मेरी धरोहर की पोस्ट्स

सर्द हवा की थाप....कुसुम कोठरी

सर्द हवा की थाप ,बंद होते दरवाजे खिडकियांनर्म गद्दौ में रजाई से लिपटा तन और बार बार होठों से फिसलते शब्द आज कितनी ठंड है कभी ख्याल आया उनका जिन के पास रजाई तो दूरहड्डियों पर मांस भी नही ,...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
मेरी धरोहर
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अमलतास....श्वेता मिश्र

छुवन तुम्हारे शब्दों की उठती गिरती लहरें मेरे मन की ऋतुएँ हो पुलकित या उदास साक्षी बन खड़ा है मेरे आँगन का ये अमलतासगुच्छे बीते लम्हों की तुम और मैं धार समय की डाली पर लटकते झूमर प...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
मेरी धरोहर
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अहसास....डॉ. सरिता मेहता

इक सहमी सहमी आहट हैइक महका महका साया है।अहसास की इस तन्हाई में,ये साँझ ढले कौन आया है।ये अहसास है या कोई सपना है,या मेरा सगा कोई अपना है।साँसों के रस्ते से वो मेरे,दिल में यूँ आ के समाया है।अहसा...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
मेरी धरोहर
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ये जर जर हवेली.....कुसुम कोठारी

जर जर हवेलियां भीसंभाले खडी हैप्यार की सौगातेंकभी झांका थाएक नन्हा अंकुरदिल की खिडकी खोलसंजोये रखूंगी प्यार सेजब तक खुद न डह जाऊंगी ये जर जर हवेलीना भूलेगी कभीवो कोमल छुवनवो नरम पवनजो छू ...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
मेरी धरोहर
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तेरी सदा पे मुझे लौटना पड़ा....आलोक यादव

आँखों की बारिशों से मेरा वास्ता पड़ाजब भीगने लगा तो मुझे लौटना पड़ा क्यों मैं दिशा बदल न सका अपनी राह की क्यों मेरे रास्ते में तेरा रास्ता पड़ा दिल का छुपाऊँ दर्द कि तुझको सुनाऊँ मैं य...  और पढ़ें
7 दिन पूर्व
मेरी धरोहर
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केंचुए ....मंजू मिश्रा

काट दिये पर  सिल दी गयीं जुबानें और आँखों पर पट्टी भी बाँध दीइस सबके बाद दे दी हाथ में कलम कि लो अब लिखो निष्पक्ष हो कर तुम्हारा फैसला जो भी हो बेझिझक लिखना -:-  गूंगे बहरे लाचार ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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कैसे-कैसे गिले याद आए.....ख़ुमार बाराबंकवी

वो सवा याद आये भुलाने के बाद जिंदगी बढ़ गई ज़हर खाने के बाद दिल सुलगता रहा आशियाने के बाद आग ठंडी हुई इक ज़माने के बाद रौशनी के लिए घर जलाना पडा कैसी ज़ुल्मत बढ़ी तेरे जाने के बाद जब न...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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ऐसी ख़ुशबू पहले कभी न थी....कुसुम सिन्हा

हवाओं में ऐसी ख़ुशबू पहले कभी न थीये चाल बहकी बहकी पहले कभी न थीज़ुल्फ़ ने खुलके उसका चेहरा छुपा लियाघटा आसमा पे ऐसी पहले कभी न थीआँखें तरस रहीं हैं दीदार को उनकेदिल में तो ऐसी बेबसी पहले कभी न थीफ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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शबनम की माला....कुसुम कोठारी

सुबह धुंध सेधोई सी शबनम की मालापोई सी गजल अभी तकसोई सी आंख है क्यों कुछरोई सी यादें यादों मेखोई सी गूंजी कानो मेसरगोई सीमन वीणा सेझंकृत होशब्दों की लड़ियांसंजोई सी ।- कुसुम कोठारी ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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फिर यादें मचली .....कुसुम कोठारी

सूनी मुंडेरेंये शाम की तन्हाईकहां हो गुम। :: :: ::सूरज डूबाक्षितिज है रंगीन घिरी उदासी। :: :: ::परछाई सेनिकली यादें पुरानीबनी दास्तान । :: :: ::निस्तब्ध मनइंतजार करताहोले होले से।:: :: :: दूर आसमा...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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भोर का संजीवन लाता सूरज....श्वेता सिन्हा

