राधे गोपाल
राधे का संसार की पोस्ट्स

बाल कविता "कोयल " ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )

 बाल कविता "कोयल "पतझड़ का अंत हो रहाचारों ओर बसंत हो रहाफूल खिल रहे गुलशन गुलशन झूम रही तितली वन उपवन कोयल की है शान निराली गाती है होकर ...  और पढ़ें
11 घंटे पूर्व
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ग़ज़ल "तेरी यादों का मंजर" ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )

तेरी यादों का मंजरचली गंगा चली यमुना बनाने को समुंदर है भुलाया जो नहीं जाता वही यादों का मंजर है बनेंगे काम सारे ही, अगर हो हौसला मन मेंकोई ना भूलता जिसको ...  और पढ़ें
1 दिन पूर्व
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गीत "खेतों की शान " ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )

खेतों की शान हरी भरीहरियालीदेखोअबखेतोंकीशानहोरही वर्षाकीबौछारधानकेलिएआजवरदानहोरहीस्वर्णकणोसीचमकरहीहै अबधानोंकीबालीखुशहोरहेकिसानसभीअबसुधरेगीहालतमालीकालीघटागगनमेंअब...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
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ग़ज़ल गीत "रास्ता नेकी का है तुम को दिखाया"( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )

रास्ता नेकी का है तुम को दिखायायुवा नशे में आज क्यों अब खो रहा है? आने वाली पीढ़ी को क्या हो रहा है? गेहूं चावल बेचकर तुमको पढ़ाया,तुमको गीत...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
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मुक्तक ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )

 मुक्तक   तुम्हारे पास आकर के मेरे सब काम होते हैं भजु हनुमान को जब भी तो आगे राम होते हैं किया जिसने भी इस जग में समय पर काम सब पूरा...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
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ग़ज़ल "दिलों में पुल बनाओ भी"( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )

दिलों में पुल बनाओ भीकभी मेरी सुनो दिलबर कभी अपनी सुनाओ भी। जो कहती दिल की हर धड़कन मुझे इतना बताओ भी ।।उजाला कर रहा दिनकर हमेशा ही जमाने ...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
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ग़ज़ल"मचलता रहा है वो"( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ),

मचलता रहा है वोमुझे याद करके रात दिन सिसकता रहा है वो। घनघोर घटा बनकर बरसता रहा है वो।। वह अदाओं से लुभाता है मुझको। आंखों में बन के नूर ...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
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ग़ज़ल "खूबसूरत ख्याल लिखती हूँ "( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )

 खूबसूरत ख्याल लिखती हूँ खूबसूरत ख्याल लिखती हूँ फिर मैं अपना ही हाल लिखती हूँँ अनगिनत दे रहे हो तुम तो जवाबमैं हमेशा ही उलझे सवाल लिखती ह...  और पढ़ें
7 दिन पूर्व
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दोहे "दिखता नहीं जमीर""( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ),

 आधी धरती बन गई, इंसा की जागीर l धन दौलत तो दिख रही, दिखता नहीं जमीरll नजरों से नजरें मिली, हुई नजर से बातl अपनों की नजरें फिरी, हुई दिवस में रात...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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दोहे "वट पीपल की छाँव" ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ),

तम को हरदम ही हरे, नन्हा माटी दीप l अँधियारे में राखिए, दीपक आप समीप ll सभी खोजते आज तो, वट पीपल की छाँव l  जिनमें शीतल छाँव है, नहीं रहे वो ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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दोहे "मिट्ठू राम "( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )

मिट्ठू राम  शुकः कहो तोता कहो, या फिर मिट्ठू राम ।हर पल ही जपता रहे, मन से वह हरि नाम।।नहींसुरक्षितअबरही ,बेटीरक्षितआज।बेटोंकेप्रतिहोरहा, अर्पितसकलसमा...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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निर्भया( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )

निर्भया  निर्भया के साथ जो कुछ था हुआउसने तो पूरी धरा को था छुआ रात का अंधियार अब भी बोलता है ईमान निशा काल में क्यों डोलता है कर ले तू&n...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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गीत "हिंदी की बिंदी" ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )

 हिंदी की बिंदी भारत में रहने वालों हिंदी पर अभिमान कीजिए अपनी भाषा बोली पर इस जीवन को बलिदान कीजिए साल में केवल इक दिन लोगों क्यों करते हिंदी को याद खामोशी से  तड़प रही है करती है हिं...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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दोहे "हिन्दी है सबसे सरल" (राधा तिवारी "राधेगोपाल")

हिन्दी ने कितने किये, पार यहाँ सोपान।संस्कृत, पाली-प्राकृत, से पाया सम्मान।।हिन्दी भाषा को नहीं, मिला अभी सम्मान।शासन-शिक्षा में नहीं, बनी अभी तक शान।।आपस में सम्पर्क का, हिन्दी है आधार।हिन्...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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दोहे "कलम सदा चलती रहे"( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )

