palash "पलाश" की पोस्ट्स

आस पर विश्वास

दुर्वासा ऋषि  दुर्योधन की कपटता से पूर्णतः अनभिज्ञ थे, दुर्योधन ने उनसे अनुरोध किया कि जैसे आपने हमे अपनी सेवा का मौका दिया उसी तरह वह उसके पाड़्व भाइयों को भी अपनी सेवा का अवसर देने की कृपा क...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
palash "पलाश"
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कुछ यूं ही

बडी खामोशी से हमने चुन ली खामोशीबेअदबी ही अदब जबसे जमाने में हुआकिससे करे शिकायत किसकी करे शिकायतदामन में दागों का फैशन जरा जोरों पे हैखुदा का शुक्र जो बक्शा भूल जाने का हुनरकुछ तो बच गया जिग...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
palash "पलाश"
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जरूरत का फूल

नही दे सकती स्नेह का जलसीचंने को नवजात जीवनकि सुनती हूँ उसके रोने मेंचीखें तीन जिन्दा, चार मॄत और दो अंकुरित मादा लाशों कीजानती हूँ अच्छी तरह निर्दोष है पूरी तरहये नन्हा सा जीवबाहें पसारे आत...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
palash "पलाश"
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अब न मानूंगी भगवान तुझे

बस भी करो अब देवी कहनापहले समझो तो इंसान मुझेदिखलाओ जरा साथी बनकरअब न मानूंगी भगवान तुझेकदम कदम पर छलते चलतेऔर पतिदेवता कहलाते होकभी जोर से कभी फुसलाकरअपने ही मन की करवाते होबहुत सुना है बहु...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
palash "पलाश"
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सोशल मीडिया में हमारी भूमिका

आज के समय में ऐसा कोई भी वर्ग नही जो सोशल मीडिया से जुड़ा हुआ न हो, 6७ साल के बच्चे से लेकर ८0-८५ वर्ष का वृद्ध भी आपको यहां मिल जायगा। ऐसा कोई भी विषय नही जिसकी चर्चा यहां न होती हो। ऐसे समय में हमारी...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
palash "पलाश"
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न यूं ही कहो हम हैं सही

बुरा किसी को कहने सेबुराइयां गर होती खत्मशायद ये दुनिया जन्नत से भीकही ज्यादा होती हसीं जानते हो आप भी यकी ये हमे भी हैमहज चर्चा बुराइयों का करने सेजमीं जन्नत होगी नहीकहते है हम भीकहते हो आप भ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
palash "पलाश"
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हिंदी प्रेम

खाना खाने के बाद, बच्चे टी वी देखने में मस्त हो गये और पत्नी जी किचन का काम समेटने लगी। अवस्थी जी मोबाइल ले कर बाहर लॉन में निकल आये। अवस्थी जी चार साल पहले ही बैंक में प्रोबेशनरी ऑफीसर के पद पर न...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
palash "पलाश"
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करती हूँ आह्वाहन मै

करती हूँ आह्वाहन मै, बस पढे लिखे समझदारों सेदेखो जरा निकलकर दुनिया, फेसबुक की दीवारों सेबूढ़ी माँ लाचार पिता, हर पल राह तुम्हारी तकते हैंधन दौलत की चमक नही, तेरे चेहरे को तरसते हैथोडा उनके साथ र...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
palash "पलाश"
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प्यार मोहब्बत बदल गया

जाने कब कैसे बदलेअपने, रिश्तेदारों मेंप्यार मोहब्बत बदल गयादेखो कैसे व्यवहारों मेंछोटी छोटी बातों परजिनसे कल तक लडते थेमार पीट झगडे करके भीसंग घूमते खाते खेलते थेजीवन चक्र कुछ यूं घूमाहम आ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
palash "पलाश"
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अंतिम विदा

सोचा न था कभी मैनेहोगा कष्टकारी इतना सबसे अंतिम विदा लेनासबसे दूर चले जानाअब जब जाने की वेला मेंबस दो क्षण ही शेष रहेजीवन के अनगिनत पलआंखों में मेरी तैर रहेकितनी आसानी से कह देता थाअब और नही ज...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
palash "पलाश"
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अजनबी हूं

