शोएबवाणी की पोस्ट्स

अतीत की और

वह एक बार फिर इतिहास के उस गलियारे की तरफ पलट कर देख रहाथा, जिसे कि वह पीछे छो़ड आया था।वह सोच रहा था कि क्या   यह वही रास्ता नही है जिसे वह पीछे छोड़ कर आया था! बेशक  यह  वही रास्ता है  जिसे हम...  और पढ़ें
13 घंटे पूर्व
शोएबवाणी
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यकजहती: देश भक्ति के प्रमाण पत्र मांगने वालो के लिए पैग़ाम

यकजहती: देश भक्ति के प्रमाण पत्र मांगने वालो के लिए पैग़ाम...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
शोएबवाणी
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कैदी परिन्दा

बंद एक पिंजरे मे परिंदायाद करता अपनी आज़ादियाँकल तक जीवन ख़ुशनुमा थाआज हैं बरबादियाँकल तक आसमां में दूर तक परवाज़ थीआज बंद हु कैद मे हाय: रे ये बेबसीमाना कि बाहर है दाना-पानी ढ़ुंढ़ने की दुश्...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
शोएबवाणी
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बोल के लब आज़ाद हैं

बोल के लब आज़ाद है तेरे ज़बा तेरी आज़ाद हैउठा कर हक का परचमबन गया तु हक की आवाज हैंअब चमन मे हर तरफ चल रही नफ़रतो की आंधियाँलुटने को अमन चमन का लगी डाकुऔ की टोलियाँकरने को  नाकाम उनके मन्सुबे त...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
शोएबवाणी
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स्वपन

स्वपन तो स्वपन हैसपनो की क्या?यह है महज़निन्द्रा और चेतना के बीच की रेखा।रेखा के इस और खड़ी हैस्पष्ट सी सच्चाई।ऱेखा के उस और बसे हैंकिस्से देवमालाई।...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
शोएबवाणी
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एक गधे की राजनीति

गधा अब जौजफ के लिए तस्करी करने वाला गधा बन कर रह गया था। उसने पढ़ने और समझने का काम बिल्कुल छोड़ दिया था अखबार तो ही बिल्कुल नही। न अदब से कोई सरोकार न सियासत से।देश में काफी कुछ बदला गधे ने कोई ध...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
शोएबवाणी
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आत्महत्या के विरोध

"आत्महत्या  के विरोध में "        मैं  बंद आँखों से,अखबार पढ़ते हुए सोचता हुँ इस नए समाज के बारे मेंजिसे हमने बनाया हैएक आधुनिक समाज।यह समाज जिसमेंनही समय एक दूसरे के लिएजहां एक पार...  और पढ़ें
12 माह पूर्व
शोएबवाणी
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आदर्शवाद

हम आदर्शवादी लोगढूंढ लेते हैं आदर्शहर एक जगहआदर्शवाद क्या है?मृगतृष्णा।हम हर बार दौड़ेपर कभी नही मिला आदर्श।मैं तीन कदम आगे चलता हुँ लिए ढूंढने  आदर्शवाद कोजिसने हमें,दो कदम आगे चलायाऔर त...  और पढ़ें
12 माह पूर्व
शोएबवाणी
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अपूर्ण निवेदन

 बहुत दिनों तकछिपाए  अपने  मन मेंप्रेम निमंत्रणएक दिन कर ही दियाउसने प्रेमिका से निवेदनकि मैं करता हूँतुमसे प्यार।प्रेमिका ने कहा,आशिक़ मेरेहै  यह सब बेकारमैं तो शादीशुदा हुँपाबंद ए ...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
शोएबवाणी
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मानवता है अभिशप्त !

मानवता है अभिशप्त !कवि तुम कहाँ हो?मानवता है अभिशप्त !कवि तुम कहाँ हो?इंसान इंसान से टकरा रहा है  चिराग ए मुहब्बत बुझा जा रहा है जो सच बोले वो सज़ा पा रहा है अब तेरा चुप रहना है पाप  कवि तुम ...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
शोएबवाणी
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हो सकता है इनको आप जानते हो!  
dr neelam mahendra
dr neelam mahendra
Gwalior,India
kaustubh upadhyay
kaustubh upadhyay
Delhi,India
RAVI.KUMAR
RAVI.KUMAR
Delhi,India
Rajpurohit Harsan Kumar Valera
Rajpurohit Harsan Kumar Valera
Walera sayala jalore,India
Roberta
Roberta
,Bahrain