मंथन की पोस्ट्स

"कुछ नये के फेर में"

कुछ नये के फेर में ,अपना पुराना भूल गए ।देख मन की खाली स्लेट ,कुछ सोचते से रह गए ।।ढलती सांझ का दर्शन ,शिकवे-गिलों में डूब गया ।दिन-रात की दहलीज पर मन ,सोचों में उलझा रह गया ।।दो और दो  के जोड़ में ,...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
मंथन
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"स्वन्तत्रता दिवस"

आओ सब मिल कर आज ,स्वन्तत्रता दिवस मनायें ।शहीदों को याद करें ,मान से शीश झुकायें ।।फहरायें तिरंगा शान से ,गर्व से जन गण मन गायें ।।आओ सब मिल कर आज ,स्वन्तत्रता दिवस मनायें ।सीखें समानता बन्धुता ...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
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"सावन” ( दोहे )

(1)      उमड़घुमड़ कर छा गए, बादल ये घनघोर ।इन्द्र देव की है कृपा , नाचें मन का मोर ।।(2) सावन आया हे सखी , तीजों का त्यौहार ।पहन लहरिया आ गई , नखरीली घर नार ।।(3) गूंजे मीठी  बोलियां , गीतों क...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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"कभी तो मिलने आया करो"

कभी तो मिलने आया करो ।अपने हो याद दिलाया करो ।।महंगा हो गया वक्त आजकल ।मिले तो साथ निभाया करो ।।उलझनों को बांध गठरी में ।किसी कोने में छोड़ आया करोफबती है मुस्कान तुम पर ।इसे लबों पर सजाया करो ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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"लिखना"

ख़त में बातें सुहानी लिखना ।अपनी कोई निशानी लिखना ।।मिलेंगे हम मुद्दतों के बाद ।नेह से नाम दीवानी  लिखना ।।जिन्दगी की रवानी लिखना ।मन की बात पुरानी लिखना ।।पुल बने हैं एक अर्से के बाद ।भूली...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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"शिव स्तुति"

श्रावण मास…., भगवान शिव की आराधना का पावन महिना । शिव भक्त पूरे माह श्रद्धा से  बोले भण्डारी का पूजन-अर्चन करते हैं , पवित्र नदियों से कांवड़ लाकर जलाभिषेक करते हैं । कांवड़ियों  के “बम बम लह...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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"मनाही"

हम मिलें यह इजाजत नही है आप से तो शिकायत नहीं हैनक्श दिल से मिटाये हमारे ।फिर हमें भी लगावट नहीं है ।।इश्क  करना बुराई  कहां है ।हम करें यह इनायत नही है।।क्यों रखे  यूं अजनबी निगाहें ।आप से...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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"सेदोका”

        (1)अंजुरी भररंग छिड़क दियेकोरे कैनवास पेउभरा अक्सओस कणों से भीगाजाना पहचाना सा (2)धीर गंभीरझील की सतह सासहेजे विकलतामन आंगनकितना  उद्वेलितसागर लहरों सा  (3)तुम्हारा मौनआवरण ...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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"फौजी"

सरहद के रक्षक वीर ,चैन से कब सोते हैं ।हम जीयें अमन के साथ ,ये सीमाओं पर होते हैं ।।घनघोर अंधेरों में भी ,ये दुर्गम पथ पर होते हैं ।रखते निज देश का मान ,चैन दुश्मन का खोते हैं ।।बोले जय हिन्द की बोल...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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"नाराजगी"

समझे न जो कोई बात उसे समझायेंगे कैसे ।दिल में दबी बात को लबों तक लायेंगे कैसे ।।सच और झूठ का फर्क है बहुत आसान ।जो सुने न मन की बात उसे सुनायेंगे कैसे ।।नाराज़गी तो ठीक , अजनबियत की क्या वजह ।ना...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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"उम्मीद"

काली घटा घिरी अम्बर पे ।पछुआ पवनें चली झूम के ।।हर्षित किसान चला खेत पे ।करता  चिन्तन अपने मन में ।।नाचे मोर कुहके कोयलिया । बैलों के गले रुनझुन घंटियां ।।घर भर में हैं छाई खुशियां ।अब के सीज...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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"परामर्श"

इतने गर्वीले कैसे हो चन्द्र देव ?कितना इतराते हो पूर्णिमा के दिन ।क्या उस वक्त याद नहीं रहते बाकी के पल छिन ?पूरे पखवाड़े कलाओं के घटने बढ़ने के दिन ।सुख-दुःख , हानि-लाभ तो सबके साथ चलते हैं ।तुम्ह...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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"मुक्तक"

आप अपने मन की सुना कीजिए ।और सच के मोती चुना कीजिए ।।क्यों उलझते हैं दुनियादारी में ।नील निर्झर की तरह से बहा कीजिएहम.मिलते तो कभी कभी हैं ।मगर लगता दिल से यही है ।।साथ है हमारा कई जन्मों से ।सच...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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"हम भी काम कर लेते हैं'

चलिये आज हम भी कुछ काम कर लेते हैं ।खाली  वक्त भरने.का इन्तजाम कर लेते हैं ।।बन जाइए आप भी रौनक- ए- महफिल ।हुजूर में आपके सलाम कर लेते हैं ।।चैन-ओ-सुकूं से  यहाँ कोई जीये कैसे ।नजरों से भी लोग ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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एक दिन” (हाइकु)

खिल जाते हैंकमलिनी के फूलभोर के साथअपने आपसिमटी पंखुडियांसांझ के साथरंग बिरंगीमीन क्रीड़ा करतींलगती भलीताल किनारेगुजरे कुछ पलसांझ सकारेविश्रांति पलकुदरत के संगदेते उमंगXXXXXXX...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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"मुक्तक"

