तस्कीन की पोस्ट्स

हर झूठी उम्मीद के साथ

हर झूठी उम्मीद के साथ हर राह पर आज भी तुम्हारा  इंतज़ार करती हूँ शीरीं मंसूरी "तस्कीन"...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
तस्कीन
15

क्या करूँ साहिब ?

क्या करूँ साहिब ? रिश्ता मुझे ईमानदारी से निभाना आता हैआप मेरी इस कमजोरी को कमजोरी समझेतो हाँ साहिब मैं कमजोर ही सही आपकी नजर में....शीरीं मंसूरी "तस्कीन"    ...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
तस्कीन
16

इतने सालों में मिले तो थे हम तुम

इतने सालों में मिले तो थे हम तुमदिल में खुशी थी खुशी पहले जैसी न थीउस जगह बैठे तो थे हम तुममगर तुम तुम न थे मैं मैं न थीशायद वक़्त नेहम दोनों को बदल दियाहम दोनों होकर भी वहाँ नहीं थेशीरीं मंसूरी "त...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
तस्कीन
9

हज़ार मर्तबा लेने के लिए तैयार हूँ

ढेर सारे आँसूओं के साथ जब तुम मेरे चेहरे पर खिलखिलाती हुई मुस्कान  दे जाते हो कसम खुद की मैं तुम्हारे दिएहुए उन हज़ार आँसूओं को हज़ार मर्तबा लेने के लिए तैयार हूँ             &nb...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
तस्कीन
14

लोगों ने सच ही कहा है

लोगों ने सच ही कहा है वक़्त किसी जा नहीं होता अब तुम तुम न रहे  और हम हम न रहेवक़्त ने हम दोनों को बदल डालासच है वक़्त से कोई बड़ा नहीं होताशीरीं मंसूरी "तस्कीन"...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
तस्कीन
13

शिकायतें तो बहुत हैं तुमसे

शिकायतें तो बहुत हैं तुमसेमगर डर लगता है कि कहीं तुम रूठ न जाओ हमसे....शीरीं मंसूरी "तस्कीन"...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
तस्कीन
11

मेरा कसूर सिर्फ इतना ही तो है

मेरा कसूर सिर्फ इतना ही तो हैकि मैंने तुमसे बेइन्तहा प्यार किया हैइस बात की मुझे इतनी बड़ी सजा मत दोरहम खाओ मेरे दिल पे अब आ भी जाओ नशीरीं मंसूरी "तस्कीन"...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
तस्कीन
15

सच ही कहा है लोगों ने

सच ही कहा है लोगों नेमोहब्बत के आगे हर कोई हारा हैमैं भी हार चुकी हूँ इससेतुम्हें पाने की तिशनगी दिन-व-दिन बढ़ती जा रही है                             मेरे मह...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
तस्कीन
15

इस नादान से दिल के आगे

इस नादान से दिल के आगे मैं इससे लड़ते-लड़ते हार चुकी हूँ अबदिन-व-दिन तुम्हें पाने की चाहतइसकी बढ़ती ही चली जा रही है                      मेरे हमनवांशीरीं मंसूरी "तस्की...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
तस्कीन
15

दिन के बाद रात आती है

दिन के बाद रात आती हैख़ुशी के बाद गम आता हैविरह के बाद मिलन आता हैअँधेरे के बाद उजाला आता हैपतझड़ के बाद हरयाली आती है सूखे के बाद वारिश आती हैहर किसी न किसी जाने के,बाद वापस आता हैपर तुम तो ऐसे ग...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
तस्कीन
14

एक बात पूंछू तुमसे रूठोगे यो नहीं

एक बात पूंछू तुमसे रूठोगे यो नहींजैसे आकाश कभी अपनी धरती काचन्दा कभी अपनी चाँदनी कारात कभी अपनी जुगनू का सागर कभी अपनी लहरों काफूल कभी अपनी महक काभँवरा कभी अपनी गुनगुनाहट कादिल कभी अपनी धड़कन...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
तस्कीन
12

मैं जिद्दी हूँ -

तुम मुझसे बार बार कहते थे मैं जिद्दी हूँ - मैं जिद्दी हूँपर तुम ने मेरी जिद न पूँछीशायद पूँछ लेते तुममुझे सिर्फ तुम्हें पाने की जिद हैतो शायद उस दिन से तुम मुझेजिद्दी कहना भूल जातेशीरीं मंसूरी...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
तस्कीन
14

मेरा तुम्हारा साथ एक पतंग और हवा के जैसा है

मेरा तुम्हारा साथ एक पतंग और हवा के जैसा हैजब एक पतंग और हवा एक-दूसरे का साथ पाकरनीले आकाश में जब दूर तलक निकल जाते हैंजहाँ उन्हें दूर तलक कोई छू नहीं सकताउसी तरह मेरा-तुम्हारा साथ पतंग और हवा ज...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
तस्कीन
13

आरजू है अगर तो सिर्फ तुम्हें पाने की

खुदा से यूँ हर रोज सब लोग जन्न्त पाने की आरजू रखते हैंमगर खुदा से मुझे किसी चीज की आरजू नहींआरजू है अगर तो सिर्फ तुम्हें पाने कीशीरीं मंसूरी "तस्कीन"...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
तस्कीन
13

इस दुनियाँ में मुझे किसी, चीज की ख्वाहिश नहीं

इस दुनियाँ में मुझे किसी, चीज की ख्वाहिश नहींन हीरे की ,न मोती की, न सोने की, न चांदी कीमुझे ख्वाहिश है तो सिर्फ तुम्हारी चाहत कीशीरीं मंसूरी "तस्कीन"...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
तस्कीन
18

