अब छोड़ो भी की पोस्ट्स

देश को बेइज्‍ज़त करने के कुत्‍सित-अभियान... क्‍या ये देशद्रोह नहीं

सूचनाओं की बेलगाम आवाजाही एक ओर जहां कानून-व्‍यवस्‍था और  शासन-प्रशासन पर सवालिया निशान लगाती है वहीं दूसरी ओर समाज  को भी संवेदनाहीन बनाने का काम करती है। पिछले लगभग तीन चार  साल से मैं ...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
अब छोड़ो भी
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बूढ़े बरगद को बचाने के लिए लगाई गई है सलाइन ड्रिप

अकसर हम नेगेटिव खबरों को ही अपनी चर्चा का केंद्रबिंदु मानकर समाचार सूत्रों को गरियाते रहते हैं और साथ ही वही समाचार देखते भी रहते हैं मगर  जबकुछ करने की बात आती है तो अपना पल्‍ला झाड़ने स...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
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… ये मील के पत्‍थरों से आगे का सफर है

मशहूर शायर बशीर बद्र साहब का एक शेर है- जिस दिन से चला हूँ मेरी मंज़िल पे नज़र हैआँखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा...ये फ़कत एक शेर नहीं, उस जज्‍़बे का अक्‍स है जिसे आजकल हम रेसलिंग मैट्रेस, बॉ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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घुमक्‍कड़ी के कारण ही केदारनाथ पांडेय से राहुल सांकृत्‍यायन तक का सफर कर गए वो

9 अप्रैल, 1893 को जन्‍मे केदारनाथ पांडेय कब और कैसे राहुल सांकृत्‍यायन बन गए, इसके पीछे उनकी हजारों मील लंबी यात्रायें रहीं। दूर पहाड़ों और नदियों के बीच दुर्लभ ग्रंथों की खोज में भटकने के बाद, उन ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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नीड़ से बेदखल होने वाले मां-बापों के हक़ में... एक कदम

पहले आप डा. हरिवंशराय बच्‍चन की आत्‍मकथा के दूसरे खंड ''नीड़ का निर्माण फिर फिर''की उन पंक्‍तियों को पढ़िए जो आज के इस लेख पर खरी उतरती हैं, हालांकि संदर्भ अलग-अलग हैं मगर दोनों के अर्थ एक ही है ।न...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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पैसे की हवस: महिला खेलरत्‍नों से ये उम्‍मीद नहीं थी

सरकारी खर्चे पर ऐश करते परिजन भ्रष्‍टाचार की मुख्‍य वजहजो राष्‍ट्रीय व अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर देश का नाम रोशन कर रहे हों...जो राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार से लेकर पद्म पुरस्‍कारों से सुशोभित किय...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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बीसवेंं अम्बिका प्रसाद दिव्य पुरस्कार घोषित

भोपाल । साठ महत्वपूर्ण ग्रंथोंं के सर्जक एवं चार सौ चित्रों के चित्रकार स्व. अम्बिका प्रसाद दिव्य की स्मृति में विगत उन्नीस वर्षो से दिये जा रहे राष्ट्रीय ख्याति के दिव्य पुरस्कारो की घोषणा ...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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ये किस दयार पर खड़े हैं हम...कि देवी भी हम और गाली भी

आज से नवदुर्गा हमारे घरों में विराजेंगी, पूरे नौ दिन देश में ऋतुओं के  माध्‍यम से जीवन में उतरते नवसंचार को उत्‍सवरूप मनाने के दिन हैं। एक  समाज के तौर पर  इन नौ दिनों में हम अपने संस्‍कारो...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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हमें अष्‍टभुजी रहने दो, औज़ार ना बनाओ

Painting by arun samadder aparajita- on womens day देवि दुर्गा की अष्‍टभुजाएं देखी हैं आपने? सभी भुजाओं में कोई ना कोई अस्‍त्र-शस्‍त्र मौजूद होता है जबकि शक्‍ति दुर्गा की भुजाओं में होती है, ना कि उन अस्‍त्र-शस्‍त्रों में...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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अब स्‍तनपान के नाम पर रचा जा रहा षडयंत्र

''जिस डाल पर बैठे उसी को काटने''की मूर्खता वाली एक उक्‍ति को हम प्रसिद्ध कवि कालिदास  के लिए हमेशा से संदर्भित करते रहे हैं, मगर आज स्‍तनपान को लेकर जो शोध रिपोर्ट आई है  उसे पढ़कर यह उक्‍ति हम ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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होली पर सुरीले ब्रज की संपूर्ण गाथा का नाम है समाज गायन