                       (1) कुछ तुम कहो कुछ मैं कहूँ , बाकी सब बातें जाओ भूल ।बेकार की है दुनियादारी , नही होते इस से कुछ दुख दूर ।।औरों की बात करो मत तुम , सब अपनी अ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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"सांझा - चूल्हा"

सब को लेकर साथ चलना सब के मन की बात पढ़ना आसान नहीं कठिन सा है ।बेसब्री और केवल मेरी 'मैं’औरों के सिर पर पांव रख करकेवल अपना भला सोचती है ।कभी - कभी सोचती हूंजगह -जगह सांझा - चूल्हारेस्टोरेंट्स तो...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
मंथन
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"मुलाकात"

हम तो मिलने के बहाने आ गए ।दोस्ती को आजमाने आ गए ।।मिलने का वादा था चांद रात का ।वो वादा  तुम से निभाने आ  गए ।।चांद के दीदार का बहाना बना।दोस्ती का कर्ज चुकाने आ गए ।।सीढ़ियों पर भाग कर आते क...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
मंथन
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"मुक्तक"

                 (1)कड़वा सुनो फिर भी मुस्कुराओ तो जाने ।रंजिशो के बाद भी साथ निभाओ तो जाने ।।औरों को उपदेश देना होता है बहुत आसान ।कभी खुद पे भी आजमाओ तो जाने ।।                  (2)&nb...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
मंथन
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"एक दिन पहाड़ों वाला"

पहाड़ों के ठाट भी बड़े निराले हैंमरकत और सब्ज रंगों से सजेअपनी ही धुन में मगन ।कुदरत ने भी दोनों हाथों सेेनेह की गागर इन परबड़े मन से छलकी है ।सांझ होते ही बादलों की टोलियां इनकी ऊंची चोटियों ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
मंथन
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“कशमकश”

फुर्सत के लम्हे रोज़ रोज़ मिला नहीं करते ।सूखे फूल गुलाब के फिर खिला नहीं करते ।।छूटा जो  हाथ एक बार दुनिया की भीड़ में ।ग़लती हो अपने आप से तो गिला नहीं करते ।।आंधियों का दौर है , है गर्द ओढ़े ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
मंथन
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"मुक्तक"

( 1 )सहमति  हो किसी बात के लिए भी ।संभव नहीं ये किसी के लिए भी ।।कई बार मौन भी ओढ़ना पड़ता है ।सब के अमन-चैन के लिए भी ।।                                  ( 2 )निहारना चांद को भला स...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
मंथन
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"गुफ्तगू" (ताँका)

    ( 1 )समय चक्रकुछ पल ठहरेतो मैं चुन लूंस्मृतियों के  वो अंशछूटे है यहीं कहीं       ( 2 )वक्त के साथनिश दिन चलतेथका है मनप्रतिस्पर्धी होड़ से रूक कर सुस्ता लूं     ( 3 )मेरे अपनेतेरा हाथ ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
मंथन
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"एक चिट्ठी"

गर्मी की छुट्टियों की दोपहरऔर मेरे गुड्डे-गुड़ियों के ब्याह में ।मुझे तुम्हारी टोका-टाकीअच्छी नही लगती थी ।।मगर तुम भी यह अच्छे से जानती थी कि मैं ।तुम्हारे प्यार के बिना इस दुनिया‎ मेंनिता...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
मंथन
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"घर"

बहुत बरस बीतेबचपन वाला घर देखे ।अक्सर वह सपने में  मुझ सेमिलने बतियाने आ ही जाता है ।।पिछली बार मिला था तोबड़ा  वीरान और खामोश था ।उम्र तो पहले भी अधिक ही थीअब तो और भी बूढ़ा हो गया है ।।वक्त ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
मंथन
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"क्षणिकाएँ"

          ( 1 )अच्छी लगीतुम्हारी आवाज मेंलरजती मुस्कुराहट ।बहुत दिन बीते यहदुनियादारी की भीड़ मेंखो सी गयी थी ।।    ( 2 )जागती आँखों से देखेख़्वाब पूरा करने की जिद्दअक्सर दिख...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
मंथन
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"प्रकृति" (हाइकु)

ढलती सांझघिर आए बादलभीगी सी रातें ।            भोर के साथकरते कलरवपेड़ों पे पंछी ।ओस की बूदेंमकड़ी के जालों मेंमोती सी गुंथी ।छाया उल्लासपुलकित वसुधाअम्बर हँसा ।ये सारे दृश्...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
मंथन
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"प्रश्न"

कुछ दिन से मन उदासऔर अभिव्यक्ति‎ खामोश हैसमाज में असुरक्षा की सुनामी नेसोचों का दायरा संकुचित औरजीवन पद्धति का प्रतिबिम्बधुंधला कर दिया हैकोमलकान्त पदावली के साथप्रकृति और जीवन दर्शनमें ...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
मंथन
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“उपालम्भ"

अवसर मिला “तिब्बतियन मॉनेस्ट्री” जाने का । तिब्बतियन शैली में बने भित्तिचित्रों में भगवान बुद्ध‎ के जीवन-चरित और उनकी भव्य प्रतिमा को देख मन अभिभूत हो उठा । स्कूल लाइब्रेरी में स्व.श्री मैथ...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
मंथन
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"आँख-मिचौली”

नहाया धोया …, गीला सा चाँद उतर आया है , क्षितिज छोर पर थोड़ी देर में खेलेगा हरसिंगार की शाख पर आँख-मिचौलीझूलती डाल और फूल-पत्तियों सेआधी सी रात में…………,जब आ जायेंगे, नील गगन मेंअनगिनत तारे, तो मन...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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