रवीन्द्र पाण्डेय
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi... की पोस्ट्स

उम्मीद हैं सांसे, ख़्वाब है ज़िन्दगी....

सुनो, आओ ना, आ भी जाओ,यूँ दूर रहकर, अब ना तड़पाओ...एक तुम्हारा ही इंतज़ार,बस एक तुमसे ही प्यार,यही मेरी जिन्दगी,ये सांसो का कारोबार,दूर-दूर रहकर, अब ना सताओ...सुनो, आओ ना, आ भी जाओ...महक है जेहन में,पहली मु...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
1

समुंदर खारा हो गया...

समुंदर खारा हो गया...-------------****--------=-----बैठ गया कुछ पल के लिए, मैं समुंदर के तीर...बाँट लूँ ये सोच कर,कुछ मन के अपने पीर...आने लगी क्षितिज से,जैसेप्रेम की बयार...किनारे तक आई  जिसमें, हो कर लहर सवार...छूने ल...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
0

मेंहदी का रंग गहरा है....

उसके हाथों की मेंहदी का रंग गहरा है,मिलूँ तो कैसे ज़माने का सख्त पहरा है..जरा लिहाज़ के रुख़सार सरक जाने दो,हम भी देखेंगे माहताब जो सुनहरा है..क्या कहें वस्ल की ये रात कितनी काली है,मेरी निगाह में तो...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
5

माँ.... सारा जहां है..

नीचे जमीं है फलक आसमां है,कितना ही सुंदर ये गुलिस्तां है..चमके गगन में चाँद और सितारे,तेरी मोहब्बत के बाकी निशां हैं..कानों में गूँजे है लोरी हरेक पल,आँखें जो खोलूँ सब कुछ धुआँ है..आँचल से तेरे लि...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
3

प्रेम गीत गाए हो तुम...

बरसों से प्यासी धरती पर, मेघा बन कर छाये हो तुम...---------------------------***-------------------------बरसों से प्यासी धरती पर, मेघा बन कर छाए हो तुम...आसां करने जीवन का सफर, साथी बनकर आए हो तुम...पहले भी चलती थी पुरवा, खिलती थी कलिया...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
2

एक रात है खमोश सी...

एक हरजाई के आये नहीं,एक तन्हाई के जाये नहीं...करवट बदलते रात में,ख़्वाब उनके क्यों आये नहीं..?एक उम्मीद है टूटे नहीं,एक आश जो छूटे नहीं...लहरें किनारे आ रही,फिर भँवर क्यों आये नहीं..?एक आईना ख़ामोश है,ए...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
5

आसमान सी आस...

बेतरतीब सी ख्वाहिशें, आसमान सी आस...-----------------------******----------------बेतरतीब सी ख्वाहिशें, आसमान सी आस...दूर क्षितिज सागर फैला, मिटती नहीं है प्यास...मुठ्ठी भर साँसे महज़, फिर मिट्टी बे मोल...परछाईं से सब रिश्ते, सत...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
3

सुबह सी मिली वो....

ढल ही गया दिन, शाम आते आते,-----------------***---------------ढल ही गया दिन, शाम आते आते,चलते नहीं तो, यूँ ही ठहर जाते...बहल तो गया दिल, कुछ पल को मौजूं,मिलते ना उनसे, तो दिल क्या लगाते...बारिश की बूंदें, लटों से हैं लिपटी,फ़न...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
6

टूटे हुए तारे से तुम, ना दिल लगा लेना...

दिखे ढलता हुआ सूरज, तो मायूस ना होना,सफ़र से लौट वो शायद, अपने घर को आया है...कभी टूटे हुए तारे से तुम, ना दिल लगा लेना,अमानत है वो धरती की, चाहत ने बुलाया है...किसी रोज ग़र तनहा, हो आसमां में चाँद,समझ लेन...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
5

क्यूँ शर्मिन्दा हुआ जाये..?

बड़ी सिहरन सी होती है,अगर इल्ज़ाम लग जाये...सफाई देर तक देकर,क्यूँ शर्मिन्दा हुआ जाये..?ये मेरी काबिलियत है,चुभे हर पल जो दुश्मन को...कटघरे में खड़ा होकर,क्यूँ मुज़रिम सा जिया जाये..?कोई तो होगा वो इंसा...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
8

उम्मीदों के सौ सपने...

