डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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दोहे "मैं 'मयंक'हूँ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

चाहे चन्दा में कितने ही, धब्बे काले-काले हों।सूरज में चाहे कितने ही, सुख के भरे उजाले हों।लेकिन वो चन्दा जैसी, शीतलता नहीं दिखायेगा।अन्तर के अनुभावों में, कोमलता नहीं चगायेगा।।सूरज म...  और पढ़ें
4 घंटे पूर्व
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1

दोहागीत "समय का चक्र" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

समय-समय की बात है, समय-समय का फेर।मिट्टी को कंचन करे, नहीं लगाता देर।।समय पड़े पर गधे को, बाप बनाते लोग।समय बनाता सब जगह, कुछ संयोग-वियोग।।समय न करता है दया, जब अपनी पर आय।ज्ञानी-ध्यानी-बली को...  और पढ़ें
20 घंटे पूर्व
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2

दोहे "कभी न करना माफ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मोदी पाकिस्तान को, कभी न करना माफ।नक्शे पर से अब करो, उस पापी को साफ।।आजादी से पूर्व का, अब हो हिन्दुस्तान।बँटवारे के पाप का, अन्त करो श्रीमान।।विष हो जिनके दाँत में, वो ही होते नाग।चतुर-चपल...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
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5

दोहे "बहुत बड़ा नुकसान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

लिया नामवर सिंह ने, अब पूरा अवकाश।सूना-सूना लग रहा, हिन्दी का आकाश।।ईश्वर ने दी थी जिन्हें, सच्ची-वाचिक शक्ति।कलमकार थे नामवर, बहुत विलक्षण व्यक्ति।।किया नामवर सिंह ने, हिन्दी पर उपकार।स...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
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6

गीत "रिश्ता आज पुनीत हो गया" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जो लगता था कभी पराया,जाने कब मनमीत हो गया।पतझड़ में जो लिखा तराना,वो वासन्ती गीत हो गया।।अच्छे लगते हैं अब सपने,अनजाने भी लगते अपने,पारस पत्थर को छू करके,रिश्ता आज पुनीत हो गया।मैंने जब सरगम क...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
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11

गीत "जीत का आचरण" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

हार से सीखिए, जीत का आचरण।सीखिए गीत से, गीत का व्याकरण।।बात कहने से पहले विचारो जरामैल दर्पण का अपने उतारो जरातन सँवारो जरा, मन निखारो जराआइने में स्वयं को निहारो जरादर्प का सब हटा दीजिए आवर...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
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8

दोहे "आती इन्दिरा याद" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

बिना युद्ध के वीर क्यों, होते रोज शहीद।माँ-बहनों की दिनों-दिन, टूट रही उम्मीद।।अच्छी लगती है बहुत, जोशीली तकरीर।लेकिन भाषण पर अमल, कब होगा प्रणवीर।।जो कुछ भाषण में कहा, पूर्ण करो वागीश।बैर...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
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6

दोहे "करना पूरी मात" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

सीमाओं पर देश की, सैनिक हैं तैनात।बैरी से सीधे करो, गोली से अब बात।।बैरी कायर की तरह, जब करता हो घात।रुकना शह देकर नहीं, करना पूरी मात।।मन में अब तो प्रीत के, नहीं रहे ज़ज़्बात।अब लातों के भूत से,...  और पढ़ें
7 दिन पूर्व
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7

दोहे "धधक रही है आग" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

माँ-बहनों के लाडले, सजनी के सिन्दूर। रखवाले अब हो गये, भारत माँ से दूर।भाषण तक सीमित ने हों, भीषण-भाषणवीर।जन-गण अब यह चाहता, नेता हों प्रणवीर।।जन-जन में प्रतिशोध की, धधक रही है आग।कब बैरी के ख...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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6

दोहे "बदला लो सरकार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 सहन करोगे कब तलक, चूहों की ललकार।अब तो पाकिस्तान से, बदला लो सरकार।।सीना छप्पन इंच का, कहाँ गया श्रीमान।सीधे-सीधे युद्ध का, कर दो अब ऐलान।।नीच कर्म पर जो कभी, करता नहीं विचार।उसके प्रति ह...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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3

