Nazariya Now की पोस्ट्स

गानों की दुनिया का अज़ीम सितारा था, मोहम्मद अज़ीज़ प्यारा था... ✍ रवीश कुमार

काम की व्यस्तता के बीच हमारे अज़ीज़ मोहम्मद अज़ीज़ दुनिया को विदा कर गए. मोहम्मद रफ़ी के क़रीब इनकी आवाज़ पहचानी गई लेकिन अज़ीज़ का अपना मक़ाम रहा. अज़ीज़ अपने वर्तमान में रफ़ी साहब के अतीत को...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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मेरी याद - (लघुकथा) - लेखक : डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी

रोज़ की तरह ही वह बूढा व्यक्ति किताबों की दुकान पर आया, आज के सारे समाचार पत्र खरीदे और वहीँ बाहर बैठ कर उन्हें एक-एक कर पढने लगा, हर समाचार पत्र को पांच-छः मिनट देखता फिर निराशा से रख देता।   आ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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क़र्ज़माफ़ी (लघुकथा ) #सिफ़र

रामू ने जबसे खबर सुनी की सरकार ने किसानों का क़र्ज़ माफ़ कर दिया है तबसे बहुत खुश है। रामू पर बैंक का पचास हज़ार रुपये क़र्ज़ है पिछले साल हुई ओलावृष्टि ने उसकी फसल ख़राब कर दी जिसकी वजह से वो बैंक का क़...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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सत्यव्रत (लघुकथा) - लेखक : डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी

"व्रत ने पवित्र कर दिया।"मानस के हृदय से आवाज़ आई। कठिन व्रत के बाद नवरात्री के अंतिम दिन स्नान आदि कर आईने के समक्ष स्वयं का विश्लेषण कर रहा वह हल्का और शांत महसूस कर रहा था। "अब माँ रुपी कन्याओ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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कृषि प्रधान देश में मजबूर और लाचार किसान

‘‘भारत एक कृषि प्रधान देश है’’ इस वाक्य को अगर सही माना जाये तो कृषि का कार्य करने वाले किसानों की आर्थिक स्थिति देश में अन्य लोगों के मुक़ाबले काफ़ी बेहतर होनी चाहिए थी। किसान जिसे देश का अन्न...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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गाँधी के देश में बढ़ती अराजकता

पूरी दुनिया में गांधीजी की एक ख़ास पहचान है। पूरी दुनिया में गांधीजी को एक महान व्यक्ति के रूप में जाना जाता है।  गाँधी और भारत एक दूसरे के पर्याय हैं।  भारत को दुनिया गांधीजी के अहिंसावाद...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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किताब समीक्षा - राक्षस राज्य - लेखक : अब्बास पठान - Book Review

लेखक अब्बास पठान जी की किताब ''राक्षस राज्य''हाल ही में रिलीज़ हुई है।  किताब में कुल 57 कहानियाँ हैं, हर कहानी अपने आप में अनूठी और लाजवाब है।  हर कहानी में देश और समाज की गंभीर समस्यांओं और सम...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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नज़रिया - हिन्दी दिवस

आज हिन्दी जिस बुरे दौर से गुजर रही है हम इस के गवाह भी है और गुनाहगार भी। हिन्दी बोलने और पढने वालो को आज देश में अनपढ गंवार, मीड़िल क्लास या एकदम नीचे दर्ज का समझा जाता है। संसद हो या बडे बडे आय...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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डॉलर अंडरवियर नहीं अमरीकी डॉलर महंगा हुआ है, 72.55 रु का हो गया है - ✍ रवीश कुमार

सोमवार को 12 बज कर 03 मिनट पर डॉलर ने भारतीय रुपये को फिर धक्का दिया है. इस समय पर रुपये का भाव ऐतिहासिक रूप से नीचे चला गया. एक डॉलर 72 रुपये 55 पैसे का हो गया. वाकई अब श्री श्री रविशंकर से कहना होगा कि व...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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नज़रिया - नाम बदलने की राजनीति

मशहूर लेखक व नाटककार विलियम शेक्सपियर ने कहा था ''नाम में क्या रखा है'' लेकिन पिछले कुछ वक़्त से हमारे देश के नेताओं को लग रहा जैसे नाम में ही सबकुछ रखा है। सारे ज़रूरी मुद्दों को दरकिनार करके सि...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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मेच फिक्सिंग (लघुकथा) - लेखक : डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी

"सबूतों और गवाहों के बयानों से यह सिद्ध हो चुका है कि वादी द्वारा की गयी 'मेच फिक्सिंग'की शिकायत सत्य है, फिर भी यदि प्रतिवादी अपने पक्ष में कुछ कहना चाहता है तो न्यायालय उसे अपनी बात रखने का अधि...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
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साक्षात्कार भाग 02 : 'कौवों का हमला'उपन्यास लेखक श्री अजय कुमार सिंह 'रावण

'कौवों का हमला'उपन्यास लिखने के बाद टेलीविज़न जगत के जाने माने लेखक अजय कुमार सोशल मीडिया पर सक्रीय हैं। इस माध्यम से अजय जी अधिक से अधिक साहित्य प्रेमियों तक पहुँचने का प्रयास कर रहे हैं। इसी ...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
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परसाई होते तो क्या मॉब लिंचिंग से, आवारा भीड़ के खतरों से बच पाते? ✍ प्रियदर्शन

हरिशंकर परसाई खुशकिस्मत थे कि 1995 में ही चले गए. अगर आज होते तो या तो मॉब लिंचिंग के शिकार हो गए होते या फिर जेल में सड़ रहे होते या फिर देशद्रोह के आरोप में मुक़दमा झेल रहे होते. आवारा भीड़ के ख़तर...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
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यादों में कुलदीप नैयरः शमा हर रंग में जलती है सहर होने तक... ✍ रवीश कुमार

मिर्ज़ा ग़ालिब की शमा की तरह कुलदीप नैयर हर लौ में तपे हैं, हर रंग में जले हैं. शमा के जलने में उनका यक़ीन इतना गहरा था कि 15 अगस्त से पहले की शाम वाघा बॉर्डर पर मोमबत्तियां जलाने पहुंच जाते थे. उस...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
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यादों में कुलदीप नैयरः शमा हर रंग में जलती है सहर होने तक... - ✍ रवीश कुमार

मिर्ज़ा ग़ालिब की शमा की तरह कुलदीप नैयर हर लौ में तपे हैं, हर रंग में जले हैं. शमा के जलने में उनका यक़ीन इतना गहरा था कि 15 अगस्त से पहले की शाम वाघा बॉर्डर पर मोमबत्तियां जलाने पहुंच जाते थे. उस ...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
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साक्षात्कार : "कौवों का हमला"उपन्यास और भारतीय टेलीविज़न जगत के प्रख्यात लेखक श्री अजय कुमार सिंह 'रावण'से कुछ बातें। भाग #01 साक्षात्कारकर्ता - मोहित शर्मा 'ज़हन'

 "कौवों का हमला"उपन्यास और भारतीय टेलीविज़न जगत के प्रख्यात लेखक श्री अजय कुमार सिंह 'रावण'  से कुछ बातें। भाग #01 साक्षात्कारकर्ता - मोहित शर्मा 'ज़हन'सवाल 1 : अपने बारे में कुछ बतायें। जवाब : मै...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
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आज़ादी के 7 दशक बाद कितने आज़ाद हैं हम ?

भारत को आज़ाद हुए 71  साल हो गए हैं इस साल हम आज़ादी के 72 वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं।  लम्बे वक़्त तक ब्रिटिश हुकूमत की गुलामी के बाद 15 अगस्त 1947 को देश को आज़ादी मिली।  देश की आज़ादी के लिए, अपने स...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
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नज़रिया - भीड़ द्वारा हत्यायें - Mob Lynching

देश में पिछले कुछ समय से एक अजीब सा माहौल बनता जा रहा है।  हर महीने कुछ ऐसी ख़बरें सुनने-पड़ने को मिल रही हैं जिसमे देश में कहीं भी भीड़ द्वारा एक बेगुनाह की इंसान पीट पीटकर हत्या कर दी जाती है। ...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
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नज़रिया - एक देश एक चुनाव - One Nation One Election

भारत  में काफी समय से चुनाव सुधार की बात की जा रही है। देश में पुरे साल किसी न किसी प्रकार के चुनाव होते रहते हैं ।  हर 5 साल में लोकसभा चुनाव, अलग अलग राज्यों में विधानसभा चुनाव, कभी लोकसभा उप...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
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विजेता - कहानी लिखो प्रतियोगिता - Freelance Talents Championship 2018