मेरी खामोशियाँ ही अब, मेरी बातें सुनाती हैं,दीवाना बन के तन्हाई, वो देखो गीत गाती हैं...कभी गुजरा था राहों से, मंज़िल की चाहत में,वही राहें पकड़ बाहें, मुझे मंज़िल दिखाती हैं...वक़्त ने करवट, बदल क्या ल...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
3

चीख रहे बस्तर के साल...

रोया हूँ फिर आज सुबक के...------------------***----------------रोया हूँ फिर आज सुबक के, हरियर चुनरी हुई है लाल...मेरे खातिर कितनी माँ, खोएंगे अभी अपने लाल..?मेरे मन की पीड़ा को, अब तो कुछ आराम मिले..?झुलस रही कोशल की बगिया, अमन...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
5

क्या मन कहुँ, क्या तन कहुँ...

क्या मन कहुँ, क्या तन कहुँ...-------------***------------क्या मन कहूँ, क्या तन कहूँ,सर्वस्व तेरा, ऐ वतन कहुँ...मेरा रोम रोम, है तेरी धरा,एक फूल मैं, तुझे चमन कहुँ...क्या मन कहुँ......तेरे बाज़ुओं में, वो जान है,थामे तिरंगा, म...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
4

सबब हम ने जाना इस बात का...

सबब हम ने जाना इस बात का...---------------***--------------सबब हम ने जाना इस बात का,बे ताअल्लुक़ सी मुलाक़ात का...दबाया हथेली तो शरमा गये,हसीं वाकया ये जुमेरात का...गली का किनारा ना भूला गया,कभी था गवाही मेरी बात का...हिना ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
8

शबनमी सुरमई रात ढलने लगी...

शबनमी सुरमई रात ढलने लगी...---------------***---------------शबनमी सुरमई रात ढलने लगी,उम्मीदों का सूरज जवां हो गया...शिकारा सतह पे मचलने लगा,छूते ही लहर इक फ़ना हो गया...ज़ुल्फ़ है या घटाओं की जादूगरी,बिखरते ही दिलकश सम...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
4

वो हसीं वादियाँ.....

वो हसीं वादियाँ, हम मिले थे जहाँ...-----------------***------------------वो हसीं वादियाँ, हम मिले थे जहाँ,बात करने लगे, वो क़दमों के निशां...कभी गीत सुरमई, फिज़ाओं में थी,गुनगुनाता है आज, ये सारा जहां...क्यूँ खोलूँ मैं आँखें, ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
4

दिन ने मुठ्ठी खोल दिये.....

दिन ने मुठ्ठी खोल दिये, धूप मचल कर बिखर गयी...अँधेरों से परेशां ये जमीं, खुश होकर जैसे निख़र गयी...आबोहवा अलसाई सी, बादल की शरारत हो जैसे...दौड़ लगाती समय सुई, पल में कितनी सँवर गयी.....©रवीन्द्र पाण्डेय...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
4

हे अर्जुन! अभी अधीर न हो...

हे अर्जुन! अभी अधीर न हो,--------------***-------------हे अर्जुन! अभी अधीर न हो,ये पाञ्चजन्य की पुकार नहीं...नियम उपनियम संयमित हैं,कुरुक्षेत्र की ये ललकार नहीं...शोणित की प्यासी है ये धरा,कोई मुदित पुष्प उपहार नही...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
4

अब ना गाड़ी बुलाती है....

अब ना गाड़ी बुलाती है, और ना सीटी बजाती है...-------------------***-----------------अब ना गाड़ी बुलाती है, और ना सीटी बजाती है...               अपनी तो जिन्दगी बस, यूँ ही बीती जाती है...अब ना डिब्बों का मेल है, ना छुक छुक क...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
5

जी करता है पन्ने पलट लूँ...

जी करता है पन्ने पलट लूँ...----------------***-----------------जी करता है पन्ने पलट लूँ, यादों की किताब के...शायद ख़ुशबू बची हुई हो, उनके दिये ग़ुलाब के...दौर पुराना बीत गया क्यों, वक़्त ये ज़ालिम जीत गया क्यों..?गहरी नींद मैं स...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
17

कभी ऐसा भी हो मंज़र...

कभी ऐसा भी हो मंज़र,----------***----------कभी ऐसा भी हो मंज़र,हँसी चेहरा तेरा देखूँ...बड़े तनहा से लगते है,नज़ारे बिन तेरे हमदम...कभी ख़्वाबों में तुम आओ,ये आँखें हों उनींदी सी...मेरी हर सांस हो महकी,तुम्हारे प्यार क...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
6

साँझ घिर आने से पहले...

