मेरी धरोहर की पोस्ट्स

आँखें....दिव्या माथुर

लो आसमान सी फैल उठीं नीली आँखेंलो उमड़ पड़ीं सागर सी वे भीगी आँखेंमेघश्याम सी घनी घनी कारी आँखेंमधुशाला सी भरी भरी भारी आँखेंएक भरे पैमाने सी छलकीं आँखें दिल मानो थम गया किंतु धड़कीं आँखें...  और पढ़ें
1 दिन पूर्व
मेरी धरोहर
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मैं नीर भरी दुख की बदली!,,,,,महादेवी वर्मा

स्पन्दन में चिर निस्पन्द बसाक्रन्दन में आहत विश्व हँसानयनों में दीपक से जलते,पलकों में निर्झारिणी मचली!मेरा पग-पग संगीत भराश्वासों से स्वप्न-पराग झरानभ के नव रंग बुनते दुकूलछाया में मलय-बय...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
मेरी धरोहर
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इसीलिए तो नगर -नगर..............गोपालदास नीरज

इसीलिए तो नगर-नगर बदनाम हो गये मेरे आँसू मैं उनका हो गया कि जिनका कोई पहरेदार नहीं था|जिनका दुःख लिखने की ख़ातिर मिली न इतिहासों को स्याही,क़ानूनों को नाखुश करके मैंने उनकी भरी गवाही ज...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
मेरी धरोहर
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शेरो-सुख़न तक ले चलो...अदम गोंडवी

भूख के एहसास को शेरो-सुख़न तक ले चलो या अदब को मुफ़लिसों की अंजुमन तक ले चलोजो ग़ज़ल माशूक के जलवों से वाक़िफ़ हो गई उसको अब बेवा के माथे की शिकन तक ले चलोमुझको नज़्मो-ज़ब्‍त की तालीम देना बा...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
मेरी धरोहर
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स्वतंत्रता दिवस की पुकार....अटल बिहारी वाजपेयी

पन्द्रह अगस्त का दिन कहता - आज़ादी अभी अधूरी है।सपने सच होने बाक़ी हैं, राखी की शपथ न पूरी है॥जिनकी लाशों पर पग धर कर आजादी भारत में आई।वे अब तक हैं खानाबदोश ग़म की काली बदली छाई॥कलकत्ते के फुटप...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
मेरी धरोहर
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परिचय की वो गांठ....त्रिलोचन

1917-2007यूं ही कुछ मुस्काकर तुमनेपरिचय की वो गांठ लगा दी!था पथ पर मैं भूला भूला फूल उपेक्षित कोई फूला जाने कौन लहर ती उस दिन तुमने अपनी याद जगा दी। कभी कभी यूं हो जाता है गीत कहीं कोई गाता ह...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
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परिचय ?....मीना चोपड़ा

भूल से जा गिरी थी मिट्टी मेंमद्धिम सी अरुणिमा तुम्हारी।बचा के उसको उठा लिया मैंने।उठा कर माथे पर सजा लिया मैंने।सिंदूरी आँच को ओढ़े इसकीबर्फ़ के टुकड़ों पर चल पड़ी हूँ मैं।सर्द सन्नाटों में घूम...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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लगते थे ज्यों चिर-परिचित हों.....दुष्यन्त कुमार

वह चपल बालिका भोली थीकर रही लाज का भार वहनझीने घूँघट पट से चमकेदो लाज भरे सुरमई नयननिर्माल्य अछूता अधरों परगंगा यमुना सा बहता थासुंदर वन का कौमार्यसुघर यौवन की घातें सहता थापरिचय विहीन हो कर...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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कौन जो दूध का धुला होगा.....सजीवन मयंक

आज कोई तो फैसला होगा।कौन जो दूध का धुला होगा।।एक पगडंडी अलग से दिखती है।कोई इस पर कभी चला होगा।।होगी मशाल जिसके हाथों में।पीछे उसके एक काफ़िला होगा।।जो आदमी को गले लगाता था।वो पागल आपको मिला ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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इश्क़...निर्मल सिद्धू

इश्क़ का शौक़ जिनको होता हैमौत का न ख़ौफ़ उनको होता हैघूमते फिरते हैं फ़क़त दर बदरये मर्ज़ न हर किसी को होता हैली होती है मंज़ूरी तड़पने कीमिला ख़ुदा से यही उनको होता हैचुनता है वो भी ख़ास बन्दों को हीइसलि...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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शून्य से शिखर हो गए........सजीवन मयंक

