Dr. Hari Mohan Gupt की पोस्ट्स

रावण,

 रावणईर्ष्या,द्वेष,दम्भ धरा अगर रहेंगे,तो फिर अहंकार का रावण यहीं रहेगा |शोषण, अनाचार से जो लंका बसायगा, व्यक्ति स्वयं ही अपना कोष भरेगा |     पौराणिक आख्यान भले ही कथा सार हो,     यद...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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करो मेहनत,

तुम करो मेहनत अभी से, लक्ष्य हो परहित तुम्हारा,देश की  हो  सहज सेवा,  धर्म  होता  है  हमारा |एक जुट हो कर  करेंगे, फल तभी  हमको मिलेगा,है यही उद्देश्य सबका, हो,  प्रगति  ढूढें  किनार...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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सलाह,

 यात्रा पर जब जा रहे , कुछ बन जाते ढाल,            नाम, पता,कुछ फोन के, नम्बर रखें सँभाल              हस्ताक्षर ही  तब  करें, पढ़े  उसे  इक बार,       &nbs...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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काम की बातें

आप प्रशंसा तो करें, जिससे हो तकरार,बस प्रभाव तब देखिये, माने वह उपकार |           क्षमा करें इक बार ही, किन्तु नहीं दो बार,           दया व्यर्थ हो जायगी, क्षमा किया हर बा...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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काम के दोहे,

           घर में  यदि व्यंजन बने, रखो  पड़ोसी ध्यान,           सुख मिलता है सौ गुना, बनती निज पहिचान |मन में आये माँग कर, वाहन सुख का ख्याल,ईधन  पूरा  भरा  कर,   लौटाओ &nbs...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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जीवनोपयोगी बातें,

सब बुराई ही खोजते,अच्छा देखें आप,              उसका प्रतिफल देखिये, पड़े अनूठी छाप |जब बुराई हम देखते, मन में हो संताप,               अच्छाई  तो  देखिये,  बड़े  बनेगें  आप | ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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काम की बातें,

कुछ बातें हैं काम की, इनको करिये रोज,उनका फल फिर देखिये, आप मनाएं मौज.          कुछ मित्रों के जनम दिन, अगर आपको याद,          उसे  याद उस दिन करें,  वह भी देगा दाद.    &n...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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लघु कथा

 लघु कथा  आनन्दप्रकाश को महानगर में आये अभी दस ही वर्ष हुये थे, इन्हीं वर्षों में उन्होंने अपना कारोबार बढ़ा लिया और नगर में ऐक अच्छी कोठी जिसमें कई फलदार वृक्ष थे बनवा ली थी, बेटा अच्छे स्कू...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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करें हम जागरण

जब कभी भी यदि बिगड़ते आचरण,स्वार्थ लिप्सा का तने यदि आवरण l                                                  तो  आज मानव धर्म ...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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पापों का परिणाम जनता,

पापों का  परिणाम जानता, व्यक्ति मृत्यु से  है  घवड़ाता , व्याकुल हो  डरता रहता है, इसीलिये  हर  क्षण पछताता. धर्म, कर्म, सत्संग करोगे, तो भविष्य  भी  होगा उज्ज्वल, यदि यह हो विश्वा...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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आपका दिल

इस सदी में, आपके चेहरे  पे  भी मुस्कान है,पूंछता हूँ,दिल तुम्हारा क्या बना पत्थर का है ?...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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उपकारी ही धन्य होते हैं.

फल देतें  हैं  सदा सभी को, वृक्ष नहीं कुछ खाते,धरती   को सिंचित करते ही,बादल फिर उड़ जाते l प्यास बुझाती प्यासे की ही, सरिता लब जल पीती,पर  उपकारी  जो  होते  हैं, धन्य  वही  हो पाते l...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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जहाँ चाह है, वहीं राह है.

इर्ष्या मन में जगे, समझ लो यही डाह है,पाने  की  इच्छा हो मन में, यही चाह है l प्रगति पन्थ पर बढने की जिज्ञासा मन में,सत्य  यही  है, “जहाँ चाह है  वही राह है”l ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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श्रृद्धांजली

श्री पूरन  जी जिला जालौन के प्रसिद्ध कवि एवं रंगकर्मी थे,पूरन जी  अब  नहीं रहे  हैं, कौन किसे  बतलाये,पंचतत्व  में  लीन  हो  गये,  इसे  कौन  झुठलाये.अब तो पूर्ण विराम लग गया, मौन ह...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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भारत रत्न श्री अटल बिहारी बाजपेई सृद्धान्जलि,

