डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
ब्लॉगमंच की पोस्ट्स

बालकविता "सिसक-सिसक कर स्लेट जी रही, तख्ती ने दम तोड़ दिया है"

अपनी बालकृति"हँसता गाता बचपन"सेतख्ती और स्लेटसिसक-सिसक कर स्लेट जी रही,तख्ती ने दम तोड़ दिया है।सुन्दर लेख-सुलेख नहीं है,कलम टाट का छोड़ दिया है।। दादी कहती एक कहानी,बीत गई सभ्यता पुरानी।लक...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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"व्यञ्नावली-ऊष्म और संयुक्ताक्षर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों!आज हिन्दी वर्णमाला की अन्तिम कड़ी में प्रस्तुत हैंऊष्म और संयुक्ताक्षरसबसे पहले देखिए..--“ष”“ष” से बन जाता षटकोण!षड्दर्शन, षड्दृष्टिकोण! षट्-विद्याओं को धारणकर,बन जाओ अर्ज...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
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"हिन्दी व्यञ्जनावली-अन्तस्थ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

"व्यञ्जनावली-अन्तस्थ"--“य”“य” से यति वो ही कहलाते!जो नित यज्ञ-हवन करवाते!वातावरण शुद्ध हो जाता,कष्ट-क्लेश इससे मिट जाते!--“र” “र” से रसना को लो जान!रथ को हाँक रहे भगवान!खट्टा, मीठा और चरपर...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
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“हिन्दी व्यञ्जनावली-पवर्ग” (डॉ0 रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

“व्यञ्जनावली-पवर्ग”  -- "प""प"से पर्वत और पतंग!पत्थर हैं पहाड़ के अंग!मानो तो ये महादेव हैं,बहुत निराले इनके ढंग!!-- "फ" फ से फल गुण का भण्डार!फल सबसे अच्छा आहार! फ से बन जाता फव्वारा,फव्वार...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
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“हिन्दी व्यञ्जनावली-तवर्ग” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

"त""त"से तकली और तलवार!बच्चों को तख्ती से प्यार!तरु का अर्थ पेड़ होता है,तरुवर जीवन का आधार!!”थ”"थ"से थन, थरमस बन जाता!थम से जन जीवन थम जाता!थाम रहा थम जगत-नियन्ता,सबका रक्षक एक विधाता!!"द"द से दवा-दवात...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
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76

"व्यञ्जनावली-टवर्ग" (डॉ0 रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

"हिन्दी व्यञ्जनावली-टवर्ग" --"ट""ट"से टहनी और टमाटर!अंग्रेजी भाषा है टर-टर!हिन्दी वैज्ञानिक भाषा है,सम्बोधन में होता आदर!! --"ठ""ठ"से ठेंगा और ठठेरा!दुनिया में ठलुओं का डेरा!ठग लोगों को बहकाता है,...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
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व्यञ्जनावली "चवर्ग” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

"च""च"से चन्दा-चम्मच-चमचम!चरखा सूत कातता हरदम!सरदी, गरमी और वर्षा का,बदल-बदल कर आता मौसम!!"छ""छ"से छतरी सदा लगाओ!छत पर मत तुम पतंग उड़ाओ!छम-छम बारिश जब आती हो,झट इसके नीचे छिप जाओ!!"ज""ज"से जड़ और लिखो जहा...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
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52

व्यञ्जनावली "कवर्ग” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

♥ व्यञ्जनावली-कवर्ग ♥"क""क"से कलम हाथ में लेकर!लिख सकते हैं कमल-कबूतर!!"क"पहला व्यञ्जन हिन्दी का,भूल न जाना इसे मित्रवर!!--"ख""ख"से खम्बा और खलिहान!खेत जोतता श्रमिक किसान!!"ख"से खरहा और खरगोश,झाड़ी ...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
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47

बाल कविता "खरबूजों का मौसम आया" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों...!गर्मी अपने पूरे यौवन पर है।ऐसे में मेरी यह बालरचना आपको जरूर सुकून देगी!पिकनिक करने का मन आया!मोटर में सबको बैठाया!!पहुँच गये जब नदी किनारे!खरबूजे के खेत निहारे!!ककड़ी, खीरा और तरब...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
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ग़ज़ल "लोग मासूम कलियाँ मसलने लगे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आदमी के इरादे बदलने लगेदीन-ईमान पल-पल फिसलने लगेचल पड़ी गर्म अब तो हवाएँ यहाँसभ्यता के हिमालय पिघलने लगेफूल कैसे खिलेंगे चमन में भला,लोग मासूम कलियाँ मसलने लगे।अब तो पूरब में सूरज लगा डूबनेप...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
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75