पल दो पल के लिये आया हूं, तेरे शहर में यारोंकुछ ऐसा बोकर जाऊंगा, तुम्हे याद बहुत आऊंगा कई चेरहे कुछ फीके, कुछ उदास नजर आते हैमुस्कुरा सके दो पल, ऐसी बात दे कर जाऊंगामाना अजनबी हूं अभी, मगर यकीं है ...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
palash "पलाश"
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तैयारी

सुबह उठने के साथकरने लगती हूं तैयारीघर छोडने कीहाथ मुंह धुलते धुलतेवही उतार कर रख देते हूंमन की थकनजो नही मिटी सो कर भीबैग पैक करते करतेपैक कर देती हूंरात बीती सारी बातेंतकिये के नीचे धीरे स...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
palash "पलाश"
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हो जाये तो अच्छा

न हँसनेकादिलन रोने का मनकुछ गुमसुम सीगुजर जाये तो अच्छान दोस्ती का नाता न बैर का रिश्ताकुछ अजनबी हीरह जायें तो अच्छान गर्म दोपहरन स्याह रातकुछ ठंडी शामे भीमिल जाये तो अच्छान जीने की तमन्नान ...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
palash "पलाश"
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ये वही लड़की है………………

तीन साल की मेहनत, माँ पिता जी के आशीर्वाद और ईश्वर की अनुकम्पा से आज राधिका ने यू. पी. पी. सी. एस. में फर्स्ट रैंक हासिल की। कल तक उसे मोहल्ले के जो लोग पढाकू, घमंडी और न जाने क्या क्या कहते थे, आज अखब...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
palash "पलाश"
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रात, नींद और ख्वाब

हर रोज की तरह आज भी शाम ढलते हीरात आयी धीरे धीरेअपनी मुट्ठी बन्द कियेबडी बेसब्री से मिली उससेकुछ न सूझाबस गले लगा लिया फिर धीरे से पास जाकर कान में पूछा क्या लाई होआज मेरे लिए नींद य...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
palash "पलाश"
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हर दोपाया आदम नही

नही कहा जा सकताहर हाड़ मांस वालेदो हाथो और दो पाये वाले कोइंसानऔर भी बहुत कुछ  चाहियेदो हाथों दो पैरोंपांच इन्द्रियोंऔर शेष वो सबजिससे मिल कर बन...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
palash "पलाश"
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पलाश का पत्र- पाठ्कों केलिये

आप सभी के साथ अपनी खुशी बाँटते हुये और भी खुशी का अनुभव कर रही हूँपलाश आज एक छोटे ही सही किन्तु मुकाम पर पहुच गया, आज अगर उसकी पेज दॄश्य संख्या ६ अंको को और टिपणियों की संख्या ४ अंकों को छू सकी तो ...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
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जिन्दगी - A easiest thing

दुनिया का सबसे आसान काम जानते हैं क्या हैजिन्दगी जीनाआप सोचने लगे नकि गलत कह रही हूँकहाँ आसान है जिन्द्गी जीनाये परेशानियां खत्म होंतब तो जिये कोई जिन्दगीकभी ...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
palash "पलाश"
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स्त्री हूँ थोडा सा प्यार चाहिये

ना हार चाहिये ना गुलाब चाहियेस्त्री हूँ थोडा सा प्यार चाहियेजाने कब से तडप रही हूँबिन पानी के मछली सीअपने ही घर में सदा रहीअमानत किसी पराये कीना घर चाहिये ना दुआर चाहियेस्त्री हूँ थोडा सा दु...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
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कुछ दीवारें

कुछदीवारेजबउठतीहैंतोबनतेहैघरमगरहोतीहैकुछऐसीभीदीवारेजोबनादेतीहैघरकोमकानजिनकेखिचनेसेआजातीहैदराररिश्तोंमेंकहनेको घरकेबाहरलगीतख्तीहोतीहैपहचानघरकीमगरहरकमरेपरलगीअनदिखीतख्त...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
palash "पलाश"
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सबक

