पाँच लिंकों का आनन्द की पोस्ट्स

952 ईंजीनियर श्री दिनेश चन्द्र गुप्त 'रविकर'

सादर अभिवादन....देवी श्वेता अवकाश परआज हम एक विशेष प्रस्तुति लेकर....आज हम बात करेंगे आदरणीय श्री दिनेश चन्द्र गुप्त 'रविकर'जी की....आप बहुत सारे ब्लॉग के संचालक हैं..मसलन.."कुछ कहना है", शांत...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
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951....ब्लॉग पर लोकप्रिय रचनाऐं

सादर अभिवादन आजलीकसेहटकर आपकोनयेअनुभवकी ओरलेचलतेहैं।ब्लॉगजगत्की पाँचलोकप्रियरचनाओंकोआजकेअंकमें प्रस्तुतकियाजारहाहै। इस प्रक्रिया को ज़ारी रखा जायेगा। इस अंक का अ...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
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950..ये कैसी सियासत ? .....

२१ फरवरी २०१८।।हार्दिक शुभेच्छा।।साझी अभिव्यक्ति का माध्यम है ये मंच जो वक्त के साथ कदम मिला कर 950 अंक में  प्रवेश कर रही..गिरफ्त है इनमें अब भी आने वाली कई सरगोशियाँ आज की लिक...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
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949....इतिहास हमेशा ख़ुद को दोहराता है

जय मां हाटेशवरी.....सोचता हूं.....एक आम आदमी को बैंक से कर्ज लेने के लिये.....बैंक के कई चक्कर लगाने के बाद भी कर्ज नहीं मिलता.....एक खास आदमी को.....बैंक कई हजार करोड़ कर्ज देदेता है......एक के बाद दूसरा खास आद...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
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948....हम-क़दम का छठवाँ कदम....

ख़लल में ख़लल डालने का कोई इरादा नहीं है पर कुछ बातें जब मन को कोंचे तो कहना आवश्यक है।घोटालेबाज और बैंककर्मियों की मिलीभगत से देश को लूटने वाली नीतियों पर।अब तो सवाल यही है कि आम आदमी किस ...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
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947...एक ही ब्लॉग से.....मन के पाँखी

सोलह फरवरी को ब्लॉग मन के पाँखीने अपने जीवन के दूसरे वर्ष मे कदम रखा हैअशेष शुभकामनाएँ श्वेता जी कोसादर अभिवादन स्वीकारें....आज प्रस्तुत हैमन के पंखों की परवाज़श्वेता जी के शब्दों मेंसा...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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946... काव्य-कथा

सभी को यथायोग्यप्रणामाशीषश्रव्य काव्य दो प्रकार का होता है, गद्य और पद्य।पद्य काव्य के महाकाव्य और खंडकाव्य दो भेद कहे जा चुके हैं।गद्य काव्य के भी दो भेद किए गए हैं- कथाऔर आख्यायिका।उन्नीस...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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945...सीमित हूँ बहुत.....मैं शब्दों में....

"रचनात्मकता" किसी भी व्यक्ति के अंदर की वह योग्यता होती है जिसके द्वारा वह वस्तुओं या उन विचारों का उत्पादन करता है।दैनिक जीवन में किसी नवीन दृष्टिकोण, विचार या व्यवहार को ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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944..चाँद नगर सा गाँव तुम्हारा...

सादर अभिवादन। बाज़ार आजकल दिन निर्धारित करता जा रहा है विभिन्न गतिविधियों,परम्पराओं और रिश्तों के लिये। हमने जितना बाज़ार को आलोचा और कोसा वह उतना ही हमारी ज़िन्दगी में अतिक्रमण कर गया। बी...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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943..बसंती बेला में ...

