डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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दोहे "माँगे सबकी खैर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

करती धन की लालसा, जग को मटियामेट।दौलत से भरता नहीं, कभी किसी का पेट।।ज्ञान बाँटने के लिए, लिखते लोग निबन्ध।लेकिन सबके हैं यहाँ, धन से ही सम्बन्ध।। जो होते धनहीन हैं, उनको मिलता चैन।जब से धन आने ...  और पढ़ें
22 घंटे पूर्व
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कविता "सुख के सूरज से सजी धरा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

तुम शब्दयुक्त हो छन्दमुक्त,बहती हो निर्मल धारा सी।तुम सरल-तरल अनुप्रासयुक्त,हो रजत कणों की तारा सी।आलेख पंक्तियाँ जोड़-तोड़करबन जाती हो गद्यगीत।संयोग-वियोग, भक्ति रस से,छलकाती हो तुम प्रीत...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
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गीत "स्वार्थ छलने लगे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

करते-करते भजन, स्वार्थ छलने लगे। करते-करते यजन, हाथ जलने लगे।।  झूमती घाटियों में, हवा बे-रहम, घूमती वादियों में, हया  बे-शरम, शीत में है तपन, हिम पिघलने लगे। करते-करते यजन, हाथ जलन...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
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गीतिका "आजादी की वर्षगाँठ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

चौमासे में श्याम घटा जब आसमान पर छाती है।आजादी के उत्सव की वो मुझको याद दिलाती है।।देख फुहारों को उगते हैं, मेरे अन्तस में अक्षर,इनसे ही कुछ शब्द बनाकर तुकबन्दी हो जाती है।खुली हवा में साँस ले...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
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दोहे "आजादी का जश्न" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

डरा रही नर-नार को, बन्दूकों की छाँव।नहीं सुरक्षित अब रहे, सीमाओं पर गाँव।।--देख दुर्दशा गाँव की, मन में बहुत मलाल।विद्यालय जाँये भला, कैसे अपने बाल।।--आजादी के जश्न को, मना रहा है देश।लेकिन मेरे ...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
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देशभक्तिगीत "भारत को करता हूँ शत्-शत् नमन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों!आप सबको स्वतन्त्रता-दिवस कीहार्दिक शुभकामनाएँ।--"मुझको प्राणों से प्यारा है अपना वतन"जिसकी माटी में चहका हुआ है सुमन,मुझको प्राणों से प्यारा वो अपना वतन।जिसकी घाटी में महका हुआ है पव...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
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दोहागीत "कमा रहे हैं माल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

तन के उजले मन के गन्दे।कितने बदल गये हैं बन्दे।।शब्दकोश तक रह गया, अब तो जग में प्यार।अपने सुख के ही लिए, करते सब व्यापार।।भोग-विलासों में सब अन्धे।कितने बदल गये हैं बन्दे।।मतलब में पहचान...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
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गीत "फटी घाघरा-चोली" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

कहाँ खो गई मीठी-मीठी इन्सानों की बोली।किसने नदियों की धारा में विष की बूटी घोली।।कहाँ गयीं मधुरस में भीगी निश्छल वो मुस्कानें,कहाँ गये वो देशप्रेम से सिंचित मधुर तराने,किसकी कारा में बन्दी ह...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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कविता ''धान खेत में लहराते" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

