पाँच लिंकों का आनन्द की पोस्ट्स

1193.....मिर्च का धुआँ लगा जोर से छींक नाक कान आँख जरूरी है

सादर अभिवादनहम आज शहर से बाहर हैंफिर भी कोशिश कर रहे हैंआपको आज का विषय बता दें...हम-क़दम का बयालिसवाँ अंक का विषय..आदरणीय मुनव्वर जी राणा का एक अश़आर.....उन घरों में जहाँ मिट्टी के घड़े रहते हैंक़...  और पढ़ें
8 घंटे पूर्व
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1193....हमक़दम का इकतालीसवाँ क़दम...वजह

जग जीवन सृष्टि का बहुमूल्य उपहार है।  मनुष्य जन्म से लेकर जीवन के अंत तक किसी न किसी वजह से अपने कर्मपथ पर क्रियाशील रहता है। जीवन भर दुख-सुख की वजह का आकलन करता मनुष्य प्रकृति के सुलझे अनसुल...  और पढ़ें
1 दिन पूर्व
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1192....कहाँ माँगे थे चाँद और सितारे कभी

सादर अभिवादन..रविवार शुभ हो...और क्यों न हो....साफ-सफाई के लिए साथी मिलावो भी पहचाना-़जाना...होते रहेगी साफ-सफाई...चलिए कुछ पढ़ लिया जाए......सपने.....डॉ.वर्षा सिंहबहुत लुभाते बेघर को घर के सपने घर में ल...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
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1191... मुखौटा

सभी को यथायोग्यप्रणामाशीषमाँ मैके आकर चली गईं... पुतला रावण जला दिया गयाइंसान कबतक दम साधे रहेगाउतारेगा कभी न कभी अपने चेहरे सेमुखौटाजिनसे चुभन बढती है अकेलेपन का अँधेरा फैल जाता है जी...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
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1190....रावण अपने दस चेहरे बाहर ही रखता था..और हम??

शुभ विजयादशमीदस इंद्रियों को जीत लोयह विजयादशमी पर्व है।राम सद्गुण के सम्मुखपराजित दशानन गर्व है।।-श्वेता★दशहरा का तात्पर्य, सदा सत्य की जीत।गढ़ टूटेगा झूठ का, करें सत्य से प्रीत॥सच्चाई की ...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
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1189..गणित की किताब और रोज रोज का रोज पढ़ा रोज का लिखा हिसाब

सादर अभिवादन। आज कन्यापूजन के साथ शारदीय नवरात्र उत्सव सम्पन्न हो रहा है। भारतीय संस्कृति में व्रत-त्यौहारों का समावेश हमें धार्मिकता के परिवेश में मानवीय मूल्यों की सार्थकता का दर्शन ...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
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1188...उत्सव प्रिय: खलु मनुष्या अर्थात मनुष्य उत्सव प्रेमी होते हैंं..

।।प्रात:वंदन।।नवरात्रि के दौरान ये देखना खासा मजेदार है कि उत्तर भारतीय निर्लिप्त भाव से शाकाहारी हो जाते है जबकि बंगाली मांसाहारी व्यंजनों के तलाश में पंडालों की ओर लपकते है। हिंदुत्व...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
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1187..बेवफा वो नहीं फिर वजह क्या हुई, इंतज़ार की

सादर अभिवादनइम्तेहां हो गई इंतज़ार की आई ना कुछ खबर, मेरे यार की ये हमें है यक़ी, बेवफा वो नहीं फिर वजहक्या हुई, इंतज़ार की-*-*-*-जी हाँयही है आने वाले सप्ताह का विषयहम-क़दम सभी के लि...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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1186....हम-क़दम का चालीसवाँ क़दम....उलझन

मानव जीवन विसंगतियों से भरा है। जीवन का कोई भी पल एक जैसा नहीं होता है। एक साधारण मनुष्य बस यही चाहता है कि शांतिपूर्ण सरल जीवन जी सके जिसमें रोटी,कपड़ा और छत की सुविधा हो। पर यह सब इतना आ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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1185....कव्हर स्टोरी.....उत्तर भारत संस्कृति दस्तक ”टैसू झैंजी”

