मेरी धरोहर की पोस्ट्स

तुम कह दो......एस.के. गुडेसर 'अक्षम्य'

प्रेम की नदी का जहाँ से उद्गम होता हैमेरे उस हृदय के अन्तःपुर पर -हक़ तुम्हारा हैतू जो चाहे कर मेरे साथमुझे आँख मूँद कर स्वीकार हैपर कहने की पहल तुम करोकि दिन नहीं गुज़रता कब सेरातों को बस तेरा इं...  और पढ़ें
8 घंटे पूर्व
मेरी धरोहर
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नया घर...पूजा प्रियंवदा

Picture courtesy : @Shimlalife Twitter with permissionवहाँ कहीं एक सेब के बगीचे से घिरा एक पुराना घर है वहां एक बचपन दफ़्न हैमेरी नानी का पहाड़ी गुनगुनाना गुम है मेरे नाना की कहानियाँ खो गयी हैंवो पगडंडियां अब मुझे ...  और पढ़ें
1 दिन पूर्व
मेरी धरोहर
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दोस्तो बारगह-ए-क़त्ल सजाते जाओ....मोहसिन भोपाली

दोस्तो बारगह-ए-क़त्ल सजाते जाओक़र्ज़ है रिश्ता-ए-जाँ, क़र्ज़ चुकाते जाओरहे ख़ामोश तो ये होंठ सुलग उठेंगेशोला-ए-फ़िक़्र को आवाज़ बनाते जाओअपनी तक़दीर में सहरा है तो सहरा ही सही आबला-पाओ नए फ...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
मेरी धरोहर
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शब्द... राजेन्द्र जोशी

लड़ते हैं, झगड़ते हैंडराते हैं, धौंस दिखाते हैंडरते हैं, दुबकते हैंप्रेम करते ,कांपते हैंकभी तानाशाह होकरभीख मांगते दिखते हैं.मैं और वेखेला करते हैंमिलजुल करभोथरे हुए शब्दों कोधार देते हुए...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
मेरी धरोहर
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तुलसी खाकर ठीक करेगी ....डॉ. जियाउर रहमान जाफ़री

उठते ही घर ठीक करेगीमाँ फिर बिस्तर ठीक करेगीचावल हमें खिला देने कोकंकड़ पत्थर ठीक करेगीगिन के सिक्के चार दफ़ा मेंफिर ख़ुद छप्पर ठीक करेगीधुंआ धुंआ इस घर को कर केकितने मच्छर ठीक करेगीइस ज़िद पे ह...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
मेरी धरोहर
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है सजर ये मेरे अपनों का...डॉ. आलोक त्रिपाठी

बड़ा अजीब सा मंझर है ये मेरी जिन्दगी की उलझन का गहरी ख़ामोशी में डूबा हुआ है सजर ये मेरे अपनों का सिले होठों के भीतर तूफानों की सरसराहट से टूटते सब्र लगता है जहर बो दिया हो किसीने अपने अरमान...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
मेरी धरोहर
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जीने की वजह ........रंजना भाटिया

दुःख ...आतंक ...पीड़ा ...और सब तरफ़फैले हैं .............न जाने कितने अवसाद ,कितने तनाव ...जिनसे मुक्ति पानासहज नही हैंपर ,यूँ ही ऐसे मेंजब कोई...नन्हीं ज़िन्दगीखोलती है अपने आखेंलबों पर मीठी सी मुस्कान लिएत...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
मेरी धरोहर
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ये आँसू यूँ ही तो बहते नहीं हैं ......रंजना वर्मा

वजह बिन फ़ासला रखते नहीं हैं किसी से दुश्मनी करते नहीं हैं भरेंगे जल्द ही सब घाव तन केजखम अब ये बहुत गहरे नहीं हैं समझ लेता सभी का दर्द है दिलये आँसू यूँ ही तो बहते नहीं हैं सहेजी अश्क़ क...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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खुद से बिछड़ने की क्या थी वज़ह.....पंकज शर्मा

तेरे खामोश होने की क्या थी वज़ह,कि फिर लौट न आने की क्या थी वज़ह।तेरे होने न होने का अब फर्क नहीं पड़ता,साथ होकर भी साथ न होने की क्या थी वज़ह।बीती बातों का क्यों अफसोस है तुझे,ग़ज़ल लिखने की क्या थी वज़...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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तुम थे तो हम थे... राहुल कुमार

