समाज की बात - Samaj ki Baat की पोस्ट्स

ओ नदी! तुम कितनी अच्छी

ओ नदी! तुम कितनी अच्छी तुम हो बिलकुल माँ के जैसी लोगों के संताप तुम हरती सबको तुम निष्पाप हो करती सबकी गंदगी खुद में लेकर तुम लोगों के दुःख हो हरतीबाहर से तुम दिखती चंचल अन्दर से तुम कितनी शीतल ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
समाज की बात - Samaj ki Baat
0

पुराना पुल, प्रेम और बूढ़े लोग

पुराने पुल के आखिरी छोर परशाम के धुंधलके में बैठे हुए  दूर से आती लैंप पोस्ट की मद्दिम रोशनी के सहारे पढ़ना किसी का प्रेम पत्र  प्रेम करने वालों के लिए कितना आकर्षक होता है न!दिनभर की भागा-दौ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
समाज की बात - Samaj ki Baat
0

खोखली कविताएं

खोखले समाज को और भी खोखला करती एक खोखले कवि की खोखली कविताएंथके-हारे मन को और भी निराश करती खोखले समय की खोखली कविताएंसमय ही बुरा नहीं होता है हमेशा समय को बुरा बनती हैं अक्सर बुरे समय की बुरी क...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
समाज की बात - Samaj ki Baat
0

शैतान

किसी शैतान से कहाँ कम होते हैं वह जो सिखाते हैं अपने बच्चों को नफ़रत करना किसी और को कुचलते हुए आगे बढ़ना दूसरों के कंधे पर पैर रखकर ऊपर चढ़ना औरों के हिस्से की रोटी भी खुद हजम करना अपनी छोड़ किसी की ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
समाज की बात - Samaj ki Baat
0

बहुत काम के होते हैं बूढ़े लोग

शहरों में भले ही न मानते हों किसी काम का मगर गांवों में बहुत काम के होते हैं बूढ़े लोग छोटे-मोटे कई सारे काम बूढ़े ही कर लेते हैं गाँव में चाहे फिर गाय-बैलों को देना हो चारा-पानीया फिर करनी हो देखभा...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
समाज की बात - Samaj ki Baat
0

भस्मासुर

“तो क्या इस पहाड़ को ख़त्म ही करना होगा?क्या नहीं बचा है अब कोई भी विकल्प!”“बात सिर्फ इस पहाड़ की नहीं है मेरे दोस्त कल को जब तोडा जायेगा दूसरा पहाड़ भी रास्ता बनाने को या पत्थर फोड़ने को तब भी तुम पूछ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
समाज की बात - Samaj ki Baat
0

लोकसत्ता कहीं गहरा अन्याय कर बैठे तो सत्याग्रह ही रास्ता है

आज के भारत की तस्वीर के साथ विश्व में बदलते घटनाक्रम को समझने में हमें महात्मा गांधी से विनोबा भावे और इसके साथ कई और भी महापुरुषों के साथ यात्राएं करनी होंगी। हमें प्रजातांत्रिक मूल्यों के ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
समाज की बात - Samaj ki Baat
0

नशे के विरुद्ध उठ रही है महिला-शक्ति

टोपड़ी गांव सहारनपुर जिले (उत्तर प्रदेश) की एक मिश्रित आबादी का गांव है। दलित परिवारों की संख्या अधिक है। यहां के शान्त जीवन में कुछ समय पहले एक गंभीर समस्या आंधी की तरह आई जिसने अनेक भरे-पूरे ...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
समाज की बात - Samaj ki Baat
0

डॉ आईदान सिंह भाटी की कुछ कवितायें

क्रांति****** वह आएगीपर आएगी किसी की पीठ पर चढ़करक्यों कि वह है लंगड़ीसब इन्तज़ार कर रहे हैं उसका ;आकाश से नहींदिलों में उठ रहे हैं बवंडरउथल-पुथल मची हुई हैलोग उठाने लगे हैंराज्य, धर्म पर अँगुली ।...  और पढ़ें
11 माह पूर्व
समाज की बात - Samaj ki Baat
0

निर्मला पुतुल की एक कविता

उतनी दूर मत ब्याहना बाबा ! ********************* बाबा!मुझे उतनी दूर मत ब्याहनाजहाँ मुझसे मिलने जाने ख़ातिरघर की बकरियाँ बेचनी पड़े तुम्हेमत ब्याहना उस देश मेंजहाँ आदमी से ज़्यादा ईश्वर बसते होंजंगल नदी...  और पढ़ें
11 माह पूर्व
समाज की बात - Samaj ki Baat
0

मैथिलीशरण गुप्त की कुछ कवितायें

आर्यहम कौन थे, क्या हो गये हैं, और क्या होंगे अभीआओ विचारें आज मिल कर, यह समस्याएं सभीभू लोक का गौरव, प्रकृति का पुण्य लीला स्थल कहांफैला मनोहर गिरि हिमालय, और गंगाजल कहांसंपूर्ण देशों से अधिक, ...  और पढ़ें
11 माह पूर्व
समाज की बात - Samaj ki Baat
0

नीलाभ की कुछ कवितायें

नाराज आदमी का बयान- १******************************मुझे अब किसी भी चीज़ मेंदिलचस्पी नहीं रह गई हैन दुनिया मेंन उसके मूर्खतापूर्ण कारोबार मेंमैं सिर्फ़ एक सीधी, सरल ज़िन्दगीजीना चाहता हूँपसीने की गन्ध कोताज़ा ...  और पढ़ें
11 माह पूर्व
समाज की बात - Samaj ki Baat
0

