डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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ग़ज़ल "दर्द का सिलसिला दिया तुमने" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

दर्द का सिलसिला दिया तुमनेकरके वादा भुला दिया तुमनेहमने करना वफा नहीं छोड़ानफरतों का सिला दिया तुमनेखिलते चम्पा को नोंचकर फेंका फिर नया गुल खिला दिया तुमनेहमको आब-ए-हयात के बदलेफिर हलाहल प...  और पढ़ें
5 घंटे पूर्व
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दोहे "ढकी ढोल की पोल" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सुर, नर, मुनि के ज्ञान की, जब ढल जाती धूप।छत्र-सिंहासन के बिना, रंक कहाते भूप।।बिना धूप के खेत में, फसल नहीं उग पाय।बारिश-गरमी-शीत को, भुवनभास्कर लाय।।शैल शिखर उत्तुंग पर, जब पड़ती है धूप।हिमजल ल...  और पढ़ें
16 घंटे पूर्व
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ग़ज़ल "वचनों के कंगाल सुनो" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जनता को बहलाने वालों, वचनों के कंगाल सुनोमाल मुफ्त का खाने वालों, जंगल के शृंगाल सुनोबिना खाद-पानी के कैसे, खेतों में बिरुए पनपेंठेकेदारों ने उन सबका हड़प लिया है माल सुनोप्राण निछावर किये...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
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गीत "लाचार हुआ सारा समाज" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

हम चन्दा की क्या बात कहें,सूरज को भी तम ने घेरा।आशाओं के गुलशन में अब,कुण्ठाओं ने डाला डेरा।।गंगा-यमुना, भूषा-भाषा,सबकी बदली हैं परिभाषा,दूषित है वातावरण आज,लाचार हुआ सारा समाज,रब का बँटवारा क...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
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गीत "कैसे नियमित यजन करूँ मैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक)

सब कुछ वही पुराना सा है!कैसे नूतन सृजन करूँ मैं?कभी चाँदनी-कभी अँधेरा,लगा रहे सब अपना फेरा,जग झंझावातों का डेरा,असुरों ने मन्दिर को घेरा,देवालय में भीतर जाकर,कैसे अपना भजन करूँ मैं?कैसे नूतन सृ...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
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ग़ज़ल "पाप गंगा में बहाने चल दिये" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आज वो फिर से नहाने चल दियेपाप गंगा में बहाने चल दियेपाप की गठरी उठाकर शीश परपुण्य मन्दिर में कमाने चल दियेजिन्दगी भर जो भटकते ही रहेरास्ते अब वो बताने चल दियेदूसरों को बाँटते हैं ज्ञान जोवो च...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
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बालगीत "मौसम के अनुकूल बया ने, अपना नीड़ बनाया है"

कल केवल कुहरा आया था,अब बादल भी छाया है।हाय भयानक इस सर्दी ने,सबका हाड़ कँपाया है।।भीनी-भीनी पड़ी फुहारें,झीना-झीना उजियारा।आग सेंकता सरजू दादा,दिन में छाया अँधियारा।कॉफी और चाय का प्याला,सब...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
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"मैंने सब-कुछ हार दिया है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों!कई वर्ष पूर्व यह गीत रचा था।आज आप सबके साथ साझा कर रहा हूँ।छला प्यार में जिसने मुझको,मैंने उससे प्यार किया है।जीवन के इस दाँव-पेंच में,मैंने सब-कुछ हार दिया है।।जब राहों पर कदम बढ़...  और पढ़ें
7 दिन पूर्व
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गीत "वो निष्ठुर उपवन देखे हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आपाधापी की दुनिया में,ऐसे मीत-स्वजन देखे हैं।बुरे वक्त में करें किनारा,ऐसे कई सुमन देखे हैं।।धीर-वीर-गम्भीर मौन है,कायर केवल शोर मचाता।ओछी गगरी ही बतियाती,भरा घड़ा कुछ बोल न पाता।गर्जन करते, ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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दोहे "गरम-गरम ही चाय" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