कहानी को ज़हन में उमड़ते असंख्य विचारों का ऐसा अर्क कहा जा सकता है जो सीधे मन पर मरहम की तरह काम करती है। कभी किसी भावना को जगाती तो कभी कोई नया एहसास करवाती। जहाँ इंटरनेट ने कई लेखकों को बड़ा मंच ...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
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मानव ज्ञान का चरित्र और विकास ✍ सनी

इंसान ने अपने जीवन की संघर्षपूर्ण यात्रा की शुरुआत आज से लगभग 2,50,000 साल पहले की थी। उसने इस दौरान धरती पर हो रही अद्भुत गतिमान परिघटनाओं को समझा, उनमें से कुछ को अपने काबू में करना सीखा है। समुद...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
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Comics Theory Ghosts of India - Horror Comics Anthology

कॉमिक्स थ्योरी Ghosts of India - Horror Comics Anthology का पहला इशू दिल्ली में Indie Comix  Fest में रिलीज़ किया गया है। कॉमिक्स थ्योरी  में भारतीय भूत-प्रेत की कहानियां को कॉमिक्स के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।  कॉमि...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
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भारतीय कॉमिक्स संसार के पितामह स्व. श्री प्राण कुमार शर्मा

भारतीय कॉमिक्स जगत  में  स्व. श्री प्राण कुमार शर्मा जी का नाम पूरे सम्मान के साथ लिया जाता है। प्राण जी के बनाये कॉमिक्स कैरेक्टर्स आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। प्राण जी के बनाये क...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
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विश्व तंबाकू निषेध दिवस 31 मई - World No Tobacco Day 31st May

31 मई का दिन पूरी दुनिया में विश्व तंबाकू निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है।  तम्बाकू एक धीमा जहर है जो व्यक्ति को धीरे धीरे करके मौत के मुँह मे धकेलता रहता है। लोग जाने अनजाने मे या सिर्फ शौ...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
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सफरनामा - लेखक आबिद रिज़वी साहब - भाग - 6

मैंने जाना अकरम ‘इलाहाबादी’ एम.एल. पाण्डेय तथा तीरथराम ‘फीरोजपुरी’उस दौर के लेखकों में अकरम ‘इलाहाबादी’ , एमएल, पाडेय, तीरथराम ‘फीरोजपुरी’ पूर्व में मैं लिख न सका; भूलने जैसी बात नहीं, अनभिज...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
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Operation 136 - मीडिया का लालची चेहरा बेनक़ाब

मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ माना जाता है।  देश और समाज के निर्माण में मीडिया की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। मीडिया (इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट)  का काम सिर्फ जनता सही और निष्पक्ष त...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
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भाग - 5 - सफरनामा - लेखक आबिद रिज़वी साहब

विलक्षणता की अगली झलकपहली सिटिंग 9 से 12 के बीच सोलह पेज तैयार हुए यानि एक फार्म। सात फार्म के छपने वाले नाॅवल का 1/7 भाग पहली सिटिंग में। भोजनावकश। खाना घर से आया था। मेरे लिए भी मंगवाया गया था। ...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
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जागरूकता के आभाव में देश में बढ़ता जालसाज़ी का कारोबार

कुछ समय पहले एक मोबाइल कंपनी मात्र 251 रू. में स्मार्टफोन देने का दावा करके रातों रात चर्चा का विषय बन जाती है। प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रानिक मीडिया, सोशल मीडिया से लेकर आम जनता तक हर कहीं उस मोबा...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
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सफरनामा - लेखक आबिद रिज़वी साहब - भाग - 4

सैयद मुजाविर हुसैन रिज़वी उर्फ मुज्जन साहब, पेन नेम ‘इब्ने सईद’, पश्ताकद, साधारण डील-डौल के, पर होंठों पर हर क्षण मुस्कान समेटे रहने वाले ऐसे इंसान, जिनके पास काबलियत का अथाह खाजाना हिलोरे मारत...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
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भाग -3 : लेखक आबिद रिज़वी साहब का साठ सालों का सफरनामा उन्हीं की ज़ुबानी

प्यारे लाल ‘आवारा’ की शरण में इण्टर की परीक्षा देने के बाद, गर्मियों की छुट्टी तक किसी नामवर लेखक से ज्ञान हासिल करने की पिपासा में मैं एक सुबह, मई माह सन् 60 में जा पहुंचा मुट्ठी गंज, बिरहाना र...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
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