माही.... की पोस्ट्स

कुछ तो है... (Kuch toh hai...)

कुछ अंदर दबा हुआ सा है चुभता है ठूंठ साअपनी आवाज को भी नहीं सुनता मैंचीखता हूँ गूँज सा। एक तरफ तन्हाइयों का शोर है दूजी तरफ ग़मों का सन्नाटा पसरा हुआ हैकिस तरफ रखूँ कदम अपने फर्श पे मेरा मैं बिखर...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
माही....
7

मेरे गाँव वाले घर में..

छोटे - छोटे दरवाजेमोटी - मोटी दीवारें थींमेरे गाँव वाले घर मेंन किसी के दिल में दरारें थीं।बड़े छोटे से कमरे मेंपूरा परिवार रहता थासुख - दुख के सारे मौसमहर कोई संग सहता था।पुरानी एक तश्वीर टंगी ...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
माही....
5

बीती रात..

रौशनी तो कम हो गई थीपर आँखों के चरागअब भी जल रहे थेहम बीती रातदिल मे लिए कई ख्वाबअनजानी राहों में चल रहे थे।इक आहट हुईऔर ख्वाबों का मेहताब टूट गयाकुछ टुकड़े चुभे दिल की ज़मीं पेकोई अरमां आँखों स...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
माही....
3

मौन..

सुनों..!एक "मौन"सी कहानी हैकुछ खामोशियाँ हैं मेरे जेहन मेंजो चीखती हैंबिन आवाज के..।देखो!आज कागज पे रख ही दिया मैंनेअपने अंदर के उस "मौन"कोके कहीं गुम न जायेइसीलिएशब्दों में पिरो के..।पढ़ो!आज तुम इ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
माही....
7

क्यों तुम्हें हमेशा...

हर पल तेरा चेहरामेरे जेहन के समंदर में उतराता रहता है..और तेरा ख्यालजैसे हो कोई चाँदडूब के मुझमेंगोते खाता रहता है..तुम लाख चाहो के मुझे भुला दोपर ये जो इश्क़ है न मेरातेरे दिल की बगिया में गुलखि...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
माही....
20

अंतहीन सी डोर

एक अंतहीन सी डोर हैक्या अदृश्य कोई छोर है..?थामे हुए है मुझे और तुम्हेंमिलन की आस हैकैसी ये होड़ है..?दूर हो के भी पास हैंहमें एक दूजे का एहसास हैंहरदम मिलन की आस हैकैसी ये प्यास है..?चाहत और हकीक़तमे...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
माही....
22

किस से करें..?

इश्क़ की गुहार, किस से करेंकहो तो प्यार, किस से करें..?वो किस्से कहानियों में बीती रातेंम...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
माही....
14

ताबीज़

काश मैं तेरा वो ताबीजहोतातो तेरे दिल के पास हरदम होता।कभी यूँ ही तेरे हाथों मेंकभी दुआ के लिए लबों पे होताकाश!मैं तेरा ताबीज होता।तुझे भी मुझपे विश्वास होताजब जब कुछ अच्छा या बुरा होता।काश!म...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
माही....
11

मेरी दुल्हन

रूठने लगती है रूह मेरी मुझसे जब जब तेरे चेहरे पे शिकन देखता हूँ के अश्क़ो  को तो तुम छुपा जाते हो अक्सर पर मैं तो आँखों में तेरे  दर्द का समंदर देखता हूँ।तू लाख छुपा ले दर्द अपने पर तुझ...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
माही....
15

पहले तो ऐसा न था कभी..

पहले तो ऐसा न थाके तुझे देखने की तड़पतुझे सुनने का एहसासतुझे छूने की चाह और तेरा होने की...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
माही....
38

पत्थर की हवेली..

पत्थरों पे बनी कारीगरीदेख बीता जमाना याद आयावो लकड़ी की चौखटेंऔर भारी दरवाजों पे लटक...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
माही....
28

दिल अब भी तुझे याद करता है..

रात भर तकिये से लिपट के सोता रहाऔर तुम कहते हो के मुझे तेरी याद नहीं आतीदिल अब भी तुझे य...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
माही....
40

शायद..

कभी किसी जनम में शायदशायद पिछले ही जनम में शायदतेरा मेरा कोई नाता रहा होगाजिसे लिखना &...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
माही....
34

मेरा हिस्सा.. तेरा किस्सा..

देख तेरी तस्वीर कोमुझे एक किस्सा याद आयाज़िन्दगी का मेरीएक हिस्सा याद आया।मेरे हिस्...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
माही....
37

बेचैनी..

एकअजीब कश्मकश में हूँआज खुद के लिए ही कुछ खास मैं हूँ।के कुछ गलतफहमियां जो थी दरमियान ...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
माही....
34

ये ज़िन्दगी..

ज़िन्दगी भी अजीब हैजो बीत गयाउसे याद करती है,आने वाले कल कीफरियाद करती है,जो आज हैउसे ठु...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
माही....
38

ये ज़िन्दगी..

