Bol Skhee Re ( साहित्यिक सरोकारों से प्रतिबद्ध ) की पोस्ट्स

मांग का मौसम

प्रेम की मूसलाधार बारिश से हर बार बचा ले जाती है खुद को,वो तन्हा है........ है प्रेम की पीड़ा से सराबोर,नहीं बचा है एक भी अंग इस दर्द से आज़ाद.जब-जब बहारों का मौसम आता है,वो ज़र्द पत्ते तलाशती है खुद क...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
Bol Skhee Re ( साहित्यिक सरोकारों से प्रतिबद्ध )
3

बेटी का आना

7 दिन पूर्व
Bol Skhee Re ( साहित्यिक सरोकारों से प्रतिबद्ध )
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खान मजदूरों का शोकगीत

भारत में झरिया को कोयले की सबसे बड़ी खान के रूप में जाना जाता है जो की ईंधन का एक बड़ा श्रोत है। ये देश में ऊर्जा के क्षेत्र से  होने वाले आर्थिक विकास में महर्वपूर्ण भूमिका निभाता है। परन्तु ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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"ग्राहक"लघुकथा

रांची से जमशेदपुर आने में यही कोई दो- ढाई घंटे लगते थे हमेशा। सोचा था १०- ११ बजे रात तक घर पंहुच जाऊंगा। उस दिन जैसे ही चांडिल पार किया ट्रकों की लम्बी लाइन लगी थी रोड पर। लोगों से पूछा तो ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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अगले साल फिर दो अक्टूबर आने वाला है!

आज मोचीराम ने जूतों पर पोलिश नहीं की, चेहरे  पर पोलिश लगाए घूम रहे हैं,हंस रहे हैं....हे हे हे हो हो हो .....जूतों को क्या चमकाना! जब चेहरों की चमक गायब है,फटे जूतों को सिलकर क्या होगा:उतने में नए खरीद...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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मै खड़ा हूँ

चाहता हूँ तुम्हे लिपिबद्ध कर लूं न जाने कब छिटक कर दूर हो जाओकिसी भूले-भटके विचार की मानिन्द,मै खोजता ही रहूँ तुम्हेचेतना की असीमित परतों में....तुम्हारी लंबित मुलाकातों मेंतुमसे ज्यादा;तुम्...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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मै खड़ा हूँ

चाहता हूँ तुम्हे लिपिबद्ध कर लूंन जाने कब छिटक कर दूर हो जाओ,किसी भूले-भटके विचार की मानिन्द,मै खोजता ही रहूँ तुम्हे;चेतना की असीमित परतों में....तुम्हारी लंबित मुलाकातों में तुमसे ज्यादा;तु...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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ओ बेआवाज़ लड़कियों !

बेआवाज़ लड़कियों !उठों न, देखो तुम्हारे रुदन में........कितनी किलकारियां खामोश हैं.कितनी परियां गुमनाम हैंतुम्हारे वज़ूद में.तुम्हारी साँसेलाशों को भीज़िंदगी बख़्श देती हैं....ओ बेआवाज़ लड़कियों!एक बार...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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कौन है 'वो'

1. आज उसने अपना दर्दरोटी पर लगाया और चटकारे ले ले कर खाए,गुस्से को चबा- चबा कर हज़म कर गयी भूख इतनी थी कि निगल गयी अपना अस्तित्व चुपचाप,अब बंद पडी है बोतल के अन्दर जब कोई ढक्कन खोलेगा!समझ जाएगा उस...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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कहानी- दाग ही तो है

बहुत दिनों बाद आज जीन्स पहन कर घर से निकली थी। जीन्स में जो कम्फर्ट मिलता था वो किसी और ड्रेस में नहीं था। मन थोड़ा खुश था, उन्मुक्त , एक अलग एहसास। सोचा थोड़ी दूर पैदल चल कर अगले बस स्टाप से बस पर पक...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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आवाज़ कौन उठाएगा?

मेरे शब्दों  का रंग लाल है रक्तिम लाल!जैसे झूठी मुठभेड़ में मरे  निर्दोष आदमी का रक्त....जैसे रेड लाइट एरिया में पनाह ली हुई....... औरत के सिन्दूर का रंग. जैसे टी बी के मरीज का खून .....जो उलट दे...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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दूसरी औरत से प्रेम

वो जो चली गयी है अभी अभी तुम्हे छोड़कर,है बड़ी हसीन !जैसे नए बुनकर की उम्मीद,उँगलियों से बुने महीन सूत के जोड़ सी। जब भी तुम चूमना चाहते हो मुझे,उसके होंठ..... मुझे तुम्हारे होठों पर नज़र आते हैं;औ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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तुम्हारा उपहार

आज तुम्हारी रजिस्ट्री मिली है मुझे,कुछ प्यार के आभूषण हैं कुछ सपनों की पोशाकें,वही जो तुमने अपनी दहलीज़ के नीचे दबा रखी थीं. मैंने तुम्हारे उपहार पहन लिए है,देखो न कैसी लग रही हूँ?वैसी ही न!जैसी ...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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स्कूल में बच्चे की ह्त्या - २ कवितायें

