डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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दोहे "गुरुओं का ज्ञान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मतलब के हैं अब गुरू, मतलब के ही शिष्य।दोनों इसी जुगाड़ में, कैसे बने भविष्य।।सम्बन्धों की आज तो, हालत बड़ी विचित्र।नहीं रहे गुरु-शिष्य अब, पावन और पवित्र।।साथ बैठ गुरु-शिष्य जब, छलकाते हों ...  और पढ़ें
1 दिन पूर्व
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गीत "नीर पावन बनाओ करो आचमन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जो हैं कोमल-सरल उनको मेरा नमन।जो घमण्डी हैं उनका ही होता पतन।।कुछ भी दुर्लभ नहीं आदमी के लिए,मान-सम्मान है संयमी के लिए,सींचना नेह से अपना प्यारा चमन।जो घमण्डी हैं उनका ही होता पतन।।रास्ते मे...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
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दोहे "पितृपक्ष में कीजिए, वन्दन-पूजा-जाप" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

श्रद्धा से ही कीजिए, निज पुरुखों को याद।श्रद्धा ही तो श्राद्ध की, होती है बुनियाद।।--आदिकाल से चल रही, जग में जग की रीत।वर्तमान ही बाद में, होता सदा अतीत।।--जीवन आता है नहीं, जब जाता है रूठ।जर्जर ...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
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दोहे "गजल हो गयी पास" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

वजन भजन में कम हुआ, गजल हो गयी पास।भजन कहाँ लव-लीन की, बुझा सकेंगे प्यास।।कुछ को दौलत का नशा, कोई मद में चूर।आशिक होते हैं सदा, लोकलाज से दूर।।लुभा रहा जसलीन को, मखमल का कालीन।दौलत पाने के लि...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
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दोहे "कर दो दूर गुरूर" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

बहुत घिनौनी कर रहा, हरकत पाकिस्तान।सीना छप्पन इंच का, दिखला दो श्रीमान।।सम्मुख पाकिस्तान के, क्यों होते मजबूर।आतंकी नापाक का, कर दो दूर गुरूर।।सम्बन्धों के तार जब, सभी गये हैं टूट।बैरी पाकिस...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
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गीत "एक रहो और नेक रहो" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

त्यौहारों की धूम मची है,पर्व नया-नित आता है।परम्पराओं-मान्यताओं की,हमको याद दिलाता है।।उत्सव हैं उल्लास जगाते,सूने मन के उपवन में,खिल जाते हैं सुमन बसन्ती,उर के उजड़े मधुवन में,जीवन जी...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
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दोहे "बुड्ढों के अनुबन्ध" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

लटक रहे हैं कबर में, जिनके दोनों पाँव।साठ साल के बाद वो, चले इश्क के दाँव।।कल तक जो शागिर्द थी, रूपवती जसलीन।पत्नी बनी अनूप की, होकर अब लवलीन।।नहीं युवतियों से निभें, बुड्ढों के सम्बन्ध।मतलब स...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
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गीत "हुआ निर्मल गगन" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

खिल उठे फिर से वही सुन्दर सुमन।छँट गये बादल हुआ निर्मल गगन।।उष्ण मौसम का गिरा कुछ आज पारा,हो गयी सामान्य अब नदियों की धारा,नीर से, आओ करें हम आचमन।रात लम्बी हो गयी अब हो गये छोटे दिवस,सूर्य की ग...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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बालकविता "छुट्टी दे दो अब श्रीमान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मास्साब मत पकड़ो कान।है जुकाम से बहुत थकान।।सरदी से ठिठुरे हैं हाथ।नहीं दे रहे कुछ भी साथ।।नभ में छाये काले बादल।भरा हुआ जिनमें शीतल जल।।आज नहीं लिखने की मर्जी।सेवा में भेजी है अर्जी...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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गीत "धान खेतों में लरजकर पक गया है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 आषाढ़ से आकाश अब तक रो रहा है।बादलों को इस बरस क्या हो रहा है? आज पानी बन गया जंजाल है,भूख से पंछी हुए बेहाल हैं,रश्मियों को सूर्य अपनी खो रहा है।बादलों को इस बरस क्या हो रहा है? कब तलक न...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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गीत "इक मौन-निमन्त्रण तो दे दो"डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जलने को परवाना आतुर, आशा के दीप जलाओ तो।कब से बैठा प्यासा चातुर, गगरी से जल छलकाओ तो।। मधुवन में महक समाई है, कलियों में यौवन सा छाया,मस्ती में दीवाना होकर, भँवरा उपवन में मँडरा...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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गीत "हिन्दी की बिन्दी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

