डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
आपका ब्लॉग की पोस्ट्स

अस्तित्व

क्या यही संसार है?क्या यही जीवन है?झुठलाना चाहती हूंइस सत्य कोपाना चाहती हूंउस छल कोजो भटका देता हैछोटी सी नौका कोइस विस्तृत जलराशि मेंडूब जाती है नौकाखो देती है अपनाअस्तित्व......!भुला देता है ...  और पढ़ें
1 दिन पूर्व
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एक ग़ज़ल : कौन बेदाग़ है---

एक ग़ज़लकौन बेदाग़ है  दाग़-ए- दामन नहीं ?जिन्दगी में जिसे कोई उलझन नहीं ?हर जगह पे हूँ मैं उसकी ज़ेर-ए-नज़रमैं छुपूँ तो कहाँ ? कोई चिलमन नहींवो गले क्या मिले लूट कर चल दिएलोग अपने ही थे कोई दुश्मन नहीं...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
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चन्द माहिया : क़िस्त 54

चन्द माहिया  :क़िस्त 54:1:ये कैसी माया हैतन तो है जग मेंमन तुझ में समाया है:2:जब  तेरे दर आयाहर चेहरा मुझ कोमासूम नज़र आया:3:ये कैसा रिश्ता हैदेखा कब उसकोदिल रमता रहता है:4:बेचैन बहुत है दिलकब तक मैं ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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चिड़िया: क्षितिज

चिड़िया: क्षितिज: जहाँ मिल रहे गगन धरा मैं वहीं तुमसे मिलूँगी, अब यही तुम जान लेना राह एकाकी चलूँगी । ना कहूँगी फ़िर कभी कि तुम बढ़ाओ हाथ अपना, ......  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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"हिन्दी" (अतुल बालाघाटी)

दया सभ्यता प्रेम समाहित जिसके बावन बरनों मेंशरणागत होती भाषाएं जिसके पावन चरनों मेंजिसने दो सौ साल सही है अंग्रेजों की दमनाईधीरज फिर भी धारे रक्खा त्याग नहीं दी गुरताईतुमको अब तक भान नहीं ह...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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एक ग़ज़ल : झूठ का जब धुआँ-----

एक ग़ज़ल :झूठ का जब धुआँ ये घना हो गयासच  यहाँ बोलना अब मना हो गयाआईना को ही फ़र्ज़ी बताने लगेआइना से कभी सामना हो गयारहबरी भी तिजारत हुई आजकलजिसका मक़सद ही बस लूटना हो गयाजिसको देखा नहीं जिसको जान...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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अमन चाँदपुरी के दोहे

दोहे ~दोहा-दोहा   ग्रंथ-सा,  भाव-बिंब   हों  खास।पूर्ण करो माँ शारदे, निज बालक की आस।।संगत सच्चे साधु की, 'अमन'बड़ी अनमोल।बिन पोथी, बिन ग्रन्थ के, ज्ञान चक्षु दे खोल।।मुँह  देखें  आशीष...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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चन्द माहिया : क़िस्त 53

चन्द माहिया  :क़िस्त 53:1:सब क़िस्मत की बातेंकुछ को ग़म ही ग़मकुछ को बस सौग़ातें:2:कब किसने है मानाआज नहीं तो कलसब छोड़ के है जाना:3:कब तक भागूँ मन सेदेख रहा कोईछुप छुप के चिलमन से:4:कब दुख ही दुख रहतावक़्त क...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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एक ग़ज़ल

गजलआँखमेरीभलेअश्कसेनमनहींदर्दमेरामगरआपसे  कमनहींयेचिराग-ए-मुहब्बतबुझादेमेराआँधियोंमेअभीतकहैवोदमनहींइन्कलाबीहवाहोअगरपुरअसरकौनकहताहैबदलेगामौसमनहींपेशवोभीखिराज़-ए-अक़ीदतकिए...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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एक व्यंग्य गीत : नेता बन जाओगे प्यारे--

"छुट-भईए"नेताओं को समर्पित ----"एक व्यंग्य गीत :- नेता बन जाओगे प्यारे-----😀😀😀😀😀पढ़-लिख कर भी गदहों जैसा व्यस्त रहोगेनेता बन जाओगे ,प्यारे ! मस्त रहोगेकौए ,हंस,बटेर आ गए हैं कोटर मेंभगवत रूप दिखाई दे...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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चन्द माहिया [सावन पे] : क़िस्त 52

चन्द माहिया  [सावन पे ] : क़िस्त 52[नोट : मित्रो ! विगत सप्ताह सावन पे चन्द माहिए [क़िस्त 51] प्रस्तुत किया थाउसी क्रम में -दूसरी और आखिरी कड़ी प्रस्तुत कर रहा हूँ--]:1:जब प्यार भरे बादलसावन में बरसेभींगे त...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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चन्द माहिया सावन पे : क़िस्त 51

चन्द माहिया  [सावन पे ] : क़िस्त 51:1:सावन की घटा कालीयाद दिलाती हैवो शाम जो मतवाली:2:सावन के वो झूलेझूले थे हम तुमकैसे कोई भूले:3:सावन की फुहारों सेजलता है तन-मनजैसे अंगारों से;4:आएगी कब गोरी ?पूछ रही ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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एक ग़ज़ल : ये आँधी,ये तूफ़ाँ--

