डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
सुख का सूरज की पोस्ट्स

“फागुन सबके मन भाया है” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक')

होली आई, होली आई,गुजिया, मठरी, बरफी लाई   मीठे-मीठे शक्करपारे,सजे -धजे पापड़ हैं सारे,चिप्स कुरकुरे और करारे,दहीबड़े हैं प्यारे-प्यारे,  तन-मन में मस्ती उभरी है,पिस्ता बरफी हरी-भरी है. प...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
110

“लोभ-लालच डस रहे हैं” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

कभी कुहरा, कभी सूरज, कभी आकाश में बादल घने हैं।दुःख और सुख भोगने को, जीव के तन-मन बने हैं।।आसमां पर चल रहे हैं, पाँव के नीचे धरा है,कल्पना में पल रहे हैं, सामने भोजन धरा है,पा लिया सब कुछ मगर, फिर भी ...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
115

""टूटा स्वप्न-गीत" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरे गाँव, गली-आँगन में, अपनापन ही अपनापन है।देश-वेश-परिवेश सभी में, कहीं नही बेगानापन है।।घर के आगे पेड़ नीम का, वैद्यराज सा खड़ा हुआ है।माता जैसी गौमाता का, खूँटा अब भी गड़ा हुआ है।टे...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
135

"ग़ज़ल-आइने की क्या जरूरत" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

रूप इतना खूबसूरतआइने की क्या जरूरतआ रहीं नज़दीक घड़ियाँजब बनेगा शुभमुहूरतबैठकर जब बात होंगीदूर होंगी सब कुदूरतलाख पर्दों में छुपाओछिप नहीं पायेगी सूरतदिल में हमने है समायीआपकी सुन्दर सी ...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
112

"रिश्ते और प्यार बदल जाते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरे काव्य संग्रह "सुख का सूरज" सेएक गीत"रिश्ते और प्यार बदल जाते हैं"युग के साथ-साथ, सारे हथियार बदल जाते हैं।नौका खेने वाले, खेवनहार बदल जाते हैं।।प्यार मुहब्बत के वादे सब निभा नहीं पाते हैं,न...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
120

"आज से ब्लॉगिंग बन्द" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों।फेस बुक पर मेरे मित्रों में एक श्री केवलराम भी हैं। उन्होंने मुझे चैटिंग में आग्रह किया कि उन्होंने एक ब्लॉगसेतु के नाम से एग्रीगेटर बनाया है। अतः आप उसमें अपने ब्लॉग जोड़ दीजिए।&nb...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
121

"प्यार करते हैं हम पत्थरों से" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरे काव्य संग्रह "सुख का सूरज" सेएक गीत"प्यार करते हैं हम पत्थरों से"बात करते हैं हम पत्थरों से सदा,हम बसे हैं पहाड़ों के परिवार में।प्यार करते हैं हम पत्थरों से सदा,ये तो शामिल हमारे हैं संसार...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
82

"कुछ प्यार की बातें करें" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरे काव्य संग्रह "सुख का सूरज" सेएक ग़ज़ल"कुछ प्यार की बातें करें"ज़िन्दगी के खेल में, कुछ प्यार की बातें करें।प्यार का मौसम है, आओ प्यार की बातें करें।।नेह की लेकर मथानी, सिन्धु का मन्थन क...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
94

"जीत के माहौल में क्यों हार की बातें करें" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरे काव्य संग्रह "सुख का सूरज" सेएक ग़ज़ल"जीत के माहौल में क्यों हार की बातें करें"सादगी के साथ में, शृंगार की बातें करेंजीत के माहौल में, क्यों हार की बातें करेंसोचने को उम्र सारी ही पड़ी है सा...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
118

"दिन आ गये हैं प्यार के" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरे काव्य संग्रह "सुख का सूरज" सेएक गीतदिन आ गये हैं प्यार केखिल उठा सारा चमन, दिन आ गये हैं प्यार के।रीझने के खीझने के, प्रीत और मनुहार के।। चहुँओर धरती सज रही और डालियाँ हैं फूलती,पायल छमाछम...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
92

