श्रीरामचरितमानस की पोस्ट्स

श्रीरामचरित्रमानस - बालकाण्ड

श्रीरामचरित्रमानस की विषय-सूची- बालकाण्ड में प्रभु राम के जन्म से लेकर राम-विवाह तक के घटनाक्रम आते हैं। नीचे बालकाण्ड से जुड़े घटनाक्रमों की विषय सूची दी गई है। धर्म प्रेमी जिस भी घटना के बार...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
श्रीरामचरितमानस
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प्रथम सोपान-मंगलाचरण

श्लोक : वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि।मंगलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥1॥भावार्थ:-अक्षरों, अर्थ समूहों, रसों, छन्दों और मंगलों को करने वाली सरस्वतीजी और गणेशजी की मैं वंदना ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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गुरु वंदना

 बंदउँ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि।महामोह तम पुंज जासु बचन रबि कर निकर॥5॥भावार्थ:-मैं उन गुरु महाराज के चरणकमल की वंदना करता हूँ, जो कृपा के समुद्र और नर रूप में श्री हरि ही हैं और जिनके व...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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ब्राह्मण-संत वंदना

बंदउँ प्रथम महीसुर चरना। मोह जनित संसय सब हरना॥सुजन समाज सकल गुन खानी। करउँ प्रनाम सप्रेम सुबानी॥2॥भावार्थ:-पहले पृथ्वी के देवता ब्राह्मणों के चरणों की वन्दना करता हूँ, जो अज्ञान से उत्पन्न ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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खल वंदना

चौपाई : बहुरि बंदि खल गन सतिभाएँ। जे बिनु काज दाहिनेहु बाएँ॥पर हित हानि लाभ जिन्ह केरें। उजरें हरष बिषाद बसेरें॥1॥भावार्थ:-अब मैं सच्चे भाव से दुष्टों को प्रणाम करता हूँ, जो बिना ही प्रयोजन, ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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संत-असंत वंदना

बंदउँ संत असज्जन चरना। दुःखप्रद उभय बीच कछु बरना॥बिछुरत एक प्रान हरि लेहीं। मिलत एक दुख दारुन देहीं॥2॥ भावार्थ:-अब मैं संत और असंत दोनों के चरणों की वन्दना करता हूँ, दोनों ही दुःख देने वाले ह...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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रामरूप से जीवमात्र की वंदना :

जड़ चेतन जग जीव जत सकल राममय जानि।बंदउँ सब के पद कमल सदा जोरि जुग पानि॥7(ग)॥भावार्थ:-जगत में जितने जड़ और चेतन जीव हैं, सबको राममय जानकर मैं उन सबके चरणकमलों की सदा दोनों हाथ जोड़कर वन्दना करता ह...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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तुलसीदासजी की दीनता और राम भक्तिमयी कविता की महिमा

जानि कृपाकर किंकर मोहू। सब मिलि करहु छाड़ि छल छोहू॥निज बुधि बल भरोस मोहि नाहीं। तातें बिनय करउँ सब पाहीं॥2॥ भावार्थ:-मुझको अपना दास जानकर कृपा की खान आप सब लोग मिलकर छल छोड़कर कृपा कीजिए। मु...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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कवि वंदना

चरन कमल बंदउँ तिन्ह केरे। पुरवहुँ सकल मनोरथ मेरे॥कलि के कबिन्ह करउँ परनामा। जिन्ह बरने रघुपति गुन ग्रामा॥2॥भावार्थ:-मैं उन सब (श्रेष्ठ कवियों) के चरणकमलों में प्रणाम करता हूँ, वे मेरे सब मनोर...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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वाल्मीकि, वेद, ब्रह्मा, देवता, शिव, पार्वती आदि की वंदना

सोरठा : बंदउँ मुनि पद कंजु रामायन जेहिं निरमयउ।सखर सुकोमल मंजु दोष रहित दूषन सहित॥14 घ॥भावार्थ:-मैं उन वाल्मीकि मुनि के चरण कमलों की वंदना करता हूँ, जिन्होंने रामायण की रचना की है, जो खर (राक्ष...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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श्री सीताराम-धाम-परिकर वंदना