एक ग़ज़ल : ये आँधी ,ये तूफ़ाँ--ये आँधी ,ये तूफ़ाँ ,मुख़ालिफ़ हवाएँभरोसा रखें, ख़ुद में हिम्मत जगायेंकहाँ तक चलेंगे लकीरों पे कब तकअलग राह ख़ुद की चलो हम बनाएँबहुत दूर तक आ गए साथ चल करये मुमकिन नहीं अब कि ह...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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चन्द माहिया : क़िस्त 50

चन्द माहिया : क़िस्त 501पल जो भी गुज़र जाताछोड़ के कुछ यादेंफिर लौट के कब आता ?2होता भी अयाँ कैसेदिल तो ज़ख़्मी हैकहती भी ज़ुबाँ कैसे ?3 तुम ने मुँह फेरा हैटूट गए सपनेदिन में ही अँधेरा है4शोलों को भड़काना...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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Laxmirangam: बात कहनी है...

Laxmirangam: बात कहनी है...: बा त कहनी  है. तुमसे अब बात यही कहनी है  कि तुमसे बात नहीं करनी है. जुबां से मैं भी तुमसे कुछ न कहूँ न मुख से तुम भी मुझस......  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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कविता: उपदेशों की गंगा

कविता: उपदेशों की गंगासारांश:हींग      लगे  ना    फिटकरी,            रंग       आ     जावे,     चोखा।उपदेश  दे     कर   जग    में,   &...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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चन्द माहिया :क़िस्त 49

चन्द माहिया : क़िस्त 49:1:ये इश्क़ है जान-ए-जांतुम ने क्या समझाये राह बड़ी आसां ?:2:ख़ामोश निगाहें भीकहती रहती हैंकुछ मन की व्यथायें भी:3:कुछ ग़म की सौगातेंजब से गए हो तुमआँखों में कटी रातें:4:वो जाने  किध...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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कविता: "बदरा की आत्मकथा"

कविता: बदराकीआत्मकथासारांश:सभी     इस      बात   का,               ध्यान         रखना,     ज़्यादा। जब      भी    बरसे   बदरा,           ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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कविता: शब्द की हुँकार

कविता: शब्द की हुँकारसारांश:कभी कभी ख़ामोश हो जाता,     शब्द।नजरें     और  चेहरे  से   तब,             पढा              जाता,     शब्द।संभाल...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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चन्द माहिया : क़िस्त 48

चन्द माहिया  : क़िस्त 48:1:क्यों दुख से घबराएधीरज रख मनवामौसम है बदल जाए:2:तलवारों पर भारीएक कलम मेरीऔर इसकी खुद्दारी:3:सुख-दुख  जाए आएसुख ही कहाँ ठहराजो दुख ही ठहर जाए:4:तेरी नीली आँखेंख़्वाबों को ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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Laxmirangam: राष्ट्रहित - खोटा सिक्का.

Laxmirangam: राष्ट्रहित - खोटा सिक्का.: राष्ट्रहित अनुष्का शर्मा ने एहरान को डाँट लगाई कि वह कार से सड़क पर कचरा फेंक रहा था. भले ही लोग यह सोचें कि उसने सफाई वालंटीयर होन......  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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चन्द माहिया : क़िस्त 47

चन्द माहिया : क़िस्त 47:1:सब साफ़ दिखे मन सेधूल हटा पहलेइस मन के दरपन से:2:अब इश्क़ नुमाई क्यादिल से तुम्हे चाहाहर रोज़ गवाही क्या:3:मरने के ठिकाने सौदुनिया में फिर भीजीने के बहाने सौ:4:क्या ढूँढ रहा ,पगल...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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4

Laxmirangam: राष्ट्रहित - खोटा सिक्का.

Laxmirangam: राष्ट्रहित - खोटा सिक्का.: राष्ट्रहित अनुष्का शर्मा ने एहरान को डाँट लगाई कि वह कार से सड़क पर कचरा फेंक रहा था. भले ही लोग यह सोचें कि उसने सफाई वालंटीयर होन......  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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एक व्यंग्य : एक लघु चिन्तन देश हित में----

एक लघु चिन्तन : --"देश हित में"जिन्हें घोटाला करना है वो घोटाला करेंगे---जिन्हें लार टपकाना है वो लार टपकायेगें---जिन्हें विरोध करना है वो विरोध करेंगे--- सब अपना अपना काम करेगे ।ख़ुमार बाराबंकी साह...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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चन्द माहिया :क़िस्त 45

चन्द माहिया : क़िस्त 45        :1:सब ग़म के भँवर में हैंकौन किसे पूछेसब अपने सफ़र में हैं;2:अपना ही भला देखादेखी कब मैनेअपनी लक्षमन रेखा:3:माया की नगरी मेंबाँधोंगे कब तकइस धूप को गठरी में:4:होठों पे त...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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चिड़िया: नशा - एक जहर

चिड़िया: नशा - एक जहर: नशा - एक जहर नशे की राह में कई गुमराह हो रहे, ये नौनिहाल देश के तबाह हो रहे । कहता है कोई पी के भूल जाएगा वो गम, कहता है कोई छोड़ द......  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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