हक और बातिल की पोस्ट्स

इमाम हुसैन का वो पहला सफर जो कर्बला पे जा के ख़त्म हुआ | मदीने से मक्का 28 रजब

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); ये बात २० रजब सन ६० हिजरी की है जब मुआव्विया की मृत्यु हो गयी और यज़ीद  ने खुद को मुसलमानो  का  खलीफा घोषित कर दिया ।इमाम हुसैन (अ.स ) हज़रत मुहम्मद (स.अ व ) के नवासे थे और यह कैस...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
हक और बातिल
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HAZRAT ALI (AS) AUR KALAM’E IQBAL* WA GHALIB

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); Allama Iqbal* ke chAnd ashaar:Muslim’e awwal, shahey mardaaN Ali( A.S.)ishq ra sarmaaya’e eimaaN Ali(A.S.)Allaama Iqbal*khaira na kar saka mujhey, jalwaey daanish’e farAngsurma hai meiri aaNkh ka, khaakey Madina o NajafAllaama Iqbal*faiz Iqbal* hai usi dAr kabandaey shaah’e la-fataa hooN maiNAllaama Iqbal*yeh hai Iqbal*, faiz e yaad e naam e Murtaza, jis senigaahey fikr mein khalwat saraaey la-makaaN tAk haiAllaama Iqbal*————–M...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
हक और बातिल
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अली! यह वही है जिसको पा कर तुमने शुक्र का सजदा किया था...

विलायत पोर्टल :घर में सन्नाटा छाया हुआ था और शौहर बाहर गए हुए थे, वह तन्हा थी और अपने हुजरे में बंद अपने रब से मुलाक़ात के लिए ख़ुद को तैयार कर रही थी, और अपने मालिक की तसबीह और तहलील में मसरूफ़ थी,...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
हक और बातिल
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आख़िरत में आपका दींन क्या इस्लाम रहेगा ?

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); आख़िरत में हमारा दींन क्या दीन ऐ इस्लाम होगा क्यों की जन्नत तो  इन्ही लिए है ?दुनिया में हम अपने अक़ीदे को बयान करके खुद को मुसलमान और अली की विलायत को मानने वाले  बताते है...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
हक और बातिल
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सेक्स करने के तरीके के असरात बच्चे के किरदार पे होते हैं |

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); इस्लाम  में शादी (निकाह) का तात्पर्य सेक्सी इच्छा की पूर्ति के साथ-साथ सदैव नेक व सहीह व पूर्ण संतान का द्रष्टिगत रखना भी है। इसी लिए आइम्मः-ए-मासूमिन (अ.) ने मैथुन के लिए मही...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
हक और बातिल
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मालिक यह तेरा घर है और सिर्फ़ तू ही बचाने वाला है --अब्दुल मुत्तलिब

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); मुवर्रेख़ीन का कहना है कि अबरहातुल अशरम का ईसाई बादशाह था। उसमें मज़हबी ताअस्सुब बेहद था। ख़ाना ए काबा की अज़मत व हुरमत देख कर आतिशे हसद से भड़क उठा और इसके वेक़ार को घटाने ...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
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बेशर्म बेहया

बे शर्म और बे हया लोगो की कभी उनकी नज़र में  बेइज्ज़ती नही होती ! क्यों की उन्हें इज़्ज़त के मायने ही पता नहीं होते | उन्हें तो बस इतना पता होता है हर हाल में जीतना है उसके लिए आख़िरत जाय या हुक्म ऐ खु...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
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शहादत इमाम हुसैन मानव इतिहास की बहुत बड़ी त्रासदी

शहादत इमाम हुसैन मानव इतिहास की बहुत बड़ी त्रासदीप्रोफेसर अख्तरुल वासे22 नवंबर, 2012(उर्दू से अनुवाद- समीउर रहमान, न्यु एज इस्लाम)मोहर्रम का महीना इस्लामी महीनों में कई मायनों में बहुत अहम है। इ...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
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रतनसेन तीन हिजरी का हिन्दुस्तानी जिसने तीन साल हज़रत मुहम्मद सॉ के साथ गुज़ारे |

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); लेखक:मौलाना पैग़म्बर अब्बास नौगाँवीतारीखदानो ने हिन्दुस्तान मे इस्लाम की आमद हज्जाज बिन युसुफ के नौजवान कमांडर मौहम्मद बिन क़ासिम से मंसूब की है और ये ऐसी ज़हनीयत का नती...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
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आमाल ऐ आशूरा