चौपाई : बंदउँ अवध पुरी अति पावनि। सरजू सरि कलि कलुष नसावनि॥प्रनवउँ पुर नर नारि बहोरी। ममता जिन्ह पर प्रभुहि न थोरी॥1॥भावार्थ:-मैं अति पवित्र श्री अयोध्यापुरी और कलियुग के पापों का नाश करने ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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श्री नाम वंदना और नाम महिमा

चौपाई : बंदउँ नाम राम रघुबर को। हेतु कृसानु भानु हिमकर को॥बिधि हरि हरमय बेद प्रान सो। अगुन अनूपम गुन निधान सो॥1॥भावार्थ:-मैं श्री रघुनाथजी के नाम 'राम'की वंदना करता हूँ, जो कृशानु (अग्नि), भानु (...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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श्री रामगुण और श्री रामचरित्‌ की महिमा

मोरि सुधारिहि सो सब भाँती। जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती॥राम सुस्वामि कुसेवकु मोसो। निज दिसि देखि दयानिधि पोसो॥2॥भावार्थ:-वे (श्री रामजी) मेरी (बिगड़ी) सब तरह से सुधार लेंगे, जिनकी कृपा कृपा करने...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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मानस निर्माण की तिथि

सादर सिवहि नाइ अब माथा। बरनउँ बिसद राम गुन गाथा॥संबत सोरह सै एकतीसा। करउँ कथा हरि पद धरि सीसा॥2॥भावार्थ:-अब मैं आदरपूर्वक श्री शिवजी को सिर नवाकर श्री रामचन्द्रजी के गुणों की निर्मल कथा कहता ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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मानस का रूप और माहात्म्य

दोहा : जस मानस जेहि बिधि भयउ जग प्रचार जेहि हेतु।अब सोइ कहउँ प्रसंग सब सुमिरि उमा बृषकेतु॥35॥भावार्थ:-यह रामचरित मानस जैसा है, जिस प्रकार बना है और जिस हेतु से जगत में इसका प्रचार हुआ, अब वही सब ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद तथा प्रयाग माहात्म्य

अब रघुपति पद पंकरुह हियँ धरि पाइ प्रसाद।कहउँ जुगल मुनिबर्य कर मिलन सुभग संबाद ॥43 ख॥भावार्थ:-मैं अब श्री रघुनाथजी के चरण कमलों को हृदय में धारण कर और उनका प्रसाद पाकर दोनों श्रेष्ठ मुनियों के ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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सती का भ्रम, श्री रामजी का ऐश्वर्य और सती का खेद

रामकथा ससि किरन समाना। संत चकोर करहिं जेहि पाना॥ऐसेइ संसय कीन्ह भवानी। महादेव तब कहा बखानी॥4॥भावार्थ:-श्री रामजी की कथा चंद्रमा की किरणों के समान है, जिसे संत रूपी चकोर सदा पान करते हैं। ऐसा ह...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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शिवजी द्वारा सती का त्याग, शिवजी की समाधि

दोहा :परम पुनीत न जाइ तजि किएँ प्रेम बड़ पापु।प्रगटि न कहत महेसु कछु हृदयँ अधिक संतापु॥56॥भावार्थ:-सती परम पवित्र हैं, इसलिए इन्हें छोड़ते भी नहीं बनता और प्रेम करने में बड़ा पाप है। प्रकट करके ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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सती का दक्ष यज्ञ में जाना

दोहा : दच्छ लिए मुनि बोलि सब करन लगे बड़ जाग।नेवते सादर सकल सुर जे पावत मख भाग॥60॥भावार्थ:-दक्ष ने सब मुनियों को बुला लिया और वे बड़ा यज्ञ करने लगे। जो देवता यज्ञ का भाग पाते हैं, दक्ष ने उन सबको ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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पति के अपमान से दुःखी होकर सती का योगाग्नि से जल जाना, दक्ष यज्ञ विध्वंस

दोहा : सिव अपमानु न जाइ सहि हृदयँ न होइ प्रबोध।सकल सभहि हठि हटकि तब बोलीं बचन सक्रोध॥63॥भावार्थ:-परन्तु उनसे शिवजी का अपमान सहा नहीं गया, इससे उनके हृदय में कुछ भी प्रबोध नहीं हुआ। तब वे सारी स...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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पार्वती का जन्म और तपस्या