साँझ घिर आने से पहले,------------***-----------साँझ घिर आने से पहले,घर को लौट आना प्रिये...रात की खामोशियाँ भी,बिन तेरे तनहा सी है...है अगर शिक़वा गिला तो,खुल के तुम बतला भी दो...मेरी ये छोटी सी दुनिया,बिन तेरे तनहा स...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
5

मेरा मन बावला सा....

मेरा मन बावला सा, फिरता यहाँ वहाँ...--------------------***-------------------मेरा मन बावला सा, फिरता यहाँ वहाँ,है कौन सी वो महफ़िल, पाऊँ सुकूं जहाँ..?बहल ही जाता है मन, रिश्तों की ऐसी डोर...पर नज़रें तलाशती हैं, कहाँ खो गई है माँ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
6

कितने कसक हैं दिल में.....

कितने कशक हैं दिल में, यूँ ही पल रहे...---------------------***------------------कितने कशक है दिल में, यूँ ही पल रहे,कोई छेड़ दे इन्हें फिर, द्वन्द क्यूँ न हो..?मेरी बंद मुठ्ठियों में हैं, अक्षर भरे हुए,मुठ्ठी खोल दूँ जो, फिर छं...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
5

सरहदों के पार...

                      फिलिपीन्स में भुखमरी की भयावहता को प्रदर्शित करती छायाचित्र.... ..........से प्रेरित पंक्तियाँ....सरहदों के पार भी....-----------***----------सरहदों के पार भी, होता है सुन्दर सा जहान...ख़ु...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
6

दो घड़ी का साथ माँगा....

दो घड़ी का साथ माँगा, ------------***----------दो घड़ी का साथ माँगा, तो बुरा क्या हो गया..?हमने उनका हाथ माँगा, तो बुरा क्या हो गया..?हम न सोचे थे कभी, दिल का लगाना खेल है..?स्वर्ग से रिश्ते बने है, क्या ग़ज़ब का मेल है..!म...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
6

ढूंढ रहा मन फिर वो आँगन...

ढूंढ रहा मन फिर वो आँगन,------------------***--------------ढूंढ रहा मन फिर वो आँगन, कोई तो बतलाये ना..?फुदक रही गौरेया जिसमें, ऐसा नज़र क्यों आये ना..?साँझ घनेरी घिर जाये, वो तुलसी का बिरवा महके...धुआँ उठे फिर छप्पर से, कोई ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
5

चले आओ अब तुम, मधुर ख़्वाब जैसे...

चले आओ अब तुम, मधुर ख़्वाब जैसे...--------------------***--------------------बिन तेरे गुज़रती है, हर रात कैसे...बताऊँ सजन मैं, हर एक बात कैसे...?जो सुनना है ये सब, मेरे दिल की बातें...चले आओ अब तुम, मधुर ख़्वाब जैसे...ना मारूँगी ताने, न...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
5

मरमरी अहसास सा बंधन अनोखा हो गया...

मरमरी अहसास सा, बंधन अनोखा हो गया...झील सी आँखों में उसके, उम्र भर को खो गया...सुरमयी संगीत जैसे, घुल रहा हो फिज़ाओ में...उसकी बातें वो ही जाने, मैं उसी का हो गया.......©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
5

बड़ी रंगीनियाँ हो फ़िर...

बड़ी रंगीनियाँ हो फ़िर...------------***-----------बड़ी रंगीनियाँ हो फिर, बड़े मोहक नज़ारे हों...ज़ुबां ख़ामोश रह जायें, निगाहों से ईशारे हों...तुम्हारी ज़ुल्फ़ ग़र उलझे, धड़कनें तेज ये होंगी...मिले राहत मेरे दिल को, हवाओं के ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
4
Postcard
फेसबुक द्वारा लॉगिन  
हो सकता है इनको आप जानते हो!  
nitin jatt
nitin jatt
up,India
PanditRkShastri
PanditRkShastri
Chandigarh,India
Vishal sharma
Vishal sharma
kangra.h.p,India
Umesh
Umesh
Delhi,India
dheerendra singh bhadauriya
dheerendra singh bhadauriya
venkatnagar,India
Rajpurohit Harsan Kumar Valera
Rajpurohit Harsan Kumar Valera
Walera sayala jalore,India