bhonpooo.blogspot.com की पोस्ट्स

जुनून - खजाना यादों का 7

आग में गर्मी ना हो, बर्फ में ठंढक ना हो, कलाकार में जुनून ना हो तो फिर ये भला किस काम के । यह कलाकार का जुनून ही है जो उसे जनसाधारण से अलग करता है। वह जो ठान लेता है उसे कर के ही मानता है। भले ही उसका ...  और पढ़ें
23 घंटे पूर्व
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चिॆटू की जब आंख खुली - बाल कहानी

चिंटू खरगोश को कहानियां सुनने का बड़ा शौक था। अपने काका से कहानी सुने बिना वह सोता न था। काका ने बताया कि आज वह छिपते- छिपाते पार्क जा पहुंचे वहां देखा एक बेंच पर बैठे बुजुर्ग से बच्चे कुछ कह रह...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
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पग वंदन करता मां तेरी - वंदना

पग वंदन करता मां तेरीदूर करो भव बाधा मेरीतम हरलो मन का मां मेरेजाऊं कहां तज चरण मैं तेरेअवलंबन तेरा ही है मांकरो न मां पल भर की देरीक्या ध्याऊं क्या तुम्हें चढ़ाऊंजप तप ब्रत कुछ साध न पाऊंषट व...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
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गुरू - खजाना यादों का 6

वह किसी स्कूल के अध्यापक नहीं थे। खुद कभी स्कूल गए थे या नहीं इस बारे में मैं पक्का कुछ भी नहीं कह सकता। वह कोई धार्मिक अनुष्ठान भी नहीं करवाते थे। अलबत्ता पूरा मंझनपुर कस्बा उन्हें गुरू के ना...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
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क्यों - बालगीत 96

मम्मी क्यों आंधी  है आतीजोर जोर से पेड़ हिलातीबादल इतनी जोर गरजतेआपस में क्यों रहें झगड़तेबिजली चमक चमक छिप जाएलपक लपक क्यों हमें डराएकहां से बादल पानी लातेक्या फव्वारों से बरसातेसूरज दा...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
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मम्मी पास न आते तारे - बालगीत 78

मम्मी पास न आते तारेक्यों इतने डरपोक हैं सारेमैं जब लगूं बुलाने तब कुछभाग छिपें जा  डर के मारेमन करता उनके घर जाऊंउन संग उछलूं कूदूं गाऊंफिर समझाकर बड़े प्यार सेउनको धरती पर ले आऊंजगमग जगमग...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
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वंशवाद का बजे नगाड़ा - व्यंग रचना

बाप की गद्दी पर बेटे हैंवंशवाद का बजे नगाड़ागई राजशाही पर बाकीहै सामंती सोच अभी भीबेटे पा जाते चुनाव मेंबाप की छवि से वोट अभी भीछाती ठोंक के बेशरमी सेवंशवाद का पढ़ें पहाडा़गहरी जड़ें हैं वंश...  और पढ़ें
7 दिन पूर्व
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अक्कड़ बक्कड़ ... ( बालगीत 75 )

अक्कड़ बक्कड़ बम्बे बोलखोल जमूरा सबकी पोलइज्जतदार बने फिरते हैंलेकिन काम गलते करते हैंहैं डाक्टर साहब सरकारीघर में करते प्रैक्टिस भारीमास्टर जी स्कूल न आतेघर पर ट्यूशन खूब पढ़ातेये देखो ...  और पढ़ें
7 दिन पूर्व
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#MassCommunicationNetPrepration- bhavna ki media class

अगर आप competitive exams की preparation कर रहे हैं तो यह महसूस किया होगा कि दिन ब दिन competition बढ़ता ही जा रहा है, competitive exams tough होते जा रहे हैं और cut off high. higher education में academics में आने के लिए ugc ने कुछ मानदंड तय किये हैं और वो हैं arts background वा...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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#BulletTrain - व्यंग रचना