शून्य से शिखर हो गए।और तीखा ज़हर हो गए।।कल तलक जो मेरे साथ थे।आज जाने किधर हो गए।।बाप-बेटों की पटती नहीं।अब अलग उनके घर हो गए।।है ये कैसी जम्हूरी यहाँ।हुक्मरां वंशधर हो गए।।क्यो परिन्दे अमन च...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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परेशां आईना है...........सजीवन मयंक

शब्द को कुछ इस तरह तुमने चुना है। स्तुति भी बन गयी आलोचना है।।आजकल के आदमी को क्या हुआ है।देखकर जिसको परेशां आईना है।।दोस्तों इन रास्तों को छोड़ भी दो।आम लोगों को यहाँ चलना मना है।।जिसके भाष...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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कोई क़ीमत चुका नहीं सकता.....नज़ीर बनारसी

बुझा है दिल भरी महफ़िल में रौशनी देकर,मरूँगा भी तो हज़ारों को ज़िन्दगी देकरक़दम-क़दम पे रहे अपनी आबरू का ख़याल,गई तो हाथ न आएगी जान भी देकरबुज़ुर्गवार ने इसके लिए तो कुछ न कहा,गए हैं मुझको दुआ-ए...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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शहीद की विधवा.....अमित निश्छल

वीर रस, जन गण सुहाने गा रहे हैंपंक्तियों में गुनगुनाते जा रहे हैं,तारकों की नींद को विघ्नित करे जोगीत, वे कोरे नयन दो गा रहे हैं।ज़िंदगी की राह में रौशन रही वोमाँग में सिंदूर, सर चूनर बनी थी,रात क...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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राह तकती, वो दो आंखे....निशा माथुर

दरवाजे की चौखट परराह तकती, वो दो आंखे, मन में आंशकाओं के उठते हुये बवंडर,दिल मायूसी में डूबा, जैसे कोई खंडहर।किसी भी अनहोनी कोकर अस्वीकार, दिमाग जा पहुंचा संभावनाओं के द्वार।वो हर एक पल का अ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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समस्या....सुशान्त प्रिय

बिना किसी पूर्व-सूचना के एक दिन आ गया प्रलय, भौंचक्के रह गए सारे भविष्यवेत्ता,सन्न रह गया समूचा मौसम-विभाग, हहराता समुद्र लील गया सारा आकाश,सूर्य डूब गया उसमें, जिसकी फूली हुई लाश बहत...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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गमों की आग...हरिहर झा

गीत धड़कन से निकल कर्कश हुये टकरा ग़मों से, आग की बरसात हुई। बदक़िस्मत! ख़ुदा तक पहुंच कर, लौटी अधूरी मांगलो! दिल की हमारी;स्वाद में ऐसा लगा,  चाश्नी में किस तरह  नीम कड़ुवे की श...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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किरदार......श्यामल सुमन

बाँटी हो जिसने तीरगी उसकी है बन्दगी।हर रोज नयी बात सिखाती है ज़िन्दगी।।क्या फ़र्क रहनुमा और क़ातिल में है यारो।हो सामने दोनों तो लजाती है ज़िन्दगी।।लो छिन गए खिलौने बचपन भी लुट गया।यों बोझ किता...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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फन्दा............लक्ष्मीनारायण गुप्त

कुछ मुसीबतें, कुछ परेशानियाँऐसी होती हैं जो फन्दे की तरहगले पर पड़ जाती हैंजितना प्रयत्न करो निकलने काफन्दा उतना ही और कसता जाता हैज़्यादा से ज़्यादा तुम यह कर सकते होकि फन्दे को स्वीकार कर ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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दिन में तेरा नहीं काम............राहुल राही

शब ए फ़ुर्सत में तू आना, ऐ ख़्वाब,दिन में तेरा नहीं काम, ज़माना नहीं।हो ना जाएँ कहीं रंग ये, तेरे खराब,रात के सिवा, तेरा कोई, ठिकाना नहीं।तेरा फन, तेरा हुनर, लाजवाब,पर किसी को, ये अज़ाब, बताना नहीं।क...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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ख़्वाब मेरी आँख में........डॉ. प्रेम लता चसवाल ''प्रेमपुष्प''

