फिर कबीर की पोस्ट्स

आपका ताज कौनसा है ?

गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने ताजमहल को"समय के गाल पर आंसू की बूंद"कहा है। ताज की प्रशंसा मे शकील बदायूनी ने एक नज्म लिखी थी ,  जिसमे ताज को एक शहंशाह की बनाइ प्यार की निशानी कहा है।  इसके जवाब...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
फिर कबीर
47

कुछ इश्क किया कुछ काम किया पीयूष मिश्रा

  काम और इश्क परपढिए पीयूष मिश्रा की कवितावो काम भला क्या काम हुआजिस काम का बोझा सर पे होवो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआजिस इश्क़ का चर्चा घर पे हो…वो काम भला क्या काम हुआजो मटर सरीखा हल्का होवो...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
फिर कबीर
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मेरा राम तो मेरा हिंदुस्तान है

सभी पाठको को रामनवमी की हार्दिक बधाई.पढिए हरिओम पवार की कविता :-मेरा राम तो मेरा हिंदुस्तान हैमेरा राम तो मेरा हिंदुस्तान हैचर्चा है अख़बारों मेंटी. वी. में बाजारों मेंडोली, दुल्हन, कहारों म...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
फिर कबीर
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मां पर मुनव्वर राना के 30 शेर

      मुनव्वर राना वो पहले शायर है जिन्होने ग़ज़ल और शायरी को माँ से सम्बोधित किया, न केवल माँ से बल्कि औरत के अन्य रुप बहन और बेटी से भी सम्बोधित किया। वरना पहले ग़ज़ल का मतलब केवल औरत या य...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
फिर कबीर
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हरिवंश राय बच्चन की पांच प्रेरणात्मक कविताऐ

HARIVANSH RAI BACHHAN KI 5 MOTIVATIONAL POEMS(1)  अग्निपथवृक्ष हों भले खड़े,हों घने हों बड़े,एक पत्र छाँह भी,माँग मत, माँग मत, माँग मत,अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।तू न थकेगा कभी,तू न रुकेगा कभी,तू न मुड़ेगा कभी,कर शपथ, कर शपथ, कर...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
फिर कबीर
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Gopaldas Niraj ke dohe

NIRAJ KE DOHE(1)मौसम कैसा भी रहे कैसी चले बयारबड़ा कठिन है भूलना पहला-पहला प्यार(2)भारत माँ के नयन दो हिन्दू-मुस्लिम जाननहीं एक के बिना हो दूजे की पहचान(3)बिना दबाये रस न दें ज्यों नींबू और आमदबे बिना पूरे ...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
फिर कबीर
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NIDA FAZLI KE DOHE

NIDA FAZLI KE DOHE युग युग से हर बाग का, ये ही एक उसूलजिसको हँसना आ गया, वो ही मट्टी फूल।पंछी, मानव, फूल, जल, अलग–अलग आकारमाटी का घर एक ही, सारे रिश्तेदार।बच्चा बोला देख कर, मस्जिद आलीशानअल्ला तेरे एक को, इत...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
फिर कबीर
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GULZAR KI TRIVENIYA

GULZAR KI TRIVENIYAजुल्फ में यूँ चमक रही है बूँदजैसे बेरी में तनहा इक जुगनूक्या बुरा है जो छत टपकती है*******************************************इतने लोगों में, कह दो अपनी आंखों सेइतना ऊँचा न ऐसे बोला करेंलोग मेरा नाम जान जाते है...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
फिर कबीर
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Pankaj
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Udayvir Singh
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