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नई हलचल

दोहे "वृद्ध पिता मजबूर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

करके सभी प्रयास अब, लोग गये हैं हार।काशी में उलटी बहे, गंगा जी की धार।।पूरी ताकत को लगा, चला रहे पतवार।लेकिन फिर भी नाव तो, नहीं लग रही पार।।एक नीड़ में रह रहे, बोल-चाल है बन्द।भाई-भाई की उन्ह...  और पढ़ें
2 घंटे पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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देश हित के लिए खेलती बेटियाँहर कदम पर यहाँ जीतती बेटियाँदेखिये देश में अब पदक ला रहींबढ़ धरा से गगन चूमती बेटियाँआन को मान को देश की शान कोहर मुसीबत से हैं जूझती बेटियाँबेटियों पर पिता को हुआ न...  और पढ़ें
3 घंटे पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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वाह भाई वाह...... एक भीमपुत्र कवि की रचना

वाह भाई वाहकाबिले तारीफ हैं हम ओर हमारीअपनी बेशर्मी  ओर कृतघ्नताअपने आरक्षण के बलिदानियों के प्रतिबस मौज भाई मौजओर भी मौजअरे आंख बंद कर भी  मौजअनजान ही रहना हैचाहेकितनी भी करते जाएसोर...  और पढ़ें
15 घंटे पूर्व
prem miral
BHIMVARTA
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इसी देश में कभी अपने वचनों को निभाने के लिए प्राणों की आहुति दे दिया करते थे

हरेश कुमारका पर करूं श्रृंगार की पिया मोरा आन्हर हो। भारतीय नारी की यह व्यथा है। वह कह रही है कि मैं किस पर इतराऊं, इठलाऊँ। मेरा पति आंधा है। वह देख नहीं सकता, तो मैं श्रृंगार किसके लिए करूं। ठी...  और पढ़ें
16 घंटे पूर्व
Haresh
Information2media
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निवास स्थान

   ब्रिटिश जनरल और संसद सदस्य जेम्स ओग्लेथोर्प का दर्शन एक महान नगर बनाने का था। उन्हें उत्तरी अमेरिका में जॉर्जिया प्रांत को बसाने का बीड़ा दिया गया था। उन्होंने अपने दर्शन के अनुसार वहाँ ...  और पढ़ें
17 घंटे पूर्व
Roz Ki Roti
रोज़ की रोटी - Daily Bread
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अपने बेटे के रिपोर्ट कार्ड पर पिता ने अंगूठा लगाया...Beta : पापा आप तो C. A. हो, फिर ये अंगूठा क्यों?😯पिता : तेरे Marks देखकर Teacher को नहीं लगना चाहिए कि तेरे बाप पढ़ा लिखा है...  और पढ़ें
17 घंटे पूर्व
Upendra Gughane
hindisahityamanjari
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"खटीमा में कविगोष्ठी"सुनिए मेरी आवाज (राधा तिवारी)

खटीमा-20/05/2018 को दोपहर में  वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक के निवास पर दो सत्रों में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। पहले सत्र  में कवियों ने अपनी स्वरचित कविताओं का पाठ ...  और पढ़ें
21 घंटे पूर्व
राधे गोपाल
राधे का संसार
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बालकविता "आम और लीची का उदगम" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

हरी, लाल और पीली-पीली!लीची होती बहुत रसीली!! गायब बाजारों से केले।सजे हुए लीची के ठेले।। आम और लीची का उदगम।मनभावन दोनों का संगम।। लीची के गुच्छे हैं सुन्दर।मीठा रस लीची के अन्दर।। गु...  और पढ़ें
1 दिन पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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लोकतंत्र बच गया पर गरीब अवाम का बचना नहीं हो पा रहा है

अख़बार के बीच वाले पन्नो में कहीं एक खबर है - गोकशी के शक में दो लोगों की मार मार कर हत्या। 2015 की अखलाख की हत्या से लेकर 2018 की रियाज की हत्या तक , अख़बार के पहले पन्ने से बीच के पन्ने तक भारत सरकार न...  और पढ़ें
1 दिन पूर्व
amol saroj
अमोल सरोज स्टेटस वाला
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बीते युग को छोड़, नये युग का निर्माण करो.

