डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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दोहे "महावीर हनुमान" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 पुरखों का इससे अधिक, होगा क्या अपमान।जातिवाद में बँट गये, महावीर हनुमान।।राजनीति के बन गये, दोनों आज गुलाम।जनता को लड़वा रहे, पण्डित और इमाम।।भजन-योग-प्रवचन गये, अब योगी जी भूल। लगे फाँक...  और पढ़ें
20 घंटे पूर्व
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संस्मरण "वो पतला सा शॉल" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

वो पतला सा शॉल      आज से ठीक अट्ठारह साल पुरानी बात है। उत्तराखण्ड को जन्मे हुए उस समय एक मास ही हुआ था और उसके पहले मनोनीत मुख्यमन्त्री थे नित्यानन्द स्वामी। मा. नित्यानन्द स्वामी स...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
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ग़ज़ल "कल हो जाता आज पुराना" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जीवन एक मुसाफिरखानाजो आया है, उसको जानाझूठी काया, झूठी छायामाया में मत मन भरमानासुख के सपने रिश्ते-नातेबहुत कठिन है इन्हें निभानाताकत है तो, सब है अपनेकमजोरी में झिड़की-तानाआँखों के ता...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
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प्रकाशन "जय विजय के दिसम्बर अंक में मेरी कविता"

मैं तुमको मैना कहता हूँ,लेकिन तुम हो गुरगल जैसी।तुम गाती हो कर्कश सुर में,क्या मैना होती है ऐसी??सुन्दर तन पाया है तुमने,लेकिन बहुत घमण्डी हो।नहीं जानती प्रीत-रीत को,तुम चिड़िया उदण्डी हो।।जल...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
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गीत "भवसागर भयभीत हो गया" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जो लगता था कभी पराया,वो ही अब मनमीत हो गया।पतझड़ में जो लिखा तराना,वो वासन्ती गीत हो गया।।अच्छे लगते हैं अब सपने,अनजाने भी लगते अपने,पारस पत्थर को छू करके,रिश्ता आज पुनीत हो गया।मैंने जब सरगम क...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
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कुण्डलियाँ "मेरी दो कुण्डलियाँ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों!आज देखिए मेरी दो कुण्डलियाँ(1)खोल दो मन की खिड़कीखिड़की खोली जब सुबह, आया सुखद समीर।उपवन में मुझको दिखा, मोती जैसा नीर।।मोती जैसा नीर, घास पर चमक रहा है।सूरज की किरणों में, हीरक दमक ...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
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दोहागीत "46वीं वैवाहिक वर्षगाँठ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मृग छौने की चाल अब, हुई बैल की चाल।धीरे-धीरे कट रहे, दिवस-महीने-साल।।जीवन के संग्राम में, किया बहुत संघर्ष।वैवाहिक जीवन हुआ, अब पैंतालिस वर्ष।।देख शिष्य की लगन को, गुरू बाँटता ज्ञान।श्रम-स...  और पढ़ें
7 दिन पूर्व
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गीत "कुहासे की चादर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

छिपा क्षितिज में सूरज राजा,ओढ़ कुहासे की चादर।सरदी से जग ठिठुर रहा है,बदन काँपता थर-थर-थर।। कुदरत के हैं अजब नजारे,शैल ढके हैं हिम से सारे,दुबके हुए नीड़ में पंछी,हवा चल रही सर-सर-सर। सरदी से ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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ग़ज़ल "सागर की गहराई में" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

गीत-ग़ज़ल, दोहा-चौपाई, सिसक रहे अमराई मेंभाईचारा तोड़ रहा दम, रिश्तों की अँगनाई मेंफटा हुआ दामन दर्जी को, सिलना नहीं अभी आयासारा जीवन निकल गया है, कपड़ों की कतराई मेंरत्नाकर में जब भी होता, ख...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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"अनोखा संस्मरण" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

"अनोखा संस्मरण"    लगभग 25 साल पुरानी बात है! उन दिनों मेरा निवास ग्राउडफ्लोर पर था। दोनों बच्चे अलग कमरे में सोते थे। हमारे बेडरूम से 10 कदम की दूरी पर बाहर बराम्दे में शौचालय था। रात में मुझे...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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समीक्षा “नदी सरोवर झील” (समीक्षक-डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