कई दिनों से नभ में,बादल ने डाला है डेरा।सूरज मना रहा है छुट्टी,दिन में हुआ अन्धेरा।।हरियाली बिखरी धरती पर,दादुर गाते गान मधुर।शाम ढली तो सन्नाटे को,चीर रहा झींगुर का सुर।आसमान का पानी पीकर,धा...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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ग़ज़ल "हम तुम्हें हाल-ए-दिल सुनाएँगे" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जो भी आगे कदम बढ़ायेंगे।फासलों को वही मिटायेंगे।। तुम हमें याद करोगे जब भी,हम बिना पंख उड़ के आयेंगे।    यही हसरत तो मुद्दतों से है,हम तुम्हें हाल-ए-दिल सुनाएँगे।  ज़िन्दगी का यही फ़...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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दोहे "समय-समय का फेर" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मिट्टी को कंचन करे, नहीं लगाता देर।दिखा रहा है आइना, समय-समय का फेर।१।समय-समय की बात है, समय-समय के ढंग।जग में होते समय के, अलग-अलग ही रंग।२।पल-पल में है बदलता, सरल कभी है वक्र।रुकता-थकता...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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देशभक्तिगीत "अपना वतन" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जिसकी माटी में चहका हुआ है सुमन,मुझको प्राणों से प्यारा वो अपना वतन।जिसकी घाटी में महका हुआ है पवन,मुझको प्राणों से प्यारा वो अपना वतन।जिसके उत्तर में अविचल हिमालय खड़ा,और दक्षिण में फैला है ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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गीत "भाई-बहन का प्यार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

हरियाला सावन ले आया, नेह भरा उपहार।कितना पावन, कितना निश्छल राखी का त्यौहार।।यही कामना करती मन में, गूँजे घर में शहनाई,खुद चलकर बहना के द्वारे, आये उसका भाई,कच्चे धागों में उमड़ा है भाई-बहन का प...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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दोहे "निश्छल पावन प्यार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

परम्परा मत समझना, राखी का त्यौहार।रक्षाबन्धन में निहित, होता पावन प्यार।।--राखी लेकर आ गयी, बहना बाबुल-द्वार।भाई देते खुशी से, बहनों को उपहार।।--रक्षाबन्धन पर्व का, दिन है सबसे खास।जिनके बहनें...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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"जीवन में है मित्रता, पावन और पवित्र" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

हम तो प्रतिदिन माँगते, दुनियाभर की खैर।अमन-चैन से सब रहें, अपने हों या गैर।।--जिस पग पर काँटे चुभें, वहाँ न रखना पैर।जहाँ एक दिन मित्रता, बाकी दिन हो बैर।।--मतलब की है दोस्ती, मतलब का सब प्यार।मत...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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गीत "जल बिना बदरंग कितने" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

रूप कितने-रंग कितने।बादलों के ढंग कितने।।कहीं चाँदी सी चमक है,कहीं पर श्यामल बने हैं।कहीं पर छितराये से हैं,कहीं पर झुरमुट घने हैं।मोहते ये मन सभी का,कर रहे हैं दंग कितने।बादलों के ढंग कितने...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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लघुकथा "मेरी मुहबोली बहन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मैं उस समय ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ता था। जीवविज्ञान विषय की क्लास में मेरे साथ कुछ लड़कियाँ भी पढ़तीं थीं। परन्तु मैं बेहद शर्मीला था। इसी लिए कक्षाध्यापक ने मेरी सीट लड़कियों की बिल्कुल बगल में...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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दोहे "राखी के ये तार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

आता सावन मास में, राखी का त्यौहार।भाई अपनी बहन को, देते हैं उपहार।।कच्चे धागों में बँधा, ममता और दुलार। सम्बन्धों के पाश हैं, राखी के ये तार।।जरी-सूत या जूट के, या रेशम के तार।रचा-बसा हर तार ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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दोहे "निखरा-निखरा गात" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

बहती अविरल भाव से, निर्मल जल की धार।सुन्दर सुमनों ने लिया, पानी में आकार।।--मोती जैसी सुमन से, टपक रही है ओस।मन को महकाती महक, कर देती मदहोस।।--हीरे जैसी चमक है, निखरा-निखरा गात।कितना सुन्दर लग रह...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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प्रकाशन "जयविजय पत्रिक के अगस्त अंक में मेरी ग़ज़ल"

जमाना है तिजारत का, तिज़ारत ही तिज़ारत हैतिज़ारत में सियासत है, सियासत में तिज़ारत हैनहीं अब वक़्त है, ईमानदारी का सचाई काखनक को देखते ही, हो गया ईमान ग़ारत हैहुनर बाज़ार में बिकता, इल्म की बोल...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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दोहे "बरसो अब घनश्याम" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

