मेरी धरोहर की पोस्ट्स

मुक्तक.............नरेंद्र श्रीवास्तव

क़िस्मत~~~~~किसान के दिनपरेशानियों ने लादेआसमान सेओले मिलेनेताओं से वादे।....प्यासे~~~~वेअच्छे अच्छों कोपानी पिलाते हैंबाक़ीप्यासे रह जाते हैं*प्रशंसक~~~~~एक नेता नेकमाल कर दिखायाउन्होंनेखिलौने ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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तेरी ज़रूरत ज्यादा है..........अमित जैन 'मौलिक'

मेरी उजरत कम, तेरी ज़रूरत ज्यादा हैऐ ज़िंदगी कुछ तो बता, तेरा क्या इरादा है।दांव पर ईमान लगाकर, तरक़्क़ी कर लेनाआज के दौर का, फ़लसफ़ा सीधा सादा है।हड़बड़ी में दिख रहा, ख्वाहिशों का समंदरलहरों में उफान ह...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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क्या है मुझ में............नौबहार 'साबिर'

बूंदी पानी की हूं थोड़ी-सी हवा है मुझ मेंइस बिज़ाअतपे भी क्या तुर्फ़ांइना है मुझ मेंये जो इक हश्रशबो-रोज़बपाहै मुझ मेंहो न हो और भी कुछ मेरे सिवा है मुझ मेंसफ़्हे-दहर पे इक राज़ की तहरीरहू...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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तीन लघु नज़्म....हुमैरा राहत

 तेरा नाम बारिशों के मौसम में  छत पे'बैठ के तन्हा  नन्ही नन्ही बूंदों से  तेरा नाम लिखती हूँ  काश मेरे मालिक बहुत रहमो-करम मुझ पर किये तूने मैं तेरा शुक्र अदा करते नहीं थ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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रिहा होने से डरता है............राजेश रेड्डी

यहां हर शख़्स हर पल हादिसा होने से डरता हैखिलौना है जो मिट्टी का फ़ना होने से डरता हैमेरे दिल के किसी कोने में इक मासूम-सा बच्चाबड़ों की देख कर दुनिया बड़ा होने से डरता हैन बस में ज़िन्दगी इसके न ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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वही है दोस्ती हमारी.....विकास शर्मा "दक्ष"

ये नहीं कि दिल की ख़लिश पिघल गई।रोने से तबियत ज़रूर थोड़ी संभल गई।। वही मैं, वही तुम, वही है दोस्ती हमारी,फ़ासले से कैफ़ियत ज़रूर थोड़ी बदल गई।पहले से जानते थे कि ना आओगे मगर,बहाने से तबियत ज़रूर थोड़ी ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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प्यार का मतलब .....चंचलिका शर्मा

तुम कहते हो मैं जिद्दी हूँ और थोड़ी सी हूँ मनचली ... हाँ , मैं हूँ स्वीकार है मुझे मैं जिद्दी हूँ थोड़ी सी मनचली भी ........ जब भी माँगा , जो कुछ भी माँगा सब कुछ प्यार से दिया तुमने ......&...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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आतुरता......अमित जैन 'मौलिक'

आतुरता काव्याकुलता की ओरयह प्रवाहआह!!गुमान ही ना थाकोई अनुमान ही ना था।लज़्ज़त के गगन सेटप्प टप्प बूँद गिरती रहीहृदय के रजत कटोरे मेंचुपके से, लबालब चांदनी भरती रही।जब तंद्रा टूटी तो देखाव...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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अपने रूदन और क्रदन से....रश्मि वर्मा

सामर्थ्य नहीं अब शब्दों मेंकहना कुछ भी है व्यर्थ तुम्हें।अधरों के स्वर हो गए कंपित, अब रुँध चले हैं कंठ मेरे।नयनों के अश्रु भी तुमसेविनती कर के अब हार गएमेरे संतापों के ताप से भीना रूद्ध ह्...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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आदमी काम का नहीं होता.................जिगर मुरादाबादी

1890-1960अब तो ये भी नहीं रहा एहसास दर्द होता है या नहीं होता इश्क़ जब तक न कर चुके रुस्वा आदमी काम का नहीं होता टूट पड़ता है दफ़अ'तन जो इश्क़ बेश-तर देर-पा नहीं होता वो भी होता है एक वक़्त कि...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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प्रश्न तो है!....... अमित जैन 'मौलिक'