दोहे "करना मत हठयोग" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अंगारा टेसू हुआ, सेमल भी है लाल।बासन्ती परिवेश में, निर्मल नदियाँ-ताल।।--मैदानों में हो गयी, थोड़ी सी बरसात।पेड़ों के तन पर सजे, नूतन-कोमल पात।।--आम-नीम गदरा रहे, फूल रहे हैं खेत।परिवर्तन अपनाइए...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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6

दोहे "प्रेमदिवस का खेल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

प्रेमदिवस पर आ गये, युगल आज नज़दीक।सागर तट पर देखिए, लगे चहकने बीच।१।--तोता-तोती पर चढ़ा, प्रेम-दिवस का रंग।दोनों ही सहला रहे, इक-दूजे के अंग।२।--प्रेम दिवस में हो रहा, खेल बहुत संगीन...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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4

ग़ज़ल "सभ्यता के हिमालय पिघलने लगे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आदमी के इरादे बदलने लगेदीन-ईमान पल-पल फिसलने लगेचल पड़ी गर्म अब तो हवाएँ यहाँसभ्यता के हिमालय पिघलने लगेफूल कैसे खिलेंगे चमन में भला,लोग मासूम कलियाँ मसलने लगे।अब तो पूरब में सूरज लगा डूबनेप...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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10

दोहे "छोड़ विदेशी ढंग (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जो दिल से उपजे वही, होता सच्चा प्यार।मिलन नहीं है वासना, आलिंगन उपहार।।पश्चिम के परिवेश की, ले करके हम आड़।आलिंगन के नाम पर, करते हैं खिलवाड़।।एकदिवस के लिए क्यों, करते हो व्यापार।जी...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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5

दोहे "फीका पड़ा बसन्त" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आम आदमी के नहीं, हुआ दुखों का अन्त।शीत और बरसात से, फीका पड़ा बसन्त।।वासन्ती परिवेश में, काँप रहा है गात।अब भी रोज पहाड़ पर, होता है हिमपात।।मौसम को भगवान भी, गया आज तो भूल।टेसू के भी पेड़ प...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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9

गीत "खेतों ने परिधान बसन्ती पहना है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

हर्षित होकर राग भ्रमर ने गाया है!  लगता है बसन्त आया है!!नयनों में सज उठे सिन्दूरी सपने से,कानों में बज उठे साज कुछ अपने से,पुलकित होकर रोम-रोम मुस्काया है!लगता है बसन्त आया है!!खेतों ने परिधा...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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5

दोहे "लड़ा रहे हैं आँख" (डॉ.रूप चन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आया है ऋतुराज अब, समय हुआ अनुकूल।बौराये हैं पेड़ भी, पाकर कोमल फूल।।--टेसू अंगारा हुआ, खेत उगलते गन्ध।सपने सिन्दूरी हुए, देख नये सम्बन्ध।।--पंछी कलरव कर रहे, देख बसन्ती रूप।शाखा पर बैठे हुए, सें...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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10

दोहे "तम्बाकू दो त्याग" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

गघे नहीं खाते जिसे, तम्बाकू वो चीज।खान-पान की मनुज को, बिल्कुल नहीं तमीज।।--रोग कैंसर का लगे, समझ रहे हैं लोग।फिर भी करते जा रहे, तम्बाकू उपयोग।।--खैनी-गुटका-पान का, है हर जगह रिवाज।गाँजा, भाँग-शर...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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6

दोहे "प्रेम का सचमुच हुआ अभाव" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

पश्चिम के अनुकरण का, बढ़ने लगा रिवाज। प्रेमदिवस सप्ताह का, दिवस दूसरा आज।।--कल गुलाब का दिवस था, आज दिवस प्रस्ताव।लेकिन सच्चे प्रेम का, सचमुच दिखा अभाव।।--राजनीति जैसा हुआ, आज प्रणय का ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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11

गीत "अन्तस् मैले हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सुख के बादल कभी न बरसे, दुख-सन्ताप बहुत झेले हैं!जीवन की आपाधापी में,झंझावात बहुत फैले हैं!!अनजाने से अपने लगते,बेगाने से सपने लगते,जिनको पाक-साफ समझा था,उनके ही अन्तस् मैले हैं!जीवन की आपा...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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5

