रवीन्द्र पाण्डेय
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi... की पोस्ट्स

मैं सोचता हूँ....

मैं सोचता हूँ, एक ख़्वाब बुनूं,हीरे-मोती, माहताब चुनूं...दिखला दूं, कौन हूँ! दुनियाँ को,मन में अक्सर यही बात गुनूं...क्यों बरखा भाए मधुबन को,शीतल कर जाए तन-मन को,भीगेगीं अल्हड़ पंखुड़ियाँ,उस पल बूंदों ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
4

बाबुल के आँगना सा, ये सारा शहर होता....

कट जाती उम्र हँस कर, कुछ ऐसा बसर होता,ये ज़िन्दगानी सचमुच, पंछी-सा सफर होता।ना फ़िक्र में हम घुलते,  न जाया होती  उमर,मस्ती में मुस्कुराते,  सब  दर्द  सिफ़र होता।कोई नहीं पराया,   सब  दिल ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
8

हम से ही नज़रें चुराने लगे....

मौसम ज़रा ज़र्द हो क्या गया,वो हम से ही नज़रें चुराने लगे।कल तक रहे धड़कनों की तरह,साये से भी पीछा छुड़ाने लगे।काँच से भी नाज़ुक अरमां मेरे,टूटते ही लहू सब बहाने लगे।शुक्र है तुम्हें सम्भलना आ गया,हम ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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8

जीवंत हैं ये नारियाँ...

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर नारी शक्ति को प्रणम्य निवेदित पंक्तियाँ....**********************************सृजन को करती सदा जीवंत हैं ये नारियाँ,हर विधा हर काल में ये शक्ति का पर्याय हैं...गोद में खेले ये जब, भर दे हमे...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
23

हौसलों को उड़ान दे...

ना मंजिलें न मुकाम दे,ना मख़मली सी शाम दे...नहीं भूलना मुझे वक़्त तू,मेरे हौसलों को उड़ान दे...जिस गली से गुज़र गया,उस राह को आबाद रख...जिस शहर में हूँ जी रहा,उसे कोई तो पहचान दे...आयेंगे खैरियत पूछने,जिन्...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
20

दुनियां तू सजाने को चली आ...

सब तोड़ के तिलिस्म ज़माने के चली आ,वादे किए जो हमने  निभाने को चली आ...अब आ भी जा सूनी है ज़िन्दगी तेरे बग़ैर,बेशक मुझे तू  छोड़ के जाने को चली आ...सांसें  हुई  बोझिल  ये  धड़कने  गवाह हैं,रूठे हु...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
15

कुछ पल जो अकेला होता हूँ...

कुछ पल जो अकेला होता हूँ,शब्दों की माला पिरोता हूँ,लिखता हूँ अपने दिल की बात,हँस कर आँखों को भिगोता हूँ..कुछ पल जो....दिल के जख्म दिखाएं किसे,ये दर्द करें किसको बयां,पथरीली ये जमीन हुई,चुभता है अब आ...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
21

खूबनुमा सुबह के ओ सौदागर...

खूबनुमा सुबह के ओ सौदागर, बड़ा खूब ढाया है तूने कहर,लेकर उनींदे हमारी सभी,देते हो क्यों अलसाया सहर...कैसी है ख्वाबों की ये अनकही,बातें दिलों की दिल मे रही,सुहाना लगे है ख्वाबों का सफर,बड़ा खूब ढा...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
20

सँवारो इन्हें.... मेरी माँ...

बेचैन मन फिर ढूंढे वो आँचल,बन कर हवा उड़ चली हो कहाँ...यूँ तो खिले चाँद तारे हैं बेशक,लगे स्याह फिर क्यों हमें आसमां...ये धरती, अम्बर, नज़ारे वही हैं,लगे फिर क्यों सूना ये सारा जहां...चलना सिखाया हमें थ...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
17

मन मोहन हो जाए...

कान्हा की बंशी सबको बुलाए,राग-प्रेम का गीत सुनाए...आँख खुले तो, जग वृन्दावन,स्वप्न में मोहन भाए...प्रीत की डोर बंधी है ऐसी,भोर सुहानी, पुरवा जैसी,तन-मन है इठलाए...फिर कान्हा क्यों सताए...आस मेरी है ब्...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
20

सड़क अपने धुन में चली जा रही थी...