सादर अभिवादन...बीत रही नवरात्रि आ रहा है दशहरा....ऐसे टैसू-झैंझी को याद करना ही कर्तव्य हैचलिए पढ़े कव्हर स्टोरी..... ”टैसू झैंजी” प्रेम विवाह : पवित्र दंत कथाउत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश व राजस्थ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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1184... जय माता दी

यथायोग्य सभी कोप्रणामाशीषकुर्ते पै छपीसिंदूर की रंगोली-विजयोत्सवसुना है राम.तुमने मारा था मारीच को.जब वह.स्वर्णमृग बन दौड़ रहा था.वन-वन ।तुमने मारा था रावण को.जब वह.दुष्टता कीविजयथी कमी कुछ ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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1183....लिखा हुआ पढ़ते पढ़ते, नहीं लिखा पढ़ने से रह गया था

भारतीय दर्शन में देवी को शक्ति का दिव्य रुप माना गया है।  सृष्टि के सृजन में परम तत्व शक्ति ही है।भारतीय अध्यात्म के अनुसार मन-बुद्धि में व्याप्त अज्ञान,काम,क्रोध, लोभ,मोह को नाश करने हेतु ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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1182....मैं सजदे में नहीं था आप को धोखा हुआ होगा ...

सादर अभिवादन। नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं। खाँचों में बँटता देश यह मेरा वह तेरा प्रदेश क्षेत्रवाद की कुंठा का हो रहा विस्तार राष्ट्रीयता का भाव हो रहा तार-तार। आइये अब आ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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1181....आज का पन्ना आदरणीय रोहिताश जी के नाम....

"हो सकता है मैं आपके विचारों से सहमत न हो पाऊं,फिर भी विचार प्रकट करने के आपके अधिकारों की रक्षा करूंगा"- वाल्टेयरयशोदा जी से सुबह सुबह ईमेल मिला, और इसके बाद जो हुआ वो आज की ये हलचल है... उनका ई-मेल ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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1180...उलझन, उलझी रहे अपने आप से, तो आसानी हो जाती है

बीस पग औरफिर बारहवाँ सैकड़ा सामने होगासादर अभिवादन...****हम-क़दम सभी के लिए एक खुला मंचआपका हम-क़दम का चालीसवाँ क़दम इस सप्ताह का विषय है'उलझन'...उदाहरण...अहा! उलझनतुम हो धन्यतुमसे प्रिय है न कोई ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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1179....हम-क़दम का उन्तालिसवाँ कदम

सादर नमस्कारजी क्षमा करियेगा, यह शब्द "हौसला"किसी भी ऐसे मनुष्य के लिए  नहीं जो जबरन खुद को अंधेरे में रखना चाहते हो, सब समझते हुये अवसाद भोगते हों, जान बूझकर वैराग का चोला पहनना चाहते हो...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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1178.....नेह आँच में ही गलना सीखो

सादर अभिवादनज़नाब लिंक चुनकर रख गएकह गए लगा देनासूचना हम आकर दे देंगेअब भुगतो....जीवन रण में...श्वेता सिन्हापिघल धूप में जाते हो क्यों फूलों सा मुरझाते होसुनो मोम नहीं फौलाद बनोनेह आँच में ही...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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1177... उजाला

सभी को यथायोग्यप्रणाशीषपितृपक्ष के बाद दशहरा दिवाली छठसप्ताह भर के बाद हाजरी देती हूँहँसना गाना नाचना नया कुछ तो होपी परदेश-तलाश रही विभासप्तर्षि तारे।नव उदय अश्रु = नवोदयाश्रुसही या गलत... ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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1976...आदमी बने कोई इससे पहले इंसानियत कुएं में रख कर आइये

सादर नमस्कारजीवन की आपाधापी, राजनीति की उठा-पटक,समाजिक मुद्दों पर जरुरी-गैर जरूरी बहस, दैनिक जरुरतों की भाग-दौड़ के बीच आपने महसूस किया क्या मौसम के बदलते मिज़ाज को?अक्टूबर की दस्तक के साथ स...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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1175....हिंसा से हारा अहिंसा का पुजारी ...

सादर अभिवादन। अहिंसा के पुजारी का 150वां जन्म दिवस देशवासी मना रहे थे, दिल्ली  की सीमा पर निर्मम पुलिस जवान बेचारे किसानों पर लाठियाँ बरसा रहे थे। आइये अब आपको आज की पसंदीदा...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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1174..हर बात पर गहरी वो नजर रखते है ..

