लोकेश नदीश
किल्लोल की पोस्ट्स

नींद

【1】जब भी किया नींद नेतेरे ख़्वाबों का आलिंगनऔर आँखों ने चूमा हैतेरी ख़ुश्बू के लबों कोतब मुस्कुरा उट्ठा हैमेरे ज़िस्म का रोंया रोंयाचित्र साभार- गूगल【2】न जानेकितनी ही रातें गुजारी है मैंनेतेर...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
किल्लोल
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दो नज़्में

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({ google_ad_client: "ca-pub-8930566477748938", enable_page_level_ads: true }); तुम्हारीउलझी जुल्फों कोसुलझाते हुए अक्सर,मन उलझ जाता हैसुलझी हुई जुल्फों में...तन्हाई में आकर अचानकतुम्हारी यादजगा देती है उम्मीद...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
किल्लोल
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आईना

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({ google_ad_client: "ca-pub-8930566477748938", enable_page_level_ads: true }); आईने में देखता हूँ खुद कोऔर मुझे तुम नज़र आते होसोच में पड़ जाता हूँक्योंकि आईना पारदर्शी नहीं होताफिर ये कैसे संभव हैसोचता हूँ फिर...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
किल्लोल
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तन्हाई के जंगल

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({ google_ad_client: "ca-pub-8930566477748938", enable_page_level_ads: true }); तन्हाई के जंगल में भटकते हुए याद का पलजब भीग जाता है अश्क़ों की बारिश में तब एक उम्मीद चुपके से आकर पोछ देती है अश्क़ों की ...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
किल्लोल
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जब तुम नहीं आते

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({ google_ad_client: "ca-pub-8930566477748938", enable_page_level_ads: true }); अक्सर ही ऐसा होता हैउम्मीदों की उंगली थामेदिल चल पड़ता हैतमन्ना की पथरीली राहों मेंऔर चुभता है फिरकिसी की बेरुख़ी का कांटाफिर लहूलु...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
किल्लोल
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घर बनाने में

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({ google_ad_client: "ca-pub-8930566477748938", enable_page_level_ads: true }); (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); न तारे, चाँद, गुलशन औ'अम्बर बनाने मेंजरूरी जिस कदर है सावधानी घर बनाने मेंअचानक अश्क़ टपके और बच गई आबरू वरनाकसर छोड़ी न ...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
किल्लोल
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सुबकते रहते हैं

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({ google_ad_client: "ca-pub-8930566477748938", enable_page_level_ads: true }); याद से बारहा तेरी उलझते रहते हैंसिमटते रहते हैं या फिर बिखरते रहते हैंतेरा ख़याल भी छू ले अगर ज़ेहन को मेरेरात दिन दोपहर हम तो महकते रहते ह...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
किल्लोल
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ईश्वर से प्रेम करना सिखाएं, डरना नहीं

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({ google_ad_client: "ca-pub-8930566477748938", enable_page_level_ads: true }); आस्थावानों के लिए ईश्वर एक सार्वभौमिक शक्ति है, जिसे विभिन्न रूपों में पूजा जाता है। जिसे हम भक्ति कहते हैं, वो भी प्रेम का ही एक अंग है। प्र...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
किल्लोल
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रफ़्तार

गतांक से आगे...------------------- (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); दो घंटे बादरिपोर्टर- कैसे हुई दुर्घटनाचश्मदीद- भैया हम कई सालों से यहां चाय की दुकान चला रहे हैं, जब से सरकार ने चौड़ी और चिकनी सपाट सड़क बनाई है, आए दिन ...  और पढ़ें
11 माह पूर्व
किल्लोल
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रफ़्तार

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); रुको... रुको...इतनी तेज रफ्तार से मोटर साइकिल चलाना नियम विरुद्ध है,  जुर्माना भरना पड़ेगा, यह कहते हुए ट्रैफिक सिपाही ने रसीद बुक निकाली और तेज गति से आ रहे वाहन चालकों को र...  और पढ़ें
11 माह पूर्व
किल्लोल
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मनुष्य के दर्शन