गौरय्या का नीड़, चील-कौओं ने है हथियायाहलो-हाय का पाठ हमारे बच्चों को सिखलायाजाल बिछाया अपना, छीनी है हिन्दी की बिन्दी अपने घर में हुई परायी, अपनी भाषा हिन्दीखोटे सिक्के से लोगों के मन को ह...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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गीत "व्याकरण से हो रही खूब छेड़खानी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

हिन्दी के महलों में, अँगरेजी रानी।हिन्द का अतीत, आज बन गया कहानी।।फूल और फल रहे, देश में सुरालयलूट रहे लाज को आज खुद हयालयनित्य क्यों दरक रहे, सन्तरी हिमालय बन्द होते जा रहे, हिन्दी के विद्या...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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दोहे "सभी गणों के ईश" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

विघ्नविनाशक आप हो, सभी गणों के ईश।पूजा करते आपकी, सुर-नर और मुनीश।।--सबसे पहले आपकी, पूजा होती देव।सबकी रक्षा कीजिए, जय-जय गणपतिदेव।।--करता है आराधना, मन से सकल समाज।बिना आपके तो नहीं, होता मंगल क...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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दोहागीत "हिन्दी करे पुकार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

तोड़ दीजिए मिथक सब, भाषा करे पुकार।हिन्दी को दे दीजिए, अब उसका अधिकार।।ओ काशी के सांसद, संसद के शिरमौर।विदा करो अब देश से, अँगरेजी का दौर।। है कठिनाई कौन सी, क्यों हो अब लाचार।पूरे बहुमत की ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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गीत "तेरह सितम्बर-ज्येष्ठ पुत्र का जन्मदिन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जो वर माँगे थे विधना से,पूरे सब वरदान हो गये।नितिन तुम्हारे आ जाने सेपूरे सब अरमान हो गये।।घर-आँगनरूपी उपवन में,मुरझाये सब सुमन खिल गये।नीरस जीवन सरस हो गया,सब अनुपम उपहार मिल गये।धूल उड़ाते ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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गीत "क्या हो गया है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आज मेरे देश को क्या हो गया है?मख़मली परिवेश को क्या हो गया है?पुष्प-कलिकाओं पे भँवरे, रात-दिन मँडरा रहे,बागवाँ बनकर लुटेरे, वाटिका को खा रहे,सत्य के उपदेश को क्या हो गया है?मख़मली परिवेश को ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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"अनुबन्धों की मत बात करो" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सम्बन्धों की दुनिया में,अनुबन्धों की मत बात करो।सपने कब अपने होते हैं,सपनों की मत बात करो।।लक्ष्य नहीं हो जिन राहों में,कभी न उन पर कदम धरो,जिनसे औंधे मुँह गिर जाओ,ऐसी नहीं उड़ान भरो,रंग-बिरंग...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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ग़ज़ल "हिमाकत में निजामत है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

घुमाकर बात को करना, समय की अब नजाकत हैभले ही बात हो वजनी, मगर उसमें सियासत हैछुरी को जब मिले मौका, हमेशा वार करती हैछुरी मीठी हो या कड़वी, छिपी उसमें कयामत हैबगीचा सींचना होगा, सभी को नेह के जल से...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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दोहे "हिन्दी आती याद" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

भारत के वर्चस्व का, कैसे हो आभास। अपनी भाषा के बिना, मन हो रहा उदास।। हिन्दी करती रही है, सबसे यही सवाल।अब तक भी क्यों  खून में, आया नहीं उबाल।। सात दशक से अधिक से,  हम सब हैं आजाद।किन्त...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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दोहे "मँहगाई पर कोई नहीं लगाम" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