चरवाहे का सुख

कौन बनेगा प्रधानमंत्री!कौन बनेगा मुख्यमंत्री!या कौन बनेगा राष्ट्रपति!क्या लेना-देना इन फ़िजूल बातों से भला एक चरवाहे को उसके मतलब की बातें तो होती हैं सिर्फ इतनी सी ही कि किस तरह से भरा जाए पेट...  और पढ़ें
11 माह पूर्व
समाज की बात - Samaj ki Baat
0

स्वप्नदीप

कुटिलताओं और आशंकाओं के दौर में सहजताओं और सरलताओं को बचाए रखनाभले ही इसमें अतिशय धैर्य की होगी आवश्यकता मगर कुटिलों के कुचक्रों से बचने के लिए सहनशीलता की पराकाष्ठा के भी पार सहना होगा तुम्...  और पढ़ें
11 माह पूर्व
समाज की बात - Samaj ki Baat
0

दलाई लामा कुछ वर्ष अरुणाचल क्यों नहीं रहते?

 चीन का एक अद्र्ध सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने भारत को नसीहत के साथ-साथ नाकाबिले बर्दाश्त की भी धमकी दी है। वजह दलाई लामा हैं, जिनके अरुणाचल जाने पर चीन को आपत्ति है। तिब्बती धर्म गुरु दला...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
समाज की बात - Samaj ki Baat
0

साजिश

हमारे सीधे-सादे गाँव को शहर बनाने की साजिश है लोगों के आपसी प्यार को जहर बनाने की साजिश है समझ नहीं पा रहे हैं गाँव के लोग भोले-भालेकुदरत की नेमतों को कहर बनाने की साजिश है मिलजुलकर जहाँ रहते है...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
समाज की बात - Samaj ki Baat
0

भूटान : सादगी का वैभव

 प्रकृति की गोद में बसा भूटान एक ऐसा देश है जो खुशहाली पर जोर देता है। जहाँ पूरी दुनिया का जोर जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद पर होता है वहीँ भूटान अपने नागरिकों का जीवन स्तर जीएनएच यानी सकल रा...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
समाज की बात - Samaj ki Baat
0

चुनाव में धर्म, जाति, और भाषा का दुरुपयोग प्रतिबंधित

सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश टी.एस. ठाकुर ने अपने पद से विदा देने के पूर्व एक अत्यधिक महत्वपूर्ण निर्णय किया। इस निर्णय से धर्मनिरपेक्षता पर आधारित हमारे गणतंत्र की नींव और मजबूत ह...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
समाज की बात - Samaj ki Baat
0

टॉकिंग पेन के साथ तैयार होता भविष्य

संसाधन केंद्र-केरल द्वारा विकसित टॉकिंग पेन जेएसएस के विद्या कार्यक्रम का हिस्सा है, जो जिले के अनुसूचित जाति के लोगों के लिए एक व्यापक विकास परियोजना है। साक्षरता कार्यक्रमों के लिए मोबाइ...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
समाज की बात - Samaj ki Baat
0

एक सियार का दर्द

जैसा कि रोज का नियम था आज सुबह भी मैं घूमने निकला तो मुख्या सड़क छोड़कर पगडंडियों कि तरफ निकल गया. सुबह कि ताज़ी खुशगवार हवा का आनंद लेते हुए कुछ कदम ही चला था कि अचानक एक सियार से मेरा साक्षात हो गय...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
समाज की बात - Samaj ki Baat
0

रेलवे स्टेशन

नारायण जी शासकीय स्कूल से हेडमास्टर की नौकरी से रिटायर होकर इसी छोटे से कस्बे राजनगर में बस गए थे क्योंकि उनके गाँव में पुश्तैनी संपत्ति के नाम पर मात्र एक कच्चा घर था जिसमें उनके दो भाई अपने ...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
समाज की बात - Samaj ki Baat
0

गंदे बालों वाली लड़की

महीनों तक सुबह की सैर के दौरान नियमित रूप से रोज अपने समय पर दिख जाने वाली उस गंदे और मैले-कुचैले कपडे पहने हाथ में प्लास्टिक की बोरी लिये कचरा बीनती हुई लड़की से आज बात करने की हिम्मत आखिरकार जु...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
समाज की बात - Samaj ki Baat
0

ड्रग मार्केट में प्रतिस्पर्धा बढ़ाइए

यूपीए सरकार द्वारा लगभग 400 दवाओं के दाम तय कर दिये गये थे। वर्तमान एनडीए सरकार 450 और दवाओं के दाम निर्धारित कर दिये हैं। 350 और दवाओं के दाम निर्धारित करने की प्रक्रिया चल रही है। सरकार का यह कदम ...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
समाज की बात - Samaj ki Baat
0

बस्तर हाट

दस का आलू दस का प्याज दस की मिर्ची दस का तेल दस रु. में हो जाता है बस्तर हाट में सारा खेल थैला भरकर महुआ लाते मुट्ठी भर सामान वो पातेशहरों से आकर व्यापारी बस्तरियों को लूट ले जातेउन्हीं का महुआ उ...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
समाज की बात - Samaj ki Baat
0
 
Postcard
फेसबुक द्वारा लॉगिन  
हो सकता है इनको आप जानते हो!  
PanditRkShastri
PanditRkShastri
Chandigarh,India
Sujan
Sujan
kurukshetra,India
sanjeev katayan
sanjeev katayan
bangaon,Botswana
P.s.yadav
P.s.yadav
Bhopal,India