पाँच लिंकों का आनन्द की पोस्ट्स

1339... जीतकर दुनिया भी सिकंदर कुछ नही यहां भोग पाया

सादर अभिवादनहम सोचे थे की रविवार की प्रस्तुतिन दे.....भाई कुलदीप जी से कह देंपर वे तो दो शासकीय छुट्टी का सदुपयोगकरते हुए कहीं गरम जगह पर चले गए...चलो कोई बात नहीं ...हम तो हैं ही...इस बार की प्रस्तुत...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
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1338... नफरत निरस्त करें

"एक अजीब-सी मुश्किल में हूँ इन दिनों- मेरी भरपूर नफरत कर सकने की ताकतदिनों दिन क्षीण पड़ती जा रहीअंग्रेजों से नफरत करना चाहताजिन्होंने दो सदी हम पर राज कियातो शेक्सपियर आड़े आ जातेजिनके मुझ ...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
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1337..कैसे कैसे सपने अब सजने हैं

स्नेहिल अभिवादनभागदौड़ की ज़िंदगी में फुरसत के पलों में सामूहिक गोष्ठियों में अब चुनाव की चर्चा होने लगी । पलाश के फूलोंं के गुच्छों को देखकर मन उदास होकर सोचने लगा  किसी को याद क्यों नहीं हो...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
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1336....ख़ुश-गवार रंगीला मौसम छायी छटा बसंत....

सादर अभिवादन। हैं खिले सेमल आजकल ख़ुश-गवार  रंगीला मौसम  छायी छटा बसंत। -रवीन्द्र  आइये अब आपको आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर ले चलें- "मरीचिका'...मीना भारद्वाज  बादलो...  और पढ़ें
7 दिन पूर्व
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1335..अपनो को देने खुशी अपनो संग चली हूं..

।।उषा स्वस्ति।।"मैंने देखाएक बूँद सहसाउछली सागर के झाग सेरँगी गई क्षण भरढलते सूरज की आग से।मुझको दीख गया :सूने विराट् के सम्मुखहर आलोक-छुआ अपनापनहै उन्मोचननश्वरता के दाग से!"अज्ञेयये शब्द भ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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1334...आचार संहिता है, हमेशा नहीं रहती है, कुछ दिन के लिये मायके आती है

करना कुछ नहीं है होता, रहता है, ..औरहोता रहेगा, सादर अभिवादनउपरोक्त पंक्तियाँ चुराई हैडॉ. भैय्या की प्रस्तुति सेकुलदीप जी आज अन्तर्जालकी व्यवस्था ठीक करने में लगे हैंहोता है..पहाड़ी इलाका ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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1333...हम-क़दम.....इकसठवाँ अंक...

स्नेहिल अभिवादनसामाजिक व्यवस्था में साधन विहीन वह वर्ग जो जीवन जीने के लिए मूलभूत साधरण जरूरतों को भी पूरा कर पाने में आर्थिक रुप से अक्षम है उसे गरीब कहा जाता है।अभाव का दंश झेलते,छोटी...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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1332...."लॉलीपॉप है महिला दिवस की बातें"

सादर अभिवादन...रविवारीय प्रस्तुति में आपका स्वागत हैदेश मे आरोप-प्रत्यारोप का युद्ध जारी हैऔर जारी रहने की संम्भावना हैसम्भवतः चुनाव पर्यन्त जारी रहेगाचुनाव मे ये युद्ध घमासान होने की सम्भ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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1331... भंवर

चलो वुमन'स डे बीत गया,दादी नानी डे भी तो होना चाहिए नमदर'स डे , डॉटर'स डे जैसे आएगा..।365 दिवस सामान्य और 5 दिवस स्त्रियों बच्चियों डेकम से कम इस साल तीन सौ सत्तर दिवस होगादात्री कब याचक बन जाती है सम...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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1330....एक स्त्री के लिए समाज की सोच कभी नहीं बदलती

स्नेहिल अभिवादन"अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस"एक तारीख़ है आधी आबादी के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए,यह जताने के लिए पुरुषसत्ता समाज में उनका भी सम्मान किया जाता है।  बड़ी-बड़ी बयानबाजियो...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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1329...रेत का दामन थाम बस गए हैं आंखों में....