सड़क अपने धुन में चली जा रही थी..-------------------**--------------------एक सड़क दूर तक, चली जा रही थी..किनारे के पेड़ों से बतिया रही थी..वो सड़क दूर तक, बस चली जा रही थी...उस सड़क के किनारे, खड़े पेड़ सारे...उन्हीं पेड़ो में एक पीपल खड़ा...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
24

निगाहें नाज़ करती हैं...

निगाहें नाज़ करती हैंफ़लक के आशियाने से,खुदा भी रूठ जाता हैकिसी का दिल दुखाने से।कोई संगीन मसला होकुछ पल भूलना बेहतर,महज़ गाँठें उलझती हैंज़बरन आज़माने से।उठो तूफ़ान की तरहबहो सैलाब बन कर तुम,मज़ा ...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
26

शब्द ही बीज हैं, शब्द ही हैं शज़र...

शब्द की बानगी, शब्द के हैं हुनर,शब्द से हैं घिरे, ज़िन्दगी के डगर...शब्द उम्मीद हैं, शब्द दीवानगी,शब्द से कई रिश्ते, हैं जाते संवर...शब्द आवाज है, शब्द अंदाज़ है,शब्द से है घडी, शब्द से है पहर...शब्द अभिम...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
26

कुछ सांसे दो, जिंदगानी दो...

मैं मछली हूँ, मुझे पानी दो...--------------*****-------------मैं मछली हूँ, मुझे पानी दो...कुछ सांसे दो, जिंदगानी दो...मैं मछली हूँ, मुझे पानी दो...मैं पोखर तालों में रहती, मैं हर मौसम को हूँ सहती...चाहे मुझे कहो कुछ भी, मैं न...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
29

कोशिशें होंगी मुकम्मल, कारवाँ बन जाएगा...

है निज़ामों का शहर, यहाँ बात इतनी जानिए,सर झुकाएंगे अगर, सजदा नहीं कहलाएगा...नज़ाफ़त की ये हवा, सब कुछ उड़ा ले जाएगी,है चिराग ए इल्म जो, कब तक छुपा रह पाएगा...अब तो बाजू खोलिए, कैसी ज़हमत-ए-दासतां,कोशिशे...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
23

गीत बन कर मिलो, गुनगुनाऊँगा मैं...

गीत बन कर मिलो, गुनगुनाऊँगा मैं,आओ मेरी ग़ज़ल, तुमको गाऊँगा मैं...दूरियां दरमियां, और कब तक रहे,ग़म जुदाई के हम, बोलो कब तक सहें,और कब तक भला, आजमाऊँगा मैं,आओ मेरी ग़ज़ल....एक दस्तक हुई, आज दिल पे मेरे,मेरी ...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
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39

यूँ ही दिल जलानेे से...

छुप गया चाँद क्यों, सूरज के आ जाने से,है वो भी तनहा, सितारों के बिन ज़माने से...मैं ही खामोश हूँ, या दौर है तनहाई का,कोई तो मिलने को, आये किसी बहाने से...ये भीड़ यूँ ही, हर रोज चलती रहती है,इसे परहेज क्यों,...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
35

महबूब सा मरहम नहीं...

रूठ जाये ये जहां, परवाह मैं करता नहीं...एक तेरा साथ यारा, महफ़िलों से कम नहीं...क़ातिलाना हर अदा, गुस्ताख़ हैं तेरी नज़र,सब उलझने बेमायने, जो तेरे पेंचोखम नहीं...आशिक़ी या दिल्लगी, सोचेंगे हमने क्या किया...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
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25

हसरत धुआँ-धुआँ हैं...

हसरत धुआँ-धुआँ हैं,कैसा तेरा शहर...मिलते हसीं हजारों,लेकिन हिज़ाब में...संगीनों के साये,पसरे हैं हर तरफ़...सब कुछ झुलस गया है,मज़हब के तेज़ाब में...कोई मसीहा बन के,आयेगा फिर यहाँ...मशगूल रहनुमा हैं,इसी लब...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
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23

प्रेम रंग हो मोहना...

हे मोहना, मन मोहना...तुम आस हो, तुम स्वांस हो...मेरे अनंतिम सोच के,अपरिमित आकाश हो...तुम प्रेम रंग हो मोहना,तुम सुर-सलिल आभास हो...जीवन का मेरे प्रमाण हो,दुःख विनाशक बाण हो...जीवन सफल हो मोहना,तुम जिसके...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
27

शरारत करता हूँ...