खाली बैठे-बैठे ईश्वर ने सोचा कि चलो धरती का भ्रमण कर अपने बनाये मनुष्य का हालचाल लिया जाए। मनुष्य के आपसी प्रेम और बंधुत्व की भावना को परखा जाए। मनुष्यता और मानवीयता के विषय पर मनुष्य का विकास...  और पढ़ें
11 माह पूर्व
किल्लोल
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लौट गई तन्हाई भी

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); दिल की उम्मीदों को सीने में छिपाए रक्खाइन चिरागों को हवाओं से बचाए रक्खाहमसे मायूस होके लौट गई तन्हाई भीहमने खुद को तेरी यादों में डुबाए रक्खातिरे ख़्याल ने दिन-रात मुझे ...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
किल्लोल
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ख्वाब की तरह से

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); ख्वाब की तरह से आँखों में छिपाए रखनाहमको दुनिया की निगाहों से बचाए रखनाबिखर न जाऊं कहीं टूटकर आंसू की तरहमेरे वजूद को पलकों पे उठाए रखनाआज है ग़म तो यक़ीनन ख़ुशी भी आए...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
किल्लोल
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चाँदनी की तरह

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({ google_ad_client: "ca-pub-8930566477748938", enable_page_level_ads: true }); प्यार हमने किया ज़िन्दगी की तरहआप हरदम मिले अजनबी की तरहमैं भी इंसां हूँ, इंसान हैं आप भीफिर मिलते क्यों नहीं आदमी की तरहमेरे सीने में भी इक ...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
किल्लोल
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फेफड़ों को खुली हवा न मिली

फेफड़ों को खुली हवा न मिलीन मिली आपसे वफ़ा न मिलीदुश्मनी ढूँढ़-ढूंढ़ कर हारीदोस्ती है जो लापता न मिलीवक़्त पे छोड़ दिया है सब कुछदर्दे-दिल की कोई दवा न मिली (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); हर किसी हाथ में मिला ख...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
किल्लोल
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मिला जो शख़्स

बिछड़ते वक़्त तेरे अश्क़ का हर इक क़तरालिपट के रास्ते से मेरे तरबतर निकलाखुशी से दर्द की आँखों में आ गए आंसूमिला जो शख़्स वो ख़्वाबों का हमसफ़र निकलारोज दाने बिखेरता है जो परिंदों कोउसके तहख़ाने से क...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
किल्लोल
31

ज़िन्दगी की किताब के पन्ने

आँखों में फिर चमकने लगे हैं यादों के कुछ लम्हेंगूंजने लगी हैं कान में वो तमाम बातें जो कभी हमने की ही नहीं नज़र आई कुछ तस्वीरें जो वक़्त ने खींच ली होगी और तुम्हारा ही नाम पढ़ रह...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
किल्लोल
24

अमरबेल की तरह

दिल के शज़र कीइक शाख़ पेइक रोज़रख दिया था बेचैनी नेतेरी याद काइक टुकड़ाऔर आज़दिल के शजर कीकोई शाख़ नहीं दिखतीतेरी याद ने ढ़ाँक लिया हैअमरबेल की तरहअब वहाँदिल नहीं हैसिर्फ तेरी याद है...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
किल्लोल
25

एहसास की डोलची

दिल के कमरे में अबवीरानी पसर चुकी हैख़्वाबों की अलमारीकब से पड़ी है खालीउम्मीदों की तस्वीरों नेखो दिए हैं रंग अपनेआस की खिड़की भीअब कभी नहीं खुलतीअश्क़ों की नमी से ऊग आई हैएक कोने में यादों की का...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
किल्लोल
28

इक तेरे जाने के बाद

हर शाम ग़मगीं सीहर सुबह उनींदी सीहर ख़्याल खोया साइक तेरे जाने के बादहर वक़्त बिखरा साहर अश्क़ दहका साएहसास भिगोया साइक तेरे जाने के बादहर दर्द महका साहर वक़्त तन्हा साहर ख़्वाब रोया साइक तेरे जान...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
किल्लोल
24

