डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
नन्हे सुमन की पोस्ट्स

बालगीत "होली का मौसम अब आया" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

रंग-गुलाल साथ में लाया।होली का मौसम अब आया।पिचकारी फिर से आई हैं,बच्चों के मन को भाई हैं,तन-मन में आनन्द समाया।होली का मौसम अब आया।।गुझिया थाली में पसरी हैं,पकवानों की महक भरी हैं, मठरी ने मन ...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
नन्हे सुमन
22

बालकविता "झूम-झूमकर मच्छर आते" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

झूम-झूमकर मच्छर आते।कानों में गुञ्जार सुनाते।।नाम ईश का जपते-जपते।सुबह-शाम को खूब निकलते।। बैठा एक हमारे सिर पर।खून चूसता है जी भर कर।।नहीं यह बिल्कुल भी डरता।लाल रक्त से टंकी भरता।। कै...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
नन्हे सुमन
17

बालकविता "खेतों में शहतूत उगाओ"

कितना सुन्दर और सजीला।खट्टा-मीठा और रसीला।।हरे-सफेद, बैंगनी-काले।छोटे-लम्बे और निराले।।शीतलता को देने वाले।हैं शहतूत बहुत गुण वाले।।पारा जब दिन का बढ़ जाता।तब शहतूत बहुत मन भाता। इसका व...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
नन्हे सुमन
16

बालकविता "बच्चों का संसार निराला" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सीधा-सादा. भोला-भाला।बच्चों का संसार निराला।।बचपन सबसे होता अच्छा।बच्चों का मन होता सच्चा।पल में रूठें, पल में मानें।बैर-भाव को ये क्या जानें।।प्यारे-प्यारे सहज-सलोने।बच्चे तो हैं स्वयं खि...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
नन्हे सुमन
27

बालकविता "तीखी-मिर्च कभी मत खाओ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

तीखी-तीखी और चर्परी।हरी मिर्च थाली में पसरी।।तोते इसे प्यार से खाते।मिर्च देखकर खुश हो जाते।।सब्ज़ी का यह स्वाद बढ़ाती।किन्तु पेट में जलन मचाती।।जो ज्यादा मिर्ची खाते हैं।सुबह-सुबह वो पछ...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
नन्हे सुमन
22

बालकविता "सबके प्यारे बन जाओगे" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मैं तुमको गुरगल कहता हूँ,लेकिन तुम हो मैना जैसी।तुम गाती हो कर्कश सुर में,क्या मैना होती है ऐसी??सुन्दर तन पाया है तुमने,लेकिन बहुत घमण्डी हो।नहीं जानती प्रीत-रीत को,तुम चिड़िया उदण्डी हो।।जल...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
नन्हे सुमन
20

बालकविता "क.ख.ग.घ. सिखलाऊँगी" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

चित्रांकन - कु. प्राचीमम्मी देखो मेरी डॉल।खेल रही है यह तो बॉल।।पढ़ना-लिखना इसे न आता।खेल-खेलना बहुत सुहाता।।कॉपी-पुस्तक इसे दिलाना।विद्यालय में नाम लिखाना।।मैं गुड़िया को रोज सवेरे।लाड...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
नन्हे सुमन
20

बालकविता "काँव-काँव कर चिल्लाया है कौआ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

काले रंग का चतुर-चपल,पंछी है सबसे न्यारा।डाली पर बैठा कौओं का, जोड़ा कितना प्यारा।नजर घुमाकर देख रहे ये,कहाँ मिलेगा खाना।जिसको खाकर कर्कश स्वर में,छेड़ें राग पुराना।।काँव-काँव का इनका गा...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
नन्हे सुमन
18

बालकविता "लगता एक तपस्वी जैसा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

बगुला भगत बना है कैसा?लगता एक तपस्वी जैसा।।अपनी धुन में अड़ा हुआ है।एक टाँग पर खड़ा हुआ है।।धवल दूध सा उजला तन है।जिसमें बसता काला मन है।।मीनों के कुल का घाती है।नेता जी का यह नाती है।।बैठा यह...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
नन्हे सुमन
20

बालगीत "प्रकाश का पुंज हमारा सूरज" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

पूरब से जो उगता है और पश्चिम में छिप जाता है।यह प्रकाश का पुंज हमारा सूरज कहलाता है।। भानु रात और दिन का हमको भेद बताता है। रुकता नही कभी भी चलता रहता सदा नियम से, दुनिया को नियमित होने का ...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
नन्हे सुमन
18