बुलेट ट्रेन आ रही प्रभू जीदेश के कैसे भाग खुलेभूख गरीबी बेरोजगारीछिपेगी सब रफ्तार तलेदौड़ेगी जब ट्रेन बुलेट सी दिखेगी ना तब ऐब कहींलकदक स्टेशन होंगे जबउतरेगा तब स्वर्ग यहींभुल्लन बैजू ब...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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सांच कहे तो मारन धावे - प्रसंगवश

     इसे कहते हैं बिल्ली के भाग से छींका टूटना। मुख्यधारा के मीडिया के लिए बाबा राम रहीम की स्टोरी कुछ इसी तरह रही। तब से अभी तक लगभग सारे खबरिया चैनल रोज बिना नागा चटखारे ले लेकर वही कहानी अ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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हिंदी ने मुझे खूब दिया - भावना पाठक

हिंदी दिवस की अनेकों स्मृतियाँ मेरे मन-मस्तिष्क में आज भी रची  बसी हैं तब भला १४ सितम्बर कैसे भूलता। हिंदी दिवस पर स्कूल और कॉलेज में वाद-विवाद प्रतियोगिता, आशु भाषण,कविता प्रतियोगिता सब मे...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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मम्मी अपनी बोली बोलो - बालगीत 92

मम्मी अपनी बोली बोलोअंग्रेजी कुछ बुरी नहीं हैपर इसमें वो बात नहीं हैबोलो  जहां जरूरी बेशकघर पर नानी जैसी बोलोमम्मी अपनी बोली बोलोअपनी बोली सबको भाए बोलो जो सब समझ में आएहिंदी फैल रही तेज...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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साल के बारह महीने - बालगीत 74

बारह माह साल के होतेयाद न हों रिकू जी रोतेजनवरी फरवरी मार्च के नामरखे याद जो दे एग्जामअप्रिल मई जून जब आतेगर्मी के संग लू भी लातेमाह जुलाई अगस्त सितम्बरबरखा आती झूम झूमकरअक्टूबर और माह नवंबर...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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जागते रहो ... भावना की मीडिया क्लास 32

आप ऑफिस से थके-मांदे आएं या किसी वजह से कितने ही परेशान क्यूँ न हों, बच्चों का खिलखिलाता चेहरा, भोली सूरत और उनकी मनमोहक बातें सुनकर सारी थकान दूर हो जाती है और कुछ देर के लिए ही सही सारी टेंशन ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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विनती - बालगीत 73

विनती सुन लो हे भगवानहम बच्चों पर भी दो ध्यानअब बच्चा ना हमें बनानाइस संकट से प्रभू बचानाबच्चों पर बंधन कितना हैघुट घुट डर डर कर जीना हैपल पल रोक टोक है होतीसब की धौंस हमी पर चलतीयहां न आओ वहां ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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बेखौफ बोली - कविता

बहुत आसान हैकिसी को भी चुप करा देनागोली मार करबजाय तर्कों सेबापू के हत्यारे ने भीयही तो किया थाउनसे बहस ना करकेआगे भी उठाते रहेंगे हथियारये डरपोकबेखौफ बोली से डरकरमनाएंगे बिलों में जश्नअपन...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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मास्साब - लघुकथा

बेटा, जरा सुनना तो।पिता जी ने बाहर से आवाज लगाई तब मैं रेडियो पर क्रिकेट की कमेंट्री सुन रहा था। क्रिकेट की कमेंट्री रेडियो पर सुनना मुझे मैदान में जाकर क्रिकेट मैच देखने से कहीं ज्यादा अच्छा ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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भारतीय रेल - अवधी व्यंग रचना

गौरी गनेस सब पूज लिहेवतब पाछे रेल म गोड़ धरेवसोचेव ना सुखद यात्रा की य सब है इनकी लफ्फाजीघर पहुंचेव सही सलामत जबबटवाय दिहेव तब परसादीभगवान भरोसे रेल चलैइनसे न कभो उम्मीद किहेवना खाना ठीक क...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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बुलेटप्रूफ बोलीं - भावना पाठक

पत्रकारिता कहां रही मिशन अब लगा रही गोतेकमीशन सुविधाओं की बहती गंगा मेंफिर क्यों कोई करे निर्भीक पत्रकारितातब भी कुछ करते  हैं जिन्हें या तो चुप करा दिया जाता हैया विपक्ष का दलाल ठहरा दि...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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अकेलापन - कविता

