कुमार मुकुल
कारवॉं karvaan की पोस्ट्स

अखिल भारतीय सम्‍मान वार्ता !

क्‍या पाकिस्‍तान शेर है ? नहीं जी, गीदड़ है। पर चुनाव तक उसे शेर मानने में अपुन के बाप का क्‍या जाता है। इसी तरह चुनाव में अपुन सवा सेर साबित हो जाएंगे! फिर इन गीदडों को कौन पूछेगा ? ये सीमा पर फूं ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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सेपियन्‍स - वैज्ञानिक विकास की आत्‍मालोचना

युवाल नोआ हरारी की विश्‍वप्रसिद्ध पुस्‍तक'सेपियन्‍स'का अनुवाद अब हिंदी में उपलब्‍ध है। सेपियन्‍स रोचक ढंग से'मानव जाति का संक्षिप्‍त इतिहास'हमारे सामने रखती है। पुस्‍तक इस माने में अनोखी ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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जब तक आदमी का होना प्रासंगिक है कविता भी प्रासंगिक है - कुमार मुकुल

Hearth र्ब्‍लाग के लिए अंचित द्वारा की गयी बातचीत at March 24, 2017आज से हमलोग अपनी इंटरव्यू वाली श्रृंखला की शुरुआत कर रहे हैं. इस श्रृंखला में हम कवियों से बात करेंगे और उनकी मनोस्थिति और कविता के प्रति न...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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सोमरस क्‍या है ?

ऋग्‍वेद के अनुसार - मन्‍द्रस्‍यरूपंविविदुर्मनीषिण: - विद्वान लोग मदकर सोमरस का स्‍वरूप जानते हैं। स: पवस्‍वमदिन्‍तम। सोम को अत्‍यंत प्रमत्‍त करने वाला बताया गया है। सोम को स्‍वर्ग से बा...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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वैदिक शब्‍दों की निर्मिति - 'गौ'शब्‍द

वैदिक काल के शब्‍द बताते हैं कि उनका निर्माण और नामकरण जीवों और वस्‍तुओं की गति के संदर्भ में किस तरह हुआ होगा। वेदों में गौ शब्‍द जाने और गति के अर्थ में प्रयुक्‍त है। यह किरणका पर्याय है क्‍...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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अपने दुख से सौंदर्य की रचना करो : वॉन गॉग - कुमार मुकुल

चित्रकार बनने की आकांक्षा वॉन गॉग में शुरू से थी। गरीबी और अपमान में मृत्यु को प्राप्त होनेवाले महान चित्राकार रैम्ब्रां बहुत पसंद थे विन्सेन्ट को और उसका अंत भी रैम्ब्रां की तरह हुआ और दुन...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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स्त्रियां पिकासो की - कुमार मुकुल

सिद्ध मनोविज्ञानी कार्ल युंगने अपने एक लेख में पिकासो और उसकी कला को स्क्जिोफ्रेनिक कहा था। पिकासो के जीवन में और उसके चित्रों में आई दर्जन भर से ज्यादा स्त्रियों के साथ उसके व्यवहार को अगर...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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कथा - लगभग खुशी

4 फरवरी 2016क्या आज का मेरा दिन खुशी में बीता है? दुकानदार से छुटटा पैसों की जगह माचिस की बजाए मिले तीन चॉकलेट मुंह में डालते हुए मैंने सोचा कि लगभग खुशी ही है यह। लगभग जयहिंद की तर्ज पर। हालांकि का...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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दम तोड़ती जातिवादी राजनीति - कुमार मुकुल

करीब बीस साल पहले लिखा गया आलेखजाति और धर्म के काठ की हांड़ी राजनीति के चूल्हे पर एक-एक बार चढ़ चुकी है और अब अपने स्वाभाविक विकृत अंत की ओर बढ़ रही है। बिहार और उत्तर प्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रम...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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स्त्री को लेकर प्रबुद्ध समाज का नजरिया

Thursday, 22 March 2012  लगाएक पूरी नदी उछल कर मुझे डुबो देगीपर मुझे डर न थामारे जाने की सदियों की धमकियों के बीचमन ठहरा था आज    -  वर्तिका नंदास्त्री विमर्श के इस युग में जहां देह की मुक्ति से लेकर उनक...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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हिंसा और अहिंसा, ईसा, बुद्ध, गांधी और गोडसे - कुमार मुकुल

 हिंसा और अहिंसा क्या हैजीवन से बढ़ हिंसा क्या है - केदारनाथ अग्रवालउपरोक्‍त पंक्तियां स्‍पष्‍ट करती हैं कि हिंसा और अहिंसा अपने आप में कुछ नहीं हैं। उनके परिपेक्ष्‍य ही उनकी सकारात्‍मकता...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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आलोचना के संदिग्ध संसार में एक वैकल्पिक स्वर : प्रकाश

इधरके वर्षों में हिंदी आलोचना का वरिष्ठ संसार बड़ी तेजी से संदिग्ध और गैरजिम्मेदारन होता गया है। आलोचना की पहली, दूसरी...परंपरा के तमाम उत्तराधिकारी, जिनकी अपनी-अपनी विरासतों पर निर्लज्ज दाव...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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‘सामाजिक परिवर्तन में बाधक हिन्दुत्व’ दलित चिंतक एच एल दुसाध