“नदी सरोवर झील” एक संग्रहणीय दोहासंग्रह श्री जय सिंह आशावत जी काफी समय से दोहों पर अपनी लेखनी चला रहे हैं। आपने मुखपोथी (फेसबुक) पर 2017 में मेरे द्वारा संचालित “दोहाशिरोमणि प्रतियोगिता” ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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दोहे "धर्म रहा दम तोड़" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अब सपनों में आ रहे, राम और रहमान।उलझ गये जज्बात में, मेहनतकश इंसान।।--सच्ची होती है नहीं, सपनों की हर बात।जीते-जी मिलती नहीं, जन्नत की सौगात।।--आवारा सपने हुए, हरजाई हैं मीत।जीवन में कैसे बजे, अब ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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कविता ‘चन्दा और सूरज’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

चन्दा में चाहे कितने ही, धब्बे काले-काले हों।सूरज में चाहे कितने ही, सुख के भरे उजाले हों।लेकिन वो चन्दा जैसी शीतलता नही दे पायेगा।अन्तर के अनुभावों में, कोमलता नही दे पायेगा।।सूरज में ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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गीत "नारी की कथा-व्यथा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

अपने छोटे से जीवन में कितने सपने देखे मन मेंइठलाना-बलखाना सीखा हँसना और हँसाना सीखा सखियों के संग झूला-झूला मैंने इस प्यारे मधुबन मेंकितने सपने देखे मन में भाँति-भाँति के सुमन खिले ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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ग़ज़ल "जिन्दगी जिन्दगी पे भारी है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जिन्दगी जिन्दगी पे भारी है हाड़ धुनने का काम जारी हैपेट भरता था जो जमाने का उसकी खाली पड़ी पिटारी हैसाहुकारों का कर्ज बाकी हैखत्म होती नहीं उधारी हैकल तलक जो शिकार होता था आज खुद बन गया श...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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ग़ज़ल "प्रारब्ध है सोया हुआ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 नीड़ में सबके यहाँ प्रारब्ध है सोया हुआकाटते वो ही फसल जो बीज था बोया हुआखोलकर गठरी न देखी, दूसरों की खोलतागन्ध को है खोजता, मूरख हिरण खोया हुआकोयले की खान में, हीरा कहाँ से आयेगामैल है मन में...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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दोहे "सेंक रहे हैं धूप" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 कोयल और कबूतरी, सेंक रहे हैं धूप।बिना नहाये लग रहा, मैला उनका रूप।।अच्छा लगता है बहुत, शीतकाल में घाम।खिली गुनगुनी धूप में, सिक जाता है चाम।।छा जाता कुहरा सघन, माघ-पौष के मास।जलते तभी अलाव है...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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दोहे "सन्त और बलवन्त" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

दीन-हीन थोथे वचन, कभी न बोलो मित्र।वाणी से होता प्रकट, अच्छा-बुरा चरित्र।।कटुक वचन के कोप से, हो जाते सब क्रुद्ध।वाणी में रस हो अगर, टल जाते हैं युद्ध।।जो विनम्र होकर पढ़ें, कहलाते वो छात्र।जिन...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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दोहे कार्तिकपूर्णिमा "मेला आज उदास" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सब्जी बिकती धान से, दाम नहीं है पास।बिन पैसे के हो रहा, मेला आज उदास।।घर के दाने बिक रहे, बच्चों का है साथ।महँगाई की मार से, बिगड़ रहे हालात।।नदी शारदा बह रही, मेरे घर के पास।होता बहते नीर से, तन-म...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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गीत "राम के ही देश में, राम बेकरार है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

है नशा चढ़ा हुआ, खुमार ही खुमार है।तन-बदन में आज तो, बुखार ही बुखार है।।मुश्किलों में हैं सभी, फिर भी धुन में मस्त है,ताप के प्रकोप से, आज सभी ग्रस्त हैं,आन-बान, शान-दान, स्वार्थ में शुमार है।तन-बदन...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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गीत "ईमान बदलते देखे हैं" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

