Dr. Hari Mohan Gupt की पोस्ट्स

फर्ज

मुर्गा जो बांग दे कर, सुबह  सबको जगाता है,शाम को प्लेट में सजकर, सदा को सो जाता है,उसके उत्सर्ग का यह हश्र होगा, वह क्यों सोचे ?जगाने  का फर्ज  है उसका, वह  तो निभाता है l ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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माँ वाणी

माँ वाणी मुझ पर रखो, सदा दाहिना हाथ,कृपा अनवरत ही रहे, सदा रहो तुम साथ l              लेखन में गति हो सदा, ऐसा हो अभियान,             गागर में सागर भरूँ, जग का हो कल्या...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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श्रृद्धांजलि

राष्ट्र कवि श्री मैथिली शरण गुप्त=सुप्त राष्ट्र जाग्रत करने में, कौन  था उनके सद्दश,उद्घोषक, युग द्दष्टा का  ही, फैलता  जाता सुयश.यह रहा इतिहास कवि  ही, राष्ट्र का  प्रेरक रहा है,राष्ट्र ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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श्रद्धांजलि

श्रद्धेय श्री नीरज को श्रद्धांजलिजिन्दगी  का मौत  से  ऐसा  लगाव  है,बदले हुये  लिवास  में  आना स्वभाव है.थककर सफर में कोई सुस्ताने लगे पथिक,मैं  सोचता  हूँ  मौत  ही  ऐसा  पड...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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करे तीर का काम,

                      मिथ्या आग्रह, कटुवचन, करे तीर का काम,                      स्वाभाविक यह प्रतिक्रया, उल्टा हो परिणाम                          ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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अब पुराना होरहा है यह मकान

 अब पुराना हो रहा है यह मकान,                    देखो खिसकने लगीं ईटें पुरानी,                    झर रहा प्लास्टर कहे अपनी कहानी।     &nbs...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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मिले राम का धाम

राम चरण रज पा सके, कविश्री “तुलसीदास”,चरण वन्दना हम  करें, राम  आयंगे  पास l                                            रामचरित मानस लिखा,...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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कर्म किये जा,

 धर्म आचरण का पालन कर, धर्म जिये जा,अहंकार को  छोड़, छिपा यह  मर्म जिए जा.काम, क्रोध, मद, लोभ, सदा से शत्रु रहे हैं, फल की इच्छा क्यों करता, तू कर्म किये जा. ...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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पारस मणि श्री राम

                        पारस मणि श्री राम हैं, सत्संगति संयोग,                        कंचन मन हो आपका,करलो तुम उपयोग l                 राम नाम की ओढनी, ...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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जितनी कम जिसकी इच्छाएं

जितनी कम जिसकी इच्छायें, उसकी सुखी  रही है काया,विषय भोग में लिप्त रहा जो, उसने दुख को ही उपजाया.सब ग्रन्थों का सार यही है, सुख दुख की यह ही परिभाषा,तृष्णा, लोभ, मोह को छोड़ो, संतों ने  यह  ही दुह...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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सामर्थ है तुममें

फौलाद की   चट्टान को भी फोड़ सकते हो,कोई कठिन अवरोध हो तुम तोड़ सकते हो l तुम युवा हो, बस इरादा नेक सच्चा चाहिये,सामर्थ  है तुम में, हवा रुख मोड़ सकते हो l ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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कवि

कवि ही ऐसा प्राणी है जो, गागर में सागर को भरता केवल वाणी के ही बल पर, सम्मोहित सारा जग करता,सीधी, सच्ची, बातें कह कर, मर्म स्थल को वह छू लेता आकर्षित हो जाते जन जन, भावों में भरती है दृढ़ता l ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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राम कथा

राम कथा अमृत कथा, विष को करती दूर,विषय वासना हट सके, यश मिलता भरपूर l                   राम कथा जिसने लिखी, लिया राम का नाम,                  राम रंग  मे...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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थलचर प्राणी

नभचर,जलचर,जब खेमों में नहीं बंटे हैं,थलचर प्राणी क्यों आपस में लडे कटे हैं,हम में हो सदभाव, सियासी दांव न खेलें,मिल कर रहना सीख सकें हर जगह डटे हैं  ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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ईद

ईद पर सभी मित्रों को  शुभ कामनाएं,                             आपका                              डा० हरिमोहन गुप्त ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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प्रतिभा शाली

