मेरी धरोहर की पोस्ट्स

दो कविताएँ .....स्मृति आदित्य

1.हां मैं प्रेम में हूं, प्रेम मुझमें हैतुम ना कहो ना सही मैंने तो हर मोड़ पर हर बार यह बात कही.... पर हर बार तुम्हारी 'वह'बात हमेशा बची रही...जो तुमने कभी नहीं कही...2.इससे पहले कि तुम लाकर ...  और पढ़ें
24 घंटे पूर्व
मेरी धरोहर
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दहशत का रास्ता...मंजू मिश्रा

सरहदों पर यह लड़ाईन जाने कब ख़त्म होगीक्यों नहीं जान पाते लोगकि इन हमलों में सरकारें नहींपरिवार तबाह होते हैंकितनों का प्रेमबिछड़ गया आज ऐनप्रेम के त्यौहार के दिनजिस प्रिय को कहना थाप्यार ...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
मेरी धरोहर
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तुमको परवाह नही....प्रीती श्रीवास्तव

लिखकर खत हम जलाने लगे।पास रहकर भी दूर जाने लगे।।तुमको परवाह नही मेरे जानिब।आंशियां दूर अपना बनाने लगे।।खुश रहो तुम्हें खुशियां मुबारक।जख्म दिल के हमें सताने लगे।।चोट है खायी जो दिल पर हमने...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
मेरी धरोहर
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जंगल में कोयल कूक रही है.....अनुज लुगुन

जंगल में कोयल कूक रही हैजाम की डालियों परपपीहे छुआ-छुई खेल रहे हैंगिलहरियों की धमा-चौकड़ीपंडुओं की नींद तोड़ रही हैयह पलाश के फूलने का समय है।यह पलाश के फूलने का समय हैउनके जूड़े में खोंसी हुई ...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
मेरी धरोहर
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फिर आया बसंत.......श्वेता सिन्हा

केसर बेसर डाल-डाल धरणी पीयरी चुनरी सँभालउतर आम की फुनगी सेसुमनों का मन बहकाये फागतितली भँवरें गाये नेह के छंदसखि रे! फिर आया बसंतसरसों बाली देवे तालीमदमाये महुआ रस प्यालीसिरिस ने रेशमी वे...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
मेरी धरोहर
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प्रेम....भगवतीचरण वर्मा

बस इतना--अब चलना होगाफिर अपनी-अपनी राह हमें।कल ले आई थी खींच, आजले चली खींचकर चाह हमेंतुम जान न पाईं मुझे, औरतुम मेरे लिए पहेली थीं;पर इसका दुख क्या? मिल न सकीप्रिय जब अपनी ही थाह हमें।तुम मुझे भि...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
मेरी धरोहर
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आईने से भी रहते है.....अर्पित शर्मा "अर्पित"

सामने कारनामे जो आने लगे,आईना लोग मुझको दिखाने लगे ।जो समय पर ये बच्चे ना आने लगे, अपने माँ बाप का दिल दुखाने लगे ।फ़ैसला लौट जाने का तुम छोड़ दो, फूल आँगन के आँसू बहाने लगे ।फिर शबे हिज़्र आँसूं...  और पढ़ें
7 दिन पूर्व
मेरी धरोहर
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दिल है पुष्प गुलाब.....डॉ. यासमीन ख़ान

जैसे रखती यास्मीं , किंचित ना अभिमान ।वैसा ही विनयी मेरे , हृदयसुमन को जान।।शब्दकोष में प्रीति का, है जितना भण्डार।प्रेम सहित दिलबर मेरे ,कर लेना स्वीकार।।यह काया इक क्यार है ,दिल है पुष्प गुल...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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केसरी फूल पलाश...श्वेता सिन्हा

पिघल रही सर्दियाँझरते वृक्षों के पातनिर्जन वन के दामन मेंखिलने लगे पलाशसुंदरता बिखरी चहुँओरचटख रंग उतरे घर आँगनउमंग की चली फागुनी बयारलदे वृक्ष भरे फूल पलाशसिंदूरी रंग साँझ के रंगमल गये न...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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इश्क का फलसफा ढूँढ़ने चले है..... श्वेता सिन्हा