शब्द बिखर जाते हैं

अक्सर शब्द बिखर जाते हैंकोशिश बहुत करता हूँ, किशब्दों को समेट करकोई कविता लिखूंपर ये हो नहीं पाताकोशिश बहुत करता हूँ किएहसास समेट कर रखूंपर ये हो नहीं पातातकिये पर बिखरे अश्क़ों की तरहअक्सर ...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
किल्लोल
27

शायद तुम नहीं जानती

शायद तुम नहीं जानतीमैंने रोक रक्खा है पलकों के भीतरआंसुओं के समंदर में उठने वाले ज्वार कोबनाकर यादों का तटबंधकुछ लहरें फिर भीतोड़ देती हैं तटबंधऔर तन्हाई के साहिल पेछोड़ जाती हैं नमक के किर...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
किल्लोल
25

ज़िन्दगी मुस्कुरा दी

साँसों ने चाहा ओ'दिल ने दुआ दीमिला साथ तेरा ज़िन्दगी मुस्कुरा दीसोचा था भुलाऊंगा यादों को तेरीमगर याद ने सारी दुनिया भुला दीग़ज़ब कर दिया मेरे एहसास ने भीमुहब्बत को तन्हाइयों की सज़ा दीवही कह रह...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
किल्लोल
31

सौग़ात हो गई

पल भर तुमसे बात हो गईख़ुशियों की सौग़ात हो गईदुश्मन है इन्सां का इन्सांकैसी उसकी जात हो गईआँखों में है एक कहकशांअश्कों की बारात हो गईवक़्त, वक़्त ने दिया ही नहींबातें  अकस्मात  हो  गईजख़...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
किल्लोल
30

सोया हुआ ज्वालामुखी

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); हलचल सी मची हैउम्मीदों की बस्ती मेंगिरने लगे हैंतमन्ना के झुलसे हुये शजर कुछ ही देर में ढाँक लेगाअहसास के आसमां कोपिघले हुये ख़्वाबों कालावा और गुबारक्योंकि आँखों ...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
किल्लोल
31

न सोई आँखें

ख़्वाब जिसके तमाम उम्र संजोई आँखेंउसकी यादों ने आंसुओं से भिगोई आँखेंतेरे ख़्वाबों की हर एक वादा खिलाफी की कसममुद्दतें हो गई है फिर भी न सोई आँखें (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); जिक्र छेड़ो न अभी यार तुम ज...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
किल्लोल
31

लम्हा-ए-विसाल था

शबे-वस्ल तेरी हया का कमाल था सुबह देखा तो आसमां भी लाल था  (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});  कटे हैं यूँ हर पल ज़िन्दगी के अपने नफ़स नफ़स में वो कितना बवाल था  जवाब देते अहले-जहां को, तो क्या तुझी से बा...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
किल्लोल
27

प्यार आपका मिले

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); गुलों की राह के कांटे सभी खफ़ा मिलेमुहब्बत में वफ़ा की ऐसी न सज़ा मिलेअश्क़ तो उसकी यादों के क़रीब होते हैंतिश्नगी ले चल जहाँ कोई मैक़दा मिलेकहूँ कैसे मैं कि इस शहर-ए-वफ़ा में मुझ...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
किल्लोल
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अधिकार याद रहे कर्तव्य भूल गए

15 अगस्त को भारत वर्ष में स्वतंत्रता दिवस बड़े ही हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाया जाता है। हर्ष इस बात का कि इस दिन हमें आजादी मिली और धूम इस बात की कि अब हम पूरी स्वतत्रंता से अपनी मनमानी कर सकते है...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
किल्लोल
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महके है तेरी याद से

तूफ़ान में   कश्ती  को उतारा नहीं होताउल्फ़त का अगर तेरी किनारा नहीं होताये सोचता हूँ, कैसे गुजरती ये ज़िन्दगीदर्दों का जो है, गर वो सहारा नहीं होतामेरी किसी भी रात की आती नहीं सुबहख़्वाबों को अ...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
किल्लोल
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