बीते युग को छोड़, नये युग का निर्मार्ण करो,आने वाले कल का तुम बढ़ कर सम्मान करो l “बीती   ताहि विसारो”  का  सिद्धान्त हमारा, किन्तु नहीं हम गत को भूलें,उसका मान करो l...  और पढ़ें
1 दिन पूर्व
Dr. Harimohan Gupt
Dr. Hari Mohan Gupt
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1039 ....हम-क़दम का उन्नीसवाँ अंक

सादर नमस्कार आज के विशेषांक के मूल विषय पर बातें करना अति आवश्यक है।मानव प्रकृति पुत्र कहलाता है। जीवन-यापन के लिए मनुष्य प्रकृति पर निर्भर है। सभ्यता के विकास की अंधी दौड़ में शहरीकरण क...  और पढ़ें
1 दिन पूर्व
Yashoda Agrawal
पाँच लिंकों का आनन्द
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छांह भी मांगती है पनाह....अश्वनी शर्मा

रेगिस्तान में जेठ की दोपहर किसी अमावस की रात से भी अधिकभयावह, सुनसान और सम्मोहक होती हैआंतकवादी सूरज के समक्ष मौन हैआदमी, पेड़, चिड़िया, पशुकोई प्रतिकार नहीं बस ढूंढते हैं मुट्ठीभर छांहआ...  और पढ़ें
1 दिन पूर्व
Yashoda Agrawal
मेरी धरोहर
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भाग -3 : लेखक आबिद रिज़वी साहब का साठ सालों का सफरनामा उन्हीं की ज़ुबानी

प्यारे लाल ‘आवारा’ की शरण में इण्टर की परीक्षा देने के बाद, गर्मियों की छुट्टी तक किसी नामवर लेखक से ज्ञान हासिल करने की पिपासा में मैं एक सुबह, मई माह सन् 60 में जा पहुंचा मुट्ठी गंज, बिरहाना र...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
Nazariya Now
Nazariya Now
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निकलना खलक से आदम का सुनते आये थे लेकिन

राजनीती मजेदार चीज है। कहाँ जाता है राजनीती में कुछ भी स्थाई नहीं होता न दुश्मनी न दोस्ती। राजनीती में जो होता है वो दिखता नहीं है। जो दिखता है वैसा हो भी जरुरी नहीं है। हर घटना के अलग अलग तरह स...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
amol saroj
अमोल सरोज स्टेटस वाला
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चन्द माहिया : क़िस्त 43

चन्द माहिया : क़िस्त 43:1:जज्बात की सच्चाईनापोगे कैसेइस दिल की गहराई:2:तुम को सबकी है ख़बरकौन छुपा तुम सेसब तेरी ज़ेर-ए-नज़र:3:इक तुम पे भरोसा थाटूट गया वो भीकब मैने सोचा था:4:इतना जो मिटाया हैऔर मिटा देत...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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व्यवाहारिक

   अफ्रीका के अपने बचपन को स्मरण करते हुए सैम ने बताया, “हमारी माँ, रात को सोने से पहले हमें मिर्च खिला देती थी, और अपने मूँह की जलन हटाने को हम बहुत पानी पीते थे, जिससे पेट भरा हुआ हो जाता था। यह...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
Roz Ki Roti
रोज़ की रोटी - Daily Bread
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एक पागलखाने में एक पत्रकार ने👷 डॉक्टर से प्रश्न किया।"आप कैसे पहचानते हैं कि, कौन मानसिक रोगी है और कौन नहीं ? "👷डॉक्टर---"हम एक वाशिंग मशीन पानी से पूरा भर देते हैं और मरीज को,एक चम्मचएक गिलास और...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
Upendra Gughane
hindisahityamanjari
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कांग्रेस की स्थिति देखकर अब तरस भी नहीं आती, ये इसी के लायक हैं

हरेश कुमारयेदियुरप्पा ने तो विधायकों की संख्या पूरा न होने पर इस्तीफा दे दिया। उत्तर प्रदेश विधानसभा में शक्ति परीक्षण के समय हुई मारपीट को लोग इतनी जल्दी भूल गए। मायावती और उनकी पार्टी के व...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
Haresh
Information2media
6