जिसकी बुद्धि प्रखर होती है,वही व्यक्ति मेधावी होता,मेधावी  ही  आगे  बढ़  कर, प्रज्ञावान प्रभावी  होता l अगर विवेकी बनना है तो, बस सत्संग सदा आवश्यक,गुणी, पारखी और विवेकी, वह  ही प्रतिभा श...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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नारी की पीड़ा

जो पीड़ित हो बलात्कार से , इस में उसका दोष रहा क्या ?कब तक वह प्रस्तरवत होगी , पूँछ रही है आज अहल्या ?...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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देश जाग्रत है सदा साहित्य से,

जग प्रकाशित है सदा आदित्य से, हम प्रगति करते सदा सानिध्य से, कोई माने, या न माने सत्य है,देश जाग्रत  है सदा साहित्य से l ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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मेरी कवितायें

जग में जो जन्मी प्रतिभायें,उनकी हों जग में चर्चायें,मिल पाए सम्मान यथोचितउनके हित मेरी कवितायें- डॉ. हरिमोहन गुप्त ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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सेवा भाव

  सेवा भाव समर्पण  ही बस, मानव की पहिचान है,              जिसको है सन्तोष हृदय में, सच में वह धनवान है l              यों तो मरते,और जन्मते,जो भी आया यहाँ धरा पर,कर...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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कल किसने देखा

गद्द लेखन की तुलना में कहानी का प्रभाव अधिक होता है l कहानी पढने में और सुनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है l यदि कहानी पद्द में हो तो और अधिक प्रभावी हो जाती है l“सब सुलझ जाती समस्या , बात नानी ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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जब हम रंग मंच पर जाते.

पहली बार पाँव  कँपते  हैं, जब  हम रंग मन्च  पर जाते,किन्तु सतत अभ्यासी बन जो, कला मन्च का धर्म निभाते l द्दढता,  साहस,  सदाचरण से, तन मन उत्साहित हो जाता,जीवन  में  निर्भीक  रहे  जो, सद...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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नारी चेतना

युग कोई भी रहा हो नारी की स्थिति बराबर की कह कर उसका शोषण ही हुआ है l पुरुषों को अधिकार है कि वह बहु विवाह कर सकता है लेकिन नारी नहीं , यदि उसके साथ बलात्कार हुआ हो तो दोष नारी का ही माना गया और उसे द...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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पाप पुन्य के गणित को,

पाप पुण्य के गणित को, समझ सका है कौन,मन चाही  है  व्यवस्था, शास्त्र हुये  हैं मौन l                                          पंथों  ने बाँटा ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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कटा अंगूठा

   महाभारत के एक पात्र एकलव्य की गुरुभक्ति पर अधिकतर लेखकों ने लिखा है पर अँगूठा कट जाने के बाद उसकी मनः दशा क्या रही होगी इस पर लिखा यह काव्य अपना अलग स्थान रखता है l      आज ‘अर्जुन’ , ‘द...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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साध्वी सीता

न्याय की आँखें नहीं , अपितु कान होते हैं वह दोनों पक्षों को सुनकर अपने विवेक से निर्णय सुनाता है , पर यदि न्यायाधीश के आँख और कान दोनों हों और घटना भी उसी के साथ की हो फिर भी वह दूसरे पक्ष को बिना स...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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कुणाल

विमाता के प्रणय प्रेम के अस्वीकार करने का दण्ड सम्राट अशोक के पुत्र कुणाल को गरम सलाखों से अपने नेत्रों को खो कर भोगना पड़ा l ऐतहासिक प्रष्ठभूमि पर आधारित सत्य घटना है, खण्ड काव्य “कुणाल,ऐक अप्...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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रविदास

पहले भारतवर्ष में वर्ण भेद की समस्या गुरुतर थी l शूद्र अंतिम स्वांस तक अस्पर्श्य का नारकीय जीवन जीते थे , पर 14 वीं शातब्दी के मध्य में शूद्र रविदास अग्रगण्य संतों में गिने गए l  एक महान संत एवं ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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भाग्यहीन

    महाभारत में कर्ण भी एक पात्र है जिसे राजपुत्र होने पर भी शूद्र का जीवन व्यतीत करना पड़ा था क्योंकि वह कुँवारी माँ कुन्ती का पुत्र था और उसे नदी में प्रवाहित कर दिया गया था l जिसे शूद्र कुल क...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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