श्री बांकेबिहारी मंदिर में समाज गायन करते गोस्‍वामी समाज के मुखिया व अन्‍यअभी चूंकि होली का अवसर है तो मैं अपने सुरीले ब्रज की बात ना करूं, ऐसा हो नहीं सकता।यूं भी जब आराधना और लोकोत्‍सव एक हो...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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आज हुई मथुरा में श्रीकृष्‍ण जन्‍मस्‍थान पर Holi

 आज श्रीकृष्‍ण जन्‍मस्‍थान मथुरा पर हुई Holi: रंगभरनी एकादशी पर भगवान श्रीकृष्‍णजन्‍मस्‍थान की होली ने सभी दर्शकों को भी सराबोर कर दिया। इस अवसर पर ब्रज की मनभावन होली के रंगभरे उल्लास तो...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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देह तक सिमटे ''कथित फरिश्‍ते''

देह तक सिमटे ''कथित फरिश्‍ते''हम जिस आदि धर्म को ''सनातन''कहते हैं, आज उसी के नाम पर  किस तरह गंदगी फैलाई जा रही है, उसकी बानगी हैं आध्यात्मिक  गुरू होने का दावा करने वाले दुराचारी वीरेंद्र देव द...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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अभी तक सबसे ज्‍यादा तोड़े मरोड़े गए हैं महात्‍मा गांधी और उनके शब्‍द, ये कैसी श्रद्धांजलि

अभी तक सबसे ज्‍यादा तोड़े मरोड़े गए हैं महात्‍मा गांधी और उनके शब्‍द, आलोचकों की नई पीढ़ी में शामिल हो गई हैं भारतीय मूल की अमेरिकी लेखिका सुजाता गिडला ।  JLF (जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल) में "Ants...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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भपंग वादन से हुई समानांतर साहित्य उत्सव के दूसरे दिन की शुरूआत

जयपुर। समानांतर साहित्य उत्सव के दूसरे दिन प्रतिरोध का पंजाबी साहित्य, कविता अनंत, कहानी बुरे दिनों में और भारतीय लोकतंत्र का उत्तर सत्य विषय पर विभिन्न सत्रों का आयोजन किया गया जिसमें बड़ी स...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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आवारा पूंजी के वर्चस्व को चुनौती देने खड़ा हुआ समानांतर साहित्य उत्सव

जयपुर। राजस्‍थान की राजधानी जयपुर में तीन दिवसीय समानांतर साहित्य उत्सव यानी पीएलएफ का शनिवार से शुभारंभ हो गया। इस समानांतर साहित्य उत्सव का उदघाटन साहित्यकार विभूति नारायण, मैत्रेयी पु...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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भविष्‍य के हाथों में खंजर देकर देख लिया, अब गिरेबां में झांकने का वक्‍त

बच्‍चों में फैलती हिंसा पर पिछले कुछ दिनों में इतने लेख लिखे  गए हैं कि समस्‍या पीछे छूटती गई और लेखकों के अपने विचार  हावी होते गए। लेखकों में से कोई सरकारी नीतियों को, तो कोई  परिवारों के...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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whatsapp पर तैरते इस विराट झूठ का कड़वा सच क्‍या

...कि इस समय मेरी जिह्वापर जो एक विराट् झूठ हैवही है--वही है मेरी सदी कासब से बड़ा सच ! ...ये उस कविता की पंक्‍तियां हैं जिसे कवि केदारनाथ सिंहने  अपनी एक लंबी कविता ''बाघ''में उद्धृत किया है। कवि न...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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सबहीं को मुबारक हो हैप्‍पी वाली ''खिचराईं''

आज मकर संक्रांति है, मुझे अपना बचपन याद आ रहा है जो पूर्वी उत्‍तर प्रदेश के गांवों में बीता और जहां ''संक्राति'को ''खिचराईं''कहा जाता है।आज के दिन वहां घर की औरतों में एक कहावत बहुतायत से कही जाती ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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26 वें विश्व पुस्तक मेले में सबसे ज्‍यादा किताब बिकी ‘औरत और इस्लाम’

देश में तीन तलाक और मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को लेकर चल रही बहस की वजह से लोगों में इस्लाम में महिलाओं के अधिकारों को जानने की ललक बढ़ी रही और लोग, विशेष तौर पर महिलाएं, यहां आयोजित विश्व पुस...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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विवेकानंद जयंती : तुम्हारी आत्मा के अलावा कोई और गुरु नहीं है

