Dr. Hari Mohan Gupt की पोस्ट्स

चिकित्सीय परीक्षण आयुर्वेदिक पद्धति से एवं लाभकारी चिकित्सा

चिकित्सीय परीक्षण आयुर्वेदिक पद्धति से एवं लाभकारी चिकित्सा के सम्बंध में परामर्श करें।परामर्श चिकित्सकडा. हरिमोहन गुप्त(A;M.B.S.)सागर चौकी के सामने कोंच (जालौन)  285205परामर्श शुल्क - 250 रूपया...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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कठिन परिश्रम

       सदा सफलता चरण चूमती, हार न मानो,       सम्बन्धों को जीवन में व्योपार न मानो.         चरैवेति ही जीवन का सिध्दान्त सदा से,         कठिन परिश्रम को जीवन में ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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सत्य निकालें बाहर

 सत्य छिपा है जो शास्त्रों  में, उसे निकालें बाहर,और मठों  की  दीवालों  से, उसे  हटायें  जाकर l सम्प्रदाय जो इस पर बस, अधिकार मानते अपना, हमे छीन  कर उनसे लाना, करना हमें  उजागर l ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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सम्मान

भावना में ही निहित भगवान् है , ज़िन्दगी का साथ ही सहगान है l  दर्द बांटे दींन  हीनों का कोई , तब  कहीं मिलता उसे  सम्मान है l ...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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भज लो सीताराम

                  मधुरस बरसेगा स्वयम, जब बोलोगे राम,                  वाणी में लालित्य  हो, भजलो  सीताराम l उलझा प्राणी मोह में, जीवन है संग्राम,वही जीत पाया इसे, ज...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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भला करो तो लाभ मिलेगा

कंटक मग पर बहती सरिता सबको निर्मल जल मिलताहैं पत्थर चोट सहे पर फिरभी हमे वृक्ष  से फल मिलता हैं जो पर हित में रहते तत्पर .उनका ही भविष्य उज्वल हैं भला करो तो लाभ मिलेगा ,इसका फल प्रति पल म...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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जीवन सदा शद्ध होता है,

स्नान मात्र से तो केवल, नर तन सदा शुद्ध होता है,जो भी दान करे जीवन में, तो धन सदा शुद्ध होता है l जिसमें आई सहनशीलता, तो मन सदा शुद्ध होता है,जो रखता ईमान साथ में, जीवन सदा शुद्ध होता है l ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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माँ

  माँ मेरी ममता मयी मातु, तुमको प्रणाम है,धरा धाम में, जग में ऊँचा धन्य नाम है l               गीले में सो कर, सूखे में मुझे सुलाया,              धूप शीत से बचने को ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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सत्साहित्य सदा कवि लिखता,

सत्साहित्य सदा कवि लिखता, चाटुकारिता नहीं धर्म है,वह उपदेशक है समाज का, सच में उसका यही कर्म है l परिवर्तन लाना  समाज  में, स्वाभाविक बाधाएँ  आयें,कार्य कुशलता के ही कारण, सम्मानित है, यही मर...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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अच्छा देखें आप,

सब बुराई ही खोजते, अच्छा देखें आप,उसका प्रतिफल देखिये, पड़े अनूठी छाप |          जब बुराई हम देखते,मन में हो संताप,           अच्छाई तो  देखिये, बड़े  बनेगें  आप | रकम मि...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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मिले सफलता,

बारम्बार प्रयास करो  तो, मिले  सफलता,चिंता और निराशा  छोडो, गई  विफलता.असफलता से विमुख न हो,संघर्ष करो तुम,जब अवसर अनकूल,प्रगति पर जीवन चलता |...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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शुभ कामना दीपावली

बना कर देह का दीपक,जलाओ स्नेह की बाती,मिटे मन का अँधेरा भी,प्रकाशित हो धरा सारी |         दिवाली रोज मन जाये,         विनय है ईश से मेरी,         प्रभुल्लित आप रह पायें,         ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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मिले सफलता,

बारम्बार प्रयास करो  तो, मिले  सफलता,चिंता और निराशा  छोडो, गई  विफलता.असफलता से विमुख न हो,संघर्ष करो तुम,जब अवसर अनकूल,प्रगति पर चलता जीवन |...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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लड़ सकें कैसे यहाँ अनरीत से,