चरित्र और मर्यादा!जिसने भी गढ़े होंगे ये शब्द,बड़ा व्यापक हेतु रहा होगा।शायद आचार का निर्धारणऔर निष्ठा का पालन कहा होगा।प्रतिपादित किये गये होंगेसम्भवतः ‘सर्व गुण संपन्न’मदांध-नियंताओं और&nb...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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बता अब ऐ ज़माने और क्या करना पड़ेगा .....इफ़्तिख़ार हुसैन आरिफ़

गली-कूचों में हंगामा बपा करना पड़ेगा जो दिल में है अब उस का तज़्किराकरना पड़ेगा नतीजा कर्बला से मुख़्तलिफ़हो या वही हो मदीना छोड़ने का फ़ैसला करना पड़ेगा वो क्या मंज़िल जहाँ से रास्त...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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व्यथा मन की......प्रकाश लुनावत

समय मेरा गिरवी पड़ा था जिम्मेदारी के बाजार में.....सोचा कुछ पल जी लूँ चुराकर ए सनम, तेरे प्यार में..... न जाने कैसे आई बात तुझसे कुछ इक़रार के कहाँ खो गए प्यार के वो पल ए प्यार, तेरे प्यार क...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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रो रोकर जीते है गैरों की महफिल में.....प्रीती श्रीवास्तव

हुई अंजुमन मे आपकी रात आधी !रह गई मुलाकात आधी बात आधी!!हाथ जो बढ़ाया हमने खफा हो गये!महफिल से हुई रूखसत बारात आधी!!नजरे उठायी जो बहकने लगे कदम!खता हो गई थी चांदनी रात आधी!!करवट बदलते ही सहर हो गई सा...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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कुछ फुटकर शेर....राम नारायण हलधर

दर्द घुटनों का मेरा जाता रहा ये देख करथामकर ऊँगली नवासा सीढ़ियां चढ़ने लगा *** बरी हो कर मेरा क़ातिल सभी के सामने खुश है अकेले में फ़फ़क कर रो पड़ेगा , देखना इक दिन *** मौन के शूल को पंखुड़ी से छुआ&nb...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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सोच रहा है इतना क्यूँ .......शाहीद कमाल

सोच रहा है इतना क्यूँ ऐ दस्त-ए-बे-ताख़ीर निकालतू ने अपने तरकश में जो रक्खा है वो तीर निकाल जिस का कुछ अंजाम नहीं वो जंग है दो नक़्क़ादों की लफ़्ज़ों की सफ़्फ़ाक सिनानें लहजों की शमशीर निकाल&...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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हाले दिल पहाड़ो के..... प्रकाश

जब तनहाई में मुझको तेरी याद सताती है,  तेरे ख्याल आते हैं.....ये पहाड़ भावुकता से मुझे अपना हाले दिल सुनाते हैं....कहते मुझसे -हम भी खड़े सदियों से किसी के इन्तजार में हम भी डूबे थे कभी कि...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है ,,,,,,,दुष्यंत कुमार

1933-1975इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है,नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है।एक चिनगारी कही से ढूँढ लाओ दोस्तों,इस दिए में तेल से भीगी हुई बाती तो है।एक खंडहर के हृदय-सी, एक जंगली फूल-सी,आदमी की ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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ज़िंदगी है प्रकृति .....रुजुला शर्मा

हर जीव की ज़िंदगी है प्रकृति एक प्यारी डोर है प्रकृतिये डोर कहीं टूट ना जाएये अनर्थ कभी होने ना पायेकभी ज़िंदगी संवारने का तो कभी बिगाड़ने काकभी फूलों को महकाने कातो कभी भूकंप से डराने काहमन...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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क्या एक बेटी को बचा नहीं सकते....ऋतु पंचाल

मैं आज की नारी हूँ, ये न समझना कि मैं बेचारी हूँ, अबला हूँ, समझकर अत्याचार न करना, बेचारी हूँ, समझकर बुरा व्यवहार न करना, मुझ पर हाथ उठाओगे तो सौ हाथ उठेंगे, एक सिर झुकाऊॅंगी तो सौ सिर झुके...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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मैं, कीर्ति, श्री, मेधा, धृति और क्षमा हूं... स्मृति आदित्य

