सु-मन (Suman Kapoor)
बावरा मन की पोस्ट्स

अंधा कुआँ सी है जिंदगी

जो होता है , वो दिखता नहीं जो दिखता है , वो होता नहीं एक अंधा कुआँ सी है जिंदगी हर कोई गिरता है , पर संभलता नहीं ।।सु-मन ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
बावरा मन
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जन्मदिवस हिंदी

जन्मदिवस मुबारक प्यारी हिंदीहर रोज हम तुम्हारा उपयोग करें |मिले तुम्हें नई पीढ़ी का साथतुम संग वो दोस्ती का आगाज़ करें |चाहे घर हो या दफ़्तर, बाज़ारहिंदी में सब पढ़ाई लिखाई करें |गुड मॉर्निंग क...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
बावरा मन
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ख्वाहिशों का मयखाना

भर भरखाली होता गया ख्वाहिशों का मयखानाबूँद बूँदअश्क़ होती गयीहसरतों की बारिश !!सु-मन ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
बावरा मन
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और तुम जीत गए

पक्का निश्चय करसाध कर अपना लक्ष्यचले थे इस बार ये कदममंजिल की ओरमन में विश्वास लिएमान ईश्वर को पालनहारकर दिया था अर्पित खुद कोउस दाता के द्वारमेहनत का ध्येय लिएकर दिए दिन रात एकत्याग दिए थे ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
बावरा मन
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बिछड़न

आज ...निकाल कर सूखे पत्तों को रख दिया अलग करके..बिछड़न हिस्सों में बँट कर जीना सीखा देती है !!सु-मन ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
बावरा मन
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रेशम सी जिंदगी

रेशम सी जिंदगी में नीम से कड़वे रास्तेधुँधली सी हैं मंजिलें अनचाहे कई हादसे !!सु-मन...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
बावरा मन
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शब्द से ख़ामोशी तक – अनकहा मन का (१७)

..ज़ख्मों को कुरेदती हूँ तो दर्द सकून देता है !!सु-मन ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
बावरा मन
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शब्द से ख़ामोशी तक – अनकहा मन का (१६)

छलता है 'मन'यूँ ही मुझको बारहा लफ्ज़ों से फिर बेरुखी छलकने लगती है !!सु-मन ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
बावरा मन
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ऐ साकी !

ऐ साकी ! पिला एक घूँट कि जी लूँ ज़रा बेअसर साँस में जिंदगी की कुछ हरारत हो !!सु-मन ...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
बावरा मन
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जिंदगी

ठक ठक ...कौन ? अंदर से आवाज़ आई |मैं \ बाहर से उत्तर आया |मैं !! मैं कौन ?जिंदगी .... , उसने जवाब दिया |अच्छा ! किसकी ? \ अंदर से सवाल |तुम्हारी \ भूल गई मुझे ... | इसी बीच मन के अधखुले दरवाजे को लांघ कर उसने भीतर प्र...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
बावरा मन
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शब्द से ख़ामोशी तक – अनकहा मन का (१५)

तमाम खुशियों के बावजूद गम हरा है अभीजिंदगी की सूखी सतह पर नमी बाकी है शायद ।।सु-मन ...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
बावरा मन
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साँसों की कैद

कोई बंदिश भी नहीं न कोई बेड़ियाँ हाथों में फिर भी - जाने कितनी साँसों की कैद में जकड़ी है ये जिंदगी ..!!सु-मन ...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
बावरा मन
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शब्द से ख़ामोशी तक – अनकहा मन का (१४)

असल में हम अपने ही कहे शब्दों से धोखा खाते हैं और हमारे शब्द हमारी चाह से ।हम सब धोखेबाज़ हैं खुद अपने !!सु-मन ...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
बावरा मन
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नज़्मों का इम्तिहान

एक अरसे से कलम ख़ामोश थीऔर लफ्ज़ छुट्टी परइस बरस -नज़्मों के इम्तिहान में 'मन'फेल हो गया ..!!सु-मन...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
बावरा मन
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दीप प्रदीप

मैंने दीया जला कर कर दी है रोशनी ...तुम प्रदीप्त बन   हर लो, मेरा सारा अविश्वास |मेरे आराध्य !आस के दीये में बची रहे नमी सुबह तलक ||सु-मन दीप पर्व मुबारक !!...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
बावरा मन
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गुनगुने दिन

गुनगुने से हैं दिन अब रातें अधठंडीमौसम के लिहाफ में शरद लेने लगी है करवट ||सु-मन ...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
बावरा मन
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आभासी दुनिया का साभासी सच

                               आभासी दुनिया का साभासी सच                                जो दीखता है वो होता नहीं ,जो होता है वो दीखता नहीं..                       ...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
बावरा मन
16

शब्द से ख़ामोशी तक – अनकहा मन का (१३)

