सु-मन (Suman Kapoor)
बावरा मन की पोस्ट्स

साँसों की कैद

कोई बंदिश भी नहीं न कोई बेड़ियाँ हाथों में फिर भी - जाने कितनी साँसों की कैद में जकड़ी है ये जिंदगी ..!!सु-मन ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
बावरा मन
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शब्द से ख़ामोशी तक – अनकहा मन का (१४)

असल में हम अपने ही कहे शब्दों से धोखा खाते हैं और हमारे शब्द हमारी चाह से ।हम सब धोखेबाज़ हैं खुद अपने !!सु-मन ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
बावरा मन
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नज़्मों का इम्तिहान

एक अरसे से कलम ख़ामोश थीऔर लफ्ज़ छुट्टी परइस बरस -नज़्मों के इम्तिहान में 'मन'फेल हो गया ..!!सु-मन...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
बावरा मन
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दीप प्रदीप

मैंने दीया जला कर कर दी है रोशनी ...तुम प्रदीप्त बन   हर लो, मेरा सारा अविश्वास |मेरे आराध्य !आस के दीये में बची रहे नमी सुबह तलक ||सु-मन दीप पर्व मुबारक !!...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
बावरा मन
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गुनगुने दिन

गुनगुने से हैं दिन अब रातें अधठंडीमौसम के लिहाफ में शरद लेने लगी है करवट ||सु-मन ...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
बावरा मन
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आभासी दुनिया का साभासी सच

                               आभासी दुनिया का साभासी सच                                जो दीखता है वो होता नहीं ,जो होता है वो दीखता नहीं..                       ...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
बावरा मन
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शब्द से ख़ामोशी तक – अनकहा मन का (१३)

शाम खामोश होने को है और रात गुफ्तगू करने को आतुर ... इस छत पर काफी शामें ऐसी ही बीत जाती हैं ...आसमां को तकते हुए .... सामने पहाड़ी पर वो पेड़ आवाज लगाते हैं ..कुछ उड़ते परिदों को ..आओ ! बसेरा मिलेगा तुम्हें .....  और पढ़ें
9 माह पूर्व
बावरा मन
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इन्तज़ार का सम्मोहन

और तुम फिरहो जाते हो मुझसे दूरअकारण , निरुद्देश्य ...ये जानकर भीकि आआगे तुम पुनःमेरे ही पास स्वैच्छिक , समर्पित ...सच मानो -हर बार की तरह न पूछूँगी कोई प्रश्नन ही तुम देना कोई अर्जियां कि तुम्हार...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
बावरा मन
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तुम और मैं

अनगिनत प्रयास के बाद भीअब तक'तुम'दूर हो अछूती हो और 'मैं' हर अनचाहे से होकर गुजरता प्रारब्ध ।एक दिन किसी उस पल बिना प्रयास 'तुम'चली आओगीमेरे पास और बाँध दोगी श्वास में एक गाँठ ।तब तु...  और पढ़ें
11 माह पूर्व
बावरा मन
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शब्द से ख़ामोशी तक – अनकहा मन का (१२)

                         दोस्त वह जो जरूरत* पर काम आये ।                         सोच में हूँ कि मैं / हम जरूरत का सामान हैं । जरूरत पड़ी तो उपयोग कर लिया नहीं तो याद भी नहीं आती । ...  और पढ़ें
11 माह पूर्व
बावरा मन
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शब्द से ख़ामोशी तक – अनकहा मन का (११)

                           सुबह और रात के बीच बाट जोहता एक खाली दिन ... इतना खाली कि बहुत कुछ समा लेने के बावजूद भी खाली .... कितने लम्हें ..कितने अहसास ...फिर भी खाली ... सूरज की तपिश से भी अतृप...  और पढ़ें
11 माह पूर्व
बावरा मन
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हे निराकार !

हे निराकार !तू ही प्रमाण , तू ही शाखतू ही निर्वाण , तू ही राख तू ही बरकत , तू ही जमाल तू ही रहमत , तू ही मलालतू ही रहबर , तू ही प्रकाशतू ही तरुबर , तू ही आकाशतू ही जीवन , तू ही आस तू ही सु-मन , तू ही विश्वास !!*...  और पढ़ें
12 माह पूर्व
बावरा मन
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हे ईश्वर !

कर्मों के फल काउपासनाओं के तेज़ का दुख के भोगों का सुख की चाहों का मन के विश्वास का ईश्वर की आराधना का अपनों के साथ का रिश्तों के जुड़ाव का निश्छल प्रार्थनाओं का होता ही होगा कोई मोल ..**शरीर की नश्...  और पढ़ें
12 माह पूर्व
बावरा मन
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शब्द से ख़ामोशी तक – अनकहा मन का (१०)

                                   एक कहानी होती है । जिसमें खूब पात्र होते हैं । एक निश्चित समय में दो पात्रों के बीच वार्तालाप होता है । दो पात्र कोई भी वो दो होतें हैं जो कथानक के...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
बावरा मन
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सुमन की पाती

अप्रैल 2014 की बात है , नवरात्रे चल रहे थे और मेरे छत पर ये गुलाब महक रहे थे | मॉम रोज़ एक फूल देवी माँ को चढ़ाना चाहते थे और मैं इन फूलों से इनके हिस्से की जिंदगी नहीं छीनना चाहती थी और आज भी इन फूलों को ...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
बावरा मन
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शब्द से ख़ामोशी तक – अनकहा मन का (९)

