डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
प्रांजल-प्राची की पोस्ट्स

""पारसमणि" में मेरी बालकविता "पाठशाला" का राजस्थानी में अनुवाद"

हनुमानगढ़ (राजस्थान) से प्रकाशित पत्रिका "पारसमणि" में मेरी बालकविता "पाठशाला" का राजस्थानी में अनुवाद प्रकाशित हुआ है।अनुवादक है पं. दीनदयाल शर्मा।...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
144

"मैं भी जागा, तुम भी जागो" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" सेबालकविता"मैं भी जागा, तुम भी जागो"रोज सवेरे मैं उठ जाता।कुकड़ूकूँ की बाँग लगाता।।कहता भोर हुई उठ जाओ।सोने में मत समय गँवाओ।।आलस छोड़ो, बिस्तर त्यागो।मैं भी ...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
76

"आज से ब्लॉगिंग बन्द" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों।फेस बुक पर मेरे मित्रों में एक श्री केवलराम भी हैं। उन्होंने मुझे चैटिंग में आग्रह किया कि उन्होंने एक ब्लॉगसेतु के नाम से एग्रीगेटर बनाया है। अतः आप उसमें अपने ब्लॉग जोड़ दीजिए।&nb...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
73

"कच्चे घर अच्छे रहते हैं" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" सेबालकविता"कच्चे घर अच्छे रहते हैं"सुन्दर-सुन्दर सबसे न्यारा।प्राची का घर सबसे प्यारा।।खुला-खुला सा नील गगन है।हरा-भरा फैला आँगन है।।पेड़ों की छाया सुखदायी...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
86

"सुराही" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" सेबालकविता"सुराही""पानी को ठण्डा रखती है,मिट्टी से है बनी सुराही।बिजली के बिन चलती जाती,देशी फ्रिज होती सुखदायी।।छोटी-बड़ी और दरम्यानी,सजी हुई हैं सड़क किनार...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
98

"ठोकर से छू लो हमें.." (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मेरे काव्य संग्रह "धरा के रंग" सेएक गीत सुनिए..."ठोकर से छू लो हमें.."अर्चना चावजी के स्वर मेंआप इक बार ठोकर से छू लो हमें,हम कमल हैं चरण-रज से खिल जायेगें!प्यार की ऊर्मियाँ तो दिखाओ जरा,संग-ए-दिल...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
91

"बालकविता-सूअर का बच्चा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" से बालकविता"सूअर का बच्चा" गोरा-चिट्टा कितना अच्छा।लेकिन हूँ सूअर का बच्चा।।लोग स्वयं को साफ समझते।लेकिन मुझको गन्दा कहते।।मेरी बात सुनो इन्सानों।मत ...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
172

"आओ अब हम झूला झूलें" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" से बालकविता"झूला झूलें"आओ अब हम झूला झूलें।खिड़की-दरवाजों को छू लें।।मिल-जुलकर हम मौज मनाएँ।जोर-जोर से गाना गाएँ।।माँ कहती मत शोर मचाओ।जल्दी से विद्यालय ...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
88

"माँ को नमन" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

अपनी बालकृति"हँसता गाता बचपन" सेमाँ को नमन करते हुए!आज यह बालकविता पोस्ट कर रहा हूँ!माता के उपकार बहुत,वो भाषा हमें बताती है!उँगली पकड़ हमारी माता,चलना हमें सिखाती है!!दुनिया में अस्तित्व हमार...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
75

"बालकविता-मैना" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

अपनी बालकृति"हँसता गाता बचपन" से"मैना"मैं तुमको मैना कहता हूँ,लेकिन तुम हो गुरगल जैसी।तुम गाती हो कर्कश सुर में,क्या मैना होती है ऐसी??सुन्दर तन पाया है तुमने,लेकिन बहुत घमण्डी हो।नहीं जानती प...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
336

"खरगोश" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

अपनी बालकृति"हँसता गाता बचपन" से"खरगोश"रूई जैसा कोमल-कोमल,लगता कितना प्यारा है।बड़े-बड़े कानों वाला,सुन्दर खरगोश हमारा है।।बहुत प्यार से मैं इसको,गोदी में बैठाता हूँ।बागीचे की हरी घास,मैं इस...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
65

"तख्ती और स्लेट" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

अपनी बालकृति"हँसता गाता बचपन" सेतख्ती और स्लेटसिसक-सिसक कर स्लेट जी रही,तख्ती ने दम तोड़ दिया है।सुन्दर लेख-सुलेख नहीं है,कलम टाट का छोड़ दिया है।। दादी कहती एक कहानी,बीत गई सभ्यता पुरान...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
89

"भैंस हमारी बहुत निराली" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" से"भैंस हमारी बहुत निराली" भैंस हमारी बहुत निराली।खाकर करती रोज जुगाली।।इसका बच्चा बहुत सलोना।प्यारा सा है एक खिलौना।।बाबा जी इसको टहलाते।गर्मी में इसको ...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
68

"फोटो फीचर-बिजली कड़की पानी आया" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" से"बिजली कड़की पानी आया" उमड़-घुमड़ कर बादल आये।घटाटोप अँधियारा लाये।।काँव-काँव कौआ चिल्लाया।लू-गरमी का हुआ सफाया।। मोटी जल की बूँदें आईं।आँधी-ओले संग मे...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
87

