Dr. Hari Mohan Gupt की पोस्ट्स

जेब से भारी थे, मूंमफली के दाने भी

जेब से भारी  थे, मूंमफली  के दाने भी,कैसे समझाएं हम, अपने अब बच्चों को l ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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यों ही कोई बदनाम नहीं होता

यों ही  कोई  बदनाम  नहीं होता,वे बजह कोई गुमनाम  नहीं होता l गलत इरादे यदि चित्त में हों कभी,तो कोई भी शुभ काम नहीं होता - डॉ. हरिमोहन गुप्त ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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जुगनू जैसा है प्रकाश

 · जुगनू जैसा है प्रकाश बस,मिटा न तिल भर भी अँधियारा ,गर्व बढाया मन में इतना,सूरज को तुमने ललकारा।        यह गर्वोक्ति न ले लो मन में,        तुम्हीं बड़े हो सारे जग में,        यहाँ क...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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योग,यज्ञ,जप,तप

योग,यज्ञ,जप,तप,संकीर्तन,भजन उपासना,सभी व्यर्थ हैं, त्यागो पाहिले अहं वासना l अहंकार से विरत मनुज सुख पाता रहता,तृष्णा ,ममता ,मोह सभी की नहीं चाहना - डॉ. हरिमोहन गुप्त ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
2

समय

हों सजग हम,यही सबको बताना है,करो मजबूत खुद को, यह दिखाना है l हर समय उत्तम समय आता नहीं है,समय को ही हमें उत्तम बनाना है l - डॉ. हरिमोहन गुप्त ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
2

वक्त पर ही तुम

वक्त पर ही तुम बुरी आदत बदल लो,नहीं तो बदल जायेगा तुम्हारा वक्त भी lx- डॉ. हरिमोहन गुप्त...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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जिनका नहीं बहता पसीना

बनो कर्मठ, यही तो सब बताते हैं,बढ़े साहस, यही गुरुजन सिखाते हैं lवक्त पर जिनका नहीं बहता पसीना,मानिये वे सदा, आँसू बहाते हैं l- डॉ. हरिमोहन गुप्त...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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योग

ऐश औ आराम  से  जीवन कटे,  यह भोग है,असंतुलित भोजन करें परिणाम इसका रोग  है l परमात्मा से मन सहज हम जोड़ कर देखें सही,स्वस्थ हो तन मन हमारा,बस यही तो योग है l जीवन  का  यदि सम्यक ढंग से करना है ...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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प्रभु जी, हरते सबकी पीर,

प्रभु जी, हरते सबकी पीर,सभी दुखी हैं, सभी व्यथित हैं,          सब ही बड़े अधीर l काम, क्रोध से जो बच पाते,क्षमा, शान्ति को जो अपनाते,          वे ही सन्त फकीर l लोभ, मोह, माया का च...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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रिश्ते में जो भी अपने थे, देखो, अब सब आम हो गये,

रिश्ते में जो भी अपने थे, देखो, अब सब आम हो गये,कहाँ जानते लोग हकीकत, हमीं यहाँ बदनाम हो गये l              मैने वह ही चादर ओढ़ी, जिसमें अपने पाँव समायें,             चा...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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जग प्रकाशित है सदा आदित्य से

जग प्रकाशित है सदा आदित्य से, हम प्रगति करते सदा सानिध्य से, कोई माने, या न माने सत्य है,देश जाग्रत है सदा साहित्य से l        हरिमोहन गुप्त ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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धब्बा नहीं कोई

कुर्ता मेरा फटा है, पुराना भी बहुत है,पर दोस्त अब  भी साफ है,धब्बा नहीं कोई                  डॉ० हरिमोहन गुप्त l ...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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राम नाम

कुछ करना है जिसे धरा पर, उसे कहाँ विश्राम,सदा कार्य रत रहने से ही मिल सकते श्री राम ,भौतिक युग में आज व्यस्त जीवन है सबका,इतना समय कहाँ किसको है, ले ले जो हर नाम l डॉ हरिमोहन गुप्त ...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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कागज पर ही लुप्त हो गये सारे वादे