।।शुभ भोर वंदन।।जानने की प्रक्रिया में होने और जीने की प्रक्रिया में जानने वाला मिजाज़ जिन लोगों का है उनमें मैं अपने को पाता हूँ। धर्मवीर भारतीकुछ ऐसी ही मिजाज़ के साथ एक और प्रक्रिया कि ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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1173.....जन्म दिवस विशेषांक

सबसे पहले याद करें.....नमन करेराष्ट्र के दो नगीनों कोइस गीत के माध्यम से.....-*-*-*-*-*-अब चलते हैं इस सप्ताह के विषय की ओर.....हम-क़दम सभी के लिए एक खुला मंचआपका हम-क़दम का उनतालिसवाँ क़दम इस सप्ताह का वि...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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1172.....हम-क़दम का अड़तीसवां क़दम

रंगों का संसार है मोहक रंगरेज बड़ा विचित्र हैकूची लेकर मनमर्जी कीजग के रंगता चित्र है -श्वेता जीवन में खूबसूरती, रुचि और विविधता से सामंजस्य स्थापित करते रंग जीवन में सकारात्मक ऊर्जा ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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1171.....बातें ज़ियादा वक्त ख़राब कर देता है

हैप्पी सण्डे...खुशनुमा रविवार...नया कुछ नहींपितृ-पक्ष चालू आहे....बातें ज़ियादा वक्त ख़राब कर देता है....चलिए चलें....आने दो, माँ को, मेरी!....विश्वमोहनचलो हटो!आने दोमाँ को मेरी.करने पवित्रदेवत्व मेरा....  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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1170... सूनापन

सभी को यथायोग्यप्रणामाशीष"दीदी ! मेरी माँ भी कविता पढ़ना चाहती हैं ,क्या वे आ सकती हैं?"हाँ!हाँ ! उन्हें जरुर लेकर आयें"कल शुक्रवार(28-09-2018) को लेख्य-मंजूषा(साहित्य और समाज के प्रति जागरूक करती संस्थ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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1169....हसरतों के बाजार में सब्र की आजमाइश है

आज के दिन भारतमाता फूली नहीं समाती, उनकी गोद को धन्य करने भगत सिंह जैसा सपूत जो आँचल में आया था।-*-*-*-सुप्रभातम्चलिए आज हम साहित्य सिंधु कीएक मीठी निर्झरी की कुछ बूँदों काआस्वादन करते हैं।आ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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1168....दर्द भर स्याही से जीवनभर काग़ज़ पर लिखी....

सादर अभिवादन।  अब हम सब जान लें आधार नहीं है निराधार मध्यवर्गीय जनता को राहत देने के लिये सुप्रीम कोर्ट का आभार। आइये आपको आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर ले चलें-माँ ...दिगम्बर नासवा&n...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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1167.. मौन निमंत्रण के आगाज से ..

।।शुभ भोर वंदन।।स्वर्ण ,सुख,श्री सौरभ में भोरविश्व को देती है जब बोर,विहग कुल की कल -कंठ हिलोरमिला देती भू नभ के छोर;न जाने,अलस पलक-दल कौनखोल देता तब मेरा मौन!सुमित्रानंदन पंतइसी मुखर मौन निमंत...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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1166..बदलना चाहता है कोई अगर, कुछ उसके बदलने से पहले बदलने को ही बदल दो

सादर अभिवादन...कल से पितृ-पक्ष चालू हो गया...पितरों को आस बंधी कुछ तर खाने को मिलेगापड़ोसी भी उम्मीद लगाए हैं.....चलिए चलते हैं एक श्राद्ध कार्यक्रम का जायजा लें...श्राद्ध का खाना......ज्योति देहलीवाल...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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1165...हम-क़दम का सैंतीसवा क़दम

तृष्णा का अर्थ प्यास, इच्छा या आकांक्षा से है। सांंसारिक बंधन के जन्म से मृत्यु तक के चक्र में मानव जीवन की कथा लिखी जाती है।  मनुष्य को इस मायावी जग से बाँधे रखने के लिए काम,क्रोध,लोभ,मोह ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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