कितने ही वट वृक्ष थे, तब भी दल में शेष।अनुभवहीन-अयोग्य क्यों, फिर बन गया विशेष।।जन-गण ने युवराज को, बिल्कुल दिया नकार।इसीलिए तो देश में, बदल गयी सरकार।।वंशवाद के दंश को, झेल न पाया देश।बदल सियास...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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"स्लेट और तख्ती" (प्रकाशन जयविजय-सितम्बर,2018)

सिसक-सिसक कर स्लेट जी रही,तख्ती ने दम तोड़ दिया है।सुन्दर लेख-सुलेख नहीं है,कलम टाट का छोड़ दिया है।।  दादी कहती एक कहानी,बीत गई सभ्यता पुरानी,लकड़ी की पाटी होती थी,बची न उसकी कोई निशानी।।फा...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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गुरु वन्दना "श्रीगुरूदेव का वन्दन" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

ओम् जय शिक्षा दाता, जय-जय शिक्षा दाता।जो जन तुमको ध्याता, पार उतर जाता।। तुम शिष्यों के सम्बल, तुम ज्ञानी-ध्यानी।संस्कार-सद्गुण को गुरु ही सिखलाता।। कृपा तुम्हारी पाकर, धन्य हुआ सेवक।मन ह...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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शिक्षक दिवस "बिकता है ज्ञान" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

ऊँची दूकानफीका पकवानआज के युग मेंबिकता है ज्ञानयही तो हैशिक्षा की पहचानविद्याएँ लुप्तप्रायःछात्र कहाँ जायेंशिक्षा का शोरट्यूशन का जोरसजी हैं दूकानेंलोग लगे हैं कमाने-खानेगुरू गायबविद्...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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रपट "स्व. टीकाराम पाण्डेय 'एकाकी'की पाँचवीं पुण्यतिथि"

मित्रों !      कल दिनांक 2 सितम्बर, 2018 को मेरे 40 साल पुराने मित्र स्व. टीकाराम पाण्डेय 'एकाकी'की पाँचवीं पुण्यतिथि पर उनका भावपूर्ण स्मरण करते हुए काव्यमयी श्रद्धांजलि समर्पित की गयी। जिसका ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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दोहे "योगिराज का जन्मदिन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

योगिराज का जन्मदिन, मना रहा संसार।हे मनमोहन देश में, फिर से लो अवतार।।सुनने को आतुर सभी, बंसी की झंकार।मोहन आओ धरा पर, भारत रहा पुकार।।श्री कृष्ण भगवान ने, दूर किया अज्ञान।युद्ध भूमि में पार्...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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दोहे "महापुरुष अवतार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जन्म लिया गोपाल ने, जब-जब कारागार।धरा-गगन में हो रही, उसकी जय-जयकार।।--बादल नभ में छा रहे, बरस रहा है नीर।हुआ देवकी-नन्द का, मन तब बहुत अधीर।।--बन्दीघर में कंस की, पहरे थे संगीन।खिसक रही वसुदेव के, ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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दोहे "कृष्ण सँवारो काज" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

संकट में है द्रोपदी, खतरे में है लाज।आया भादो मास है, कृष्ण सँवारो काज।।मनुज दनुज अब बन गया, भूल गया है शील।देख अकेली नार को, बात करे अशलील।।भोली चिड़िया देखकर, झपट रहा है बाज।हुआ बहुत लाचार अब, ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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8

गीत "अपनी हिन्दी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अंग्रेजी भाषा के हम तो, खाने लगे निवाले हैंखान-पान-परिधान विदेशी, फिर भी हिन्दी वाले हैं अपनी गठरी कभी न खोली, उनके थाल खँगाल रहेअपनी माता को दुत्कारा, उनकी माता पाल रहेकुछ काले अंग्रेज, देश क...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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7

"सृजन कुंज की भूमिका" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

काव्य का गुलदस्ता है सृजन कुंज(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)   पेशे से अंग्रेजी की एक शिक्षिका जो कामकाजी महिला के साथ-साथ एक कुशल गृहणी, एक सम्वेदनशील पुत्री, मन्दालसा जैसी माता, धर...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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