1.ये जो तुमने मौत ओढ़ाई है मुझेकितनी लाचार है अपनी कोशिशों में.मै तो अब भी ज़िंदा हूँ तुम्हारे खून से सने हाथों में ,तुम्हारे दुधमुहे बच्चे की बोतल में मेरी साँसे बंद हैंऔर तुम्हारी पत्नी की मुस्...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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माँ का होना-न होना

तुम्हारा जाना बहुत अखर रहा है माँ!अनुपस्थिति है फिर भी है उपस्थिति का एहसास. होने न होने के बीच डोलते मनोभाव!कैसे कहूँ! तुम थीं तो सोचता था कब आयेगा तुम्हारा वक्त,बिस्तर साफ़ करना,धोना, पोछना, न...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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हम प्रेम पगी बाते छेड़ें

कुछ हल्की- फुल्की बातें हों कुछ नेह भरी बरसातें हों कुछ बीते जीते लम्हे हों कुछ गहरी- उथली बातें हों.कभी हम रूठा -रूठी खेलें pic credit google कभी हम थोड़ीे मनुहार करें कभी आपा -धापी भूल  च...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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हम सफेदपोश!

आओ न थोड़ी सादगी ओढ़ लेंथोड़ी सी ओढ़ लें मासूमियतकाले काले चेहरों पर थोड़ी पॉलिश पोत लेंनियत के काले दागों हो सर्फ़ से धो लें.उतार दें उस मज़दूर का कर्जजो कल से हमारे उजाले के लिए आसमान में टंगा हैभ...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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गौरी लंकेश की मौत पर (On the death of Gauri Lankesh)

तुमने एक सच को मारना चाहा वो तुम्हे मरकर भी अंगूठा दिखा रहा है!कलम है, रुक नहीं सकती शब्द मौन नहीं हो सकते कितनी ही कर लो कोशिश दबा लो गला काट दो नाड़ी विक्षिप्त घोषित कर दो ओढा दो कफ़न दफ़न नहीं कर स...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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तुम मेरा मधुमास बन कर लौट आओ!

लौट कर आओ ज़रा सा मुस्कुराओचाँद- तारों को हंथेली में छुपाओ और कह दो रात ये सूनी न होगीउन नयन में दीप्ति मेरी गुनगुनाओ तुम मेरा मधुमास बन कर लौट आओ.मै अकेला ही रुका था बाँध पर जब तुम नदी सी बह चली थ...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
Bol Skhee Re ( साहित्यिक सरोकारों से प्रतिबद्ध )
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स्टेशन वाले मास्टर जी

pic- googleआपको देखकर उस दिन आपको बहुत डर लगा था मुझे. पता है क्योँ ? मुझे लगा आप मेरी पूरे दिन की मेहनत नाले में फेंकने आये है. आपके घर के पास खाली बोतलें, प्लास्टिक की थैलियाँ, कुछ कबाड़ में बिकने वाली च...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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सेल्फी में चमकता देश

picture - google मेरे चहरे पर ये जो उदासी देख रहे होमेरी ही पीड़ा नहीं है इसमेमेरी आँखों में थोड़े से आंसू सीरिया के उन बच्चों के भी है;जिन्होंने पैदा होने  के बाद सिर्फ बारूद का धुंआ देखा है,मेरी उफ़्फ़...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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सागर हो कर क्या कर लोगे?

एक था सागर भरा लबालबप्यास के मारे तड़प रहा था,इतनी थाती रखकर भी वोबूंद - बूंद को मचल रहा था,नदिया ने फ़िर हाथ मिलाया,घूंट-घूंट उसको सहलाया,उसके खारे पानी में भीअपना मीठा नीर मिलाया.दोनो मिलकर एक ...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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डरो मत!

हर रोज गुजराती हूँ इस राहकभी डर नहीं लगाफिर भी कहते हैं लोगसंभल कर जाना,न जाने कब धमक पड़े बनबिलाव सरे आम,भूख मिटाने के लिए तोड़ने लगे तुम्हारा जिस्म।हाथ में पीसी मिर्च जरूर रखना,दिखे कोई जंगल...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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एक टूटी कहानी

एक राह चुनी थीकुछ कदम चली थीकुछ मान था  तेराकुछ साथ था मेराहम संग बढ़े  थेहम संग लड़े थे।कुछ काली रातेंकुछ चुभती बातें ,कुछ शब्द लुटे सेकुछ ज़ख्म हरे सेवो बात पुरानीक्यों हमने जानी?न कुछ काला थ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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बिक गये तुम!

2 माह पूर्व
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#RAAM RAHEEM, #राम रहीम

राम और रहीम दोनों ने मर्यादा में रहना सिखाया,समाज के नियमों का हमेशा पाठ पढ़ाया,जब जब मानवता पर आंच आयीदोनों ने इंसान को कमर कसना सिखाया।अब न राम की मर्यादा है, न रहीम की इंसानियतसाधुओं में भर ग...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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#अपना #पराया

2 माह पूर्व
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बुद्द बक्शे में बंद सुंदरियों!

टी. वी. सीरियल की अच्छी बहुओं,अरे कभी तो थको अपनी झूठी मुस्कराहट से,कभी तो दिखाओ कि तुम इंसान हो देवी नहीं,दूसरों को खुश करने का ठेका नहीं ले रखा है तुमने,तुममे भी हैं जान- प्राण।तुम्हें देख-देख क...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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