लिखकर तहरीरें  खत में तेरा पता ढूँढ़ने चले हैकभी तो  तुमसे जा मिले वो रास्ता ढ़ूँढ़ने चले हैसफर का सिलसिला बिन मंजिलों का हो गयातुम नही हो ज़िदगी जिसमें  वास्ता ढूँढ़ने चले हैचीखती है खामोशिय...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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चाँद मिलता न राह में...गौतम राजऋषी

तू जो मुझसे जुदा नहीं होतामैं ख़ुदा से खफ़ा नहीं होताये जो कंधे नहीं तुझे मिलतेतू तो इतना बड़ा नहीं होताचाँद मिलता न राह में उस रोजइश्क़ का हादसा नहीं होतापूछते रहते हाल-चाल अगरफ़ासला यूं बढ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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प्रवासी पक्षियों के डेरे ...पूजा प्रियंवदा

किसी का होना बस होना भर ही काफी होता है हमें भरने के लिएउस किसी का लौटना सज़ा होता है प्रवासी पक्षियों के डेरे रहते हैं साल भर उदासबसने और उजड़ने के बीच कहीं एक भूमध्य रेखा है जो ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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प्रेम का नहीं छोर'...डॉ. यास्मीन ख़ान

प्रेम का छोर नही रे बन्धु !खुल खुल पुनःमन प्रेमालिंगन मेंबन्ध जाये,अंतिम प्रेम लिखे कोई कैसेप्रेम ही जीने की जब आस दिलाये,प्रेम है केवल प्रेम, और प्रेम ही हैकोई पहला या अंतिम कहकर रुक नहीं पा...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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गूगल+

सादर अभिवादनगूगल प्लस 2 अप्रैल से बन्द होने जा रहा हैपाठक वर्ग से निवेदन है कि आप की कम्युनिटी भी बन्द हो जाएगीअतः आप फेसबुक में नई कम्युनिटी, ग्रुप बना लें और अपने सदस्यें को सूचित करें ताकि व...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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मेरी दुआएँ,सुन....श्वेता सिन्हा

नक़्श आँगन के अजनबी,कहें सदायें, सुनहब्स रेज़ा-रेज़ा पसरा,सीली हैं हवायें,सुनधड़कन-फड़कन,आहट,आहें दीद-ए-नमनाकदिल के अफ़साने में, मिलती हैं यही सज़ाएं सुनसुन मुझ पे न मरक़ूज कर नज़रें अपनीख़ाली हैं एहस...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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कुछ तो हवा सर्द थी.......परवीन शाकिर

कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी बात वो आधी रात की रात वो पूरे चाँद की चाँद भी ऐन चेत का उस पे तेरा जमाल भी सब से नज़र बचा के वो मुझ को ऐसे दे...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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ख़्यालों में कोई मचल रहा है.........श्वेता सिन्हा

शाख़ से टूटने के पहलेएक पत्ता मचल रहा है।उड़ता हुआ थका वक्त,आज फिर से बदल रहा है।गुजरते सर्द लम्हों कीख़ामोश शिकायत परदिन ने कुछ धूप जमा की है,साँझ की नम आँगन मेंचाँदनी की शामियाने तलेदर्द के शरा...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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यादों के दरीचे से........अर्जित पाण्डेय

एक हसीन ख़्वाबकाग़ज़ की तरह मोड़करदिल के कमरे में बने यादों के दरीचे पर मैंने रख दिया हैधूमिल न हो जाए वो पन्ना इसलिए अक्सर उसे अपनेआँसुओं से धोता हूँउस ख़्वाब को सजाने मेंवक़्त की कितनी स...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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याद.....शबनम शर्मा

बरसों बादपीहर की दहलीज़,आँख भर आई, सोच बेसुध सीढ़ियाँ चढ़ना पापा के गले लग रो देना, हरेक का उनके आदेश पर गिर्द घूमना, खूँटी पर टंगा काला कोट, मेज़ पर चश्मा, ऐश-ट्रे,घर के हर कोने में रौ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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यादों में पगलाई शाम....श्वेता सिन्हा

उतर कर आसमां कीसुनहरी पगडंडी सेछत के मुंडेरों केकोने में छुप गयीरोती गीली गीली शामकुछ बूँदें छितराकरतुलसी के चौबारे परसाँझ दिये के बाती मेंजल गयी भीनी भीनी शामथककर लौट रहे खगों केपरों पे स...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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परों को कभी छिलते नहीं देखा.....परवीन शाकिर