ख़्वाब मेरी आँख में पलते रहे हैं। अहर्निश हर-पल वही सजते रहे हैं।। मोतियों से जो सितारे आसमां में,आँख से मेरी ही तो झरते रहे हैं। रेत के टीले पे जा के देखिये, वो  कल्पना की मृगतृषा रचते र...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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ख़्वाब आते रहे!.....डॉ. अनिल चड्ढा

ख़्वाब आते रहे, ख़्वाब जाते रहे,तुमसे मिलने को थे तरसाते रहे!बात हर ओर तेरी ही होती रही,हम भी संग-संग तेरे गीत गाते रहे!बीत जायेगा हर पल तुम्हारे बिना,फिर भी हर पल तुम्हे क्यों बुलाते रहे!एक जीवन मि...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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ख़्वाबो मेरे ख़्वाबो......विभा नरसिम्हन

ख़्वाबों मेरे ख़्वाबों कभी तो आराम करो कितना और उड़ोगे कहीं तो अब शाम करो थक कर बैठी हूँ मैं पीछे तुम्हारे भागते-भागते आँख-मिचोली के इस खेल में तुम हाथ कभी न आतेइतनी ऊँची पींगे तुम्हारी कभी...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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आदत..........श्यामल सुमन

मेरी यही इबादत है।सच कहने की आदत है।।मुश्क़िल होता सच सहना तो।कहते इसे बग़ावत है।।बिना बुलाये घर आ जाते।कितनी बड़ी इनायत है।कभी ज़रूरत पर ना आते।इसकी मुझे शि्क़ायत है।।मीठी बातों में भरमाना।इ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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आशा की किश्ती...डॉ. कुशल चंद कटोच

आशा की किश्ती कोहम ले चले हैंहिम्मत की पतवार सेवक़्त की विपरीत धारा मेंनहीं पता हमेंपाएँगे मंज़िलयह फिरहो जाएँगे शिकारलालच, बेईमानी, ख़ुदगर्ज़ीके पत्थरों काऔर डूब जाएँगेअपनी ही आशा के दरिया ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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यही मेरी मुहब्बत का सिला है.....मोहन जीत ’तन्हा’

यही मेरी मुहब्बत का सिला है मिला है दर्द दिल तोड़ा गया है हुआ जो कुछ भी मेरे साथ यारो“ज़माने में यही होता रहा है”उसे मालूम है मैं बेख़ता हूँ न जाने फिर भी क्यों मुझसे ख़फ़ा हैये जिस अंदाज़ से झटक...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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उस रात......डॉ मधु त्रिवेदी

तुमने लिखा था;उस रातखींचकर मेरा हाथ,बना उंगली कलम से प्यार नाम तुमने!फ़ासला था हममें;उस रात,चारों ओर नीरवताबेसुध सो रही थी।तारिकाएँ ही जानतीदशा मेरे दिल की उस रात।मैं तुम्हारे पास होकर ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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एक दुनिया का उजड़ना है....गोपालदास "नीरज"

सड़क विस्तार के लिए सारे पेड़ों के कटने के बाद बस बचे हैं एक नीम और बरगद जो अस्सी साल के साथ में शोकाकुल हैं पहली बार नीम बोला परसों जब हरसिंगार कटा था तो बहुत रोया बेचारा सारे पक...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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किस्मत से हम नहीं...देवेन्द्र सोनी

अक्सर ही हमरोना रोते रहते हैंअपनी फूटी किस्मत काचाहे हमको मिला होकितना भी, अधिक क्यों न !नही होता आत्म संतोषकभी भी हमकोचाहते ही हैं -और अधिक, और अधिक ।ये कैसी चाहत है, सोचा है कभी !मिलता है जितना ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
मेरी धरोहर
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प्रेम संगिनी..तीन क्षणिकाएँ...डॉ. शालिनी यादव

नमक की डलीजैसी होती है प्रेम-संगिनीप्रेम करने वाली पल में गुस्सा होबन जाती है कठोरफिर पिघल भी जाती है दूसरे ही पलजीवन के हर साग में डलकर पिघलती-घुलती रहती हैबेस्वाद जीवन को स्वादिष्ट बन...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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