भारतीय रेलवे की सेवाओं को दुरुस्त न करके कहीं जानबूझकर प्राइवेटाइजेशन की ओर तो नहीं धकेल रही यह सरकार

हरेश कुमारकिसी भी ट्रेन के रद्द होने पर सरकार यात्रियों को होनेवाली दिक्कतों को देखते हुए मुआवजा क्यों नहीं देती। टिकट कैंसल कराने पर तुरंत पैसे काटने वाला रेल विभाग ट्रेन के रद्द और लेट होन...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
Haresh
Information2media
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चांद सी मुनिया (राधा तिवारी "राधेगोपाल ")

 चांद सी मुनियामेरी जब चांद सी मुनिया, मेरे आंगन ठुमकती है ।तेरी अठखेलियों से ही ,मेरी गोदी दमकती है ।।कभी बिंदिया मेरी ले कर ,स्वयं को तू लगाती है ।रोशन हो तेरी सूरत ,सितारों से चमकती है ।।कभी...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
राधे गोपाल
राधे का संसार
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आज तो सुमित्रानंदन पंत का जन्‍मदिन है, पढ़िए उनकी दो कवितायें

फोटो: प्रसार भारती से साभारआज तो सुमित्रानंदन पंत का जन्‍मदिन है, तो चलिए इसी बात पर हो जाए उनकी दो कविताऐं जो हमें अपनी जड़ों तक ले जायेंगी।  वरना कौन ऐसा कर सकता है कि सात वर्ष की उम्र में, ...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
Alaknanda singh
ख़ुदा के वास्‍ते !
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लघुत्तम सीख

कर्नाटक की सीख कुल इतनी है कि दो महाशक्तियों की लड़ाई का कैसे तीसरी ताकत को फायदा पहुंच...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
Barun Sakhajee
आम आदमी सरकारी चंगुल में......
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दोहे "गीदड़ और विडाल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

रास न आयी दलों को, महामहिम की चाल।करनाटक में कमल का, सूख गया है ताल।।न्यायालय ने कर दिये, सपने चकनाचूर।ढाई दिन में हो गये, वो सत्ता से दूर।।नहीं किसी के पक्ष में, आया जन आदेश।नूरा कुश्ती का बना, क...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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मीठा-मीठा गप्प, कड़वा-कड़वा थू

हरेश कुमारमीठा-मीठागप्प, कड़वा-कड़वा थूजंगलराज के दिनों में हमने वो दौर भी इन नंगी आंखों से देखा है जब वोटों के ठेकेदार पैसे लेकर दूसरी पार्टी के उम्मीदवार के लिए काम करते थे। दबंग उम्मीदवार तो ...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
Haresh
Information2media
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"मुक्तक"

( 1 )सहमति  हो किसी बात के लिए भी ।संभव नहीं ये किसी के लिए भी ।।कई बार मौन भी ओढ़ना पड़ता है ।सब के अमन-चैन के लिए भी ।।                                  ( 2 )निहारना चांद को भला स...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
Meena Bhardwaj
मंथन
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20 मई याद है ना आपको ?

आज 20 मई है, देश के अन्‍य शिक्षा बोर्ड्स की तो नहीं मालूम मगर 3 दशक पहले तक  हमारे यूपीबोर्ड के स्‍कूल और इंटर कॉलेजों में इस दिन एक अलग किस्‍म के त्‍यौहार  का नजारा होता था। परीक्षायें खत्‍म ह...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
Alaknanda singh
अब छोड़ो भी
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जनता आपके कार्यों को देख रही है, नहीं सुधरे तो दूसरों को मौका देगी ही

हरेश कुमारजो तुम्हारे नहीं हैं, वो कभी नहीं होंगे। उसे अपना बनाने की कोशिश में तुम कहीं अपनों को न दूर कर लो।भाजपा को सुन्नी और बहावी मुसलमान कभी वोट नहीं करने वाला। शिक्षा करता है और आगे भी कर ...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
Haresh
Information2media
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