पाँच पांडवों के बीच फँसीद्रौपदी सी हो गयी है ज़िन्दगी।किसका कब साथ निभाऊं कुछ समझ में नहीं आता।जहाँ देखूँ वहीँ पे मेरा अपना खड़ा होता है,पर किसके साथ कहाँ जाऊँ कुछ समझ में नहीं आता।मैंने तो चुन...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
माही....
60

सफ़र-ए-दर्द का राही

जागता रहा रात भरअपने गुनाहों को याद करता मैंखुद से ही माफ़ी माँगताऔर खुद को ही सजा देता मैं।हर सजा के बादगुनाह खुद मुझसे पूछताक्यों तूने मुझे कियाऔर फिर मुझसे रूठता।न जवाब थान शर्मिंदगीजाने ...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
माही....
55

जाने क्यों..?

जब मैं तुमसे मिली थीतब कुछ खास नहीं लगे तुमपर शायद कोई तो बात थी तुममेजिस कारणमैने तुमसेदोस्ती करना चाही।हममेधीरे धीरेबातबातों की शुरुआत हुई।फिर इन्हींबातों बातों मेंमैं तुम्हे जानने लगी...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
माही....
49

दीवानी हूँ मैं उसके प्यार की..

ए साहिब!पागल न कहना मुझेके दीवानी हूँ मैं उसके प्यार कीवो माही है मेराऔर मंज़िल हूँ मैं उसके नाम की।क्या कहना अदाओं के उसकेके कभी बड़ा हँसाता है वो मुझकोरो लेता है खुद में हीपर बड़ा गुदगुदाता है ...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
माही....
69

यादों के झरोखों से....

यादों के झरोखों से एक याद अब भी याद आती हैवो बचपन की अठखेलियाँदोस्तों के साथ की सैकड़ों मस्तियाँमुझे अब भी याद आती है।कोई लौटा नहीं सकताअब वो सुनहरे पल मुझेके ज़िन्दगी की भाग दौड़मुझे अब भी नहीं ...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
माही....
67

वो प्यार नहीं था..

वो...वो प्यार नहीं था,के जब तुमसे दूर जाने की बात मैंने तुमसे कही थीतो तुमने मुझे न जाने कितनी बददुआएं, कितनी बुरी बातें कितने बुरे विचार बस मेरे लिए ही तुम्हारे लबों से कही होगी। उन लबों से हाँ! ...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
माही....
96

तेरे रंग में रंग दे...

मुझपे रंग अपना, कुछ ऐसा लगा माही!के अब कोई दूजा रंग मुझपे दिखे नहीं।उतर जाएँ सारे रंग पुरानेके अब कोई दूजा रंग मुझपे बचे नहीं।ऐसे सजूं कुछ अब मैं तेरे रंग सेके अब कोई दूजा रंग मुझपे सजे नहीं।जह...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
माही....
93

तुमसा कोई नहीं..

काश! तुझसा कोई दूसरा पाना इतना आसान होता।जो हर सुबह मुझेख्वाबों में आकरमुझे नींद से जागने न दे।गर खुल भी जाए नींद सुबह तोख्याल उसका होंठों से मुस्कान भागने न दे।तभी कॉल आये उसका और गुड मॉर्नि...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
माही....
99

चल आज.. बड्डे मनाते हैं।

चल आज..बड्डे मनाते हैं।खो गए हैं वक़्त की धुंध में जो दोस्तआज उन्हें ढूँढ के लाते हैं।चल आज..बड्डे मनाते हैं।चंद खुशियाँ भी खो गई हैं संग उनकेचल वो भी बंटोर के लाते हैं।चल आज..बड्डे मनाते हैं।वो ...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
माही....
103

वो पहली बार...

तुम एक सपने में आई थीसपना छोटा सा था और तुम मुस्कुराई थीएक कोई दोस्त भी था साथ तुम्हारेऔर मेरे दोस्तों ने महफ़िल जमाई थी।बैठी थी तुम मुझसे चिपक केऔर हर बात पे अपनी मौजूदगी जताई थी।कुछ शरारतें क...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
माही....
111

आज जरा जी लेने दे मुझे...

आ भर लूँ बांहों में तुझेकि आज जी लेने दे मुझे।ये तरसती निगाहेंऔर खुली मेरी बाहेंतू इन धड़कनों की प्यास हैक्या कहती हैं धड़कने तेरीआज सुनने दे मुझे।मेरी प्यास है तूएक अन्जाना एहसास है तूलिखा है...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
माही....
93

कब ?

कब रोका था मैंने तुझे माही!मेरी ज़िंदगी में आने से और दिल तोड़ कर फिर जाने से... मुझे अपना बनाने से मुझे पलकों में छुपाने से मेरी दुनिया में आ के कुछ देर रुक के मुझे यूं ही सताने से सता के मुहब्बत में...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
माही....
55

कभी कभी तू यूं ही...

कभी कभी तू यूं ही दिख जाता है तस्वीरों में मुझको पर ऐ खुदा!क्यूँ नहीं मिलता वो मेरी तक़दीरों में मुझको।कोई तो खता की होगी गए जनम में हमने के हर पल पाता हूँ जंजीरों में खुद को।प्यार देने आया हूँ प...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
माही....
69

तुम थे वहाँ...

तुम थे वहाँकरते मेरा इंतज़ारबैठ बिस्तर के कोने मेंथा मेरे आने का एतबार।जाने कितनी दे...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
माही....
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