बिछड़ा है जो एक बार तो मिलते नहीं देखा इस ज़ख़्म को हमने कभी सिलते नहीं देखा इस बार जिसे चाट गई धूप की ख़्वाहिशफिर शाख़ पे उस फूल को खिलते नहीं देखा यक-लख़्त गिरा है तो जड़ें तक निकल आईं ज...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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रिक्त कटोरे यादों के .....श्वेता सिन्हा

क्षितिज का सिंदूरी आँचल मुख पर फैलाये सूरजसागर की इतराती लहरों परबूँद-बूँद टपकने लगा।सागर पर पाँव छपछपता लहरों की एड़ियों में फेनिल झाँझरों सेसजातारक्तिम किरणों की महावर।...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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नीले पंखों वाली मैं हूँ.......केदारनाथ अग्रवाल

वह चिड़िया जो-चोंच मार करदूध-भरे जुंडी के दानेरुचि से, रस से खा लेती हैवह छोटी संतोषी चिड़ियानीले पंखों वाली मैं हूँमुझे अन्‍न से बहुत प्‍यार है।वह चिड़िया जो-कंठ खोल करबूढ़े वन-बाबा के खातिर...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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सत्तर के ऊपर सात है.....महेश चन्द्र गुप्त ’ख़लिश’

सत्तर ऊपर सात हैं, बाकी हैं कुछ एकईश्वर के दरबार में अब तो माथा टेकबाजू में अब दम नहीं, धीरे उठते पाँवयौवन मद का ही रहा था अब तक अतिरेकक्यों है ढलती उम्र में तू माया से ग्रस्तबिन ललचाए काम तू करत...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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पता नही क्या हुआ....श्वेता सिन्हा

क्यों ख़्यालों से कभीख़्याल तुम्हारा जुदा नहीं,बिन छुये एहसास जगाते होमौजूदगी तेरी लम्हों में,पाक बंदगी में दिल कीतुम ही हो ख़ुदा नहीं।ज़िस्म के दायरे में सिमटीख़्वाहिश तड़पकर रूलाती है,तेरी ख़ुश...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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ग़ज़ल....सैयद गुलाम रब्बानी 'अयाज'

हार पर हार खाए जाता हूँ।बेसबब फिर भी मुस्कुराता हूँ।रोते रहते हैं आह भरते हैं,हाल दिल का जिन्हें सुनाता हूँ।सख्त मेहनत व जां फिशानी से,पेट की आग मैं बुझाता हूँ।अम्न क़ायम जहां में रखने का,कोई न...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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यूँही नीम-जान छोड़ गया......परवीन शाकिर

तराश कर मेरे बाजू उड़ान छोड़ गया,हवा के पास बरहना कमान छोड़ गया।रफ़ाक़तों का मेरी ओर उसको ध्यान कितना था,ज़मीन ले ली मगर आसमान छोड़ गया।अज़ीब शख़्स था बारिश का रंग देख के भी,खुले दरीचे पे इक फूलदान छोड़ ग...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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तन्हा गुलाबी किनारे पर.....श्वेता सिन्हा

किसी साँझ के किनारेपलकें मूँदती हौले से,आसमां से उतरकरपेडों से शाखों से होकरपत्तों का नोकों से फिसलकर,ख़ामोश झील केदूर तक पसरे सतह परकतरा-कतरा पिघलकरसूरज की डूबती किरणेंगुलाबी रंग घोल देती ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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सूरज तुम जग जाओ न...श्वेता सिन्हा

धुँधला धुँधला लगे है सूरजआज बड़ा अलसाये हैदिन चढ़ा देखो न  कितनाक्यूँ न ठीक से जागे हैछुपा रहा मुखड़े को कैसेज्यों रजाई से झाँके हैकुछ तो करे जतन हम सोचेकोई करे उपाय हैसूरज को दरिया के पानी में...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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शायद वो आ गए हैं ...दानिश भारती

परखेगा ये ज़माना धोखे में आ न जाना ------------दिलचस्प तज्रबा है दुनिया से दिल लगाना ------------'हाँ 'भी छिपी थी उसमें जब उसने कह दिया 'ना'------------साक़ी का हुक्म है ये पीना , न डगमगाना ------------सब लोग याद रक्...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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