कौैन  हो तुम मौन हो क्योंइस कदर बेचैन हो क्योंवेदना अपनी छिपाए भटकते फिर रहे हो क्योंलोग बच बच कर क्यों चलतेपास आने से भी डरतेदंश क्यों तीखे तुम्हारेइस कदर सब आह भरतेकौन कब तक साथ देतानाव ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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दो रंगा शिक्षक दिवस - प्रसंगवश

आज शिक्षक दिवस  के दो रंग देखने को मिले। एक था परम्परागत रूप जो मैं  अपने छात्र जीवन से देखता आया हूं। इसमें आज भी एक दिन के लिए ही सही गुरुजनों का सम्मान किया जाता है। उनके सम्मान में गरिमाम...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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इस देश का यारो क्या कहना - हास्यव्यंग

साधो, हम तो यही गीत सुन सुन कर बड़े हुए हैं कि यह देश है वीर जवानों का। उस समय क्या मालूम था कि आगे चल कर यही वीर जवानों का देश घोटालों का देश बन जाएगा और इस क्षेत्र में इतना तरक्की कर जाएगा कि हजार...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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कुछ ज़ख्मों के निशां नहीं होते - कविता

कुछ ज़ख्मों के निशाँ नहीं होतेवो दिखते नहीं पर दुखते रहते हैंसालते रहते हैं भीतर ही भीतरवो ज़ख्म हरे हो जाते हैं तबजब कोख में ही मार दी जाती हैं बेटियांज़िंदा बच भी जाएँ तोभूखे भेड़िये और गिद्द बै...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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खेल मौत का है ब्लूव्हेल - बालगीत

खेल मौत का है ब्लूव्हेलकभी न खेलो ऐसे खेलजान गंवाने को उकसातातरह तरह से है धमकाताफंसे चाल में जो जो इसकीजान ले चुका मासूमों कीनजर सदा बच्चों पर रखियेउन्हें दूर इन सब से करियेबच्चों के संग सम...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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मीडिया लिटरेसी के लिए एरिन मक्नेल की कानूनी जंग - भावना की मीडिया क्लास

मीडिया पर लेखन और चर्चा परिचर्चा के दौरान ही मुझे मीडिया लिटरेसी के बारे में पता चला। मीडिया में काम करने और मास मीडिया के अध्यापन से जुड़े होने के नाते मीडिया लिटरेसी के बारे में ज़्यादा से...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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कान्हा डगर चलत मत छेड़ो - लोकगीत

   ब्रज लोकगीतों का माधुर्य शब्दों में वर्णन करना कठिन है। इसे तो सुन कर ही समझा जा सकता है। दिल से निकले शब्द सीधे दिल तक पहुंचते हैं। धुनें इतनी सरल, लुभावनी कि मन करता है बस सुनते ही रहो। त...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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लिख न पाऊं ... ( गीत )

लिख न पाऊं तुम्हें पाती नेह कीयादें बरसीं आज फिर फिर मेह सीकह न पाता था कभी तुमसे मैं जोचाहता लिखना मैं सब कुछ आज वोशब्द साधे मौन मुझको देखतेसुधि नहीं मुझको रही जब देह कीलिख न पाऊं तुम्हें पात...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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अलबेली शादी - बालगीत 66

बना है बैगन दूल्हाराजासिर पर मौर हरा है साजा कद्दू कटहल आलू टमाटरआए सूट बूट सब डटतर गोभी मूली गाजर प्याजदमक रहीं हैं सारी आजककड़ी खीरा मिर्च तरोईभिंडी लौकी कुंदरू मकोईगिलकी परवल टिंडा श...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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बाबा तेरे चेले बड़े दुखदाई - प्रसंगवश

साधो,  61 वर्ष की अपनी इस उम्र में अब तक मैने ऐसा एक भी संत महात्मा बाबा नहीं देखा जिसने हिंसा आगजनी तोड़फोड़ आदि की शिक्षा दी हो। बल्कि इसके उलट सभी सत्य अहिंसा संयम का ही उपदेश देते आए। सुंदर भ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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