सादर अभिवादन। है दौर अनोखा अविश्वास घनेरा तम रचा इतिहास हैं चीख़ते सबूत।ले भागा बन्दर हल्दी-गाँठ कहता फिरे अब हूँ पंसारी   है नियति हमारी?  -रवीन्द्र    लीजि...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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1328..वो सुनहरी चंचल रश्मियाँ..

।।प्रातः वंदन।।नभ की है उस नीली चुप्पी पर घंटा है एक टंगा सुंदर,जो घड़ी -घड़ी मन के भीतरकुछ कहता रहता बज- बज कर।डूबे प्रकाश में दिशा छोड़अब हुआ भोर अब हुआ भोर!आई सोने की नई प्रातःकुछ नया काम और...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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1327....शिवरात्रि सुर संगीत सुनो

जय मां हाटेशवरी......हर बार की तरह इस बार विश्व महिला दिवस के लिये एक विषय निर्धारित किया गया है.....इस बार  की थीम थिंक इक्वल, बिल्ड स्मार्ट, इनोवेट फॉर चेंज है. इस साल इस थीम का उद्देश्य नई सो...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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1326... "अभिशाप"हम-क़दम का 60 वां अंक...

सादर अभिवादन। आज महशिवरात्रि है. शुभकामनाएँ.              इस बार हम-क़दम के 60 वें अंक का विषय "अभिशाप"शब्द दिया गया था। इस विषय पर रचनाकारों ने उत्साहपूर्वक ख़ूबसूरत रसिकता से परिपूर्ण उद...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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1325..रविवारीय बुलेटिन

सुखद मिलन पिछले रविवार की प्रस्तुति देखकर आनन्द आ गयाआज का अंक भी उसी तर्ज परसादर अभिवादनचलिए चलें देखें इन दो दिनों में हुआ क्या है...सबसे पहले देखें आज क्या है....आज सखी श्वेता का जन्मदिन है......  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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1324.. युद्ध

जिस जंग मेंबादशाह की जान को खतरा न होउसे जंग नहीं सियासत कहते हैं...कितना सच... ?सभी को यथायोग्यप्रणामाशीषसदा रहा, एक आँख से हँसना,एक आँख से रोनाअभिनन्दन का वंदनअनेकानेक शहीदों को खोनायुद्धधृत...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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1323..फिज़ाओं में कैसी, घुल रही है चुभन

मार्च का पहला दिनसखी श्वेता आज आएगी  वापसफिर हम न मिलेंगे आपसेसादर अभिवादन...क्या होगाकुछ भी कहने में असमर्थ हैं हममीडिया का कितना विश्वास करेंऔर क्यों करें...सरकारी बुलेटिन खामोश है...चलिए च...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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1322...अभिनन्दन सलाम करता हमारा हिन्दुस्तान...

सादर अभिवादन। है भ्रम टूटता प्रतिशोध अभिनन्दन सलाम करता हमारा हिन्दुस्तान।   अब न ठहर पाऊंगा'--नज़्म ---डा श्याम गुप्त---एक वीर,सैनिक जब युद्ध पर जाता है तो उसके उदगार क्या होते ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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1321..मैत्री का मूल्य न पहचाना..

।।उषा स्वस्ति।।हित-वचन नहीं तूने माना,मैत्री का मूल्य न पहचाना,तो ले, मैं भी अब जाता हूँ,अन्तिम संकल्प सुनाता हूँ।याचना नहीं, अब रण होगा,जीवन-जय या कि मरण होगा।              -रामधारी सिंह (...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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1320...चल मन ले चल मुझे झील के उसी किनारे !