 कागज पर ही लुप्त  हो  गये सारे वादे,      और  सामने केवल  उनके गलत  इरादे  ,आदर्शों की कसमें उनकी सभा मन्च तक, अन्तरमन  काले   हैं, ऊपर  सीधे  सादे  - Dr. Harimohan Gupt...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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पढ़ कर,गुन कर,

पढ़ कर,गुन कर, गुण दोषों की करें समीक्षा,समय पड़े पर आवश्यक उत्तीर्ण परीक्षा,लेकिन इतना धीरज रक्खें शांत भाव से,फल पाने को करना पड़ती सदा प्रतीक्षा l डॉ० हरिमोहन गुप्त ...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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प्रेम दिवस

जाने क्यों युवाओ ने प्रेम दिवस को अपने तक सीमित कर लिया है,संत वेलैंताइन ने सभी से प्रेम करने का संदेश  दिया है .......  और पढ़ें
10 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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फल देतें हैं सदा सभी को

फल देतें हैं सदा सभी को, वृक्ष नहीं कुछ खाते,धरती को सिंचित करते ही,बादल फिर उड़ जाते,प्यास बुझाती प्यासे की ही,सरिता कब जल पीती,पर उपकारी जो रहते हैं, धन्य वही हो पाते ,,,,, डॉ, हरिमोहन गुप्त ...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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कवि की पहिचान

देश,परिस्थिति और काल काजिसको रहता ज्ञान,साहस, शोर्य जगाने का ही, जो करता अभियान lवैसे तो वह सरल प्रकृति का,प्राणी है पर-कवि मिटता है आन,वान परयह उस पहिचान lडॉ हरिमोहनगुप्त...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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गागर में सागर को भरता

कवि ही ऐसा प्राणी है जो, गागर में सागर को भरता केवल वाणी के ही बल पर, सम्मोहित सारा जग करता,सीधी, सच्ची, बातें कह कर, मर्म स्थल को वह छू लेता आकर्षित हो जाते जन जन, भावों में भरती है दृढ़ता l डॉ. हरिमोह...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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कविता पाठ सुनाता हूँ..

मित्रो, आज आपको अपनी आवाज़ में एक कविता पाठ सुनाता हूँ... बताइयेगा कैसा लगा... आपकी प्रतिक्रियाओं का इन्तजार रहेगा ....सुनने के लिए नीचे दिए हुए लिंक पर क्लिक करें... Kavita Path - By- Dr. Harimohan Gupt...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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Dr. Hari Mohan Gupt
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आपका मन पवित्र हो

केवल तन ही नहीं आपका मन पवित्र हो,आत्म नियंत्रण, परोपकार उत्तम चरित्र हो,सुख के साथी नहीं दुःख में साथ निभायें बस जिनके आचरण श्रेष्ठ हों वही मित्र हो डॉ. हरिमोहन गुप्त ...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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रूढवादी कर्म को ही त्यागना होगा

रूढवादी कर्म को ही त्यागना होगा हमें कर्म कांडों की क्य्वस्था को बदलना है तुम्हें ....  और पढ़ें
10 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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देश जाग्रत है सदा साहित्य से

जग प्रकाशित है सदा आदित्य से, हम प्रगति करते सदा सानिध्य से, कोई माने, या न माने सत्य है,देश जाग्रत है सदा साहित्य से l डॉ. हरिमोहन गुप्त ...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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किरकिरी है आँख में देती चुभन

आज पीड़ा हो गई इतनी सघन, नीर बन कर अब बरसना चाहियेl        चारों तरफ ही मच रहा कुहराम है,       शान्ति को मिलता नहीं विश्राम है,       आज रक्षक ही यहाँ भक्षक हुये,     &n...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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