।।शुभ वन्दन।।ऋतुओं का बदलना स्वाभाविक है पर बसंती बेला में आज का दिन काव्यात्मक और अध्यात्म का अनूठा संगम है। ये भी सही है कि..वक्त कितना भी बदल जाए पर इंसान का मशीनीकरण अब भी मुश्किल...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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942.....धड़कनो से भी इबादत में खलल पड़ता हैं

सादर अभिवादन..संशय है....महाशिवरात्रि आज है कि कलहिन्दुस्तान टाईम्स कहता हैमहाशिवरात्रि पर्व इस बार दो दिन 13 व 14 फरवरी को होगा। दो दिनों में व्रत किस दिन किया जाए इसे लेकर श्रद्धालु असमंजस म...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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941...हम क़दम का पाँचवां क़दम....पहाड़ी नदी

सादर नमस्कारसदाअविचल हिमाच्छादित पहाड़ों के सीने से निसृत,मौन चट्टानों के अंतर से प्रवाहित,कल-कल, छल-छल अपनी ही धुन में बहती मैं नदी हूँ। मेरी समृद्ध तटों पर अनेक मानवीय ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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940..गरीब इस मँहगाई के साथ कैसे चलता होगा

सादर अभिवादन...आज हम एक नए ब्लाग से परिचय करवा रहे हैंशुद्ध हिन्दी और उत्कृष्ट साहित्य के लिए जाने जाते हैंश्री महेश रौतेला...चलिए, अवलोकन करें मनन करेंकविताओ वसंतमैं फूल बन जाउँसुगंध के लिए ,ओ ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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939... ~टेडी डे~प्रेम~

प्यार बताने की चीज या जताने कीजिन्हें मिलता जी कहता मताने कीनिश्छल परिभाषा में गढ़ा क्या कोईउलझे धागे रफू ताने बाने सताने कीप्रेमप्रेमप्रेमहजारदास्ताँप्रेमफिर मिलेंगे🙃 क्यूँ मिले...🤔 ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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938....कुछ ऐसा ही है जीवन

|| सादर नमस्कार ||"प्रेम" इस शब्द में छुपे व्यापक और गूढ़ अर्थ को शब्दों में परिभाषित करना आसान हो सकता है परंतु इसकी अनुभूति का लौकिक आनंद अभिव्यक्त कर पाना संभव नहीं। आज के युग म...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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937...कुछ ख़ूनी जामा पहने हैं, पर कुछ के कपड़े ख़ाकी हैं...

सादर अभिवादन। वर्तमान सरकार के आख़िरी आम बज़ट पेश होने के बाद शेयर बाज़ार की सेहत लगातार चितांजनक होती जा रही है।  पिछले मंगलवार निवेशकों के 5 लाख 40 हज़ार करोड़ रुपये चुटकियों में डूब गये ज...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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936..वर्तमान को वर्णित करो..

७फरवरी२०१८उषा स्वस्ति                                  बढ़ते अपराधों के  प्रति सहजता ,संवेदनहीनता की प्रवृत्ति को ही बढ़ावा देता है।समय है ..वर्तमान को वर्णित करो.. अब तो आवा...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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935....देश के वीर सिपाही देखो ! माँ का कर्ज चुकाते हैं.

जय मां हाटेशवरी.....सरहदों पर  देश के वीर सिपाही.....दुश्मनों से हमारी रक्षा कर रहे हैं.....तभी हम चैन की नींद सो पा रहे हैं....मेले-त्योहारों उत्सवों का आनंद उठा पा रहे हैं....हम इन सैनिकों को नहीं जानत...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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934...हमक़दम का चौथा क़दम....इंद्रधनुष

आज हमारी यशोदा दी का जन्मदिवस है। जन्मदिनमिदम् अयि प्रिय सखेशंतनोतु हि सर्वदा मुदम् ।प्रार्थयामहे भव शतायु:ईश्वर सदा त्वाम् च रक्षतु ।पुण्य कर्मणा कीर्तिमार्जयजीवनम् तव भवतु सार्थकम्&nb...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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933....बोल सखी री....