एक मधुर सुगंधित आहट। आहट त्योहार की। आहट रास, उल्लास और श्रृंगार की। आहट आस्था, अध्यात्म और उच्च आदर्शों के प्रतिस्थापन की। एक मौसम विदा होता है और सुंदर सुकोमल फूलों की वादियों के बीच खुल जात...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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अहसासों की शैतानियाँ ...सीमा "सदा"

खूबसूरत से अहसास, शब्‍दों का लिबास पहन खड़े हो जाते जबकलम बड़ी बेबाकी से उनको सजाती संवारती कोई अहसास निखर उठता बेतकल्‍लुफ़ हो तो कोई सकुचाता .... अहसासों की शैतानियाँ मन को मो...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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आहिस्ता.....प्रभात सिंह राणा ‘भोर’

तेरी ख़ातिर आहिस्ता,शायद क़ामिल हो जाऊँगा।या शायद बिखरा-बिखरा,सब में शामिल हो जाऊँगा॥शमा पिघलती जाती है,जब वो यादों में आती है।शायद सम्मुख आएगी,जब मैं आमिल हो जाऊँगा॥पेशानी पर शिकन बढ़ाती,जब वो...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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जो भूले से भूल जाते बिखर गये होते....नीतू राठौर

जरा सी देर सही घर अगर गये होतेतेरे ही सीने से लग के निखर गये होते।नहीं भूली हूँ जुदाई की शाम अब तक भीजो भूले से भूल जाते बिखर गये होते।अभी नहीं जो होता रूह से रूह का मिलनातो इस जनम में दुबारा ठहर ...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
मेरी धरोहर
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खोई हुई पहचान हूँ मैं...राजेश रेड्डी

गीता हूँ कुरआन हूँ मैंमुझको पढ़ इंसान हूँ मैंज़िन्दा हूँ सच बोल के भीदेख के ख़ुद हैरान हूँ मैंइतनी मुश्किल दुनिया मेंक्यूँ इतना आसान हूँ मैंचेहरों के इस जंगल मेंखोई हुई पहचान हूँ मैंखूब हूँ वाक...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
मेरी धरोहर
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दस्तक देते कईं शब्द मेरे.....रश्मि वर्मा

सामर्थ्य नहीं अब शब्दों मेंकहना कुछ भी है व्यर्थ तुम्हें।अधरों के स्वर हो गए कंपित, अब रुँध चले हैं कंठ मेरे।नयनों के अश्रु भी तुमसेविनती कर के अब हार गएमेरे संतापों के ताप से भीना रूद्ध ह्...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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खिलौने वाला.....सुभद्रा कुमारी चौहान

वह देखो माँ आजखिलौनेवाला फिर से आया है।कई तरह के सुंदर-सुंदरनए खिलौने लाया है।हरा-हरा तोता पिंजड़े मेंगेंद एक पैसे वालीछोटी सी मोटर गाड़ी हैसर-सर-सर चलने वाली।सीटी भी है कई तरह कीकई तरह के सु...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
मेरी धरोहर
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सुख या फिर ख़ुशी..

चुनते हैं हमसुख या फिरख़ुशी..रह कर भीशिविर में ..प्रताड़नाओं केहम मन केमौसम को... बासन्ती बना सकते हैंकोई इन्सान..कोई वस्तु या फिर प्रक्रिया हो कोई भी....इतनी बलशाली नहींकि हमारे मन परकब्ज...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
मेरी धरोहर
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मिट्टी से मशविरा न कर...अभिषेक शुक्ला

मिट्टी से मशविरा न कर, पानी का भी कहा न मानऐ आतिश-ए-दुरुं मेरी, पाबंदी-ए-हवा न मानहर एक लुग़त से मावरा मैं  हूँ अजब मुहावरामेरी ज़बान में पढ़ मुझे, दुनिया का तर्जुमा न मानहोने में या न होने में मेरा ...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
मेरी धरोहर
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मौसम बदले, न बदले....अशोक वाजपेई

मौसम बदले, न बदलेहमें उम्मीद कीकम से कमएक खिड़की तो खुली रखनी चाहिए।शायद कोई गृहिणीवसंती रेशम में लिपटीउस वृक्ष के नीचेकिसी अज्ञात देवता के लिएछोड़ गई होफूल-अक्षत और मधुरिमा।हो सकता हैकिसी...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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