बालकविता "क.ख.ग. लिखवाती हैं" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

रंग-बिरंगी पेंसिलें तो, हमको खूब लुभाती हैं। ये ही हमसे ए.बी.सी.डी., क.ख.ग. लिखवाती हैं।। रेखा-चित्र बनाना, इनके बिना असम्भव होता है।कला बनाना भी तो, केवल इनसे सम्भव होता है।। गल्...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
नन्हे सुमन
25

बालकविता "नानी के घर जाना है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मई महीना आता है और, जब गर्मी बढ़ जाती है।नानी जी के घर की मुझको, बेहद याद सताती है।।तब मैं मम्मी से कहती हूँ, नानी के घर जाना है।नानी के प्यारे हाथों से, आइसक्रीम भी  खाना है।।कथा-कह...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
नन्हे सुमन
15

बालगीत "मेरी प्यारी मुनिया" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

 इतनी जल्दी क्या है बिटिया, सिर पर पल्लू लाने की।अभी उम्र है गुड्डे-गुड़ियों के संग,समय बिताने की।।मम्मी-पापा तुम्हें देख कर,मन ही मन हर्षाते हैं।जब वो नन्ही सी बेटी की,छवि आखों में पाते है।...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
नन्हे सुमन
25

बालकविता "विद्यालय लगता है प्यारा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

विद्या का भण्डार भरा है जिसमें सारा।मुझको अपना विद्यालय लगता है प्यारा।।नित्य नियम से विद्यालय में, मैं पढ़ने को जाता हूँ।इण्टरवल जब हो जाता मैं टिफन खोल कर खाता हूँ।खेल-खेल में दीदी जी विज्...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
नन्हे सुमन
20

बालकविता (बालवाणी में मेरी बालकविता 'उल्लू')

"उल्लू"उल्लू का रंग-रूप निराला।लगता कितना भोला-भाला।।अन्धकार इसके मन भाता।सूरज इसको नही सुहाता।।यह लक्ष्मी जी का वाहक है।धन-दौलत का संग्राहक है।।इसकी पूजा जो है करता।ये उसकी मति को है हरता...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
नन्हे सुमन
18

बालकविता "नौकर है यह बिना दाम का" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

यह कुत्ता है बड़ा शिकारी।बिल्ली का दुश्मन है भारी।।बन्दर अगर इसे दिख जाता।भौंक-भौंक कर उसे भगाता।।उछल-उछल कर दौड़ लगाता।बॉल पकड़ कर जल्दी लाता।।यह सीधा-सच्चा लगता है।बच्चों को अच्छा लगता है।।...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
नन्हे सुमन
18

बालकविता "अपना ऊँचा नाम करूँ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 मैं अपनी मम्मी-पापा के,नयनों का हूँ नन्हा-तारा। मुझको लाकर देते हैं वो,रंग-बिरंगा सा गुब्बारा।।मुझे कार में बैठाकर,वो रोज घुमाने जाते हैं।पापा जी मेरी खातिर,कुछ नये खिलौने लाते हैं।। म...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
नन्हे सुमन
21

बालकविता "मीठा रस पीकर जीता है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

गुन-गुन करता भँवरा आया।कलियों फूलों पर मंडराया।।यह गुंजन करता उपवन में।गीत सुनाता है कानन में।।कितना काला इसका तन है।किन्तु बड़ा ही उजला मन है।जामुन जैसी शोभा न्यारी।खुशबू इसको लगत...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
नन्हे सुमन
15

बालकविता "गुब्बारों की महिमा न्यारी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

बच्चों को लगते जो प्यारे।वो कहलाते हैं गुब्बारे।।गलियों, बाजारों, ठेलों में।गुब्बारे बिकते मेलों में।।काले, लाल, बैंगनी, पीले।कुछ हैं हरे, बसन्ती, नीले।।पापा थैली भर कर लाते।जन्म-दिवस ...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
नन्हे सुमन
22

बालकविता "गैस सिलेण्डर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

गैस सिलेण्डर कितना प्यारा।मम्मी की आँखों का तारा।।रेगूलेटर अच्छा लाना।सही ढंग से इसे लगाना।।  गैस सिलेण्डर है वरदान।यह रसोई-घर की है शान।। दूघ पकाओ, चाय बनाओ। मनचाहे पकवान बनाओ।। बि...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
नन्हे सुमन
21