भोर की अलगनी पर लटकेघटाओं से निकल बूँदें झटकेस्वर्ण रथ पर होकर सवारभोर का संजीवन लाता सूरजझुरमुटों की ओट से झाँकताचिड़ियों के परों पर फुदकतासरित धाराओं के संग बहकरलिपट लहरों से मुस्काता सूर...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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हर दीपक दम तोड़ रहा है...कुसुम कोठारी

चारों तरफ कैसा तूफान हैहर दीपक दम तोड़ रहा हैइंसानों की भीड जितनी बढी है आदमियत उतनी ही नदारद हैहाथों मे तीर लिये हर शख्स हैहर नजर नाखून लिये बैठी हैकिनारों पे दम तोडती लहरें हैसमंदर से लगती ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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गुल ओ गुल-ज़ार की बातें करें.....'अख्तर'शीरानी

यारो कू-ए-यार की बातें करेंफिर गुल ओ गुल-ज़ार की बातें करेंचाँदनी में ऐ दिल इक इक फूल सेअपने गुल-रुख़्सार की बातें करेंआँखों आँखों में लुटाए मै-कदेदीदा-ए-सरशार की बातें करेंअब तो मिलिए बस लड़ा...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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व्यथा शब्दों की....शबनम शर्मा

आसमान के ख़्याल,धरा की गहराई, रात्री का अँधेरा, दिन की चमक, शब्द बोलते हैं।इन्सान की इन्सानियत,हैवान की हैवानियत, फूल की मुस्कान, काँटों का ज्ञान, शब्द बोलते हैं।प्रकृति का प्रकोप, ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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साँस भर जी लो.....डॉ. शैलजा सक्सेना

तपो,अपनी आँच में तपो कुछ देर,होंठों की अँजुरी सेजीवन रस चखो-बैठो...कुछ देर अपने सँगअपनी आँच से घिरे,अपनी प्यास से पिरे,अपनी आस से घिरे,बैठो...ताकि तुम्हे कल यह न लगेसाँस भर तुम यहाँ जी न सके।।-डॉ. श...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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दिल की गलियों से न गुज़र....पावनी दीक्षित 'जानिब'

बड़ी हसरत थी तमन्ना थी प्यार हो जाए किसी दीवाने की चौखट पे दिल ये खो जाए ।ले चलीं हमको बहाकर अश्कों में यादें तेरी दिल का तूफ़ान मुझे क्या जाने कहां ले जाए।हो गया इश्क़ तो दिवानगी का आलम है ये ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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चुप.....प्रियंका सिंह

मैं चुप से सुनती चुप से कहती और चुप सी ही रहती हूँ मेरे आप-पास भी चुप रहता है चुप ही कहता है और चुप सुनता भी है अपने अपनों में सभी चुप से हैं चुप लिए बैठे हैं और चुप से सोये ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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कान्हा घूंघर पैर धरे हैं ....डॉ. इन्दिरा गुप्ता

ठुमकि ठुमकि गईया के बाड़े कान्हा घूंघर पैर धरे हैं कमर कछनियाँ खुलि खुलि जाये लटपटाय कर गिरत उठत है ! आधी कछनिया फँसी कमर मै आधी भूमि पर लहराये नाय सुधि कछु कान्हा को वाकी चाहे खुल...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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ये दिलासा...तरुणा मिश्रा

मुझे आज इतना दिलासा बहुत है..कि उसने कभी मुझको चाहा बहुत है ;उसी की कहानी उसी की हैं नज़्में...उसी को ग़ज़ल में उतारा बहुत है ;बड़ी सादगी से किया नाम मेरे...तभी दिल मुझे उसका प्यारा बहुत है ;उठाओ न ख़ंजर म...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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एक ख़त ...!!!....तरुणा मिश्रा

ख़त तुमको दिलदार लिखूँगी..पायल कंगन हार लिखूँगी ;मैं कश्ती हूँ जीवन तूफां...पर तुमको पतवार लिखूँगी ;जो है उल्फ़त नए चलन की...उसको कारोबार लिखूँगी ;सीने से एक बार लगा लो...तुमको अपना प्यार लिखूँगी ;जब ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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घर पहुँचना....कुंवर नारायण