जय मां हाटेशवरी......आज से 10 दिन बाद......बेटियों व महिलाओं की असंख्य उपलब्धियों के साथ.....विश्व महिला दिवस आ रहा है......ये संदेश लेकर......आज की बेटी व महिला शिक्षित हैं.....वो अपने अधिकार जानती हैं.....वो घरेल...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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1319.....क़रार (हम-क़दम का उनसठवाँ अंक)

सादर अभिवादन। क़रार अर्थात चैन, शाँति, अनुबंध।जीवन में क़रार चाहे जी को क़रार देनेवाला हो अथवा दो पक्षकारों के बीच क़रार (अनुबंध)..... दोनों रूपों में अपनी अहमियत से हमें प्रभावित करता है।&nb...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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1318...आज बुलेटिन नुमा प्रस्तुति...

सादर अभिवादनकल हमारी काकी जी का बरहवां थागंगा पूजन पर हम सब शहर से बाहर थे...शनिवार को तेरहवीं के लिए हमें रोक लिया गया..सो आज बुलेटिन नुमा प्रस्तुति...क्यूँ नही जाता...आशा सक्सेनावक्त की शरारत है...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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1317.. सरकार

सभी को यथायोग्यप्रणामाशीषकिसी की शख़्सियत का बैठ अंदाज़ा लगाना मत।किसी के शक्ल के पीछे छिपी फ़ितरत नहीं दिखती।निगल जाते डकारे बिन सभी अज़गर जरा बचना।अगर है चुप समंदर तो हमें जुर्रत नहीं दिखती।...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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1316...डरपोक कुत्ते सबसे तेज़ भौंकते हैं...

सादर अभिवादनसखी श्वेता प्रवास पर हैंं..देश व्यथित है.... हमेशा की तरह किसी निर्णय पर नहीं पहुंच पाए हैं ..लोग सलाह पर सलाह दिए जा रहे हैं..इस विषय पर यही कहा जा सकता हैजो भी होगा अच्छा ही होगा...हम स...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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1315...श्रद्धाँजलि! डॉ. नामवर सिंह...

सादर अभिवादन।              पिछले 6 दशक से अधिक समय से हिंदी साहित्य में समालोचना  के केन्द्र बिंदु रहे प्रख्यात साहित्यकार एवं शिक्षाविद आदरणीय डॉ. नामवर सिंह जी का कल निधन हो ग...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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1314..बेनाम-सा ये दर्द ठहर क्यों नहीं जाता ....

।प्रातःवदंन।।ओ, प्रिय ऋतुराज! किन्तु धीरे से आना,यह है शोक-स्थान यहाँ मत शोर मचाना।वायु चले ,पर मंद चाल से उसे चलाना ,दुःख की आहें संग उड़ा कर मत ले जाना।कोकिल गावें, किंतु राग रोने का गावें,भ्र...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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1313....मानव ने बम बन घात किया, ये सोच के दिल घबराता है।

जय मां हाटेशवरी.....जो वीर  हर पल सरहदों पर......हमारी सुरक्षा में तैनात रहते हैं.......जो एक-एक वीर......सैंकड़ों दुशमनों को मारने की क्षमता रखता हैं.....पुलवामा में इन वीरों के साथ जो घटा......वो इन की सुरक्ष...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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1312....पलाश !! हम-क़दम का अट्ठावनवाँ अंक...

सादर अभिवादन। सोमवारीय प्रस्तुति में आपका हार्दिक स्वागत है। रचनाकारों को हम-क़दम के अट्ठावनवें अंक का विषय दिया गया था "पलाश" सप्ताह के बीच में कश्मीर के पुलवामा में हमारे जवानों पर...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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1311....क्या इस्लाम यही सिखलाता है

पिछले चौदह फरवरी को सारा संसार प्रेम-दिवस मना रहा था कुछेक आतंकवादियों ने सैन्यबल से भरी बसों पर कायराना हमला कियाधिक्कार है ..धिक्कार हैशाश्वत तो ये है कि मनोबल बढ़ता जा रहा हैआतंकवादिय...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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1310.. सूरज उगेगा पर्दे के पीछे

दुःख आक्रोशनापने का पैमानामत तय करोस्तब्धता मौनवाचालता में क्या भाव गौण...बस्ती बस्ती पर्बत पर्बत वहशत की है धूप 'ज़िया'चारों जानिब वीरानी है दिल का इक वीराना क्या @अहमद ज़ियासूरज उगेगा पर्द...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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