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7 माह पूर्व
हक और बातिल
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ज़ियारत ऐ आशूरा ,ज़ियारत ऐ वरिसा और दुआ ऐ अलक़मा

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7 माह पूर्व
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अमीरूल मोमेनीन अली (अ0) का खत मालिक ऐ अश्तर के नाम |

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); (जिसे मालिक बिन अश्तर नग़मी के नाम तहरीर फ़रमाया है, उस वक़्त जब उन्हें मोहम्मद बिन अबीबक्र के हालात के ख़राब हो जाने के बाद मिस्र और उसके एतराफ़ का गवर्नर मुक़र्रर फ़रमाया और यह ...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
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अमल में ख़ुलूस ज़रूरी है |

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); इंसान अपनी ज़िंदगी में अल्लाह से क़रीब होने के लिए बहुत से अमल अंजाम देता है लेकिन कभी कभी महसूस करता है कि इतने सारे आमाल के बावजूद वह ख़ुद को अल्लाह से क़रीब नहीं पा रहा है,...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
हक और बातिल
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माह ऐ मुहर्रम में अज़ादारी बिना नीयत की पाकीज़गी के नहीं हो सकती|

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});  इस्लाम की निगाह में वह अमल सही है जो अल्लाह उसके रसूल स.अ. और इमामों के हुक्म के मुताबिक़ हों क्योंकि यही सेराते मुस्तक़ीम है, और जितना इंसान इस रास्ते से दूर होता जाएगा उत...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
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पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद (स.) की सौ हदीसें |

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद (स.) 1.       आदमी जैसे जैसे बूढ़ा होता जाता है उसकी हिरस व तमन्नाएं जवान होती जाती हैं।2.       अगर मेरी उम्मत के आलिम व हाकिम...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
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ग़दीर पर रसूले इस्लाम (स.अ.) का ऐलान |

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); ग़दीर पर रसूले इस्लाम (स.अ.) का ऐलान  |  हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही वसल्लम को भी ग़दीर का उतना ही ख़्याल था जितना की अल्लाह को, और उस साल बहुत सारी क़ौ...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
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ऐ अल्लाह! तू उसको दोस्त रखना जो अली को दोस्त रखे | ग़दीर

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); ईद ऐ ग़दीर खुशियों का दिन है और मुसलमानों के आपसी भाईचारे और एकता का प्रतिक है | लेकिन यह दुआ हमेशा करते रहे की अल्लाह हम सबको इब्लीस के शर से महफूज़ रखे |ग़दीर के दिन दुनिया के सभ...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
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सच्चे दोस्त की पहचान मौला अली ने बताया |

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); किसी ने मुसलमानो के खलीफा हज़रत अली (अ.स ) से पूछा की कोई शख्स उसका सच्चा दोस्त है या नहीं यह कैसे पता किया जाय तो हज़रत अली ने फ़रमाया उसके साथ किसी दावत में जाओ और देखो वो दस्तरख...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
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इमाम ज़ैनुल आबेदीन (अ .स ) ने कहा चार लोगों के साथ कभी नहीं रहना |

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); इमाम ज़ैनुल आबेदीन (अ .स ) ने कहा चार लोगों के साथ कभी नहीं रहना | एक बार इमाम ज़ैनुल आबेदीन (अ .स )  ने अपने बेटे इमाम मुहम्मद बाक़िर (अ .स ) से कहा बेटा ज़िंदगी में  क़िस्म के ल...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
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ईरान में अमीर और ग़रीब के बीच फासले हो रहे हैं ख़त्म

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); ईरान में अमीर और ग़रीब के बीच फासले को लेकर पहले काफी कुछ पढ़ा था। ईरान पहुंचकर भी मेरी दिलचस्पी क़रीब साढ़े आठ करोड़ आबादी वाले इस मुल्क के स्लम्स में थी। पूरे सफर में जिन ...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
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ख्याल रहे औलाद को आक़ किया नहीं जाता वो हो जाता है |

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); कल आज और कल |बचपन में जब भाई बहन एक दुसरे के साथ ना इंसाफ़ी करते थे तो माँ बाप ना इंसाफ़ी करने वाले बच्चे को डांट के जिसका हक़ मारा वो दिला देते थे | बड़े होने पे जो लायक बच्चा होता ह...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
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इमामे जमाअत क़वानीन के दायरे मे इमाम है|

