समाज की बात - Samaj ki Baat की पोस्ट्स

कलाकार

वह किसी महान फिल्म की शूटिंग कर रहे थे, जिसमें उनका पात्र मुख्य भूमिका में था. जिसने उन्होने दर्जनों गुंडों को कुछ ही पलों में धूल चटा दी थी और कई गरीबों की मदद की व उन्हें न्याय दिलाया. शॉट बह...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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वतन

                                                    सरकारी अस्पताल में घायल जवान की मरहम पट्टी करते हुए नर्स ने पूछा"आप को इतनी सारी चोटें कैसे लगीं!"जवान ने जख्मों के दर्द ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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बूढ़ा गाँव

      दस दिन की गर्मियों की छुट्टियों में विनय. नानी के गाँव, बुआ के गाँव और ससुराल भी हो आया था बीवी-बच्चे वहीँ ससुराल में ही रुक गए थे. फिर भी दो दिन की छुट्टियाँ और बच रही थी उसकी.  अचानक ही उ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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बुढ़ऊ पंडित

“स्कूल जाते-जाते आज पंडित को जरूर बोल देना कि कल सवेरे कथा सुनाने आ जायेंगे”.“ठीक है माँ, बोलते हुए जाऊंगा”. “वैसे बुढ़ऊ पंडित को ही बोलना है कि बच्चू पंडित को बोल दूंगा”!“तू फ़ालतू की बकवास मत कर. ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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विद्रोहियों के बीच में

कंपनी के काम से मैं पहले भी बस्तर आ चुका था लेकिन इस बार का अनुभव काफी कड़वा रहा. हालाँकि इससे पहले भी मैंने असंतोष की चिंगारियां देखी थी पर इस बार वह चिंगारियां लपटों का रूप धारण कर चुकी थीं.लौह ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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भीड़

एक दिन कुछ लोग किसी घटना परभीड़ बनकर बेहद आक्रोशित हुए आक्रोश ने उन्माद की शक्ल ली उन्माद ने भीड़ पर अपना असर किया वह कुसूरवार था या बेकसूर!उन्माद ने भीड़ को सोचने ही न दिया भीड़ ने उसे पीट-पीटकर मा...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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सवालों के जवाब

बूढों के पास बचा ही क्या था कुछ अदद नाती-पोतों के सिवाय जो खिंचे चले आते थे उनके पास सुनने कुछ नए-पुराने किस्से-कहानियां या ढूँढने अपने कुछ अनसुलझेसवालों के जवाब वरना कौन आता है भला उनके पास बड़...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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हम और हमारा समाज

हरे-भरे और पुराने, छाँव वाले पेड़ों को  घर के बड़े-बूढों और अनुभवी बुजुर्गों को सदियों पुरानी आस्थाओं को, मान्यताओं को बिना जाने उनके फायदे या नुकसान काट देना जड़ों से बेवजह ही क्योंकि उनकी वजह ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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तालाब याद आये

हमने तालाबों को पाट-पाटकरबड़े-बड़े आलीशान घर बनाये घरों में सुख-सुविधा के तमाम उपकरण लगाये मगर जब नहीं मिला पानी गुजर-बसर के लिए तब हमें वही पाटे हुए तालाब बहुत-बहुत याद आये    (कृष्ण धर शर्मा, 16...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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हाँ मगर!

तुम्हारी भेड़ियों जैसी भूखी नजरें तुम्हारी गलीज और कामुक भावनाएं तुम्हारी अश्लील और गंदी टिप्पणियां जो, राह चलती किसी की बहन या बेटी को देखकर उपजते हैं तुम्हारे भीतर तुम सोचकर भी देखोगे यही स...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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इंसान को डर लगता है

इंसान को जिससे-जिससे डर लगता हैवह उन सबको मार देता है या फिर मारने की कोशिश करता रहता हैभले ही वह डर वास्तविक न हो डर काल्पनिक ही सहीमगर इंसान जिससे-जिससे डरता है वह उन सबको मार देता है इंसान जि...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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घर और घरवाले

टीवी की आवाज म्यूट कर दो मोबाइल को साइलेंट में डाल दो मन को जरा शांत करके गौर से सुनो तो कभी तुम्हारा घर और घरवाले बहुत बेचैन हैं इन दिनों! वह तुमसे बातें करना चाहते हैं  उन्हें लगता है कि वह भी ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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अनमनी सी जिंदगी

अल्लसुबह की मीठी नींद का मोह छोड़करलग जाते हैं काम पर जाने की तैयारी में मुंहअँधेरे ही गिरते-पड़ते से सोते हुए बच्चे का माथाचूमकर निकल पड़ते हैं दिनभर काम में अनमने से खटने के लिए निभाने पड़ते हैं...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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राक्षस

अब जिसे राक्षस ही साबित करना होवह भला आपके कहने भर से कैसे हो जायेगा राक्षस उसके बारे में प्रचारित करना होगादुनियाभर का सच-झूठ जैसे कि वह होता है घोर अत्याचारी एक विशालकाय शरीर वाला होते हैं उ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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ओ नदी! तुम कितनी अच्छी

ओ नदी! तुम कितनी अच्छी तुम हो बिलकुल माँ के जैसी लोगों के संताप तुम हरती सबको तुम निष्पाप हो करती सबकी गंदगी खुद में लेकर तुम लोगों के दुःख हो हरतीबाहर से तुम दिखती चंचल अन्दर से तुम कितनी शीतल ...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
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पुराना पुल, प्रेम और बूढ़े लोग