लम्हे वो प्यार के जो जिए थे, वजह तुम थेख्वाब वो जन्नत के जो सजाये थे, वजह तुम थे दिल का करार तुम थे,रूह की पुकार तुम थेमेरे जीने की वजह तुम थेलबों पे हँसी थी जो , वजह तुम थेआँखों में नमी थी जो, वजह त...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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बीच भँवर में डोले कश्ती.......डॉ. रजनी अग्रवाल 'वाग्देवी रत्ना'

जीवन में आई बाधाएँहमको नाच नचाती हैं,सुलझ न पाए गुत्थी कोईउलझन ये बन जाती हैं।असमंजस का भाव जगातींदिल को ये भटकाती हैं,मृग शावक से चंचल मन कोव्याकुल ये कर जाती हैं।रिश्तों के कच्चे धागों में...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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मन की उलझन ....इन्दु सिंह

कभी सोचता है उलझनों में घिरा मनक्या ठहर गया है वक्त ? नहीं,वक्त वैसे ही भाग रहा हैकुछ ठहरा है तो वो है मन,मन ही कर देता है कमअपनी गति कोऔर करता है महसूसठहरे हुए वक्त कोउसे नज़र आती हैं सारीजिज्ञा...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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उलझन.....देवेन्द्र सोनी

उलझन रहती हैसदा ही हमारे आसपास।हर उलझन का होता है हल भी वहीं-कहींपर हमारा वैचारिक द्वंद्व करता है देर, इन्हें सुलझाने में।उलझन का हमारी जिंदगी सेगहरा नाता है सुलझती है एक तो रहती है दू...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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यहाँ तो सिर्फ़ गूँगे और बहरे लोग बस्ते हैं .....दुष्यंत कुमार

ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दोहरा हुआ होगा मैं सजदे में नहीं था आप को धोखा हुआ होगा यहाँ तक आते आते सूख जाती है कई नदियाँ मुझे मालूम है पानी कहाँ ठहरा हुआ होगा ग़ज़ब ये है की अपनी मौत की आह...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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उलझन.....राम लखारा "विपुल"

उलझ रहा जितना जीवन में, पल पल उतना सुलझ रहा हूँअहा! उलझन तुम हो धन्यतुमसे प्रिय है न कोई अन्यपग पग पर काँटों को सजाफूलों का पुंज लिए विकललगती कुरूप हो वेदना सीमगर अंतस सुंदर सकलकंचन सम तन निखर र...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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शहर में जश्न हे, नैजो पे चढे है बच्चे ......मुजफ्फर हनफ़ी

दोस्तों नजरे फसादात नही होने की जान दे कर भी मुझे मात नहीं होने की उन से बिछड़े तो लगा जैसे सभी अपनो सेआज के बाद मुलाकात नहीं होने कीये कड़े कोस मसाफत के बरस दिन तक है ओर दोराने सफर रात नही ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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फल्गु के तट पर !!!!!......सीमा 'सदा'

फल्गु के तट परपिण्डदान के व़क्त पापाबंद पलकों में आपके साथमाँ का अक्स लियेतर्पण की हथेलियों मेंश्रद्धा के झिलमिलाते अश्कों के मध्यमन हर बारजाने-अंजाने अपराधों कीक्षमायाचना के साथपितरों क...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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आज के लिए मेरे शब्द !!............कविता गुप्ता

आज, फिर मन में आया, शब्दों की पिटारी खोल लूँ। विवेक का पल्लू पकड़ कर चुनिंदा, जादुई शब्द ढूँढ लूँ। जिनमें हो आकर्षण अनन्त हों मस्त पुरवाई से, स्वछंद। सुबह की ओस में नहाए हुए लिए भीनी ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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आरती का दिया...... गोपाल दास नीरज

तुम्हारे बिना आरती का दिया यह,न बुझ पा रहा है, न जल पा रहा है।भटकती निशा कह रही है कि तम में दिये से किरन फूटना ही उचित है,शलभ चीखता पर बिना प्यार के तो विधुर सांस का टूटना ही उचित है,इसी दर्द म...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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हौसला उम्मीदों का .............भारती पंडित