हम सब एक सीधी ट्रेन पकड़ कर अपने अपने घर पहुँचना चाहते हम सब ट्रेनें बदलने की झंझटों से बचना चाहते हम सब चाहते एक चरम यात्रा और एक परम धाम हम सोच लेते कि यात्राएँ दुखद हैं और घर उनस...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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अबकी बार लौटा तो .......कुंवर नारायण सिंह

1927-2017अबकी बार लौटा तो बृहत्तर लौटूंगा चेहरे पर लगाए नोकदार मूँछें नहीं कमर में बांधें लोहे की पूँछे नहीं जगह दूंगा साथ चल रहे लोगों को तरेर कर न देखूंगा उन्हें भूखी शेर-आँखों से अब...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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अपलक देखती रही.....मोनिका जैन 'पंछी'

तुम्हें याद है वो दिन जब हम आखिरी बार मिले थे फिर कभी ना मिलने के लिए। तुम्हें क्या महसूस हुआ ये तो नहीं जानती पर जुदाई के आखिरी पलों में मैं बिल्कुल हैरान थी। कुछ ऐसा लग रहा था जैस...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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नन्हीं कलाइयों की गुलाबी चूड़ियाँ,,,,बाबा नागार्जुन

प्राइवेट बस का ड्राइवर है तो क्या हुआ,सात साल की बच्ची का पिता तो है!सामने गियर से उपरहुक से लटका रक्खी हैंकाँच की चार चूड़ियाँ गुलाबीबस की रफ़्तार के मुताबिकहिलती रहती हैं…झुककर मैंने पूछ ल...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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दीवारों की सीलन…उफ़...गौतम राजरिशी

ठिठुरी रातें, पतला कम्बल, दीवारों की सीलन…उफ़और दिसम्बर ज़ालिम उस पर फुंफकारे है सन-सन …उफ़दरवाजे पर दस्तक देकर बात नहीं जब बन पायीखिड़की की छोटी झिर्री से झाँके है अब सिहरन…उफ़छत पर ठाठ से प...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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ज़िन्दगी उम्मीद पर...गुलाब जैन

ज़िन्दगी उम्मीद पर कब तक रहेगी,काग़ज़ की कश्ती है कब तक बहेगी।क्यूँ, किसने, क्या कहा, फ़िक्र न करें,दुनिया तो कहती है, कहती रहेगी।जलती है वो भी इश्क़ में उसके,शमा परवाने को, ये कैसे कहेगी।ख़िज़ां गर है आ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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सोच में सीलन बहुत है......सीमा अग्रवाल

सोच में सीलन बहुत हैसड़ रही है,धूप तो दिखलाइयेहै फ़क़त उनको ही डरबीमारियों काजिन्हें माफ़िक हैं नहींबदली हवाएँबंद हैं सब खिड़कियाँजिनके घरों कीजो नहीं सुन सके मौसमकी सदाएँलाज़मी ही था बदलनाजीर्...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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किन धागों से सी लूँ बोलो.....श्वेता सिन्हा

मैं कौन खुशी जी लूँ बोलो।किन अश्कों को पी लूँ बोलो।बिखरे लम्हों की तुरपन कोकिन धागों से सी लूँ बोलो।पलपल हरपल इन श्वासों सेआहों का रिसता स्पंदन है,भावों के उधड़े सीवन को,किन धागों से सी लूँ बोल...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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शब्द... राजेन्द्र जोशी

लड़ते हैं, झगड़ते हैंडराते हैं, धौंस दिखाते हैंडरते हैं, दुबकते हैंप्रेम करते ,कांपते हैंकभी तानाशाह होकरभीख मांगते दिखते हैं.मैं और वेखेला करते हैंमिलजुल करभोथरे हुए शब्दों कोधार देते हुए...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
मेरी धरोहर
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अहसास....डॉ. शैलजा सक्सेना

अकेलापन..अहसास मन का,संग-साथ..कब जीवन भर का ?वादे ..रहे अधूरेसपने..कब हुए पूरे?,इच्छा"..समुद्री तरंगें,आशा"..जगाती उमंगें,अनुभव..कब सदा मीठा?यथार्थ.रहा सदा सीठा,जाना..कब स्वीकारा?इसीलिए..मन रहा हारा।।...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
मेरी धरोहर
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