"शाख वाला चमन बेच देंगे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरे काव्य संग्रह "सुख का सूरज" सेएक ग़ज़ल"गद्दार मेरा वतन बेच देंगे"ये गद्दार मेरा वतन बेच देंगे।ये गुस्साल ऐसे कफन बेच देंगे।बसेरा है सदियों से शाखों पे जिसकी,ये वो शाख वाला चमन बेच देंगे।सद...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
93

"काँटों की पहरेदारी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 अपने काव्य संकलन सुख का सूरज सेएक गीत"काँटों की पहरेदारी"आशा और निराशा के क्षण,पग-पग पर मिलते हैं।काँटों की पहरेदारी में,ही गुलाब खिलते हैं।पतझड़ और बसन्त कभी,हरियाली आती है।सर्दी-गर्मी सह...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
88

"दो शब्द-सुख का सूरज" (डॉ. सिद्धेश्वर सिंह)

"कविता के सुख का सूरज" (डॉ. सिद्धेश्वर सिंह)       डॉ. सिद्धेश्वर सिंह हिन्दी साहित्य और ब्लॉग की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम है। जब कभी विद्वता की बात चलती है तो डॉ. सिद्धेश्वर सिंह को क...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
98

"सुख का सूरज-मेरी बात"

मेरी बातनहीं जानता कैसे बन जाते हैं, मुझसे गीत-गजल।ना जाने मन के नभ पर, कब छा जाते गहरे बादल।।ना कोई कापी ना कागज, ना ही कलम चलाता हूँ।खोल पेजमेकर को, हिन्दी-टंकण करता जाता हूँ।।देख छटा बा...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
87

"जब याद किसी की आती है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 अपने काव्य संकलन सुख का सूरज सेएक गीत"जब याद किसी की आती है"दिल में कुछ-कुछ होता है,जब याद किसी की आती है।मन सब सुध-बुध खोता है,जब याद किसी की आती है।गुलशन वीराना लगता है,पागल परवाना लगता है,भँव...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
116

चाँद-सितारे ला सकता हूँ (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अपने काव्य संकलन सुख का सूरज से"चाँद-सितारे ला सकता हूँ" अपना माना है जब तुमको,चाँद-सितारे ला सकता हूँ । तीखी-फीकी, जली-भुनी सी,सब्जी भी खा सकता हूँ।दर्शन करके चन्द्र-वदन का,निकल पड़ा हूँ रा...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
84

"बसन्त आया है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अपने काव्य संकलन सुख का सूरज सेलगता है बसन्त आया है!हर्षित होकर राग भ्रमर ने गाया है!  लगता है बसन्त आया है!!नयनों में सज उठे सिन्दूरी सपने से,कानों में बज उठे साज कुछ अपने से,पुलकित होकर रोम-...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
106

"कोढ़ में खाज" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

"जी रहे पेड़-पौधे हमारे लिए" अपने काव्य संकलन सुख का सूरज सेगीतनिर्दोष से प्रसून भी डरे हुए हैं आज।चिड़ियों की कारागार में पड़े हुए हैं बाज।अश्लीलता के गान नौजवान गा रहा,चोली में छिपे अंग की ...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
101

"जी रहे पेड़-पौधे हमारे लिए" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अपने काव्य संकलन सुख का सूरज सेगीतजी रहे पेड़-पौधे हमारे लिए, दे रहे हैं हमें शुद्ध-शीतल पवन! खिलखिलाता इन्हीं की बदौलत सुमन!! रत्न अनमोल हैं ये हमारे लिए। जी रहे पेड़-पौधे हमारे लिए।।आद...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
81

"शब्द कोई व्यापार नही है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अपने काव्य संकलन सुख का सूरज सेगीत"शब्द कोई व्यापार नही है" जीवन की अभिव्यक्ति यही है,क्या शायर की भक्ति यही है?शब्द कोई व्यापार नही है,तलवारों की धार नही है,राजनीति परिवार नही है,भाई-भाई में ...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
94