आवारा बादल हुए, खुद ही पीते नीर।सावन सूखा जा रहा, धरती हुई अधीर।।नभ में बादल गरजते, चपला करती नृत्य।भूल गये बरसात में, बादल अपना कृत्य।।सूरज अब भी गगन में, रौब रहा है झाड़।तेज धूप के तेज से, ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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प्रकाशन "लोकनायक गोस्वामी तुलसीदास"

"सूर-सूर तुलसी शशि, उडुगन केशव दास।अब के कवि खद्योत सम, जहँ-तहँ करत प्रकाश।।’’मित्रों!आज से 29 वर्ष पूर्व मेरा एक लेखनैनीताल से प्रकाशित होने वालेसमाचारपत्र"दैनिक उत्तर उजाला"में प्रकाशित ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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दोहे "तुलसीदास-नमन हजारों बार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

श्रावण शुक्ला सप्तमी, दिवस आज है खास।माँ हुलसी की कोख से, जनमे तुलसीदास।।--मानस के इस सन्त का, जनम दिवस है आज।मना रहा अनुभाव से, जिसको आज समाज।।--मर्यादित श्री राम का, लिया सबल आधार।मानस की महिमा ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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"जन्मदिन पर मुंशी प्रेमचन्द को शत-शत नमन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मुंशी प्रेमचन्द जन्म-     प्रेमचन्द का जन्म ३१ जुलाई सन् १८८० को बनारस शहर से चार मील दूर लमही गाँव में हुआ था। आपके पिता का नाम अजायब राय था। वह डाकखाने में मामूली नौकर के तौर पर काम करते ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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दोहे "हरी-भरी सब बेल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मतलब में जब-जब हुए, दुनिया में अनुबन्ध।थोड़े दिन के बाद में, टूट गये सम्बन्ध।।--अधिक दिनों तक तो नहीं, चलता नहीं फरेब।साथ नहीं जाती कभी, धन-दौलत की जेब।।--सिमट जायेगा एक दिन, चार दिनों का खेल।...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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दोहे "राजनीति गन्दी नहीं, गन्दे हैं हम लोग"

राजनीति गन्दी नहीं, गन्दे हैं हम लोग।जन सेवा के नाम पर, खाते मोहनभोग।।--आये जग में किसलिए, समझ लीजिए सार।जीवनरूपी नाव का, सदाचार आधार।।--जैसा बोया खेत में, वही रहा है काट।सामाजिक परिवेश के, मत कर ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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"पूज्य पिता जी आपको श्रद्धापूर्वक नमन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

पूज्य पिता जी आपको श्रद्धापूर्वक नमन।2014 में आज ही के दिन आप विदा हुए थे।पूज्य पिता जी आपका, वन्दन शत्-शत् बार।बिना आपके हो गया, जीवन मुझ पर भार।।--बचपन मेरा खो गया, हुआ वृद्ध मैं आज।सोच-समझ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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गीत "मौत ज़िन्दगी की रेल में सवार हो गई"

ज़िन्दगी हमारे लिएआज भार हो गई! मनुजता की चूनरी तोतार-तार हो गई!! हादसे सबल हुए हैं गाँव-गली-राह में खून से सनी हुई छुरी छिपी हैं बाँह में मौत ज़िन्दगी की रेल में सवार हो गई! मनु...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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दोहे "नागपंचमी-अद्भुत अपना देश"

श्रावण शुक्ला पञ्चमी, बहुत खास त्यौहार।नागपञ्चमी आज भी, श्रद्धा का आधार।१।--महादेव ने गले में, धारण करके नाग।विषधर कण्ठ लगाय कर, प्रकट किया अनुराग।२।--दुनिया को अमृत दिया, किया गरल का पान।जो क...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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दोहे "बन बैठे अधिराज" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सहयोगी करने लगें, जब कुछ ओछे कर्म।पल्ला उनसे झाड़ना, सबसे अच्छा कर्म।।हो जाये जब भुनन में, तारा ताराधीश।तब विवेक से काम को, करता है नीतीश।।तेजस्वी का बन गया, घोटाला नैमित्त।एक चाल से ही किया, ल...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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