मंथन की पोस्ट्स

"त्रिवेणी"

( 1 ) गीली रेत पर कभी उकेरी थी एक तस्वीर ।समेट ले गई सब कुछ वक्त की लहर ।बस कुछ शंख सीपियों के निशान बाकी हैं ।।( 2 ) कभी कभी बेबाक हंसी ।बेलगाम झरने सरीखी होती है ।गतिरोध आसानी से हट जाया करते हैं ...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
मंथन
0

"माहिया" ( स्वीकारोक्ति )

(1) बचपन कब बीत गयाइस के जाने सेमन मेरा रीत गया(2) मैं तो बस ये जानूंतुम को  ही अपनासच्चा साथी मानूं (3) लम्बी बातें कितनीनापूं तो निकलेगहरी सागर जितनी (4) मैं याद करूं क्या क्याबीच हमारे थींस...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
मंथन
0

“सीख” (रोला छंद)

विषम चरण  - ११ मात्राएंसम चरण  - १३ मात्राएं( १ )   मन ने ठानी आज , सृजन हो नया पुराना ।        मिली-जुली हो बात , लगे संगम की धारा ।।( २ )   हो सब का सम्मान , कर्म कुछ ऐसे कीजै ।   &nb...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
मंथन
0

"जीवन रंग"

भोर का तारा जा सिमटानींद के आगोश में ।अरूणाभ ऊषा नेछिड़क दिया सिंदूरी रंगकुदरत के कैनवास पर ।पूरी कायनात सज गईअरूणिम मरकती रंगों से ।भोर की भंगिमा निखर गईप्रकृति के विविध अंगों से ।सात रंगो...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
मंथन
0

"वक्त"

वक्त मिला है आज , कुछ अपना ढूंढते हैं ।करें खुद से खुद ही बात , अपना हाल पूछते  हैं ।।कतरा कतरा वक्त , लम्हों  सा बिखर गया ।फुर्सत में खाली हाथ , उसे पाने को जूझते हैं ।।दौड़ती सी जिंदगी , यकबयक थ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
मंथन
0

“तृष्णा”

अभिव्यक्ति शून्य , भावों से रिक्त ।तृष्णा से पंकिल , ढूंढता असीमित ।।असीम गहराइयों में , डूबता-तिरता ।निजत्व की खोज में ,रहता सदा विचलित ।।दुनियावी गोरखधंधों से , होता बहुत व्यथित ।सूझे नही रा...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
मंथन
0

"लघु कविताएं"

( 1 )तुम्हारे और मेरे बीच एक थमी हुई झील हैजिसकी हलचल जम सी गई है ।जमे भी क्यों नहीं…..,मौसम की मार सेधूप की गर्माहटहमारे नेह की आंच की मानिंदबुझ सी गई है । ( 2 )सांस लेने दो इस कोशब्दों पर बंधन क...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
मंथन
0

"कब तक”

नैन हमारे तकते राहें ,जाने तुम आओगे कब तक ।जाओ तुम से बात करें क्यों , साथ हमारा दोगे कब तक ।।ना फरमानी फितरत पर हम , बोलो क्योंकर गौर करेंगे ।तुम ही कह दो जो कहना है , हम से और लड़ोगे कब तक ।।बेमतलब ...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
मंथन
0

"हिन्दी दिवस"

चलिए हम सब आज ,हिन्दी में बात करते हैं१४ सितम्बर का नाम ,हिन्दी दिवस रखते हैंकरें कुछ सभाएं , दिखाएं कुछ ठसक अपनीआती तो नहीं फिर भी, बस थोड़ी सी समझते हैंसमझते क्यों नहीं है आप …,बूढ़ी हो गई है हिन...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
मंथन
0

"जल”

हरहराता ठाठें मारताप्रकृति का वरदान है जल ।जीवन देता प्यास बुझातानद-निर्झर में बहता है जल ।।जो ये बरसे मेघ बन करखिले धरा दुल्हन बन कर ।उस अम्बर का इस धरती पर   छलके ये अनुराग बन कर ।।सीप म़े...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
मंथन
0

"मैं कौन हूँ’