बालकविता "छोटा बस्ता हो आराम" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरा बस्ता कितना भारी।बोझ उठाना है लाचारी।।मेरा तो नन्हा सा मन है।छोटी बुद्धि दुर्बल तन है।।पढ़नी पड़ती सारी पुस्तक।थक जाता है मेरा मस्तक।।रोज-रोज विद्यालय जाना।बड़ा कठिन है भार उठाना।।क...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
नन्हे सुमन
19

बालकविता "सारा दूध नही दुह लेना" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरी गैया बड़ी निराली, सीधी-सादी, भोली-भाली। सुबह हुई काली रम्भाई,मेरा दूध निकालो भाई। हरी घास खाने को लाना,उसमें भूसा नही मिलाना। उसका बछड़ा बड़ा सलोना,वह प्यारा सा एक खिलौना।  मैं ...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
नन्हे सुमन
21

बालकविता "तितली रानी कितनी सुन्दर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मन को बहुत लुभाने वाली,तितली रानी कितनी सुन्दर।भरा हुआ इसके पंखों में,रंगों का है एक समन्दर।।उपवन में मंडराती रहती,फूलों का रस पी जाती है।अपना मोहक रूप दिखाने,यह मेरे घर भी आती है।।भोली-भाली ...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
नन्हे सुमन
22

बालकविता "जीवन श्रम के लिए बना है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

“नन्हे सुमन” ब्लॉग!बच्चों अर्थात् नन्हीं कलियों और सुमनों को समर्पित हैः चिड़िया रानी फुदक-फुदक कर,मीठा राग सुनाती हो।आनन-फानन में उड़ करके,आसमान तक जाती हो।।मेरे अगर पंख होते तो,म...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
नन्हे सुमन
18

वन्दना "बनें सब काज सुन्दर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

कह दिया मेरे सुमन ने आज सुन्दर।तार वीणा के बजे बिन साज  सुन्दर ।।ज्ञान की गंगा बही, विज्ञान पुलकित हो गया,आकाश झंकृत हो गया, संसार हर्षित हो गया,नाम से माँ के हुआ आगाज़  सुन्दर ।तार वी...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
नन्हे सुमन
25

"पढ़ना-लिखना मजबूरी है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मुश्किल हैं विज्ञान, गणित,हिन्दी ने बहुत सताया है।अंग्रेजी की देख जटिलता,मेरा मन घबराया है।।  भूगोल और इतिहास मुझे,बिल्कुल भी नही सुहाते हैं।श्लोकों के कठिन अर्थ,मुझको करने नही आते हैं।।...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
नन्हे सुमन
23

"बाल-दिवस-पं. नेहरू को शत्-शत् नमन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

राष्ट्र-नायक पं. नेहरू को शत्-शत् नमन!चाचा नेहरू तुमने प्यारे बच्चों को ईनाम दिया था।अपने जन्म-दिवस को तुमने बाल-दिवस का नाम दिया था।फूलों की मुस्कानों से महके उपवन।बच्चों की किलकारी से ग...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
नन्हे सुमन
40

बालकविता "प्रांजल-प्राची की नयी स्कूटी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आज हमारे लिए हमारे,बाबा जी लाये स्कूटी।वैसे तो काले रंग की है, लेकिन लगती बीरबहूटी।।इस प्यारी सी स्कूटी में,खर्च नहीं बिल्कुल ईंधन का।चार्ज करो इसको बिजली से,संवाहक यह संसाधन का।।अपने घर स...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
नन्हे सुमन
87

“होली का त्यौहार” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

गुड़िया गुझिया बना रही है,दादी पूड़ी बेल रही है। कभी-कभी पिचकारी लेकर,रंगों से वह खेल रही है।।तलने की आशा में आतुरगुझियों की है लगी कतार।घर-घर में खुशियाँ उतरी हैं,होली का आया त्यौहार।।मम्म...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
नन्हे सुमन
101

"नेशनल दुनिया में मेरी बालकविता-गुब्बारे" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

नई दिल्ली से प्रकाशित होने वाले दैनिक समाचार पत्र "नेशनल दुनिया"में मेरी बाल कविता"गुब्बारे"बच्चों को लगते जो प्यारे।वो कहलाते हैं गुब्बारे।। गलियों, बाजारों, ठेलों में।गुब्बारे बि...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
नन्हे सुमन
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