 कलम सदा चलती रहेदोहे मैं तो लिख दिए, मैंने राधेश्याम। कलम सदा चलती रहे, राधे की अभिराम।। धाम धरा धन छोड़कर, जाए वन की ओर। संत जनों ने छोड़&n...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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दोहे "कारागार "( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ),

कारागार जन्मे कारागार में ,बनकर अष्टम पूत। कैसे बाहर आ गए, दिखते नहीं सबूत।।रंग तेरा है सावला, चेहरा गोल मटोल ।लट घुंघराले बाल है, तुतले तुतले बो...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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दोहे "मेरे तो गोपाल"( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )

 मेरे तो गोपालहीराअपनेमोलका, नहींमचाताशोर। लेकिनअपनीचमकको, चमकाताचहुओर।।साथनिभानेकेलिए, रखनामनमेंचाह।जहाँचाहहोतीवहाँ, मिलजातीहैराह।।सच्चाईकेमार्गपर, चलनाकदमबढ़ाय।नेकइराद...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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बेटी( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ),

 बेटीघरआंगनमेंदौड़केआतीहैबेटी मात- पिताकोसदालुभातीहैबेटीथककरजबआतेहैंपापाघरअपनेहँसकेउनकातापमिटातीहैबेटीबीमारअगरमाँहोजातीकभी-कभीशीघ्रचिकित्सालयलेजातीहैबेटीजन्मदिवसबेटीक...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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वृद्धाश्रम( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ),

वृद्धाश्रमवृद्धाश्रम क्यों अपने मां बाप छोड़ते होसेवा से उनकी अपनी क्यों राह मोड़ते होप्यार लुटा कर सारा बचपन में जिसने पालाभूख लगी तो अपने मु...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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ग़ज़ल "फरियाद"( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )

 फरियादखुदा से भी अभी मेरी ये एक फरियाद बाकी हैजिसे मैं भूलना चाहूं वही एक याद बाकी है चली हूँ  जब डगर अपनी तुझे मुड़ मुड़ के देखा है अ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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राधे की परछाई ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )

राधे की परछाई डूबने को दिल है मेरा तेरे प्यार में इसमें तू बता दे कि कितनी सच्चाई है देख लूँ  मैं ख्वाब में तुझ को करीब से नैनों ने अब ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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"अध्यापक दिन" ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )

जीवन भर करते रहो, गुरुओं से संवाद। अध्यापक दिन पर करें, हम गुरुओं को याद।।द्वापर युग में हुए थे, शिक्षक द्रोणाचार्य। राजकुमारों के लिए, किया उन्होंने कार्य।। अध्यापक जब साथ हो, हो जाती है जीत।...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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खुशबू उसी की है ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ),

खुशबू उसी की हैजो बस गई है मुझ में वो खुशबू उसी की हैजी रही हूं  जिंदगी वो भी उसी की है रहता है आसपास मेरे साथ में सदा हंसते हुए लबों ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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दोहे "श्री कृष्ण भगवान" ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )

श्री कृष्ण भगवान जन्मे कारागार में, मेरे को गोपाल। माता उनकी देवकी,  वो हैं नंद के लाल।। असुरों का था वध किया, उसने बालक काल। रूप अनेको दिख र...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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कान्हा ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ),

कान्हा मेराकान्हा मेरा जग से न्यारा ये है सबकी आंख का तारा मनाते जन्मदिवस सब मिलकर माखन मिश्री खाते हंसकर संग तेरे हैं दही की प्यालीतेरी हर ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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ग़ज़ल "बचपना"( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ),

बचपनाजो महकना चाहते हैं उनको महकने दीजिएबाग उपवन में सदा दिल को चहकने दीजिएहो रही वर्षा छिपे हैं ताल में दादुर सभीखेत और खलिहान में भी उनको म...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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दोहे "जल की भोली मीन" ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ),

जल की भोली मीन सभी खोजते आज तो, वट पीपल की छांव l  जिनमें शीतल छांव है, नहीं रहे वो गांव ll रिश्तो में मिलता सदा   , हम को आदर प्यार l रिश...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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आंखों में ख्वाब ( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ),

आंखों में ख्वाबआंखों में ख्वाब सुख के हो,   कोई न हो नमी। आपस में सबसे मित्रता हो, ना हो दुश्मनी।। ग़म -ए-दौर आएंगे और आके जाएंगे। जीने की तो&nb...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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शीश झुका( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ),

शीश  झुका आओ शीश  झुका कर हम सब, ईश्वर का गुणगान करें ।जिसने सूरज चांद बनाए ,उनका हम सम्मान करें ।।काली रातों में दे दिया, जिसने चमकीले तार...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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इस शहर में( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )

 इस शहर मेंइस शहर में कोई एक रहता है कुछ कुछ बातें वह हमसे नेक कहता हैजब भी उदास रहतीमैं याद उसको करतीयादों में उसके जीती जी जी के रोज ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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