पुराने पुल के आखिरी छोर परशाम के धुंधलके में बैठे हुए  दूर से आती लैंप पोस्ट की मद्दिम रोशनी के सहारे पढ़ना किसी का प्रेम पत्र  प्रेम करने वालों के लिए कितना आकर्षक होता है न!दिनभर की भागा-दौ...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
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खोखली कविताएं

खोखले समाज को और भी खोखला करती एक खोखले कवि की खोखली कविताएंथके-हारे मन को और भी निराश करती खोखले समय की खोखली कविताएंसमय ही बुरा नहीं होता है हमेशा समय को बुरा बनती हैं अक्सर बुरे समय की बुरी क...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
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शैतान

किसी शैतान से कहाँ कम होते हैं वह जो सिखाते हैं अपने बच्चों को नफ़रत करना किसी और को कुचलते हुए आगे बढ़ना दूसरों के कंधे पर पैर रखकर ऊपर चढ़ना औरों के हिस्से की रोटी भी खुद हजम करना अपनी छोड़ किसी की ...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
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बहुत काम के होते हैं बूढ़े लोग

शहरों में भले ही न मानते हों किसी काम का मगर गांवों में बहुत काम के होते हैं बूढ़े लोग छोटे-मोटे कई सारे काम बूढ़े ही कर लेते हैं गाँव में चाहे फिर गाय-बैलों को देना हो चारा-पानीया फिर करनी हो देखभा...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
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भस्मासुर

“तो क्या इस पहाड़ को ख़त्म ही करना होगा?क्या नहीं बचा है अब कोई भी विकल्प!”“बात सिर्फ इस पहाड़ की नहीं है मेरे दोस्त कल को जब तोडा जायेगा दूसरा पहाड़ भी रास्ता बनाने को या पत्थर फोड़ने को तब भी तुम पूछ...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
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लोकसत्ता कहीं गहरा अन्याय कर बैठे तो सत्याग्रह ही रास्ता है

आज के भारत की तस्वीर के साथ विश्व में बदलते घटनाक्रम को समझने में हमें महात्मा गांधी से विनोबा भावे और इसके साथ कई और भी महापुरुषों के साथ यात्राएं करनी होंगी। हमें प्रजातांत्रिक मूल्यों के ...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
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नशे के विरुद्ध उठ रही है महिला-शक्ति

टोपड़ी गांव सहारनपुर जिले (उत्तर प्रदेश) की एक मिश्रित आबादी का गांव है। दलित परिवारों की संख्या अधिक है। यहां के शान्त जीवन में कुछ समय पहले एक गंभीर समस्या आंधी की तरह आई जिसने अनेक भरे-पूरे ...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
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डॉ आईदान सिंह भाटी की कुछ कवितायें

क्रांति****** वह आएगीपर आएगी किसी की पीठ पर चढ़करक्यों कि वह है लंगड़ीसब इन्तज़ार कर रहे हैं उसका ;आकाश से नहींदिलों में उठ रहे हैं बवंडरउथल-पुथल मची हुई हैलोग उठाने लगे हैंराज्य, धर्म पर अँगुली ।...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
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निर्मला पुतुल की एक कविता

उतनी दूर मत ब्याहना बाबा ! ********************* बाबा!मुझे उतनी दूर मत ब्याहनाजहाँ मुझसे मिलने जाने ख़ातिरघर की बकरियाँ बेचनी पड़े तुम्हेमत ब्याहना उस देश मेंजहाँ आदमी से ज़्यादा ईश्वर बसते होंजंगल नदी...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
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मैथिलीशरण गुप्त की कुछ कवितायें

आर्यहम कौन थे, क्या हो गये हैं, और क्या होंगे अभीआओ विचारें आज मिल कर, यह समस्याएं सभीभू लोक का गौरव, प्रकृति का पुण्य लीला स्थल कहांफैला मनोहर गिरि हिमालय, और गंगाजल कहांसंपूर्ण देशों से अधिक, ...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
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नीलाभ की कुछ कवितायें

नाराज आदमी का बयान- १******************************मुझे अब किसी भी चीज़ मेंदिलचस्पी नहीं रह गई हैन दुनिया मेंन उसके मूर्खतापूर्ण कारोबार मेंमैं सिर्फ़ एक सीधी, सरल ज़िन्दगीजीना चाहता हूँपसीने की गन्ध कोताज़ा ...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
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चरवाहे का सुख

कौन बनेगा प्रधानमंत्री!कौन बनेगा मुख्यमंत्री!या कौन बनेगा राष्ट्रपति!क्या लेना-देना इन फ़िजूल बातों से भला एक चरवाहे को उसके मतलब की बातें तो होती हैं सिर्फ इतनी सी ही कि किस तरह से भरा जाए पेट...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
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स्वप्नदीप

कुटिलताओं और आशंकाओं के दौर में सहजताओं और सरलताओं को बचाए रखनाभले ही इसमें अतिशय धैर्य की होगी आवश्यकता मगर कुटिलों के कुचक्रों से बचने के लिए सहनशीलता की पराकाष्ठा के भी पार सहना होगा तुम्...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
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दलाई लामा कुछ वर्ष अरुणाचल क्यों नहीं रहते?

 चीन का एक अद्र्ध सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने भारत को नसीहत के साथ-साथ नाकाबिले बर्दाश्त की भी धमकी दी है। वजह दलाई लामा हैं, जिनके अरुणाचल जाने पर चीन को आपत्ति है। तिब्बती धर्म गुरु दला...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
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