नवोत्पल की ड्राफ्टबुक: नव-जन की पोस्ट्स

इकहत्तर साल का झोपड़ा / शैलेश सिंह

शैलेश सिंह क्या न कर गुजरता है इंसान अपनों के लिए , माथे का पसीना एड़ी तक पहुचते देर नहीं लगती। तपती धूप की अंगार हो या ठिठुरती ठण्ड की मार, या कानो से सन्न से गुजरती पानी की बौछार। हर दिन हर पल अ...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
नवोत्पल की ड्राफ्टबुक: नव-जन
13

इकहत्तर साल का झोपड़ा / शैलेश सिंह

शैलेश सिंह क्या न कर गुजरता है इंसान अपनों के लिए , माथे का पसीना एड़ी तक पहुचते देर नहीं लगती। तपती धूप की अंगार हो या ठिठुरती ठण्ड की मार, या कानो से सन्न से गुजरती पानी की बौछार। हर दिन हर पल अ...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
नवोत्पल की ड्राफ्टबुक: नव-जन
11

महागठबंधन/ डॉ. श्रीश

झूठ, बेईमानी, अनाचार आदि ने साक्षर युग की ज़रूरतों को समझते हुएकिया महागठबंधन. इन्होंने सारे सकारात्मक शब्दों की बुनावट को समझा और तैयार किया सबका खूबसूरत चोला। इन चोलों को पहन इन्होंने फिर ...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
नवोत्पल की ड्राफ्टबुक: नव-जन
13

"चाय की दुकान"और बेटी " / शैलेश सिंह

सोनू के होठ काँप रहे थे। दाँत किटकिटा रहे थे। ठण्ड का मौसम था ही ऐसा । रात के ग्यारह बज रहे होंगे जब वो अपनी बीबी और माँ को लेकर गांव के जीप से शहर के सरकारी अस्पताल में आया था।। बीबी की तबियत अच...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
नवोत्पल की ड्राफ्टबुक: नव-जन
12

"माँ " : शैलेश सिंह

जिम्मेदारियों के बोझ तले दब गयी।तेरी खुशियाँ हे माँ।सब रिश्तों की तुझको चिंतापर तेरे लिए क्या माँ।सुबह से शाम फिर रात फिर सुबहबदल जाती थी।..... माँ फिर भी नहीं घबराती थी।हम थोड़े काम कर लिए तो ।म...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
नवोत्पल की ड्राफ्टबुक: नव-जन
13
नवोत्पल की ड्राफ्टबुक: नव-जन
14
 
Postcard
फेसबुक द्वारा लॉगिन  
हो सकता है इनको आप जानते हो!  
shahnawaz
shahnawaz
patna,India
Steven
Steven
New York,Namibia
prafull kumar Bhati
prafull kumar Bhati
Neemuch ,India
kumar mukul
kumar mukul
new delhi,India