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विश्राम

      मेरा ध्यान उस प्रमुख समाचार की ओर गया: “धावकों के लिए विश्राम दिन भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।” अमेरिका के पहाड़ों पर दौड़ने वाले दल के भूतपूर्व सदस्य, टॉमी मैन्निंग द्वारा लिखे गए उस ...  और पढ़ें
3 घंटे पूर्व
Roz Ki Roti
रोज़ की रोटी - Daily Bread
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Happy Holi 2019.

Pic credit : Google.Happy Holi.कहीं उड़े रंग, कहीं उड़े गुलाल,होली में लाल हुए हैं सबके गाल,छुप ना जाना डर से तुम घर के अंदर,नहीं तो खींचकर ले आएंगे तुम्हें निकाल।फिर मत करना कोई जवाब सवाल,रंग लगाकर कर देंगे तुम्हार...  और पढ़ें
5 घंटे पूर्व
Nitish Tiwary
iwillrocknow:nitish tiwary's blog.
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आदिमपन के उल्लास का त्योहार है होली

      जब खेतों में सरसों के रंग बिखरने लगे हों , पीले फूलों पर तितलियां और भौरें मंडराने लगे हों , अमराई बौराई बौराई सी लगने लगी हो , टेसू धहकने लगे हों , हवा के अलमस्त झोके मदहोस करने लगे हो...  और पढ़ें
13 घंटे पूर्व
एल एस बिष्ट
क्षितिज(horizon)
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आदिमपन के उल्लास का त्योहार है होली

      जब खेतों में सरसों के रंग बिखरने लगे हों , पीले फूलों पर तितलियां और भौरें मंडराने लगे हों , अमराई बौराई बौराई सी लगने लगी हो , टेसू धहकने लगे हों , हवा के अलमस्त झोके मदहोस करने लगे हो...  और पढ़ें
13 घंटे पूर्व
एल एस बिष्ट
क्षितिज(horizon)
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आदिमपन के उल्लास का त्योहार है होली

      जब खेतों में सरसों के रंग बिखरने लगे हों , पीले फूलों पर तितलियां और भौरें मंडराने लगे हों , अमराई बौराई बौराई सी लगने लगी हो , टेसू धहकने लगे हों , हवा के अलमस्त झोके मदहोस करने लगे हो...  और पढ़ें
13 घंटे पूर्व
एल एस बिष्ट
क्षितिज(horizon)
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दोहे "रंगों की बौछार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

-0-0-0-0-0-होली में अच्छी लगे, रंगों की बौछार।सुन्दर, सुखद-ललाम है, होली का त्यौहार।।शीत विदा अब हो गया, चली बसन्त बयार।प्यार बाँटने आ गया, होली का त्यौहार।।पाना चाहो मान तो, करो शिष्ट व्यवहार।सीख ...  और पढ़ें
16 घंटे पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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गीत "सबके मन को भाते हैं" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जब-जब आती मस्त बयारें,तब-तब हम लहराते हैं।काँटों की पहरेदारी में,गीत खुशी के गाते हैं।।हमसे ही अनुराग-प्यार है,हमसे है मधुमास जुड़ा,हम संवाहक सम्बन्धों के,सबके मन को भाते हैं।काँटों की पहरेद...  और पढ़ें
19 घंटे पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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शब्द

      वह इतवार की रात थी, और अधिकांश लोग सो रहे थे जब पुडिंग लेन में स्थित थॉमस फैरिनर की बेकरी में एक छोटी सी आग लग गई। देखते ही देखते आग की लपटों ने एक से दूसरे घर फैलना आरंभ कर दिया और और श...  और पढ़ें
1 दिन पूर्व
Roz Ki Roti
रोज़ की रोटी - Daily Bread
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मंदिर वहीं बनाएंगे। मोदी, योगी और राहुल की बातचीत में हुआ खुलासा।

मंदिर वहीं बनाएंगे। मोदी, योगी और राहुल की बातचीत में हुआ खुलासा। "अरे मोदी जी, यहाँ अपने आवास पर यूँ अचानक क्यों बुलाया।"राहुल गाँधी ने सरप्राइज़ लुक देते हुए पूछा।"तुम ज़िन्दगी भर पप्पू ही रह...  और पढ़ें
1 दिन पूर्व
Nitish Tiwary
iwillrocknow:nitish tiwary's blog.
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गालियाँ ही गालियाँ गालियों की हो रही है आजकल खूब बौछार, देश में आ गया है चुनाव फिर इक बार, शिशुपाल भी लगा है थोड़ा घबराने, उसका कीर्तिमान तोड़ेंगे नेता नये-पुराने, सब नेताओं में लगी है इक होड़, गली-ग...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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बालगीत "होली का मौसम अब आया" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

बालगीत (होली)रंग-गुलाल साथ में लाया।होली का मौसम अब आया।पिचकारी फिर से आई हैं,बच्चों के मन को भाई हैं,तन-मन में आनन्द समाया।होली का मौसम अब आया।।गुझिया थाली में पसरी हैं,पकवानों की महक भरी हैं,...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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चिड़िया: होली

चिड़िया: होली: होली के अवसर पर सारे, रंगों को मैं ले आऊँ, और तुम्हारे जीवन में मैं, उन रंगों को बिखराऊँ... लाल रंग है गुलमोहर का, केशरिया पलाश का ह......  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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काबा किस मुंह जाओगे ग़ालिब

पिछले साल यहाँ सिक्युरिटी गार्ड की यूनियन ने लम्बे वक्त तक हड़ताल की। उनकी माँग थी कि उनके काम के घंटे कम किये जाये। वेतन डीसी रेट के बराबर किया जाए। अधिकतर सिक्युरिटी गार्ड आर्मी से ही रिटायर...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
amol saroj
अमोल सरोज स्टेटस वाला
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निकट