"जमाखोरों का वतन में राज आया है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जलाया खून है अपना, पसीना भी बहाया है।कृषक ने अन्न खेतों में, परिश्रम से कमाया है।।सुलगते जिसके दम से हैं, घरों में शान से चूल्हे,उसी पालक को, साहूकार ने भिक्षुक बनाया है।मुखौटा पहनकर बैठे हैं, ढ...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
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79

'झरी नीम की पत्तियाँ'का विमोचन (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

19 सितम्बर, 2015 कोमेरे अभिन्न मित्र स्व. देवदत्त 'प्रसून'कीप्रथम काव्यकृति'झरी नीम की पत्तियाँ'का विमोचन पीलीभीत में हुआ।इस अवसर पर मैंने अपने मित्र को निम्न  दोहों के साथ श्रद्धासुमन अर्पि...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
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226

कविगोष्ठी"स्व. टीकाराम पाण्डेय 'एकाकी'की दूसरी पुण्यतिथि"

जीवन भर जिसने कभी, किया नहीं विश्राम।धन्य हिन्द के केशरी, पंडित टीकाराम।।--दीन-दुखी के लिए जो, सदा रहे थे नाथ।जीवन सैनिक सा जिया, कर्तव्यों के साथ।।--खुश रहते हर हाल में, रहे न कभी उदास।कोकिल जैस...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
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85

गीत "आशाएँ विश्वास जगाती" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आशा पर ही प्यार टिका है।आशा पर संसार टिका है।।आशाएँ ही वृक्ष लगाती,आशाएँ विश्वास जगाती,आशा पर परिवार टिका है।आशा पर संसार टिका है।।आशाएँ श्रमदान कराती,पत्थर को भगवान बनाती,आशा पर उपकार टिका ...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
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83

‘‘धैर्य में ही सुख है’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

‘‘रोटी की कहानी’’    एक राजकुमारी थी। वह रोटी खाने बैठी। रोटी गरम थी राजकुमारी का हाथ जल गया आर वह रोने लगी।    तब रोटी ने कहा- ‘‘बहिन! तुम तो बहुत कमजोर दिल की हो। जरा सी भाप लगने पर ही रो...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
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129

"काव्य की आत्मा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक)

♥ रस काव्य की आत्मा है ♥सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि रस क्या होता है?कविता पढ़ने या नाटक देखने पर पाठक या दर्शक को जो आनन्द मिलता है उसे रस कहते हैं।आचार्यों ने रस को काव्य की आत्मा की संज्ञा ...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
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79

"दोहे्-भेद-भाव को मेटता होली का त्यौहार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

होली का त्यौहार-0-0-0-0-0-फागुन में नीके लगें, छींटे औ' बौछार।सुन्दर, सुखद-ललाम है, होली का त्यौहार।।शीत विदा होने लगा, चली बसन्त बयार।प्यार बाँटने आ गया, होली का त्यौहार।।पाना चाहो मान तो, करो मधुर व...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
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76

"लगता है बसन्त आया है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

 टेसू की डालियाँ फूलतीं, खेतों में बालियाँ झूलतीं, लगता है बसन्त आया है! केसर की क्यारियाँ महकतीं, बेरों की झाड़ियाँ चहकती, लगता है बसन्त आया है! आम-नीम पर बौर छा रहा, प्रीत-रीत का द...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
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190

"गीत-फिर से चमकेगा गगन-भाल" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

फिर से चमकेगा गगन-भाल। आने वाला है नया साल।।आशाएँ सरसती हैं मन में, खुशियाँ बरसेंगी आँगन में, सुधरेंगें बिगड़े हुए हाल। आने वाला है नया साल।।होंगी सब दूर विफलताएँ, आयेंगी नई सफलताएँ, जन्मेंगे ...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
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159

