डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
उच्चारण की पोस्ट्स

दोहे "मोह सभी का भंग" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

अपने-अपने पेंच हैं, अपने-अपने दाँव।दल-दल में सबके यहाँ, धँसे हुए हैं पाँव।।बिना बुलाये आ रहे, वोट माँगने लोग।दुखती रग को पकड़कर, बढ़ा रहे हैं रोग।।चार साल से पूर्व जो, दिखते थे सम्पन्न।महँग...  और पढ़ें
5 घंटे पूर्व
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1

दोहे "बदन जलाता घाम" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

वाक्शक्ति हमको मिली, ईश्वर से अनमोल।सोच समझकर बात को, तोल-तोलकर बोल।।कुछ लोगों के तंज की, करना मत परवाह।आगे बढ़ते जाइए, मिल जायेगी राह।।चिकनी-चुपड़ी बात से, होता जग अनुकूल।खरी-खरी जो बोलता, उ...  और पढ़ें
1 दिन पूर्व
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3

दोहे "जीवन का भावार्थ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

दोहों में ही निहित है, जीवन का भावार्थ।गरमी में अच्छे लगें, शीतल पेय पदार्थ।।ज्यादा मीठे माल से, हो जाता मधुमेह।कभी-कभी तो चाटिए, कुछ तीखा अवलेह।।हमने दुनिया को दिया, कविताओं का ढंग।किन्तु व...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
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3

"अक्षर बड़े अनूप" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

काले अक्षर कभी-कभी, तो बहुत सताते है।कभी-कभी सुख का, सन्देशा भी दे जाते हैं।।इनका दर्द मुझे बिल्कुल, अपना जैसा लगता है।कभी बेरुखी कभी प्यार से, सीधी बातें करता है।।अक्षर में ही राज भरे ह...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
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5

"गीत सुनाती माटी अपने बेटों के श्रमदान की" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

गीत सुनाती माटी अपने, गौरव और गुमान की।दशा सुधारो अब तो लोगों, अपने हिन्दुस्तान की।।खेतों में उगता है सोना, इधर-उधर क्यों झाँक रहे?भिक्षुक बनकर हाथ पसारे, अम्बर को क्यों ताँक रहे?आज ज...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
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2

दोहे "वृद्ध पिता मजबूर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

करके सभी प्रयास अब, लोग गये हैं हार।काशी में उलटी बहे, गंगा जी की धार।।पूरी ताकत को लगा, चला रहे पतवार।लेकिन फिर भी नाव तो, नहीं लग रही पार।।एक नीड़ में रह रहे, बोल-चाल है बन्द।भाई-भाई की उन्ह...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
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5

बालकविता "आम और लीची का उदगम" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

हरी, लाल और पीली-पीली!लीची होती बहुत रसीली!! गायब बाजारों से केले।सजे हुए लीची के ठेले।। आम और लीची का उदगम।मनभावन दोनों का संगम।। लीची के गुच्छे हैं सुन्दर।मीठा रस लीची के अन्दर।। गु...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
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4

दोहे "गीदड़ और विडाल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

रास न आयी दलों को, महामहिम की चाल।करनाटक में कमल का, सूख गया है ताल।।न्यायालय ने कर दिये, सपने चकनाचूर।ढाई दिन में हो गये, वो सत्ता से दूर।।नहीं किसी के पक्ष में, आया जन आदेश।नूरा कुश्ती का बना, क...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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6

दोहे "वो ही अधिक अमीर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

बिकते हैं बाजार में, जिनके रोज जमीर।छल-बल से होते यहाँ, वो ही अधिक अमीर।।फाँसी खा कर रोज ही, मरते जहाँ किसान।बोलों किस मुँह से कहें, अपना देश महान।।माना है प्यारी धरा, जीवन का आधार।लेकिन पौधों ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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6

ग़ज़ल "बड़ा वतन होता है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जो पीड़ा में मुस्काता है, वही सुमन होता हैनयी सोच के साथ हमेशा, नया सृजन होता हैजब आतीं घनघोर घटायें, तिमिर घना छा जाताबादल छँट जाने पर निर्मल, नीलगगन होता हैभाँति-भाँति के रंग-बिरंगे, ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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5

