संदीप यादव
कही-अनकही की पोस्ट्स
कही-अनकही
7

पहिली पानी

      बंशी को—आॅपरेटिव बैंक से सीधे अपने खेत आ गया था। घर जाकर अपनी घरवाली धनकुंवर के आगे मुंह दिखाने का साहस उसमें न था। क्योंकि मैनेजर ने आज जैसी जिल्लत उसके साथ की थी, वैसा गोविंद ने भी अप...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
कही-अनकही
6

पैसे के गुलाम

आर्थिक और राजनीतिक स्वतंत्रता को जोड़कर देश—विदेश के सैकड़ों बुद्धिजीवियों ने सिद्धांतों के जुमले गढ़े हैं। इन सिद्धांतों को हमारे लोकतंत्र, खासकर विकेंद्रीयकरण के बाद इसकी आधारभूत इकाई ...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
कही-अनकही
5

कश्मीर मांगोगे तो साला चिर देंगे

मोबाइल, इंटरनेट, टेक्नोलॉजी, ऊर्जावान युवा... विकसित होता दिखाई देता देश. पर हम आखिर जा कहाँ रहे हैं. क्या ऊर्जा समाज को आइना दिखाकर रोशन कर रहा है या मोहरा बनकर सिमट जाना चाह रहा है. दूसरी ओर, देश ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
कही-अनकही
9

उनको करने दें ये हमारा काम नहीं:—

ये हम जो थोड़े—थोड़े इकॉनॉमिस्ट हैं, थोड़ा पॉलिटिशियंस हैं और थोड़ा बुद्धिजीवी का कीड़ा जो बैठा है खोपड़िया में ठोनकतेच रहता है बीच—बीच में। इस अलकरहा टाइप के दर्द को भूलाने कोई मोदी भक्त बन...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
कही-अनकही
3

इस सीने में भी धड़कता होगा एक दिल

     हाल ही में मैंने “सर्वश्रेष्ठ हिंदी कहानियां (२०००-२०१०) पीडीऍफ़ फोर्मेट” में वंदना राग की लिखी कहानी यूटोपिया पढ़ी है, जिसमें एक दक्षिणपंथी विचारधारा से अतिरंजित नवयुवक की कुंठाओं को ...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
कही-अनकही
2

विकास: दिखाने के लिए (पर्यावरण को तो बख्श दो)

आमतौर पर हम सरकारों को सरोकार के प्रति संवेदनशीलता और संवेदनहीनता के तराजू पर तौलते हैं. अब इसका पैमाना विकास हो गया है. लेकिन एक सवाल पर गौर फ़र्माइएगा कि सत्ता पर बैठा सख्श क्या सचमुच विकास क...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
कही-अनकही
1

हां मैं दल-बदलू हूँ

               हां मैं गाँव का वही गंवार हूँ, जिसे गरीबी की सोंधी मिटटी ने जहां ममत्व का खजाना दिया तो उसी ने वो औकात भी दिखाया जहां से महलों की एक-एक सीढ़ी कदमों को बौना कर देता है. कोरबा ...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
कही-अनकही
4

गरीबों के सब्र का ‘चीर हरण’

"नईदुनिया के पत्रकार दिलीप यादव के FB वाल से साभार"कभी एक-एक एक प्याली चाय बेचने वाले पीएम नरेंद्र मोदी गरीबी को नजदीक से समझते ही नहीं, बल्कि गरीबी का दंश भी झेल चुके हैं. लोकसभा चुनाव के दौरान ‘...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
कही-अनकही
2
कही-अनकही
2

मेरा संक्षिप्त जीवन परिचय

कलम का एक नन्हा सिपाही हूं, जो जाने अनजाने मुझसे जिंदगी के फलसफों और अनुभवों को कागज से मेल कराकर नए-नए कैनवास बनवाते रहता है। मेरा बचपन कोरबा जैसे शहर से लेकर करुमहूं(karumahun) जैसे छोटे से गांव के ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
कही-अनकही
6
 
Postcard
फेसबुक द्वारा लॉगिन  
हो सकता है इनको आप जानते हो!  
Rajesh Kumar
Rajesh Kumar
,India
W
W
,India
Dr. Bandana Prasad
Dr. Bandana Prasad
AIZAWL,India
nitin jatt
nitin jatt
up,India
Rashmi Gupta
Rashmi Gupta
Bilaspur,India
Mahesh Singh
Mahesh Singh
delhi,India