मारा गया फिर मंझलामंझला अभिशापित रहा है सदा से....पितर भी मंझले के हाथ कापानी ग्रहण नहीं करते...सरकार भी....सारा काममंझले से करवाती है....जब देने का वक्त आता है तोपिटता भी मंझला है....सभी कहते है मंझला ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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932... कद्रदां

इकाई सबके साथ मिल सैकड़ों में शामिल हो सकती थीलेकिन काश में फँस हम स्त्रियाँमौका के साथ वजूद खोना स्वीकार करती हैंसभी को यथायोग्यप्रणामाशीषऔरएक दिन विलम्ब से अनुजा स्वामीआदरणीय दिग्विजय अ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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931...अलबर्ट पिंटो को गुस्सा आज भी आता है

सादर नमस्कारएक बार फिर से सालाना हिसाब-किताब के पन्ने पर जनमानस के कुछ ख़्वाबों के जोड़-घटाव को शब्दों में लिख दिया गया।हम सभी जेब को भींचे टकटकी बाँधे एक दूसरे की थालियों में ताक रहे हैं, किसक...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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930....पुलक - पुलककर भानुप्रिया ने किए निछावर मुक्ताथाल,

सादर अभिवादन। समय बड़ा बलवान है। बे-शक गुज़रा हुआ महीना हमारे देश के लिए आशातीत नहीं रहा। आतंकवाद, फ़िल्मी विवाद, मज़हबी फ़साद, सांप्रदायिक उन्माद और नफ़रत के बीच राजनैतिक क्षेत्र से दो बड़...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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929..इक बगल में चाँद होगा इक बगल में रोटियाँ...

हार्दिक शुभेच्छासाल का पहला महीना के आखिरी दिन..पर जिक्र पहली फरवरी की वजट की ओर कि..हर किसी की आस ..वजट में उसके लिए क्या हैं खासउम्मीदों और अकांक्षाओं का उजास,आर्थिक नितियों का विकास सीमित व...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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928....क्या थे महात्मा गांधी के अंतिम शब्द!

जय मां हाटेशवरी...."धाँय...धाँय...धाँय..."। बंदूक से तीन गोलियाँ निकलीं। गोलियों की आवाज के बाद अगली आवाज थी ‘‘हे...राम...।"  70 साल पहले आज ही के दिन दिल्ली के बिरला भवन में नाथू राम गोडसे महात्मा गांधी ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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927...लिख कुछ तितली या तितली सा बस.....हम-क़दम का तीसरा क़दम

सादर अभिवादनहम-क़दम का तीसरा क़दमशीर्षक था एक चित्र...और ये चित्र चीख-चीख कर कह रहा थाकि मैं बसंत हूँमुझ पर लिखिए कविता...पर अफसोस... नहीं हुइ जागृत भावनाएँ..अब की बार हम सोचते हैं...पाठकों से ही माँ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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926......मोहितपन

सादर अभिवादनआज हमने भी कोशिश कीएक विषय तो नहींपर हाँ, एक ही ब्लॉग से ज़रूर  हैसिखाया तो आदरणीय विभा दीदी ने हीउनके जैसी प्रस्तुति बनी या नहींये आप ही बतलाएँगेप्रस्तुत है उन्हीं की स्टाईल मे...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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925... जन्मभूमि

सभी को यथायोग्यप्रणामाशीषसच के पीछे का झूठ सच हैया झूठ है झूठ के पीछे का सचदेश की सम्पत्ति नष्ट करने वालेअपराध को देशद्रोह समझना हितकर"जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी"जन्मभूमिमैं स्‍व...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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924...सरकारी आयोजन मात्र नहीं, है ये राष्ट्रीय त्योहार

"गणतंत्र का मतलब हमारा संविधान,हमारी सरकार हमारे अधिकार और हमारे कर्तव्य"भारत का संविधान, भारत का सर्वोच्च विधान है जो संविधान सभा द्वारा 26 नवम्बर 1949 को पारित हुआ तथा 26 जनवरी 1950 से प्रभावी ह...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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923....हो रहे पात पीत सिकुड़ी सी रात रीत ठिठुरन भी गई बीत

सादर अभिवादन। भारतीय संविधान सभा द्वारा 26 नवम्बर 1949 को मौजूदा संविधान को स्वीकृति मिली और 26 जनवरी 1950 को इसे लागू किया गया अतः कहा गया कि यह पूर्ण स्वतंत्रता को याद करने की तिथि है। कल 26 जनवरी ...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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