तन सुखी रहता सदा जग रीत से,मन सुखी जो हार बदले जीत में,है लड़ाई आज भी, जग में यहाँ,लड़ सकें कैसे यहाँ अन रीत से l ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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बेबसी

मुँह जुंबा हो बन्द वे ताले मिले,बाद मेहनत हाथ को छाले मिले.भूख से  तरपें नहीं  बच्चे  मेरे,आबरू बेची, तब  निवाले  मिले | ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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सदा सफलता चरण चूमती,

सदा सफलता चरण चूमती, हार न मानो,सम्बन्धों को जीवन में व्योपार न मानो.चरैवेति ही जीवन का सिध्दान्त सदा से,कठिन परिश्रम को जीवन में भार न मानो |...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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रावण,

 रावणईर्ष्या,द्वेष,दम्भ धरा अगर रहेंगे,तो फिर अहंकार का रावण यहीं रहेगा |शोषण, अनाचार से जो लंका बसायगा, व्यक्ति स्वयं ही अपना कोष भरेगा |     पौराणिक आख्यान भले ही कथा सार हो,     यद...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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करो मेहनत,

तुम करो मेहनत अभी से, लक्ष्य हो परहित तुम्हारा,देश की  हो  सहज सेवा,  धर्म  होता  है  हमारा |एक जुट हो कर  करेंगे, फल तभी  हमको मिलेगा,है यही उद्देश्य सबका, हो,  प्रगति  ढूढें  किनार...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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सलाह,

 यात्रा पर जब जा रहे , कुछ बन जाते ढाल,            नाम, पता,कुछ फोन के, नम्बर रखें सँभाल              हस्ताक्षर ही  तब  करें, पढ़े  उसे  इक बार,       &nbs...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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काम की बातें

आप प्रशंसा तो करें, जिससे हो तकरार,बस प्रभाव तब देखिये, माने वह उपकार |           क्षमा करें इक बार ही, किन्तु नहीं दो बार,           दया व्यर्थ हो जायगी, क्षमा किया हर बा...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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काम के दोहे,

           घर में  यदि व्यंजन बने, रखो  पड़ोसी ध्यान,           सुख मिलता है सौ गुना, बनती निज पहिचान |मन में आये माँग कर, वाहन सुख का ख्याल,ईधन  पूरा  भरा  कर,   लौटाओ &nbs...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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जीवनोपयोगी बातें,

सब बुराई ही खोजते,अच्छा देखें आप,              उसका प्रतिफल देखिये, पड़े अनूठी छाप |जब बुराई हम देखते, मन में हो संताप,               अच्छाई  तो  देखिये,  बड़े  बनेगें  आप | ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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काम की बातें,

कुछ बातें हैं काम की, इनको करिये रोज,उनका फल फिर देखिये, आप मनाएं मौज.          कुछ मित्रों के जनम दिन, अगर आपको याद,          उसे  याद उस दिन करें,  वह भी देगा दाद.    &n...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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लघु कथा

 लघु कथा  आनन्दप्रकाश को महानगर में आये अभी दस ही वर्ष हुये थे, इन्हीं वर्षों में उन्होंने अपना कारोबार बढ़ा लिया और नगर में ऐक अच्छी कोठी जिसमें कई फलदार वृक्ष थे बनवा ली थी, बेटा अच्छे स्कू...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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करें हम जागरण

जब कभी भी यदि बिगड़ते आचरण,स्वार्थ लिप्सा का तने यदि आवरण l                                                  तो  आज मानव धर्म ...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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पापों का परिणाम जनता,

पापों का  परिणाम जानता, व्यक्ति मृत्यु से  है  घवड़ाता , व्याकुल हो  डरता रहता है, इसीलिये  हर  क्षण पछताता. धर्म, कर्म, सत्संग करोगे, तो भविष्य  भी  होगा उज्ज्वल, यदि यह हो विश्वा...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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आपका दिल

इस सदी में, आपके चेहरे  पे  भी मुस्कान है,पूंछता हूँ,दिल तुम्हारा क्या बना पत्थर का है ?...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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उपकारी ही धन्य होते हैं.

फल देतें  हैं  सदा सभी को, वृक्ष नहीं कुछ खाते,धरती   को सिंचित करते ही,बादल फिर उड़ जाते l प्यास बुझाती प्यासे की ही, सरिता लब जल पीती,पर  उपकारी  जो  होते  हैं, धन्य  वही  हो पाते l...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
Dr. Hari Mohan Gupt
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