दोहे "विश्व प्रणय सप्ताह" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

बारिश-कुहरे से घिरा, पूरा उत्तर देश।नहीं बना मधुमास में, बासन्ती परिवेश।।नभ आँसू टपका रहा, सहमे रस्म-रिवाज।बहुत विलम्बित हो रहा, ऐसे में ऋतुराज।।लौट-लौट कर आ रहा, हाड़ कँपाता शीत।नहीं सुन...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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11

दोहे "बहता शीतल नीर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सरदी अब घटने लगी, चहका है मधुमास।खेतों से नव-अन्न की, आने लगी सुवास।।--बया नीड़ से झाँकती, अपने चारों ओर। हरित धरा पर हो गयी, अब तो सुन्दर भोर।।--धूम मचाने आ गया, फिर से अब ऋतुराज।बदल गया मधुमास म...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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7

दोहे "अढ़सठ आज बसन्त" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जीवन में से घट गया, एक सुहाना साल।क्या खोया क्या पा लिया, करता हूँ पड़ताल।।--मना रहा है जन्मदिन, मेरा कुल परिवार।अपने-अपने ढंग से, लाये सब उपहार।।--जीवन-साथी चल रहा, थाम हाथ में हाथ।चार दशक से अधि...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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5

गीत "प्रीत की सौगात लेकर, जन्मदिन फिर आज आया"

आ रहा मधुमास फिर से, साज मौसम ने बजाया।प्रीत की सौगात लेकर, जन्मदिन फिर आज आया।।साल बीता, माह बीते, बीतते दिन-पल गये,बालपन-यौवन समय के साथ सारे ढल गये,फिर दरकते पत्थरों ने, ज़िन्दग़ी का गीत गाया।...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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1

दोहे "चली बजट की नाव" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सीना छप्पन इंच का, तन है बहुत सुडौल।मोदी अपने पक्ष में, बना रहे माहौल।।जनमानस को दे रहे, लुभावने सन्देश।पाँच साल के लिए फिर, बना रहे परिवेश।।झलक रहा संकल्प में, देखो आम चुनाव।पार लगाने के ल...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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10

दोहे "मैदानों पर मेह" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

कुहरे ने सूरज ढका, थर-थर काँपे देह।पर्वत पर हिमपात है, मैदानों पर मेह।१।--कल तक छोटे वस्त्र थे, फैशन की थी होड़।लेकिन सरदी में सभी, रहे शाल को ओढ़।२।--ऊनी कपड़े पहनकर, मिलता है आराम।बच्च...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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4

दोहे "जन्मभूमि में राम" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

 मौजूदा माहौल में, किसको कहें महान।आज देश में चल रहा, आतंकी फरमान।।भ्रष्ट आचरण देश में, फैला चारों ओर।सरकारी अनुभाग में, बैठे रिश्वतखोर।।मुद्दा बनकर रह गया, आज राम का नाम।अब भी रहते टेण्ट...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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2

दोहे "गाँधी का निर्वाण" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्य तिथि परअहिंसा के अस्तित्व पर कुछ दोहे- अपना भारतवर्ष है, गाँधी जी का देश।सत्य-अहिंसा के यहाँ, मिलते हैं सन्देश।। चाहे काल भविष्य हो, वर्तमान या भूत।सत...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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8

दोहे "बन जाता संगीत" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अमल-धवल होता नहीं, सबका चित्त-चरित्र।जाँच-परख के बाद ही, यहाँ बनाना मित्र।।।रखना नहीं घनिष्ठता, उन लोगों के संग।जो अपने बनकर करें, गोपनीयता भंग।।जिसमें हो सन्देश कुछ, रचना ऐसा गीत।सात सुरों क...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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8

गीत "निखरा-निखरा है नील गगन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

सबके मन को भाया बसन्त।आया बसन्त-आया बसन्त।।उतरी हरियाली उपवन में,आ गईं बहारें मधुवन में,गुलशन में कलियाँ चहक उठीं,पुष्पित बगिया भी महक उठी, अनुरक्त हुआ मन का आँगन।आया बसन्त, आया बसन्त।१...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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