धूप नहीं नभ में खिली, अंग ठिठुरता जाय।सरदी में अच्छी लगे, गरम-गरम ही चाय।१।आग सेंकने का चढ़ा, देखो कैसा चाव।सरदी में अच्छा लगे, जलता हुआ अलाव।२।ठिठुरन से जमने लगा, सारे तन का खून।शीतल ऋतु में आग...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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दोहे "प्यार नहीं व्यापार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जीवन के पथ में मिले, जाने कितने मोड़।लेकिन में सीधा चला, मोड़ दिये सब छोड़।। पग-पग पर मिलते रहे, मुझको झंझावात। शह पर शह पड़ती रहीं, मगर न खाई मात।।मैं आगे बढ़ता गया, भले लक्ष्य हो दूर। कभी उमर...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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"मा.मुख्यमन्त्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा मेरी दो पुस्तकों का विमोचन"

उत्तराखण्ड के मा.मुख्यमन्त्रीश्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत नेमेरी दो पुस्तकों “ग़ज़लियात-ए-रूप”  तथा “स्मृति उपवन”का विमोचन किया।      (6 दिसम्बर, 2017) सौ बिस्तरों वाले सामुदायिक ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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दोहे "महँगा आलू-प्याज" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

कुहरे ने सूरज ढका, थर-थर काँपे देह।पर्वत पर हिमपात है, नहीं बरसता मेह।।--ऊनी कपड़े पहनकर, मिलता है आराम।बच्चे-बूढ़े ढक रहे, अपनी-अपनी चाम।।--ख़ास मजे को लूटते, व्याकुल होते आम।मूँगफली मे...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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अकविता "सर्दी में कम्पन, गर्मी में स्वेदकण" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

कुहासे की चादरमौसम ने ओढ़ ली,ठिठुरन से मित्रता,भास्कर ने जोड़ ली। निर्धनता खोज रही,आग के अलाव,ईंधन के बढ़ गयेऐसे में भाव।हो रहा खुलेआम,जंगलों का दोहन,खेतों में पनप रहेकंकरीट के वन। ठण्ड से...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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दोहा गीत "पैंतालिसवीं वैवाहिक वर्षगाँठ"

मृग छौने की चाल अब, हुई बैल की चाल।धीरे-धीरे कट रहे, दिवस-महीने-साल।।--जीवन के संग्राम में, किया बहुत संघर्ष।वैवाहिक जीवन हुआ, आज चवालिस वर्ष।।पात्र देख कर शिष्य को, ज्ञानी देता ज्ञान।श्रम-स...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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बालगीत "ऋतुएँ तो हैं आनी जानी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक)

कुहरा करता है मनमानी।जाड़े पर छा गयी जवानी।।  नभ में धुआँ-धुआँ सा छाया,शीतलता ने असर दिखाया,काँप रही है थर-थर काया,हीटर-गीजर शुरू हो गये,नहीं सुहाता ठण्डा पानी।जाड़े पर छा गयी जवानी।। बाल...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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गीत "बहुत अच्छा लगता है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

शिष्ट मधुर व्यवहार, बहुत अच्छा लगता है।सपनों का संसार, बहुत अच्छा लगता है।।फूहड़पन के वस्त्र, बुरे सबको लगते हैं,जंग लगे से शस्त्र, बुरे सबको लगते हैं,स्वाभाविक श्रंगार, बहुत अच्छा लगता है।स...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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बालकविता "गिलहरी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

 "गिलहरी"बैठ मजे से मेरी छत पर,दाना-दुनका खाती हो!उछल-कूद करती रहती हो,सबके मन को भाती हो!!तुमको पास बुलाने को,मैंमूँगफली दिखलाता हूँ,कट्टो-कट्टो कहकर तुमको,जब आवाज लगाता हूँ,कुट-कुट करती हुई त...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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दोहे "पढ़े-लिखे मुहताज़" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

थोड़े से माली रहे, आज चमन को सींच।बाकी सब लालित्य का, चीर रहे हैं खींच।।--उपवन में चलता नहीं, गुणा-भाग का जोड़।लेकिन फिर भी कर रहे, माली तोड़-मरोड़।।--बिना अध्ययन कर रहे, मनमानी कुछ लोग।नियमों की ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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दोहे "करना मत दुष्कर्म" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आदिकाल से चल रही, यही जगत में रीत।वर्तमान ही बाद में, होता सदा अतीत।।--जग में आवागमन का, चलता रहता चक्र।अन्तरिक्ष में ग्रहों की, गति होती है वक्र।।--जिनके पुण्य-प्रताप से, रिद्धि-सिद्धि का वास।उ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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दोहे "चरैवेति की सीख" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