"कैसे जी पायेंगे कसाइयों के देश में" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अपने काव्य संकलन सुख का सूरज सेघनाक्षरी छन्द"कैसे जी पायेंगे?"नम्रता उदारता का पाठ, अब पढ़ाये कौन?उग्रवादी छिपे जहाँ सन्तों के वेश में।साधु और असाधु की पहचान अब कैसे हो,दोनो ही सुसज्जित हैं, द...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
97

"भारत माँ के मधुर रक्त को कौन राक्षस चाट रहा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अपने काव्य संकलन सुख का सूरज सेएक कविताभारत माँ के मधुर रक्त को कौन राक्षस चाट रहाआज देश में उथल-पुथल क्यों,क्यों हैं भारतवासी आरत?कहाँ खो गया रामराज्य,और गाँधी के सपनों का भारत?आओ मिलकर आज वि...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
81

"मुस्कराता हुआ अब वतन चाहिए" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अपने काव्य संकलन सुख का सूरज सेएक गीत"लहलहाता हुआ वो चमन चाहिए"मन-सुमन हों खिले, उर से उर हों मिले, लहलहाता हुआ वो चमन चाहिए। ज्ञान-गंगा बहे, शन्ति और सुख रहे- मुस्कराता हुआ वो वतन चाहिए...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
97

"ढाई आखर नही व्याकरण चाहिए" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरे काव्यसंग्रह "सुख का सूरज" से    प्यार का राग आलापने के लिए"ढाई आखर नही व्याकरण चाहिए"मोक्ष के लक्ष को मापने के लिए,जाने कितने जनम और मरण चाहिए ।प्यार का राग आलापने के लिए,शुद्ध स्वर, त...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
87

"हमें संस्कार प्यारे हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरे काव्यसंग्रह "सुख का सूरज" से    "हमें संस्कार प्यारे हैं"उजाला ले के आये हो तो अपने मुल्क में छाँटो,हमें अँधियार प्यारे हैं।निवाला ले के आये हो तो अपने मुल्क में चाटो.हमें किरदार प्यार...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
126

"प्यार करते हैं हम पत्थरों से" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरे काव्यसंग्रह "सुख का सूरज" से    "प्यार करते हैं हम पत्थरों से" बात करते हैं हम पत्थरों से सदा,हम बसे हैं पहाड़ों के परिवार में।प्यार करते हैं हम पत्थरों से सदा,ये तो शामिल हमारे हैं सं...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
93

"दूषित हुआ वातावरण" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरे काव्यसंग्रह "सुख का सूरज" से    "दूषित हुआ वातावरण"सभ्यता, शालीनता के गाँव में, खो गया जाने कहाँ है आचरण? कर्णधारों की कुटिलता देखकर, देश का दूषित हुआ वातावरण। सुर हुए गायब, मृदु...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
88

"नमन शैतान करते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरे काव्यसंग्रह "सुख का सूरज" से    "नमन शैतान करते हैं"हमारा आवरण जिसने, सजाया और सँवारा है,हसीं पर्यावरण जिसने, बनाया और निखारा है।बहुत आभार है उसका, बहुत उपकार है उसका,दिया माटी क...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
85

"पहरे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरे काव्यसंग्रह "सुख का सूरज" से    पहरेपहले पाबन्दियाँ थीं हँसने में,अब तो रोने में भी लगे पहरे।पहले बदनामियाँ थीं कहने में,अब तो सहने में भी लगे पहरे।कितने पैबन्द हैं लिबासों में,जिन्द...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
94

"दे रहा मधुमास दस्तक" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरे काव्यसंग्रह "सुख का सूरज" से    गीतदे रहा मधुमास दस्तकसुमन पुलकित हो रहा अभिनव नवल शृंगार भर।दे रहा मधुमास दस्तक है हृदय के द्वार पर।।भ्रमर की गुञ्जार गुन-गुन गान है गाने लगी,तितलियो...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
सुख का सूरज
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