सु-मन (Suman Kapoor)
अर्पित ‘सुमन’ की पोस्ट्स

शबनमी ख्वाब

देर रात चाँद सोता रहा पलकों तलेचाँदनी तेरे ख्वाब को शबनमी करती रही !!सु-मन ...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
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तेरा अश्क़ मेरा दामन

गिरा तेरी आँख से इक क़तरा अश्क कामेरा दामन यूँ सहरा से सागर बन गया ।।सु-मन ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
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ख़लिश

एक ख़लिश सी पसरी है हर तरफ हरसू नुमाइश-ए-ज़ीस्त से इक धूल उतरती जाती है !!सु-मन ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
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तुम और मैं -९

मैंने दीया जला कर कर दी है रोशनी ...तुम प्रदीप्त बन हर लो, मेरा सारा अविश्वास |मेरे आराध्य !आस के दीये में बची रहे नमी सुबह तलक !!सु-मन ...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
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हुनर

समेट लेना खुद को , अपने दायरे में सिखा देता है ये हुनर , वक़्त आहिस्ता आहिस्ता !!सु-मन ...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
17

रूबरू

तुझसे रूबरू न हो पाऊँ , न सही तेरी धड़कन अब मुझसे होकर गुजरती है !!सु-मन ...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
20

शापित मंजिलें

... स्थितियाँ बदल देती हैं राह जिंदगी की ...... मंजिलेंअक्सर अकेली रह शापित हो जाया करती हैं !!सु-मन ...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
27

खाली हसरतें

खाली हसरतों की होती है मियाद बस इतनी ....भीतर के भरेपन में होती है खाली जाम-ए-पनाह जितनी.. !!सु-मन ...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
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बस यूँ ही ~ 2

मैं जिंदा तो हूँ , जिंदगी नहीं है मुझमें फक़त साँस चल रही है ज़िस्म फ़ना होने तक !!सु-मन ...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
37

बस यूँ ही ~ 1

झील की चादर पर पड़ गई हैं सिलवटें आज फिर, मस्त पवन उससे मिलने आया है !!सु-मन ...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
28

तुम और मैं -८

.....तुम !स्याह लफ्ज़ों में लिपटे ख़यालात होऔर मैं...उन ख़यालों की ताबीर |एक एहसास की नज़्मआज भी ...जिन्दा है तुम्हारे मेरे बीच !!सु-मन ...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
26

तुम और मैं - ७

मेरी पेशानी पर तुम्हारे एहसास के दस्खतआज भी तुम्हारे हक़ की हाज़री देते हैं ..इश्क़ की जमाबंदी में तुम्हारे नाम की मुहर काबिज़ है !!सु-मन ...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
39

तुम और मैं -६

तुम अनलिखी कविताओं का केंद्र बिंदु हो और मैं लिखी इबारतों से बची स्याही |मेरे अशेष ! स्याह हो रीत लो मुझको ||सु-मन ...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
41

तुम और मैं -५

जानती हूँ तुम नहीं हो ..ख़ामोशी तुम तक पहुँचने का मेरा पसंदीदा एकमात्र विकल्प है !!सु-मन ...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
31

तुम और मैं -४

रिश्ते के प्रति प्रतिबद्धता मेरा निर्णय है और निष्कासन तुम्हारी अपनी चाह | सोच अलहदा होकर भी एक सी हैं ..बे-हद और बेलगाम |हम लाईलाज तमन्नाओं से अभिशप्त हैं !!सु-मन ...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
36

तुम और मैं -३

        मेरे पास हज़ारों ख़्वाहिशें हैं तुम तक पहुँचने की और और तुम्हारे पास बहुत सारे गिले जुदा           होने के |        चलो हिसाब बराबर हुआ ..गिला ख़्वाहिशों की नमी तले आबाद रहे !!    ...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
34

हौसले की लौ

एक दिया रौशन कर देता है जिन्दगी हौसले की लौ को जब जलाता है वो !!सु-मन दीप पर्व मुबारक !!...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
34

तुम और मैं -२

मेरी धड़कन मेरे होने का प्रमाण है और तुम धड़कन की गति |प्रमाणित है कि जिंदगी चल रही है !!सु-मन ...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
35

तुम और मैं -१

तुम बन जाना मेरी अंतिम साँस .......मैं तुम संग मृत्यु जी लूँगी !!सु-मन ...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
36

उम्मीद

चल उम्मीद के तकिये पर सर रख कर सोयें ख़्वाबों में बोयें कुछ जिन्दगी क्या मालूम सुबह जब आँख खुले हर उम्मीद हो जाये हरी भरी !!सु-मन ...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
34

दर्द

मेरे दर्द की खबर भी नहीं हुई जमाने को दर्द मुझको और मैं दर्द को यूँ जीता रहा !! सु-मन ...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
37

आस भरी तसल्लियाँ

बाँध लेते हैं हम कलाई में अपनी कुछ हिफाज़तें जीने की खातिर मिल ही जाती है कुछ इस तरह हमारी चाहों कोआस भरी तसल्लियाँ !!सु-मन ...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
38

ख़ामोशी

जब कभी ....मैं नहीं कह पाती ....तुमसे अपने मन की बात मुठ्ठी भर ख़ामोशी भेज देती हूँ तुम्हें ख़ामोशी भी बोलती है सुन सको तो सुनना !!सु-मन ...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
47

ख़्वाब और ख़याल

अलसुबह , पलकों पर एक ख़्वाब ने दम तोड़ दिया ..रात तलक , ख़यालज़नाजे से उसके फूल चुनते रहे !!सु-मन ...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
53

झुलस रहा मेरा वतन

झुलस रहा है देखो , हर ओर मेरा वतन सेंक रहा चिता कोई , अपने ही हमवतन की !!सु-मन ...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
42

बुलबुलों से ख़्वाब

बुलबुलों से ख़्वाबों को दे दूँ पल भर की उड़ान जीने दूँ उनको,उनके हिस्से की कुछ जिन्दगी !!सु-मन ...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
37

हर दफ़ा

हर दफ़ा भूल जाते हो तुम अपनी कही हर बात मैं सोच कर इसे पहली दफ़ा हर बार भूल जाती हूँ !!सु-मन ...  और पढ़ें
2 वर्ष पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
47

पहचान

आईना रोज़ ढूँढता है मुझमें मेरी पहचान मैं देख कई अक्स अपने सोच में पड़ जाता हूँ !!सु-मन ...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
58

रिश्ते की गर्माहट

.....कुछ ख़याल बुन रही हूँ मैं तुम्हारे एहसास के हर फंदे पर डाल रही हूँ एक बेजोड़ बुनाई सुनो ! इस दफ़ा जब दिसम्बर में आओगे न तुम रेशों से इन लफ्ज़ों को सिल देना अपने स्पर्श से  ...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
46

बोझ धरा का

बढ़ रहा धरा के सीने पर बोझ शायद कि दिल इसका भी अब ज़ोर से धड़कने लगा है !!सु-मन ...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
अर्पित ‘सुमन’
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