मुकेश राठौड़ की पोस्ट्स

क्षणिक जीवन

क्षण बड़ा निर्दयी होता हैमौत की आगोश में सोता हैअपने ही दम पर जीता हैअपने ही दम पर मरता हैजो जी ले हर क्षण कोक्षण उसका ही होता हैहर क्षण जीने की हौसलाकहाँ हर जन में होता हैजी लो जी भर जिंदगीक्यों...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
मुकेश राठौड़
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दस्तक मौत की

दस्तक मौत की आने लगी अबउम्र भी लड़खड़ाने लगी अबसाथ तेरा खोकर सहारो की आसइस दिल को तड़पाने लगी अबदस्तक मौत की आने लगी अब....जन्म से आज तकवो साथ मेरे चलती रहीमैं सोचता था जी रहापर वो मेरे लिए मरती रहीज...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
मुकेश राठौड़
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शरद ऋतु

ऋतु शरद मन मोहिनीमम मन हरषाये,कान्हा की सांवली सूरत,प्रीत उमंग जगाये,निशा शरद पूनम की धौलीरास रचाऊं सांवरे कान्हा संग,जाकर संग गोपीयों के,मन में भरे उल्लास के रंगप्रकृति भी मनमोहक छटाबिखरे ऋ...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
मुकेश राठौड़
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हमसफर

सफर जिंदगी काजब साथ हमसफर होहर गम भूला देऐसा हमसफर होऐसा हमसफर है पायाकोरा कागज था जीवनरंगीन फूलों से सजायासाथ हरदम हरकदमबन अंधेरों में भी सायाजीवन के हर पढ़ाव परसंघर्ष के हर चढ़ाव परदेकर साथ ...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
मुकेश राठौड़
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माटी है अनमोल

है अनमोल माटीप्राणी मात्र की मां है माटीइसमें उपजे अन्न खनिजहै औषधीय भंडार माटीकिसान उपजाए अन्न धनचिर मेहनत से माटीभूख शांत हो जन जनहै अनमोल माटीप्रकृति पले इस परहै प्रभू वरदान माटीपंचतत्...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
मुकेश राठौड़
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आदर्श

त्रस्त हूँ समाज के खोखले आदर्शों से,छूत अछूत के पाखंडो से,जात धर्मों के झगड़ों से,त्रस्त हूँ समाज के खोखले आदर्शों से,रोज हो रहे बलात्कारों से,हो रहे नारी पर घरेलू हिंसाओं से,त्रस्त हूँ समाज के ...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
मुकेश राठौड़
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आगमन की आस

है आगमन की आस तेरे,कब आओगी पास मेरे,नैन तरसे दरश को तेरे, कब आओगी पास मेरे, चौका सूना बिन तेरे,तके आगमन की राह तेरे,घर मंदिर के कंगूरे,पड़ोसी भी पूछ पूछ हारे,क्या दूं उनको जवाब मेरे,है आगमन की आस...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
मुकेश राठौड़
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तृष्णा

जाने कौन तृष्णा थी मन कीमंत्र मुग्ध हुआ तुम्हें पाकरजीवन सुशोभित किया मेराजीवन संग...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
मुकेश राठौड़
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परिवर्तन

क्या परिवर्तन हुआ है कल में और आज में,कल भी नारी जलती थी सति प्रथा की आग में,आज भी नारी जल&#...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
मुकेश राठौड़
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शहीद

मां देख तेरा लाल आया है,तेरा बेटा आज देश के काम आया है,तु न कहती थी कि दूध न लजाना,देख आज ति...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
मुकेश राठौड़
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दीपक

घोर अंधकार होचल रही बयार होआज द्वार द्वार पर            यह दिया बुझे नहीं.....अनगिनत बलिद&...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
मुकेश राठौड़
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खामोशी

लेखक कहे लेखनी से,क्या करेगी तु अगर,मैं खामोश हो गया,क्या पता काल का ,कल मैं खामोश हो गया,&#...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
मुकेश राठौड़
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यादें

वो बचपन के खेल कैसे याद बन गये,वो रेत के घरौंदे कैसे आज ढह गये,याद आता है बचपन सुहाना,वो ख&#...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
मुकेश राठौड़
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उम्र और मौत

हे उम्र तु सुन जरा,दो पल ठहर रिश्ते निभा लूँ जरा,जिसने मुझे जनम दियापाल पोष कर बड़ा किया,...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
मुकेश राठौड़
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