गीत "रिश्ते ना बदनाम करें" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

पहले काम तमाम करें।फिर थोड़ा आराम करें।।आदम-हव्वा की बस्ती में,जीवन के हैं ढंग निराले।माना सबकुछ है दुनिया में,पर न मिलेगा बैठे-ठाले।नश्वर रूप सलोना पाकर,काहे का अभिमान करें।पहले काम तमाम क...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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7

दोहे "रमजान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

नेकी और खुलूस है, मौला का फरमान।मौमिन को सन्देश ये, देते हैं रमजान।।पाँचों वक्त नमाज पढ़, कहता पाक कुरआन। बुरा किसी का मत करो, सिखलाते रमजान।।नाम इबादत के अलग, देश-काल अनुरूप।लेकिन मक़सद एक है,...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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5

दोहे "रोटी है तकदीर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

बाहर खाने में नहीं, आता कोई स्वाद।होटल में जाकर सदा, होता धन बरबाद।।फूली-फूली रोटियाँ, सजनी रही बनाय।बाट जोहती है सदा, कब साजन घर आय।।फूली रोटी देखकर, होते सब अनुरक्त।मगर काटते तो नहीं, हँ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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7

दोहे "रखना सम अनुपात" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

होते गीत-अगीत हैं, कविता का आधार।असली लेखन है वही, जिसमें हों उदगार।।--मंजिल पर हर कदम का, रखना सम अनुपात।स्वारथ से बनती नहीं, जग में कोई बात।।--जो भूखा हो ज्ञान का, दो उसको उपदेश।जितने से जीवन चल...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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4

गीत "याद बहुत माँ आती है" (रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

ममता की मूरत माता की,हरदम याद सताती है।कष्ट-क्लेश दुख की घड़ियों में,याद बहुत माँ आती है।।जीव-जन्तुओं को भी होते,बच्चे प्राणों से प्यारे।सुत हों या हो सुता,जननि की आँखों के होते तारे।नज...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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7

"माँ के उर में ममता का व्याकरण समाया है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मातृदिवस पर विशेष-0-माँ ने वाणी को उच्चारण का ढंग बतलाया है,माता ने मुझको धरती पर चलना सिखलाया है,खुद गीले बिस्तर में सोई, मुझे सुलाया सूखे में,माँ के उर में ममता का व्याकरण समाया है,माता शब्द क...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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8

दोहे (नीतिदशक) "हो जाते सब मौन" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

शूद्र-ब्राह्मण या बणिक, या हों ठाकुर-वीर। इन सबसे मिलकर बना, अपना सौम्य शरीर।१। लालच में जो बेंचता, अपना यहाँ जमीर। उसको तो कहता नहीं, कोई कभी अमीर।२। मग़ज़ चाटने जब लगें, कुछ ज...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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7

दोहे "धूप हुई विकराल" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

सूरज अब करने लगा, दुनिया को बेहाल।गरमी के कारण हुआ, जीना बड़ा मुहाल।।सिर पर रख कर तौलिया, चेहरे पर रूमाल।ढककर बाहर निकलिए, अपने-अपने गाल।।आग बरसती धरा पर, धूप हुई विकराल।विकल हो रहे प्यास से, वन...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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7

ग़ज़ल "मक़्तल की जरूरत क्या" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मदहोश निगाहें हैं, खामोश तराना हैमासूम परिन्दों को, अब नीड़ बनाना हैसूखे हुए शजरों ने, पायें हैं नये पत्तेबुझती हुई शम्मा को, महफिल में जलाना हैकुछ करके दिखाने का, अरमान हैं दिलों म...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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13

दोहे "गयी मनुजता हार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 फिरकों में अब बँट गये, सारे रीति-रिवाज।मत-मजहब की जेल में, बन्दी हैं सब काज।।भूख मिटाने के लिए, होता है आहार।खान-पान में किन्तु अब, बना मजहब आधार।।बैर-भाव के खेल में, गयी मनुजता हार।बात-बात पर ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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6