स्‍वामी विवेकानंद ने कहा था कि-You have to grow from the inside out. None can teach  you, none can make you spiritual. There is no other  teacher but your own soul.अर्थात्तुम्हें अन्दर से बाहर की तरफ विकसित होना है। कोई तुम्हें पढ़ा  नहीं सकता, कोई तुम्हें आध्यात्मि...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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नाजायज़ शोर की बंधुआगिरी

Painting courtsey: Google imagesकिसी भी धर्म का मर्म व्‍यक्‍ति की अंतध्‍वर्नि को जाग्रत करने में निहित है  ताकि धर्माचरण के बाद प्रवाहित होने वाली तरंगें व्‍यक्‍ति व समाज में  सकारात्‍मक ऊर्जा फैलाने का काम...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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लिखी गईं नई इबारतें...कि ये ख्‍वाहिशें रूमानी नहीं हैं...

आज के विषय पर सबसे पहले पढ़िए मेरे चंद अशआर.....ये परेशानियां जिस्‍मानी नहीं हैंये ख्‍वाहिशें रूमानी नहीं हैंऔर ये खिलाफतें भी रूहानी नहीं हैंकि अब ये आवाज़ें उठ रही हैंउन जमींदोज वज़ूदों की ज...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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मशहूर शायर अनवर जलालपुरी के निधन से गमगीन हुआ माहौल

ख्वाहिश मुझे जीने की ज़ियादा भी नहीं हैवैसे अभी मरने का इरादा भी नहीं हैहर चेहरा किसी नक्श के मानिन्द उभर जाएये दिल का वरक़ इतना तो सादा भी नहीं हैवह शख़्स मेरा साथ न दे पाऐगा जिसकादिल साफ नही...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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सुनिए मंत्री जी! गले नहीं उतरने वाले ये बचकाना तर्क

किसी भी उच्‍च पदस्‍थ व्‍यक्‍ति की मन: स्‍थिति को समझने के लिए उसके भाव काफी होते हैं। उच्‍चपदासीन होने का यह मतलब यह नहीं कि पद प्राप्‍त करने वाले व्‍यक्‍ति द्वारा पद पर आसीन होने से पहले जो क...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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चंबल की ये औरतें- feminism से आगे की बात हैं

राजनैतिक रूप से लगातार उद्भव-पराभव वाले हमारे देश में कुछ  निर्धारित हॉट टॉपिक्स हैं चर्चाओं के लिए। देश के सभी प्रदेशों में  ''महिलाओं की स्‍थिति''पर लगातार चर्चा इन हॉटटॉपिक्स में से एक ...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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हम पैदाइशी संन्यासी हैं, हमें तो सूतक भी नहीं लगता

हमें न अखाड़ा परिषद से मान्यता की जरूरत है, न उनके सहयोग की। अपने अधिकार व सम्मान की लड़ाई स्वयं लड़ लेंगे, क्योंकि जनता हमारे साथ है। वैसे भी हम पैदाइशी संन्यासी हैं, हमें तो सूतक भी नहीं लगता,...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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हारून भाई को किसने मारा...

वो फैमिली हेयर ड्रेसर थे, दुबई रिटर्न...जी हां...''दुबई रिटर्न'', ये तमगा 90 के दशक में बड़ी बात  हुआ करती थी, वो बताते थे कि वो स्‍वयं तब वहां शेखों के पर्सनल सैलून्‍स में हजामत किया करते  थे।खुशदि...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
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भंसाली जी! इतिहास प्रयोगधर्मी का सेट नहीं हो सकता

हाई बजट, ग्रेट स्‍ट्रैटजी, भव्‍य सेट और टॉप के कलाकारों के साथ अपनी फिल्‍म को 'महान'  बताने के 'आदी'रहे संजय लीला भंसाली ने संभवत: रानी पद्मिनी के जौहर को हल्‍के में ले  लिया। यूं आदतन उन्‍हों...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
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खबर आई है कि उनका दम घुट रहा है...

सुना है कि धुंध ने दिल्‍ली में डेरा जमा लिया है। ये कैसी धुंध है जो  एक कसमसाती ठंड के आगमन की सूचना लेकर नहीं आती बल्‍कि  एक ज़हर की चादर हमारे अस्‍तित्‍व पर जमा करती चली आती है।इस धुंध ने आद...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
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