दिखता न हो जब किनारा कोई,मिलता न हो जब सहारा कोईजला ले दीया खुद ही की रोशनी का,कोई तुझसे बढ़कर सितारा नहींतूफां तो आए है आते रहेंगे,ग़मों के अँधेरे भी छाते रहेंगे,आगाज़ कर रोशनी का कि तुझको, अं...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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मुल्क भी हैरान है.......अतुल कन्नौजवी

एक करतब दूसरे करतब से भारी देखकरमुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर,जिनके चेहरे साफ दिखते हैं मगर दामन नहींशक उन्हें भी है तेरी ईमानदारी देखकर,उम्रभर जो भी कमाया मिल गया सब खाक मेंचढ गया फांसी क...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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हौसला...... प्रीति विकास मोहनानी 'भारती

पागलपन की हद तक सपनों को चाहना।कुछ नया कर दिखा, दिल यह कह रहा।क्षितिज तक उड़ान है भरना,सपनों को साकार है करना।चाहत ऊँची उड़ान की,मुश्किल डगर है आसाँ नहीं।मेहनत से नहीं है डरना,ख़्वाब को पूरा है कर...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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ऐ शरीफ़ इंसानों........... साहिर लुधियानवी

खून अपना हो या पराया होनस्ल-ए-आदम का ख़ून है आख़िर,जंग मशरिक में हो या मगरिब में,अमन-ऐ-आलम का ख़ून है आख़िर !बम घरों पर गिरे के सरहद पर , रूह-ऐ-तामीर जख्म खाती है !खेत अपने जले के औरों के ,ज़ीस्त फ़ा...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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दृष्टि और रंगों की गाथा.....सुमन रेणु

बस आँखों को बंद करोसोचो क्या रंग जो तुमने देखेपहली नीमिलित पलकों केनीचे रंग कौन से थे वोएक अन्धेरा दूर दूर तकआवाजों की एक दुनिया हैकितनी परत चढी है तम कीशब्दों का बस साज बजा हैदो तूलिका उसे भी...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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और रूह रिस रही है....पूजा प्रियंवदा

तुम तक पहुँचने का रास्ताबहुत अकेला थालम्बा भीकड़ी धूप थीऔर तुम्हारे इश्क़की गर्मीझुलसाती रही मेरी रूह कोमुसलसलएक लाल रेशमी छाते सेसालों की बर्फ कोअचानक पिघलने सेबचाते हुएगीले आँखों के पोरो...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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आँख का रंग तुलु होते हुए देखा...गुलज़ार

वक़्त को आते न जाते न गुजरते देखान उतरते हुए देखा कभी इलहाम की सूरतजमा होते हुए एक जगह मगर देखा हैशायद आया था वो ख़्वाब से दबे पांव हीऔर जब आया ख़्यालों को एहसास न थाआँख का रंग तुलु होते हुए देख...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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मन के भी तो कितने हैं रंग....देवयानी

हरे के कितने तो रंग हैंएक हरा जो पेड की सबसे ऊँची शाख से झाँकता हैएक जिसे छू सकते हैं आपबढ़ाते ही अपना हाथएक दूर झुरमुटों के बीच से दिखाई देता हैएक नयी फूटती कोंपल का हरापन हैएक हरा बूढ़े पके हु...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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साजिश में शामिल नहीं हूँ......एकान्त श्रीवास्तव

इस रंग के बारे मेंकोई भी कथन इस वक़्तकितना दुस्‍साहसिक काम हैजब जी रहे हैं इस रंग कोगेंदे के इतने और इतने सारे फूलजब हँस रहे होंपृथ्‍वी पर अजस्र फूलसरसों और सूरजमुखी के सूर्य भी जब चमक रहा ह...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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साजिश में शामिल नहीं हूँ......एकान्त श्रीवास्तव

इस रंग के बारे मेंकोई भी कथन इस वक़्तकितना दुस्‍साहसिक काम हैजब जी रहे हैं इस रंग कोगेंदे के इतने और इतने सारे फूलजब हँस रहे होंपृथ्‍वी पर अजस्र फूलसरसों और सूरजमुखी के सूर्य भी जब चमक रहा ह...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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आज की हकीकत.....अज्ञात

ये इंसा है केवल चमन देखता है,सरेराह बेपर्दा तन देखता है।हवस का पुजारी हुआ जा रहा है,कली में भी कमसिन बदन देखता है।जलालत की हद से गिरा इतना नीचे,कि मय्यत पे बेहतर कफन देखता है।भरी है दिमागों में ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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