      हमारे पुत्र, एलेन के जन्म की अगली प्रातः डॉक्टर ने मेरे पास बैठकर हमारे पुत्र के विषय मुझ से कहा, “कुछ गड़बड़ी है” – हमारा पुत्र जो बाहर से देखने में इतना सुडौल दिखा रहा था, उसमें एक जन...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
Roz Ki Roti
रोज़ की रोटी - Daily Bread
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दोहे "धन्य मनोहर पर्रिकर, नमन तुम्हें शत् बार"

गोवा से दिल्ली तलक, जिसकी थी पहचान।चला गया इहलोक से, जिन्दादिल इंसान।।तन पर सादा वस्त्र थे, मन में उच्च विचार।धन्य मनोहर पर्रिकर, नमन तुम्हें शत् बार।।भले रोग से तन हुआ, परिकर जी का पस्त।फिर ...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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शाहरुख खान मेरे गाँव आये थे।

Shah Rukh Khan was in my village.शाम के 4 बज रहे थे और शहर से लौटकर मैं गाँव पहुँचता हूँ तो दूर से ही कुछ लोगों की भीड़ दिखाई देती है। फिर दस साल का चिंटू दौड़ते हुए मेरी तरफ आता है। बोला, "नीतिश भईया"मैंने कहा "हाँ चिंटू ...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
Nitish Tiwary
iwillrocknow:nitish tiwary's blog.
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झूठ का सच

यह सच है कि प्रत्येक व्यक्ति यदा-कदा अनेक कारणों से झूठ बोलता है किंतु जब यह किसी व्यक्ति के लिए आदत या लत बन जाती है तो समाज में वह निंदा का पात्र बन जाता है । कोई भी व्यक्ति नहीं चाहता कि कोई उस...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
mahendra verma
शाश्वत शिल्प
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भरोसा

      कुछ संस्कृतियों में यह अपेक्षा की जाती है कि आयु में कम व्यक्ति अपने से बड़े को कमरे में पहले जाने देगा; जबकि कुछ अन्य में इस बात का ध्यान रखा जाता है कि जिसका ओहदा अधिक ऊँचा होगा, वह प...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
Roz Ki Roti
रोज़ की रोटी - Daily Bread
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दोहे "चौकस चौकीदार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

क्रान्तिकारियों ने किया,  गोरों को हलकान।अँग्रेजों ने तब किया, भारत से प्रस्थान।।साजिश करके कर दिये, क्रान्तिदूत सब दूर।सत्ता पर काबिज हुए, कामचोर लंगूर।।हिन्दी के हैं पाँव में, अँगरेजी ज...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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1339... जीतकर दुनिया भी सिकंदर कुछ नही यहां भोग पाया

सादर अभिवादनहम सोचे थे की रविवार की प्रस्तुतिन दे.....भाई कुलदीप जी से कह देंपर वे तो दो शासकीय छुट्टी का सदुपयोगकरते हुए कहीं गरम जगह पर चले गए...चलो कोई बात नहीं ...हम तो हैं ही...इस बार की प्रस्तुत...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
Yashoda Agrawal
पाँच लिंकों का आनन्द
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कुछ नहीं....भावना मिश्रा

‘कुछ नहीं’ये दो शब्द नहींकिसी गहरी नदी के दो पाट हैंजिनके बीच बाँध रखा है हर औरत नेअनगिन पीड़ाओं, आँसुओं और त्रास कोइन दो पाटों के बीच वो समेटलेती है सारे सुख दुःखबहुत गहरे जब मुस्काती हैया जब...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
Yashoda Agrawal
मेरी धरोहर
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हाथ

      मैंने असावधानी के कारण रेस्टोरेंट के काउंटर पर अपने ग्लास को लुढ़का दिया, और उसका पेय निकलकर काउंटर के किनारे से होकर नीचे फर्श की ओर बहने लगा। अपने शर्मिन्दगी को छुपाने के प्रयासो...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
Roz Ki Roti
रोज़ की रोटी - Daily Bread
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पाखंड की विविधता-1

सलीम उस लड़के का नाम था जिसने मुझसे कहा कि ‘पैसे की तो कोई बात नहीं, आपकी जींस पर दो सुईयां टूट गईं हैं, उनके दो रुपए दे दो’। मुझे बात बहुत अच्छी लगी। जींस बहुत मोटे कपड़े की थी। सलीम उस वक़्त लड़का-स...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
Sanjay Grover संजय ग्रोवर
नास्तिक The Atheist
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धुप्प अँधेरे में

धुप्प अँधेरे मेंखुद को तलाशने की कोशिश मेंस्वयं के एहसासों के अवशेषों से कई बार टकराया निःशब्द स्व-श्वासों की आहट से कई बार चकराया दिग्भ्रमित करने के लिएतैनात हो गए  मेरे ही खंडित सपनेआक्र...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
M Verma
जज़्बात
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अकविता "काश् कोई मसीहा आये" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आज इण्टरनेट परपाकिस्तान के कुछ शहरों के नजारे देख रहा था जहाँ खुली-खुली चौड़ी सड़कें थी बीच में जिवाइडर भी थे जिन पर बिजली के खम्बों बल्बों की दूधिया रौशनी जगमगा रही थी विशालकाय भवन थे गगनच...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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1338... नफरत निरस्त करें

"एक अजीब-सी मुश्किल में हूँ इन दिनों- मेरी भरपूर नफरत कर सकने की ताकतदिनों दिन क्षीण पड़ती जा रहीअंग्रेजों से नफरत करना चाहताजिन्होंने दो सदी हम पर राज कियातो शेक्सपियर आड़े आ जातेजिनके मुझ ...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
Yashoda Agrawal
पाँच लिंकों का आनन्द
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