"रंग-बिरंगे छाते" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" से"रंग-बिरंगे छाते" धूप और बारिश से,जो हमको हैं सदा बचाते।छाया देने वाले ही तो,कहलाए जाते हैं छाते।। आसमान में जब घन छाते,तब ये हाथों में हैं आते।रंग-बिरंगे छ...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
269

"बालकविता-कद्दू" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" सेबालकविता♥ कद्दू ♥ नेता जैसा कद्दू प्यारा।काशी फल है सबसे न्यारा।।देवालय में त्यौहारों में।कथा-कीर्तन भण्डारों में।।इसका साग बनाया जाता।पूड़ी के संग ख...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
65

"पतंग" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" सेबालकविता♥ पतंग ♥नभ में उड़ती इठलाती है।मुझको पतंग बहुत भाती है।।रंग-बिरंगी चिड़िया जैसी,लहर-लहर लहराती है।।कलाबाजियाँ करती है जब,मुझको बहुत लुभाती है।।इ...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
87

"बाल मिठाई" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" से"बाल मिठाई" मेरे पापा गये हुए थे,परसों नैनीताल।मेरे लिए वहाँ से लाए,वो यह मीठा माल।।खोए से यह बनी हुई है,जो टॉफी का स्वाद जगाती।मीठी-मीठी बॉल लगी हैं,मुझको ब...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
65

"अच्छे लगते बच्चे" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" से"अच्छे लगते बच्चे"बालकविता चंचल-चंचल, मन के सच्चे।सबको अच्छे लगते बच्चे।।कितने प्यारे रंग रंगीले।उपवन के हैं सुमन सजीले।।  भोलेपन से भरमाते हैं।य...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
67

"आँगनबाड़ी के हैं तारे" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" सेबालकविता"आँगनबाड़ी के हैं तारे" आँगन बाड़ी के हैं तारे।बालक हैं  ये प्यारे-प्यारे।। आओ इनका मान करें हम।सुमनों का सम्मान करें हम।। बाल दिवस हम आज मना...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
67

"देशी फ्रिज" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" सेबालकविता"देशी फ्रिज""पानी को ठण्डा रखती है,मिट्टी से है बनी सुराही।बिजली के बिन चलती जाती,देशी फ्रिज होती सुखदायी।।छोटी-बड़ी और दरम्यानी,सजी हुई हैं सड़क कि...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
76

"स्लेट और तख़्ती" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" सेस्लेट और तख़्तीसिसक-सिसक कर स्लेट जी रही,तख्ती ने दम तोड़ दिया है।सुन्दर लेख-सुलेख नहीं है,कलम टाट का छोड़ दिया है।।  दादी कहती एक कहानी,बीत गई सभ्यता पुर...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
72

"खेतों में शहतूत लगाओ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" सेखेतों में शहतूत लगाओकितना सुन्दर और सजीला।खट्टा-मीठा और रसीला।। हरे-सफेद, बैंगनी-काले।छोटे-लम्बे और निराले।।शीतलता को देने वाले।हैं शहतूत बहुत गुण वाले...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
253

"देशी फ्रिज-सुराही" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" सेबालकविता"देशी फ्रिज""पानी को ठण्डा रखती है,मिट्टी से है बनी सुराही।बिजली के बिन चलती जाती,देशी फ्रिज होती सुखदायी।।छोटी-बड़ी और दरम्यानी,सजी हुई हैं सड़क कि...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
74

"घर भर की तुम राजदुलारी" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" सेघर भर की तुम राजदुलारीप्यारी-प्यारी गुड़िया जैसी,बिटिया तुम हो कितनी प्यारी।मोहक है मुस्कान तुम्हारी,घर भर की तुम राजदुलारी।।नये-नये परिधान पहनकर,सबको बह...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
64

"सच्चा भारत" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" सेसच्चा भारतसुन्दर-सुन्दर खेत हमारे।बाग-बगीचे प्यारे-प्यारे।।पर्वत की है छटा निराली।चारों ओर बिछी हरियाली।।छटा अनोखी बिखराता है।।सूरज किरणें फैलाता है।त...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
171

"थाली के बैंगन" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" सेथाली के बैंगन गोल-गोल हैं, रंग बैंगनी,बैंगन नाम हमारा है।सुन्दर-सुन्दर रूप हमारा,सबको लगता प्यारा है।। कुछ होते हैं लम्बे-लम्बे,कुछ होते हैं श्वेत-धवल।क...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
140

"स्वागतगान" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" सेस्वागतगानलगभग 29 वर्ष पूर्व मैंने एक स्वागत गीत लिखा था।इसकी लोक-प्रियता का आभास मुझे तब हुआ, जब खटीमा ही नहीइसके समीपवर्ती क्षेत्र के विद्यालयों में भी इसक...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
57

"अल्मोड़ा की बाल मिठाई" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" सेएक बालकविता"अल्मोड़ा की बाल मिठाई" मेरे पापा गये हुए थे,परसों नैनीताल।मेरे लिए वहाँ से लाए,वो यह मीठा माल।।खोए से यह बनी हुई है,जो टॉफी का स्वाद जगाती।मीठी-...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
65

"मेरी साइकिल" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" सेबालकविता"मेरी साइकिल"मेरी साइकिल कितनी प्यारी।यह है मेरी नई सवारी।।अपनी कक्षा के बच्चों में,फर्स्ट डिवीजन मैंने पाई,खुश होकर तब बाबा जी ने,मुझे साईकिल दिल...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
प्रांजल-प्राची
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