मैं ढूंढ रहा उस बचपन को,जाने कब कैसे फिसल गया...रुकने को बोला था कितना,देखो वो जिद्दी निकल गया...अब की बार जो मिल जाये,मैं उसकी कान मरोडूँगा...कितना भी फिर वो गुस्साये,नहीं उसकी बाँह मैं छोडूंगा...ले...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
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42

अफ़सोस मग़र अब कहानी में...

कहती हैं दर-ओ-दीवारें सभी,फिर कब वो मौसम आयेगा...मैं झूम उठूँगा बरबस ही,बचपन आँगन में समायेगा...वो खुली गगन के नीचे सब,फिर खाट लगाकर सोएंगे...जब डाँट पड़ेगी नानी की,चिल्ला चिल्ला कर रोयेंगे...फिर माम...  और पढ़ें
11 माह पूर्व
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20

खता आज हम-तुम करें...

हुई है मोहब्बत बताऊँ किसे,किस से कहूँ और जताऊँ किसे..ये दीवानगी अब अदा है मेरी,सम्हालूँ इसे या मिटाऊँ इसे..?वो लमहात कितने जूनूनी हुए,जिसे हमने चाहा वो खूनी हुए..दिए जख़्म दिल पे दिखाऊँ किसे,हुई है...  और पढ़ें
11 माह पूर्व
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25

कृतियाँ नव दीपक बन, साहित्य के अलख जगाएंगी...

हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि अजित कुमार जी के निधन से मन आहत हुआ है...अश्रुपूरित शब्दांजलि.....मौसम एक प्यारा बीत गया,वो सबके मन को जीत गया,अब शेष स्मृतियां जीवन भर,हमें उनकी याद दिलाएंगी...कुछ कर देंगी ...  और पढ़ें
11 माह पूर्व
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30

मंजिलों से प्यार कर...

सिमटती राहें कह रहीं, मंजिलों से प्यार कर...धड़कनों का राग सुन, सांसों का व्यापार कर...वक़्त से कर यारियाँ, ये जो गुजरे ना मिले...कह दे जो दिल में तेरे, प्रेम का  इज़हार कर...दो घड़ी -सी ज़िन्दगी, कब ये खो जा...  और पढ़ें
11 माह पूर्व
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25

बाज़ी ये कैसे पलटती नहीं...

मुस्कुराता हुआ चेहरा देखकर,यकीं है सवेरा हुआ हो कहीं...क्या होती है रातें, न जानू सजन,रोशनी तेरे यादों की छटती नहीं...डगर हो, सफ़र हो, मंजिल तुम्हीं,बिन तुम्हारे घड़ी एक कटती नहीं..खुला आसमां और हम तु...  और पढ़ें
11 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
28

ख़्वाबों में महफ़िल है...

यकीं है मिलेंगे ख़्वाबों में हम तुम,मग़र बेकरारी में, नीदें कहाँ हैं..?तुम्हीं से रौशन है मेरी ये दुनिया,तुम्हीं से खुशियों का कारवां है...भले दूर हो तुम, जेहन में हो मेरे,जैसे धरती के संग आसमां है......  और पढ़ें
11 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
28

सफ़र है ये ज़िन्दगी...

ढूंढने निकला हूँ फिर मैं, ज़िन्दगी के मायने,शाम तक शायद मिले वो, या अंधेरी रात हो...सफ़र है ये ज़िन्दगी तो, चलते रहना लाज़मी,है कभी तनहाईयाँ, कभी हमसफ़र का साथ हो...एक आहट से किसी की, जोर से धड़का है द...  और पढ़ें
11 माह पूर्व
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26

मेरी उम्मीदों के सूरज... तू आ निकल...

कल तक तेरी तपिश से, हैरान रहा मैं...आज ढूँढती है नजरें, बन बावरा तुझे...एक झलक दे भी दे, अब और न तड़पा...मिल जायेगा सुकूं और, करार बस मुझे...एक साथ तेरा रहते, आबाद थी दुनिया...नजरें क्या तूने फेरी, भूला ...  और पढ़ें
11 माह पूर्व
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25

मुस्कुरा के तो देख...

मिसालें मिलेंगी तेरे नाम की,तू खुद को ज़रा आज़मा के तो देख...चली आयेगी वो हवा की तरह,तू मौसम की तरह बुला के तो देख...भले दूर है वो खुशी की नगर,दो कदम ज़रा तू बढ़ा के तो देख...सिफर है अगर हासिल-ए-ज़िन्दगी,...  और पढ़ें
11 माह पूर्व
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