शाम खामोश होने को है और रात गुफ्तगू करने को आतुर ... इस छत पर काफी शामें ऐसी ही बीत जाती हैं ...आसमां को तकते हुए .... सामने पहाड़ी पर वो पेड़ आवाज लगाते हैं ..कुछ उड़ते परिदों को ..आओ ! बसेरा मिलेगा तुम्हें .....  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
बावरा मन
16

इन्तज़ार का सम्मोहन

और तुम फिरहो जाते हो मुझसे दूरअकारण , निरुद्देश्य ...ये जानकर भीकि आआगे तुम पुनःमेरे ही पास स्वैच्छिक , समर्पित ...सच मानो -हर बार की तरह न पूछूँगी कोई प्रश्नन ही तुम देना कोई अर्जियां कि तुम्हार...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
बावरा मन
21

तुम और मैं

अनगिनत प्रयास के बाद भीअब तक'तुम'दूर हो अछूती हो और 'मैं' हर अनचाहे से होकर गुजरता प्रारब्ध ।एक दिन किसी उस पल बिना प्रयास 'तुम'चली आओगीमेरे पास और बाँध दोगी श्वास में एक गाँठ ।तब तु...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
बावरा मन
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शब्द से ख़ामोशी तक – अनकहा मन का (१२)

                         दोस्त वह जो जरूरत* पर काम आये ।                         सोच में हूँ कि मैं / हम जरूरत का सामान हैं । जरूरत पड़ी तो उपयोग कर लिया नहीं तो याद भी नहीं आती । ...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
बावरा मन
20

शब्द से ख़ामोशी तक – अनकहा मन का (११)

                           सुबह और रात के बीच बाट जोहता एक खाली दिन ... इतना खाली कि बहुत कुछ समा लेने के बावजूद भी खाली .... कितने लम्हें ..कितने अहसास ...फिर भी खाली ... सूरज की तपिश से भी अतृप...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
बावरा मन
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हे निराकार !

हे निराकार !तू ही प्रमाण , तू ही शाखतू ही निर्वाण , तू ही राख तू ही बरकत , तू ही जमाल तू ही रहमत , तू ही मलालतू ही रहबर , तू ही प्रकाशतू ही तरुबर , तू ही आकाशतू ही जीवन , तू ही आस तू ही सु-मन , तू ही विश्वास !!*...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
बावरा मन
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हे ईश्वर !

कर्मों के फल काउपासनाओं के तेज़ का दुख के भोगों का सुख की चाहों का मन के विश्वास का ईश्वर की आराधना का अपनों के साथ का रिश्तों के जुड़ाव का निश्छल प्रार्थनाओं का होता ही होगा कोई मोल ..**शरीर की नश्...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
बावरा मन
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शब्द से ख़ामोशी तक – अनकहा मन का (१०)

                                   एक कहानी होती है । जिसमें खूब पात्र होते हैं । एक निश्चित समय में दो पात्रों के बीच वार्तालाप होता है । दो पात्र कोई भी वो दो होतें हैं जो कथानक के...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
बावरा मन
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सुमन की पाती

अप्रैल 2014 की बात है , नवरात्रे चल रहे थे और मेरे छत पर ये गुलाब महक रहे थे | मॉम रोज़ एक फूल देवी माँ को चढ़ाना चाहते थे और मैं इन फूलों से इनके हिस्से की जिंदगी नहीं छीनना चाहती थी और आज भी इन फूलों को ...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
बावरा मन
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शब्द से ख़ामोशी तक – अनकहा मन का (९)

आजकल बहुत सारे शब्द मेरे ज़ेहन में घूमते रहते हैं इतने कि समेट नहीं पा रही हूँ अनगिनत शब्द अंदर जाकर चुपचाप बैठ गए हैं । एक दोस्त की बात याद आ रही है जब कुछ अरसा पहले यूँ ही शब्द मेरे ज़ेहन में कैद ...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
बावरा मन
27

वो लड़की ~ 4

वो लड़की अक्सर देखती रहती सूर्य किरणों में उपजे छोटे सुनहरी कणों को हाथ बढ़ा पकड़ लेती दबा कर बंद मुट्ठी में ले आती अपने कमरे में खोल कर मुट्ठी बिखेर देती सुनहरापन :रात, पनीली आँखों में चाँद को भरक...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
बावरा मन
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प्रेम

प्रेम !हर दिन का उजालाहर रात की चाँदनी हर दोपहर की तपिश हर शाम की मदहोशी तुम्हें एक दिन में समेट पाऊंइतनी खुदगर्ज़ नहीं .....मेरे प्रिय !तुम्हें चिन्हित तुम्हारा ये दिन तुम्हें बहुत बहुत मुबारक !!स...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
बावरा मन
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वो लड़की ~ 3

बहुत उदास सी है शाम आज आसमान भीखाली खाली घर की ओर बढ़तेउसके कदमों में है कुछ भारीपन यूँ तो अकसर दबे पाँव ही आती है ये उदासी पर आज न जाने क्यूँ इसकी आहट में है चुभन सी जो उसकी ...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
बावरा मन
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