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); नमाज़ की अस्ल यह है कि उसको जमाअत के साथ पढ़ा जाये। और जब इंसान नमाज़े जमाअत मे होता है तो वह एक इंसान की हैसियत से इंसानो के बीच और इंसानों के साथ होता है। नमाज़ का एक इम्तिय...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
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हमें ज़िन्दगी कैसे गुज़ारनी है यह नमाज़ के दो जुम्लों से तय होती है।

हमें ज़िन्दगी कैसे गुज़ारनी है यह  नमाज़ के दो जुम्लों  से तय होती है।पहला ग़ैरिल मग़ज़ूबि अलैहिम वलज़्ज़ालीन (न उनका जिनपर ग़ज़ब (प्रकोप) हुआ और न बहके हुओं का) जिसका मतलब की हमें उन गुमराह ल...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
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पैग़ाम ए इमाम हुसैन अ स अपने अज़ादारो के नाम ।।।।।

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); पैग़ाम ए इमाम हुसैन अ स अपने अज़ादारो के नाम ।।।।।मेरा पैग़ाम ज़माने को सुनाने वालो ।।मेरे ज़ख्मो को कलेजे से लगाने वालो ।।मेरे मातम से ज़माने को जगाने वालोकर्बला क्या है ज़माने ...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
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इस्लाम और पर्दा -सैय्यद ज़ीशान हैदर

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); प्राक्कथनऔरत का समाज में स्थान एंव महत्व के विषय पर बहुत से लेख लिखे जा चुके हैं। आज के इस नवीन युग में पूरे संसार में सत्री जाति की स्वत्रंता के लिये संघर्ष हो रहा है और यहा...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
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एक मुनाज़ेरा इमाम तक़ी अ.स. का |

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); इमाम रज़ा अ.स. को शहीद करने के बाद मामून चाहता था कि किसी तरह से इमाम तक़ी अ.स. पर भी नज़र रखे और इस काम के लिये उसने अपनी बेटी उम्मे फ़ज़्ल का निकाह इमाम तक़ी  से करना चाहा।इस बात पर...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
हक और बातिल
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नमाज़ की हकीकत |

नमाज़ और लिबासरिवायात मे मिलता है कि आइम्मा-ए-मासूमीन अलैहिमुस्सलाम नमाज़ का लिबास अलग रखते थे। और अल्लाह की खिदमत मे शरफ़याब होने के लिए खास तौर पर ईद व जुमे की नमाज़ के वक़्त खास लिबास पहनत...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
हक और बातिल
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वक़्त को चार हिस्सों में तकसीम करो | इमाम अली रज़ा (अ.स

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); इमाम अली रज़ा (अ.स ) ने फरमाया की तुम अपने वक़्त को चार हिस्सों में तकसीम करो|१. किसी ने तुम्हे पैदा किया है कोई तुम्हारा हाकिम है तुम्हारा रब है इसलिए सबसे पहले वक़्त निकालो तुम्...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
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क़ुरआन सिर्फ पढ़ें नहीं समझें और अमल भी करें |

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); क़ुरआन-ए-करीम के मुताले से ज़ाहिर होता है कि तंगहाल, मुफ़लिसों,मिस्कीनों ,ग़रीबों यतीमों की माली मदद, दीगर मुस्लमानों पर इसी तरह फ़र्ज़ है जिस तरह उन पर नमाज़ फ़र्ज़ है|अलम ज़ालिक ...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
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GHAR SE NIKALTE WAQT...

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); GHAR SE NIKALTE WAQT...Imam Sadiq (as):Jab bhi ghar se baahar niklo to BISMILLAH kaho, ke 2 Farishte iske jawaab mein ye kehte hain ke ye najaat paa gaya.Agar kaho LA HAWLA WA LA QUWWATA ILLA BILLAH, to kehte hain ye mehfooz ho gaya.Aur agar kaho TAWAKKALTO 'ALALLAH to kehte hain tere liye kaafi hai.Aise mein Shaitan la'een kehta hai,"Ab mera is bande se kya waasta hain. Ye to mehfooz ho gaya, hidayat paa gaya aur kifaal...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
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