 ‘सामाजिक परिवर्तन में बाधक हिन्दुत्व’दलित चिंतक एच एल दुसाध का दुसाध प्रकाशन से आया हजार पृष्ठों का ग्रंथ है। श्री दुसाध पत्रकारिता को समर्पित अकेले ऐसे व्यक्तित्व हैं जिन्होंने राजनी...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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वेदों में क्‍या है (1) - कुमार मुकुल

वेदों की आधारभूमी स्पष्ट है कि खेतिहर समाज के लिए वर्षा प्राथमिक जरूरत है, इसी तरह बादलों से वर्षा कराने वाले इंद्र की पूजा भी स्वाभाविक है।वेद आदिग्रंथ है। इसमें मांसाहारी समाज से विकसित हो...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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दास्‍तोएवस्‍की के प्रेम - कुमार मुकुल

उपन्‍यास जगत की महान हस्‍ती और अपराध और दंडजैसी सार्वकालिक कृति के सर्जकदास्‍वोएवस्‍की के जीवन को हम देखें तो वह भी अपराध और दंड के जटिल संजाल में गुत्‍थम-गुत्‍था दिखेगा। रूप सिंह चंदेल की ...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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क्रोध, चिंता आदि भावावेग सोद्देश्‍य होते हैं - कुमार मुकुल

सहज बुद्धि के आधार पर मन पर नियंत्राण रखना ही जीवन का सबसे बड़ा अर्थ है। एडलर लिखते हैं कि ``जीवन का अर्थ है, मैं अपने साथी मनुष्यों में दिलचस्पी लूं, सम्पूर्ण का एक अंश बनूं, मानव-मात्र की भलाई ...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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संयोगों की सत्‍ता ईश्‍वरीय सत्‍ता का निषेध करती है - कुमार मुकुल

समय का संक्षिप्‍त इतिहास  कुछ नोटससंयोगों की सत्‍ता ईश्‍वरीय सत्‍ता का निषेध करती है : स्‍टीफेन हाकिंग 'पूरा सच कभी किसी एक के हिस्‍से नहीं पड़ता' - स्‍टीफेन हाकिंगको पढते हुए लगता है कि पूर...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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ब्राहमणवाद जातिसूचक संज्ञान नहीं, विचारधारा

डॉ सेवा सिंहके लियेब्राहमणवादजातिसूचक संज्ञान नहीं एक विचारधारा है, वचर्स्वी वर्गों के प्रभुत्व को आधार प्रदान करने वाली एक सत्तामूलक विचारधारा। बौदध और लोकायत लंबे समय तक इसे चुनौती दे...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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मुखर बौद्धिक कवि : कुमार मुकुल ... कृष्ण समिद्ध

( 2017 - आज मुकुल जी को दुसरी बार सुना...मुझे उनके स्वेत धवल बालों से जलन है...वो मुझे भी चाहिए था।)कविता तब दीर्घजीवी होती है ....जब समय को लांघकर बार बार प्रासंगिक बनी रहे और कुमार मुकुल की कविता ऐसी ह...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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अँधकार के बाद लौटकर आती सुबह जैसी कविताएँ - शहंशाह आलम

चर्चित किताब : बयालीस - 'एक उर्सुला होती है' ( कुमार मुकुल )            इससे पहले भी युद्घ हुए थे           पिछला युद्ध जब ख़त्म हुआ           तब कुछ विज...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
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गहरे प्रेम की गहरी कविताएँ ... प्रांजल धर

‘एक उर्सुला होती है’कवि कुमार मुकुल का ताज़ा कविता संग्रह है जिसकी कविताएँ जीवन और समाज में छीजते जा रहे प्रेम को केन्द्र में लाते हुए एक सार्थक-साहित्यिक हस्तक्षेप की बुनियाद रखती हैं। इस ...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
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सृजनात्‍मक जिजीविषा और जिगीषा का प्रतीक 'उर्सुला' - अनिल अनलहातु

हर रचनात्‍मक यात्रा में सहजीवन के रूप में किसी न किसी 'उर्सुला'की मौजूदगी अवश्‍य रहती है, इस संग्रह की कविताएं इसी बात की तस्‍दीक करती हैं। इस तरह कुमार मुकुलवॉन गॉग की 'उर्सुला'को एक प्रतीक म...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
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सहज तरंगित काव्यात्मक रिपोर्टिंग का सुंदर कोलाज - राधेश्‍याम तिवारी

भारतीय साहित्य में यह विचित्र सी स्थिति हैे कि जिन आचार्याें ने काव्य की आलेाचना के सिद्धान्त गढ़े आमतौर पर वे कविता लिखने से बचते रहे। प्लेटो या अरस्तू ,दांडी, भामह से लेकर आचार्य रामचन्द्र ...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
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अस्तित्व के अभिप्रेरक प्रेम की खरी कविताएँ - सवाई सिंह शेखावत

मित्र कवि कुमार मुकुलका अंतिका प्रकाशन से :'एक उर्सुला होती है'शीर्षक से तीसरा कविता संकलनआया है। इससे पूर्व 'परिदृश्य के भीतर''(2000)और'ग्यारह सितम्बर और अन्य कविताएँ'(2006)शीर्षक से उनके दो संग्र...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
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जो नहीं मिला, उसे पाने की कोशिश में सर्वोत्तम रचना - कैलाश मनहर

"परस्पर अर्थों को अन्तिम सीमाओं तक समझते हुये/एक-दूसरे के स्पर्श तक की इच्छा नहीं करते थे"(द्रोपदी के विषय में कृष्ण) कवि विष्णु खरे की पंक्तियों को उध्दृत करते हुये कुमार मुकुल अपनी काव्य कृ...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
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