दोहे "मन में तरल-तरंग" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

 जाग गया है नींद से, जिन्ना का अब जिन्न। ऐसे लोगों से हुआ, हृदय देश का खिन्न।।  शैतानी करतूत पर, आती है अब घिन्न। रहना निज औकात में, ओ जिन्ना के जिन्न।। रक्तबीज सी हो रही, जिन्ना की औ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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6

ग़ज़ल "धुँधली सी परछाई में" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

गीत-ग़ज़ल, दोहा-चौपाई, विहँस रहे अमराई मेंभाईचारा तोड़ रहा दम, रिश्तों की अँगनाई मेंफटा हुआ दामन अब तक भी सिलना नहीं हमें आयासारा जीवन निकल गया है, कपड़ों की कतराई मेंरत्नाकर में अब भी होता, ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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7

दोहे "डोल रहा ईमान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

.यादों में आने लगे, अगर अनोखी गन्ध।तब समझो अजनबी से, हुआ नया अनुबन्ध।।चाहे कविताएँ लिखो, चाहे लिखो निबन्ध।लेकिन तन-मन का रखो, आपस में सम्बन्ध।।छोटा हो या हो बड़ा, या साझा परिवार।ताल-मेल के ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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5

"उपसर्ग और प्रत्यय" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मित्रों!आइए प्रत्यय और उपसर्ग के बारे में कुछ जानें।प्रत्यय= प्रति (साथ में पर बाद में)+ अय (चलनेवाला) शब्द का अर्थ है,पीछे चलना। जो शब्दांश शब्दों के अंत में विशेषता या परिवर्तन ला देते हैं, व...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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6

गीत "स्वाति का जन्मदिन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आज हमारे मित्र श्री गोपाल दत्त तिवारी औरश्रीमती राधा तिवारी की पुत्रीस्वाति के जन्म दिवस पर कुछ उद्गार सुता स्वाति के जन्मदिवस पर, बनती आज बधायी है।खुशियों की सौगात लिए, यह मंगल बेला आयी ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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8

गीत "जय-विजय, मई-2018, गुलमोहर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सहते हो सन्ताप गुलमोहर!फिर भी हँसते जाते हो।लू के गरम थपेड़े खाकर,अपना “रूप” दिखाते हो।।ताप धरा का बढ़ा मगर,गदराई तुम्हारी डाली है,पात-पात में नजर आ रही,नवयौवन की लाली है,दुख में कैसे मुस्काते...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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7

दोहे "मजदूरों के सन्त" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

श्रमिकों से जिनका नहीं, कोई भी सम्बन्ध।श्रमिक-दिवस पर लिख रहे, वो भी शोध-प्रबन्ध।।--सुबह दस बजे जागते, सोते आधी रात।खाते माल हराम का, करते श्रम की बात।।--काँटे और गुलाब का, कैसा है संयोग।अन्तर आल...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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8

"रूप पुराना लगता है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

वक्त सही हो तो सारा, संसार सुहाना लगता है।बुरे वक्त में अपना साया भी, बेगाना लगता है।।यदि अपने घर व्यंजन हैं, तो बाहर घी की थाली है,भिक्षा भी मिलनी मुश्किल, यदि अपनी झोली खाली है,गूढ़ वचन ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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5

गीत "बहुत उपकार है उसका" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मधुर पर्यावरण जिसने, बनाया और निखारा है,हमारा आवरण जिसने, सजाया और सँवारा है।बहुत आभार है उसका, बहुत उपकार है उसका,दिया माटी के पुतले को, उसी ने प्राण प्यारा है।।बहाई ज्ञान की गंगा, मध...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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3

गीत "कमल पसरे हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

रंग-रंगीली इस दुनिया में, झंझावात बहुत गहरे हैं।कीचड़ वाले तालाबों में, खिलते हुए कमल पसरे हैं।।पल-दो पल का होता यौवन,नहीं पता कितना है जीवन,जीवन की आपाधापी में, झंझावात बहुत उभरे हैं।कीचड़ वा...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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