दुनियादारी में सदा, रखना संग विवेक।उसको करते याद सब, जो होता है नेक।।फैले हैं संसार में, यूँ तो पन्थ अनेक।सबके दिल में जो बसे, वो नारायण एक।।रूप-रंग सबका अलग, होता भिन्न विवेक।उर मन्दिर में ही क...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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दोहे "कहलाना प्रणवीर" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मतलब में करना नहीं, लोगों की मनुहार।।अपने लेखन में करो, अपने आप सुधार।रँगे पश्चिमी रंग में, जब से अपने गीत।तब से अपने देश का, बिगड़ गया संगीत।।वचनबद्ध रहना सदा, कहलाना प्रणवीर।वचन निभाने क...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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दोहे "देखो कितना मुक्त है, आभासी संसार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

बिना किसी सम्बन्ध के, भावों का संचार।अनुभव करते हृदय से, आभासी संसार।।--होता अन्तर्जाल पर, दूर-दूर से प्यार।अच्छा लगता है बहुत, आभासी संसार।।--बिना किसी हथियार के, करते हैं सब वार।देख...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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दोहे "उल्लू जी का भूत" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

दुनियाभर में बहुत हैं, ऐसे जहाँपनाह।उल्लू की होती जिन्हें, कदम-कदम पर चाह।।--उल्लू का होता जहाँ, शासन पर अधिकार।समझो वहाँ समाज का, होगा बण्टाधार।। --खोज रहें हों घूस के, उल्लू जहाँ उपाय।न्यायाल...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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5

दोहे "आम गया है हार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

निर्वाचन के बाद में, आम हो गये खास।आम-खास के बीच में, लेकिन भरी खटास।।बची हुई है आम में, जब तक यहाँ मिठास।तब तक दोनों में रहे, नातेदारी खास।।आम-खास के खेल में, आम गया है हार।आम खास की कर रहा, सदिय...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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3

दोहे "जीवन है बेहाल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

घटते जाते धरा से, बरगद-पीपल-नीम।इसीलिए तो आ रहे, घर में रोज हकीम।।--रक्षक पर्यावरण के, होते पौधे-पेड़।लेकिन मानव ने दिये, जड़ से पेड़ उखेड़।।--पेड़ काटता जा रहा, धरती का इंसान।प्राणवायु...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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8

दोहे "रवि लगता नाराज" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अच्छे दिन की चाह में, जनता है बदहाल।महँगे होते जा रहे, आटा चावल-दाल।बाजारों में एक से, कभी न रहते भाव।आता कभी उतार तो, आता कभी चढ़ाव।।रहती एक समान कब, नक्षत्रों की चाल।कभी रुलाती प्याज तो, क...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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2

दोहे "मत होना मदहोश" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जीवन के अवसान का, कैसे हो अनुमान।कुदरत के कानून को,भूल गया इंसान।।जितनी बढ़ती है उमर, उतनी बढ़ती प्यास।भँवरा जीवनभर नहीं, ले पाता सन्यास।।जिनके लेखन में रहें, कुण्ठा भरे विचार।फिर उनके सपन...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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6

दोहे "नहीं रहा लालित्य" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

जीवन के दो चक्र हैं, सुख-दुख जिनके नाम।दोनों ही हालात में, धीरज से लो काम।।सरल सुभाव अगर नहीं, धर्म-कर्म सब व्यर्थ।वक्र स्वभाव मनुष्य का, करता सदा अनर्थ।।जीवन प्रहसन के सभी, इस दुनिया में पात्र...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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"अंकुर हिन्दी पाठमाला में बिना मेरी अनुमति के मेरी बाल कविता"

आज “चैतन्य का कोना”ब्लॉग पर अचानक ही डॉ. मोनिका शर्माकी इस पोस्ट पर भी नजर पड़ी।  ब्लॉगिंग से जुड़े सभी लोग रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक'जी की बाल कवितायेँ पढ़ ही चुके हैं । मुझे भी उनकी बाल कविताये...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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