अच्छे कॉलेज में एडमीशन लेना जितना मुश्किल है उससे भी कही ज्यादा मुश्किल होता है वहाँ पर सर्वाइव करना, एक एक नम्बर पाने के लिये दिन रात एक करने पढते है। जब एडमीशन की तैयारी के लिये कोचिंग कर रही ...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
palash "पलाश"
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मुझसे मुहब्बत करने से पहले

मुझसे मुहब्बत करने से पहलेसुन लो मेरी दास्तापढ लो वो सारे पन्नेजिनमें बसे हैं कुछ महके पलकुछ बेबस आंसूंहाँ, खबर है मुझेकि कई महीनों से बन कर सायारहते हो मेरे आस पासकरते हो कोशिश मुझे जानने की ...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
palash "पलाश"
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पैकिंग

सुनो, अपना सामान बाँध लोआया हूँ मैं, तुम्हे लेने बस रख लो अपनी जरूरी चीजें बाकी मिलता तो है सब कुछ तो वहाँएक बात बताऊंयहाँ से बहुत कई गुना अच्छी जगह हैअच्छा ये बताओकही जाने में तुमको ...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
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नवजीवन

बैठता हूँ तो घर पुराना याद हमको आ रहा हैंअहसास हो रहा कि बुढापा पास मेरे आ रहा है भीड भाड से भर गया मन, हुयी दावतों से बेरुखीयाद कर भूली बिसरी बातें, छा रही मन में खुशीशरारते बच्चो सी करने को, दि...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
palash "पलाश"
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निगाहें

हमे जिसने भी देखा, अपनी निगाह से देखामेरी निगाह से मुझे न किसी निगाह ने देखाये शिकायत सिर्फ मेरी नही, हर निगाह की हैपढकर कई निगाहों को मेरी निगाह ने देखाजुदा नही आरजू इन निगाहो की तेरी निगाहों ...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
palash "पलाश"
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जिन्दगी वादा है तुमसे नये वर्ष का

जिन्दगीवादा है तुमसे,इस वर्षनही दूंगी तेरी आंखों में आंसूनही सिसकेगी तू चुपके चुपके रात में तकिये के नीचेनही मरेगी तिल तिलकिसी अत्याचारी के हाथनही होने दूंगी उदास किसी वीरान कोने में चुपचा...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
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अपने अपने कर्म या अपने अपने भाग्य

कॉलेज की सीढियां उतर रही थी, मेरे नीचे की सीढियों पर दो गर्भवती स्त्रियां थी- एक मेरे साथ की ही अध्यापिका थीं और दूसरी थी कॉलेज में काम करने वाली एक मजदूर औरत। एक सम्भल सम्भल कर उतर रही थी, तो दूस...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
palash "पलाश"
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कागज की टीस

लैपटाप पर करते करते कामएकदिन अचानकआया मुझे याद  लिखना कागज पर बैठ गया लेकरअपना फेवरेटपुराना लेटर पैड और बॉलपेन जिसके पीले पन्ने दे रहे थे गवाहीमेरे और उसके रिश्ते की उम्र कीलिखना...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
palash "पलाश"
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मै और मेरा वक्त

देखा है वक्त को सावन सा बरसतेकभी बूँद बूँद रिसते हुयेदेखा हैवक्त को बच्चे सा भागतेकभी हांफते कदमों से रेंगते हुयेदेखा है वक्त कोरेत सा फिसलतेकभी बर्फ सा पिघलते हुयेदेखा है वक्त कोनॄतकी ...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
palash "पलाश"
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उफ ये बडे आदमी

सुना थाबहुत बडे आदमी थे तुमफिर क्यों फर्क पढ गया तुम्हेगर मुझ जैसे छोटे से व्यक्ति नेनही किया सलाम तुम्हे झुक करक्यों रात भेज अपने चार आदमीबुलवा कर अपनी कोठीझुका कर अपने पैरोंतुम्हे बताना प...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
palash "पलाश"
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