आज वारिश आयी थी मेरे घर

आज वारिश आयी थी मेरे घरवारिश भी आयी तुम्हारी कुछ यादें भीअपने साथ-साथ लायी थी सनमयाद है तुम्हें जब हम उस दिन पहली बार उस वारिश में साथ-साथ भीगे थेशीरीं मंसूरी "तस्कीन"...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
तस्कीन
17

आज हवाएं बहुत तेज हैं

आज हवाएं बहुत तेज हैंमेरे कानों के पास से गुजर कर ये मुझसे कुछ कह रही हैं हमेशा तुम अकेली क्यों आती होअपने महबूब को क्यों नहीं लायीकब तक इन हवाओं से इन महके हुये फूलों से, इन चाँदनी भरी रातों से...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
तस्कीन
14

अब लौट भी आओ न ऐ मेरे हमदम

बहुत हुआ रूठने मनाने का खेल अब लौट भी आओ न ऐ मेरे हमदम कब से बैठी हूँ तुम्हारे इंतजार मेंहर गली हर रास्ता मैंने तुम्हारे लिए सजाया है पता नहीं किस गली किस रास्ते से गुजरो तुम अब तुम्हारे इन्तजा...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
तस्कीन
18

सच ही कहा है लोगों ने

सच ही कहा है लोगों नेमोहब्बत के आगे हर कोई हारा हैमैं भी हार चुकी हूँ इससेतुम्हें पाने की तिशनगी दिन-व-दिन बढ़ती जा रही है                             मेरे मह...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
तस्कीन
13

न ईद पर वो आये, न उनका कोई पैगाम

न ईद पर वो आये, न उनका कोई पैगामक्या यही प्यार करने की अदा है उनकी.....                   शीरींमंसूरी "तस्कीन" ...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
तस्कीन
18

यूँ तो कुछ देर ठहर जाती वो रात

यूँ तो कुछ देर ठहर जाती वो रात तेरे मेरे मिलन की वो आखिरी रात यूँ तो कुछ देर तुम्हें आये न हुआ तुमने कह दी फिर वो जाने की बात यूँ तो कुछ........तेरे आगोश में मैं आने न पायी थी अभी तुमने कह दी फिर से जाने ...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
तस्कीन
15

मुझे याद है शायद तुम भूल गए

मुझे याद है शायद तुम भूल गए दोस्ती तुमने की पर निभाई मैंने है मुझे याद है........प्यार तुमने किया पर निभाया मैंने है मुझे याद है........वादे तुमने किये पर निभाए मैंने हैं मुझे याद है........शीरीं मंसूरी “तस...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
तस्कीन
14

ख्वाहिशें तो बहुत उठती हैं इस दिल में हर रोज

ख्वाहिशें तो बहुत उठती हैं इस दिल में हर रोज मगर तुम्हारी खुशियों के लिए इन्हें दफनाया भी हर रोज करती हूँ शीरीं मंसूरी “तस्कीन”...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
तस्कीन
18

मैंने तुमसे कुछ ज्यादा तो नहीं

मैंने तुमसे कुछ ज्यादा तो नहीं सिर्फ प्यार के बदले, प्यार ही तो माँगा था मैंने तुमसे........दो कदम साथ चलने के लये,मैंने तुम्हारा हाथ ही तो माँगा थामैंने तुमसे........तुम्हें ख़ुशी देने के लिए, तुम्हारे ...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
तस्कीन
20

जिन्दगी के सफर को, मैं कितना आसाँ समझती थी

जिन्दगी के सफर को, मैं कितना आसाँ समझती थी पर जिन्दगी के सफर को तय कर पाना बड़ा ही मुश्किल है कुछ लोग मिलते हैं, तो कुछ लोग बिछड़ते हैं कुछ लोग शहद से ज्यादा मीठे होते हैं,तो कुछ लोग नीम से भी ज्यादा ...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
तस्कीन
17

चन्दा अपनी चाँदनी से कह दो

चन्दा अपनी चाँदनी से कह दो चली जाये यहाँ से अब मुझे ये काली रातें ही अच्छी लगतीं हैं चाँदनी रात अब मुझे बैरी विरहन सी लगती है चाँदनी रात में मेरे दिल के ज़ख्म भी दिखाई पड़ते हैं काली रातों से मैंन...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
तस्कीन
16

प्रिय, तुम्हारे जन्मदिवस पर,

प्रिय,तुम्हारे जन्मदिवस पर,मैं तुम्हें दें न सकी कुछ भीकिसे ने तुम्हें कमल दिया,किसी ने तुम्हें रोज़(गुलाब)पर मैं तुम्हारे लिए अल्लाह से दुआ मांगती हूँ हररोज़मुझे मिले खार(कांटे),तुम्हें मिले ...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
तस्कीन
21

रमज़ान का पाक़ महीना

रमज़ान का पाक़ महीना लूट लो सवाब जितना लूटना है पता नहीं ऐसा पाक महीना फिर मिले न मिलेशीरीं मंसूरी “तस्कीन”...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
तस्कीन
19

ऐ मुसलमान

ऐ मुसलमान रमजान के ऐसे पाक़ महीने में तो गुनाहों से तौबा कर लेशीरीं मंसूरी “तस्कीन”...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
तस्कीन
17

रमज़ान में करते हो गुनाह

रमज़ान में करते हो गुनाह और बड़े फख्र से कहते हो की हम मुसलमान हैं शीरीं मंसूरी “तस्कीन”...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
तस्कीन
20
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