मन में अभी एक ख्याल आया ।कौन हूँ , क्या हूँ , ये सवाल आया ।।खोजा तो पाया स्वयं को बड़ा विशाल ।नारी रूप में मेरा अस्तित्व बेमिसाल।।बाबुल के आंगन तितली सीमेघों की चपला बिजली सी ।साजन के घर लगती ऐस...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
मंथन
0

“भ्रमर गीत”

सभी साथियों को भगवान श्री कृष्ण जी के जन्म दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाइयाँ । कभी सूरदास जी के पद खुद पढ़ते तो कभी पढ़ाते जहाँ मन अधिक रमा वो थे भ्रमर गीत । इन पदों में कृष्ण का वियोग और ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
मंथन
0

"परामर्श" (सेदोका)

(1)            तुम ही कहोये भी कोई बात हैअपना ही अपनागौरवगानसमझदारी नहींदर्प का पर्याय है   (2)बुरी बात हैकिसी की ना सुननामनमानी करनाजिद्द होती हैयदि जाना है आगेसब के सा...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
मंथन
0

"आशाएँँ " (लघु कविताएँ)

  (1) बहते दरिया सा हो जीवन करें सुकर्म रखें पुनीत मन प्रगति पथ पर बढ़ते जाएँ राग-द्वेष का कलुष मिटाएँं निर्मल जल सा अपना हो मन ज्योतिर्मय हो सब का जीवन          ( 2 )डाल से विलग पत...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
मंथन
0

"सपना’

नील गगन आंगन में तारे  ।निशदिन हम को तकते सारे ।।सोचूं इक दिन इनको जानूं ।मन की सब बातें पहचानूं  ।।सोचा मैं अम्बर पर जाऊं  ।तारों की झोली भर लाऊं  ।।टकेंगे जब चूनर पर सारे  ।जुगनूु  छ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
मंथन
0

"कुछ नये के फेर में"

कुछ नये के फेर में ,अपना पुराना भूल गए ।देख मन की खाली स्लेट ,कुछ सोचते से रह गए ।।ढलती सांझ का दर्शन ,शिकवे-गिलों में डूब गया ।दिन-रात की दहलीज पर मन ,सोचों में उलझा रह गया ।।दो और दो  के जोड़ में ,...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
मंथन
0

"स्वन्तत्रता दिवस"

आओ सब मिल कर आज ,स्वन्तत्रता दिवस मनायें ।शहीदों को याद करें ,मान से शीश झुकायें ।।फहरायें तिरंगा शान से ,गर्व से जन गण मन गायें ।।आओ सब मिल कर आज ,स्वन्तत्रता दिवस मनायें ।सीखें समानता बन्धुता ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
मंथन
0

"सावन” ( दोहे )

(1)      उमड़घुमड़ कर छा गए, बादल ये घनघोर ।इन्द्र देव की है कृपा , नाचें मन का मोर ।।(2) सावन आया हे सखी , तीजों का त्यौहार ।पहन लहरिया आ गई , नखरीली घर नार ।।(3) गूंजे मीठी  बोलियां , गीतों क...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
मंथन
0

"कभी तो मिलने आया करो"

कभी तो मिलने आया करो ।अपने हो याद दिलाया करो ।।महंगा हो गया वक्त आजकल ।मिले तो साथ निभाया करो ।।उलझनों को बांध गठरी में ।किसी कोने में छोड़ आया करोफबती है मुस्कान तुम पर ।इसे लबों पर सजाया करो ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
मंथन
0

"लिखना"

ख़त में बातें सुहानी लिखना ।अपनी कोई निशानी लिखना ।।मिलेंगे हम मुद्दतों के बाद ।नेह से नाम दीवानी  लिखना ।।जिन्दगी की रवानी लिखना ।मन की बात पुरानी लिखना ।।पुल बने हैं एक अर्से के बाद ।भूली...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
मंथन
0

"शिव स्तुति"

श्रावण मास…., भगवान शिव की आराधना का पावन महिना । शिव भक्त पूरे माह श्रद्धा से  बोले भण्डारी का पूजन-अर्चन करते हैं , पवित्र नदियों से कांवड़ लाकर जलाभिषेक करते हैं । कांवड़ियों  के “बम बम लह...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
मंथन
0