सतीं मरत हरि सन बरु मागा। जनम जनम सिव पद अनुरागा॥तेहि कारन हिमगिरि गृह जाई। जनमीं पारबती तनु पाई॥3॥भावार्थ:-सती ने मरते समय भगवान हरि से यह वर माँगा कि मेरा जन्म-जन्म में शिवजी के चरणों में अनु...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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श्री रामजी का शिवजी से विवाह के लिए अनुरोध

दोहा : अब बिनती मम सुनहु सिव जौं मो पर निज नेहु।जाइ बिबाहहु सैलजहि यह मोहि मागें देहु॥76॥भावार्थ:-(फिर उन्होंने शिवजी से कहा-) हे शिवजी! यदि मुझ पर आपका स्नेह है, तो अब आप मेरी विनती सुनिए। मुझे य...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वतीजी का महत्व

चौपाई : रिषिन्ह गौरि देखी तहँ कैसी। मूरतिमंत तपस्या जैसी॥बोले मुनि सुनु सैलकुमारी। करहु कवन कारन तपु भारी॥1॥भावार्थ:-ऋषियों ने (वहाँ जाकर) पार्वती को कैसी देखा, मानो मूर्तिमान्‌ तपस्या ही ह...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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कामदेव का देवकार्य के लिए जाना और भस्म होना

दोहा : सुरन्ह कही निज बिपति सब सुनि मन कीन्ह बिचार।संभु बिरोध न कुसल मोहि बिहसि कहेउ अस मार॥83॥भावार्थ:-देवताओं ने कामदेव से अपनी सारी विपत्ति कही। सुनकर कामदेव ने मन में विचार किया और हँसकर ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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रति को वरदान

दोहा : अब तें रति तव नाथ कर होइहि नामु अनंगु।बिनु बपु ब्यापिहि सबहि पुनि सुनु निज मिलन प्रसंगु॥87॥भावार्थ:-हे रति! अब से तेरे स्वामी का नाम अनंग होगा। वह बिना ही शरीर के सबको व्यापेगा। अब तू अप...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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देवताओं का शिवजी से ब्याह के लिए प्रार्थना करना, सप्तर्षियों का पार्वती के पास जाना

दोहा :सकल सुरन्ह के हृदयँ अस संकर परम उछाहु।निज नयनन्हि देखा चहहिं नाथ तुम्हार बिबाहु॥88॥भावार्थ:-हे शंकर! सब देवताओं के मन में ऐसा परम उत्साह है कि हे नाथ! वे अपनी आँखों से आपका विवाह देखना चाह...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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शिवजी की विचित्र बारात और विवाह की तैयारी

दोहा : लगे सँवारन सकल सुर बाहन बिबिध बिमान।होहिं सगुन मंगल सुभद करहिं अपछरा गान॥91॥भावार्थ:-सब देवता अपने भाँति-भाँति के वाहन और विमान सजाने लगे, कल्याणप्रद मंगल शकुन होने लगे और अप्सराएँ गा...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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शिवजी का विवाह

दोहा : मुनि अनुसासन गनपतिहि पूजेउ संभु भवानि।कोउ सुनि संसय करै जनि सुर अनादि जियँ जानि॥100॥भावार्थ:-मुनियों की आज्ञा से शिवजी और पार्वतीजी ने गणेशजी का पूजन किया। मन में देवताओं को अनादि समझ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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शिव-पार्वती संवाद

दोहा : जटा मुकुट सुरसरित सिर लोचन नलिन बिसाल।नीलकंठ लावन्यनिधि सोह बालबिधु भाल॥106॥भावार्थ:-उनके सिर पर जटाओं का मुकुट और गंगाजी (शोभायमान) थीं। कमल के समान बड़े-बड़े नेत्र थे। उनका नील कंठ थ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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अवतार के हेतु

सोरठा : सुनु सुभ कथा भवानि रामचरितमानस बिमल।कहा भुसुंडि बखानि सुना बिहग नायक गरुड़॥120 ख॥भावार्थ:-हे पार्वती! निर्मल रामचरितमानस की वह मंगलमयी कथा सुनो जिसे काकभुशुण्डि ने विस्तार से कहा और...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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