इंसानों की बोली में, ईमान बदलते देखे हैं।धनवानों की झोली में, सामान बदलते देखे हैं।।सौंपे थे हथियार युद्ध में, अरि को सबक सिखाने को,उनका ही मुँह मोड़ दिया, अपनों को घाव खिलाने को,गद्दारों की गो...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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दोहे "देव उत्थान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक)

दिन है देवोत्थान का, व्रत-पूजन का खास।भोग लगा कर ईश को, तब खोलो उपवास।।--होते देवउठान से, शुरू सभी शुभ काम।दुनिया में सबसे बड़ा, नारायण का नाम।।--मंजिल की हो चाह तो, मिल जाती है राह।आज रचाओ हर्ष से,...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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"अमर वीरंगना लक्ष्मीबाई का 193वाँ जन्मदिवस"

आज दुर्गा की अवतार श्रीमती इन्दिरा गांधीका भी जन्मदिवस है। अमर वीरांगना झाँसी की महारानी लक्ष्मीबाई के193वें जन्म-दिवस पर उन्हें अपने श्रद्धासुमन समर्पित करते हुएश्रीमती सुभद्राकुमा...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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ग़ज़ल "महकता चमन है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक)

शीतल धरा और शीतल गगन हैकड़ाके की सरदी में, ठिठुरा बदन हैउड़ाते हैं आँचल, हवा के झकोरे,काँटों की गोदी में, पलता सुमन हैमिली गन्ध मधु की, चले आये भँवरेहँसे फूल-कलियाँ, महकता चमन हैपरेशान नदियाँ है...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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संस्मरण ‘‘बाबा नागार्जुन’’ (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

‘‘आर्य समाज:बाबा नागार्जुन की दृष्टि में’’ (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')        राजकीय महाविद्यालय, खटीमा में हिन्दी के विभागाध्यक्ष वाचस्पति शर्मा थे । बाबा नागार्जुन अक्सर उनके यहा...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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वन्दना "चहकता-महकता चमन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आओ माता! सुवासित करो मेरा मन।शारदे माँ! तुम्हें कर रहा हूँ नमन।।घोर तम है भरा आज परिवेश में,सभ्यता सो गई आज तो देश में,हो रहा है सुरा से यहाँ आचमन।शारदे माँ! तुम्हें कर रहा हूँ नमन।।दो सुमेधा मु...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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ग़ज़ल "नहीं जाती" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

कभी आरम्भ की शिक्षा, भुलायी ही नहीं जातीभवन के नींव की ईंटे, दिखायी ही नहीं जातीजमाने भर की कमियाँ, हम जमाने को बताते हैंमगर सन्तान की कमियाँ, गिनायी ही नहीं जातीजो दिलवर चोर हैं वो डालते खुलकर ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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बालकविता "काँव-काँवकर चिल्लाया है कौआ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

काले रंग का चतुर-चपल,पंछी है सबसे न्यारा।डाली पर बैठा कौओं का, जोड़ा कितना प्यारा।नजर घुमाकर देख रहे ये,कहाँ मिलेगा खाना।जिसको खाकर कर्कश स्वर में,छेड़ें राग पुराना।।काँव-काँव का इनका गान...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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"बच्चों के प्यारे चाचा नेहरू को शत्-शत् नमन!"

बच्चों के प्यारे चाचा नेहरू कोशत्-शत् नमन!जिस दिन लाल जवाहर ने था,जन्म जगत में पाया।उसका जन्मदिवस भारत मेंबाल दिवस कहलाया।।मोती लाल पिता बैरिस्टर,माता थी स्वरूप रानी।छोड़ सभी आराम-ऐश को,राह ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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"बालगीत और बालकविता में भेद" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

बालगीत और बालकविता             बहुत से लोग जानकारी के अभाव में बाल गीत को बाल कविता और बालकविता को बालगीत लिख देते हैं। किन्तु यह विचार नहीं करते कि बालकविता और बालगीत कोई नयी वि...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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