आजकल बहुत सारे शब्द मेरे ज़ेहन में घूमते रहते हैं इतने कि समेट नहीं पा रही हूँ अनगिनत शब्द अंदर जाकर चुपचाप बैठ गए हैं । एक दोस्त की बात याद आ रही है जब कुछ अरसा पहले यूँ ही शब्द मेरे ज़ेहन में कैद ...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
बावरा मन
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वो लड़की ~ 4

वो लड़की अक्सर देखती रहती सूर्य किरणों में उपजे छोटे सुनहरी कणों को हाथ बढ़ा पकड़ लेती दबा कर बंद मुट्ठी में ले आती अपने कमरे में खोल कर मुट्ठी बिखेर देती सुनहरापन :रात, पनीली आँखों में चाँद को भरक...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
बावरा मन
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प्रेम

प्रेम !हर दिन का उजालाहर रात की चाँदनी हर दोपहर की तपिश हर शाम की मदहोशी तुम्हें एक दिन में समेट पाऊंइतनी खुदगर्ज़ नहीं .....मेरे प्रिय !तुम्हें चिन्हित तुम्हारा ये दिन तुम्हें बहुत बहुत मुबारक !!स...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
बावरा मन
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वो लड़की ~ 3

बहुत उदास सी है शाम आज आसमान भीखाली खाली घर की ओर बढ़तेउसके कदमों में है कुछ भारीपन यूँ तो अकसर दबे पाँव ही आती है ये उदासी पर आज न जाने क्यूँ इसकी आहट में है चुभन सी जो उसकी ...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
बावरा मन
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वो लड़की ~2

वो लड़कीसफ़र में जाने से पहलेबतियाती हैआँगन में खिले फूल पत्तों से देती है उन्हें हिदायत हमेशा खिले रहने कीरोज़ छत पर दाना चुगने आई चिड़िया को दे जाती है यूँ ही हर रोज़ आते रहने का न्योताचाहती है व...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
बावरा मन
29

वो लड़की ~ 1

वो लड़कीरोटी सेंकते हुएनहीं मिटने देना चाहती अपने हाथों में लगी नेलपॉलिशचिमटे से पकड़ करगुब्बारे सी फूलती रोटी सहेज कर रख लेती कैसरोल में नहीं माँजना चाहती सिंक में पड़े जूठे बर्तन गुलाबी रंग...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
बावरा मन
30

वो लड़का ~1

वो लड़का सारे दिन के बोझिल पलों को सुला देता है थपकियाँ देकर हर रात अपने बिस्तर में आँख मूंदती बेजान हसरतें जब निढाल हो सो जाती हैं एक कोने में वो उन्हेंलेकरअपनी हथेली में सुबकता है रात भर सुबह ...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
बावरा मन
29

गर्माहट

सुनो ! याद है वो कड़क धूप तपे थे जिसमें हम दोनों रख ली है मैंने संभाल के शरद में ओढेंगे इस गुनगुने मौसम में भर देंगे थोड़ी सी गर्माहट !!सु-मन ...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
बावरा मन
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हायकु

छाये बादलचहका उपवन नेह बरसा !!सु-मन ...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
बावरा मन
29

जिंदगी मुबारक !

रहें ना रहें हम , महका करेंगे बन के कली बन के सबा बागे वफ़ा में ..सर्दियों में क्यारी की शुरुआत आखिर मेहनत रंग ला ही गई |बात कई महीनों पहले की है | हमारे ऑफिस के प्रांगण में सामने की तरफ खाली पड़ी ज...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
बावरा मन
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एक हद तक

एक हद तकजीये जा सकते हैं सब सुखएक हद तक ही सहा जा सकता है कोई दुखसरल सी चाही हुई जिंदगी में मिलती हैं कई उलझने बेहिच बदल देते हैं हम रास्ता मनचाहे को पाने के लिएभूल जाते हैं अक्सरपाने के ...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
बावरा मन
75

मेरे जाने के बाद

मेरे जाने के बादहोती रहेंगी यूँ ही सुबहेंशामें भी गुजरेंगी इसी तरहरातें कभी अलसाई सी स्याह होगींकभी शबनमी चांदनी से भरपूरखिला करेंगे यूँ हीये बेशुमार फूल इस आँगनकमरा यूँ ही सजा रहेगाकुछ मा...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
बावरा मन
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शब्द से ख़ामोशी तक – अनकहा मन का (८) ख़याली दीमक

पिछले 2-3 बरस के सहेज कर रखे सामान को टटोला तो पाया कि वक़्त के साथ-साथ बदलने लगा है सब । उस वक्त के सहेजे इस सामान में फफूंद लगने लग गई है । बहुत बचा के रखा था कि बेशकीमती ये सामान यूँ ही नया न...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
बावरा मन
58

सोच की हद

हर बार सोचती हूँएक हद में सिमट जाऊँकर लूँ अपनी सोच को एक अँधेरी कोठरी में बंद दुनिया की रवायत संग जीने लगूं एक बेनाम जिंदगी बांध अपने पैरों में बेड़ियाँ चल दूँ राह पर उस तरफ जिस तरफ ले जाना चाहे ...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
बावरा मन
58

शब्द से ख़ामोशी तक – अनकहा मन का (७)

                                    खोया कुछ भी नहीं जो पाया था । जो पाया था वो अब तक भीतर है ।उसे खोया ही नहीं जा सकता ।तुम हमेशा खोजते रहते थे भटकते रहते थे यहाँ वहां । सब कुछ तो यह...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
बावरा मन
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