भारत रत्न स्मृति शेष श्री अटल बिहारी बाजपेई श्रृद्धांजलिओ महान कवि,युग द्रष्टा,ओजस्वी वक्ता,जो जीवन में, सदा नये रंगों  को भरता.नई दिशा  दी भारत को, आगे बढ़ने की,ओ दधीच! तुम जैसा कोन य्हन्हो स...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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फर्ज

मुर्गा जो बांग दे कर, सुबह  सबको जगाता है,शाम को प्लेट में सजकर, सदा को सो जाता है,उसके उत्सर्ग का यह हश्र होगा, वह क्यों सोचे ?जगाने  का फर्ज  है उसका, वह  तो निभाता है l ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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माँ वाणी

माँ वाणी मुझ पर रखो, सदा दाहिना हाथ,कृपा अनवरत ही रहे, सदा रहो तुम साथ l              लेखन में गति हो सदा, ऐसा हो अभियान,             गागर में सागर भरूँ, जग का हो कल्या...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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श्रृद्धांजलि

राष्ट्र कवि श्री मैथिली शरण गुप्त=सुप्त राष्ट्र जाग्रत करने में, कौन  था उनके सद्दश,उद्घोषक, युग द्दष्टा का  ही, फैलता  जाता सुयश.यह रहा इतिहास कवि  ही, राष्ट्र का  प्रेरक रहा है,राष्ट्र ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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श्रद्धांजलि

श्रद्धेय श्री नीरज को श्रद्धांजलिजिन्दगी  का मौत  से  ऐसा  लगाव  है,बदले हुये  लिवास  में  आना स्वभाव है.थककर सफर में कोई सुस्ताने लगे पथिक,मैं  सोचता  हूँ  मौत  ही  ऐसा  पड...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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करे तीर का काम,

                      मिथ्या आग्रह, कटुवचन, करे तीर का काम,                      स्वाभाविक यह प्रतिक्रया, उल्टा हो परिणाम                          ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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अब पुराना होरहा है यह मकान

 अब पुराना हो रहा है यह मकान,                    देखो खिसकने लगीं ईटें पुरानी,                    झर रहा प्लास्टर कहे अपनी कहानी।     &nbs...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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मिले राम का धाम

राम चरण रज पा सके, कविश्री “तुलसीदास”,चरण वन्दना हम  करें, राम  आयंगे  पास l                                            रामचरित मानस लिखा,...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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कर्म किये जा,

 धर्म आचरण का पालन कर, धर्म जिये जा,अहंकार को  छोड़, छिपा यह  मर्म जिए जा.काम, क्रोध, मद, लोभ, सदा से शत्रु रहे हैं, फल की इच्छा क्यों करता, तू कर्म किये जा. ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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पारस मणि श्री राम

                        पारस मणि श्री राम हैं, सत्संगति संयोग,                        कंचन मन हो आपका,करलो तुम उपयोग l                 राम नाम की ओढनी, ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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जितनी कम जिसकी इच्छाएं

जितनी कम जिसकी इच्छायें, उसकी सुखी  रही है काया,विषय भोग में लिप्त रहा जो, उसने दुख को ही उपजाया.सब ग्रन्थों का सार यही है, सुख दुख की यह ही परिभाषा,तृष्णा, लोभ, मोह को छोड़ो, संतों ने  यह  ही दुह...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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सामर्थ है तुममें

फौलाद की   चट्टान को भी फोड़ सकते हो,कोई कठिन अवरोध हो तुम तोड़ सकते हो l तुम युवा हो, बस इरादा नेक सच्चा चाहिये,सामर्थ  है तुम में, हवा रुख मोड़ सकते हो l ...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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कवि

कवि ही ऐसा प्राणी है जो, गागर में सागर को भरता केवल वाणी के ही बल पर, सम्मोहित सारा जग करता,सीधी, सच्ची, बातें कह कर, मर्म स्थल को वह छू लेता आकर्षित हो जाते जन जन, भावों में भरती है दृढ़ता l ...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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राम कथा

राम कथा अमृत कथा, विष को करती दूर,विषय वासना हट सके, यश मिलता भरपूर l                   राम कथा जिसने लिखी, लिया राम का नाम,                  राम रंग  मे...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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थलचर प्राणी

नभचर,जलचर,जब खेमों में नहीं बंटे हैं,थलचर प्राणी क्यों आपस में लडे कटे हैं,हम में हो सदभाव, सियासी दांव न खेलें,मिल कर रहना सीख सकें हर जगह डटे हैं  ...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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