"मनाही"

हम मिलें यह इजाजत नही है आप से तो शिकायत नहीं हैनक्श दिल से मिटाये हमारे ।फिर हमें भी लगावट नहीं है ।।इश्क  करना बुराई  कहां है ।हम करें यह इनायत नही है।।क्यों रखे  यूं अजनबी निगाहें ।आप से...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
मंथन
0

"सेदोका”

        (1)अंजुरी भररंग छिड़क दियेकोरे कैनवास पेउभरा अक्सओस कणों से भीगाजाना पहचाना सा (2)धीर गंभीरझील की सतह सासहेजे विकलतामन आंगनकितना  उद्वेलितसागर लहरों सा  (3)तुम्हारा मौनआवरण ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
मंथन
0

"फौजी"

सरहद के रक्षक वीर ,चैन से कब सोते हैं ।हम जीयें अमन के साथ ,ये सीमाओं पर होते हैं ।।घनघोर अंधेरों में भी ,ये दुर्गम पथ पर होते हैं ।रखते निज देश का मान ,चैन दुश्मन का खोते हैं ।।बोले जय हिन्द की बोल...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
मंथन
0

"नाराजगी"

समझे न जो कोई बात उसे समझायेंगे कैसे ।दिल में दबी बात को लबों तक लायेंगे कैसे ।।सच और झूठ का फर्क है बहुत आसान ।जो सुने न मन की बात उसे सुनायेंगे कैसे ।।नाराज़गी तो ठीक , अजनबियत की क्या वजह ।ना...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
मंथन
0

"उम्मीद"

काली घटा घिरी अम्बर पे ।पछुआ पवनें चली झूम के ।।हर्षित किसान चला खेत पे ।करता  चिन्तन अपने मन में ।।नाचे मोर कुहके कोयलिया । बैलों के गले रुनझुन घंटियां ।।घर भर में हैं छाई खुशियां ।अब के सीज...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
मंथन
0

"परामर्श"

इतने गर्वीले कैसे हो चन्द्र देव ?कितना इतराते हो पूर्णिमा के दिन ।क्या उस वक्त याद नहीं रहते बाकी के पल छिन ?पूरे पखवाड़े कलाओं के घटने बढ़ने के दिन ।सुख-दुःख , हानि-लाभ तो सबके साथ चलते हैं ।तुम्ह...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
मंथन
0

"मुक्तक"

आप अपने मन की सुना कीजिए ।और सच के मोती चुना कीजिए ।।क्यों उलझते हैं दुनियादारी में ।नील निर्झर की तरह से बहा कीजिएहम.मिलते तो कभी कभी हैं ।मगर लगता दिल से यही है ।।साथ है हमारा कई जन्मों से ।सच...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
मंथन
0

"हम भी काम कर लेते हैं'

चलिये आज हम भी कुछ काम कर लेते हैं ।खाली  वक्त भरने.का इन्तजाम कर लेते हैं ।।बन जाइए आप भी रौनक- ए- महफिल ।हुजूर में आपके सलाम कर लेते हैं ।।चैन-ओ-सुकूं से  यहाँ कोई जीये कैसे ।नजरों से भी लोग ...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
मंथन
0

एक दिन” (हाइकु)

खिल जाते हैंकमलिनी के फूलभोर के साथअपने आपसिमटी पंखुडियांसांझ के साथरंग बिरंगीमीन क्रीड़ा करतींलगती भलीताल किनारेगुजरे कुछ पलसांझ सकारेविश्रांति पलकुदरत के संगदेते उमंगXXXXXXX...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
मंथन
0
Postcard
फेसबुक द्वारा लॉगिन  
हो सकता है इनको आप जानते हो!  
RussellFub
RussellFub
Stirling,Northern Mariana Islands
Lakshman Kumar
Lakshman Kumar
Darbhanga,India
sunil kumar
sunil kumar
delhi,India
Rohit Mewada
Rohit Mewada
Bhopal,India
SATYADEV TIWARI
SATYADEV TIWARI
pune,India
Aghori Baba Ji
Aghori Baba Ji
Mumbai,India