"गीत-महाइन्द्र की पंचायत" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जिनका पेटभरा हो उनको, भोजन नहीं कराऊँगा।जिस महफिल में उल्लू बोलें, वहाँ नहीं मैं गाऊँगा।।महाइन्द्र की पंचायत में, भेदभाव की है भाषा,अपनो की महफिल में, बौनी हुई सत्य की परिभाषा,ऐसे सम्मेलन में,...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
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79

"बाल साहित्य के ब्लॉगरों के लिए सूचना"

मान्यवर,    दिनांक 18-19 अक्टूबर को खटीमा (उत्तराखण्ड) में बाल साहित्य संस्थान द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय बाल साहित्य सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।    जिसमें एक सत्र बाल साहित्य लिखने वाले ...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
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92

‘‘जीवन के रूप’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

जीवन ! दो चक्रकभी सरलकभी वक्र,--जीवन !दो रूपकभी छाँवकभी धूप--जीवन!दो रुखकभी सुखकभी दुःख--जीवन !दो खेलकभी जुदाईकभी मेल--जीवन !दो ढंगकभी दोस्तीकभी जंग--जीवन !दो आसकभी तमकभी प्रकाश--जीवन !दो सारकभी न...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
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255

"मुक्तक-सदा दीप जलाये रखना" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मुक्तकप्यार के फूल बगीचे में खिलाये रखनागीत के साथ सदा ताल मिलाये रखनारात के स्याह अँधेरों को छाँटने के लिए-दिल के दरम्यान सदा दीप जलाये रखना...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
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382

“पथ निखर ही जाएगा” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आज अपना हम सँवारें, कल सँवर ही जायेगाआप सुधरोगे तो सारा, जग सुधर ही जाएगा जो अभी कुछ घट रहा है, वही तो इतिहास हैदेखकर नक्श-ए-कदम को, रथ उधर ही जाएगा रास्ते कितने मिलेंगे, सोचकर पग को बढ़ानाआओ म...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
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144

"गज़ल-अब "रूप" राम का उभरा है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

नजरों से गिराने की ख़ातिर, पलकों पे सजाये जाते हैं।मतलब के लिए इस दुनिया में, किरदार बनाये जाते हैं।।जनता ने चुना नहीं जिनको, वो चोर द्वार से आ पहुँचे,भारत में कुछ ऐसे वज़ीर, हर बनाये जाते ...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
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172

"ग़ज़ल-सावन की छटा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सावन की है छटा निरालीधरती पर पसरी हरियालीतन-मन सबका मोह रही हैनभ पर घटा घिरी है कालीमोर-मोरनी ने कानन मेंनृत्य दिखाकर खुशी मना लीसड़कों पर काँवड़ियों की भीघूम रहीं टोली मतवालीझूम-झूम लहराते ...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
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73

"आज से ब्लॉगिंग बन्द" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों।फेस बुक पर मेरे मित्रों में एक श्री केवलराम भी हैं। उन्होंने मुझे चैटिंग में आग्रह किया कि उन्होंने एक ब्लॉगसेतु के नाम से एग्रीगेटर बनाया है। अतः आप उसमें अपने ब्लॉग जोड़ दीजिए।&nb...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
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92

"आज विनीत चाचा का जन्मदिन है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

चाचा जी खा लेओ मिठाई,जन्मदिवस है आज तुम्हारा।महके-चहके जीवन बगिया,आलोकित हो जीवन सारा।।बाबा-दादी, पापा-मम्मी,सब देंगे उपहार आपको।लेकिन हम बच्चे मिल करके,देंगे अपना प्यार आपको।।बूढ़ीदादी-दा...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
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292

"चन्दा से चाँदनी का आधार माँगता हूँ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मै प्यार का हूँ राही और प्यार माँगता हूँ।मंजिल से प्यार का ही उपहार माँगता हूँ।।सूनी सी ये डगर हैं,अनजान सा नगर हैं,चन्दा से चाँदनी का आधार माँगता हूँ।मंजिल से प्यार का ही उपहार माँगता हूँ।।स...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
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246

"दोहे-छंदहीन काव्य" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

लुप्त हुआ है काव्य का, नभ में सूरज आज।बिनाछन्द रचना रचें, ज्यादातर कविराज।१।जिसमें हो कुछ गेयता, काव्य उसी का नाम।रबड़छंद का काव्य में, बोलो क्या है काम।२।अनुच्छेद में बाँटिए, कैसा भी ...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
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