डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
आपका ब्लॉग की पोस्ट्स

हेमन्त ऋतु अपने यौवन पर---डा श्याम गुप्त

         हेमन्त ऋतु अपने यौवन पर  है , रात्रि- समारोहों आदि में ठिठुरन सेबचने के लिए  अलाव जलाए जाने  का क्रम प्रारम्भ हो चला है | प्रस्तुत है एकठिठुरती हुई रचना .....        &...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
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एक व्यंग्य : धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे---

एक व्यंग्य : धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे---धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सव:मामका: पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजयधॄष्टराष्ट्र उवाच -- हे संजय ! सुना है मेरे ’ भारत’ भूमि पर 2019 में ’महाभा...  और पढ़ें
2 दिन पूर्व
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एक व्यंग्य : आँख दिखाना-----

एक व्यंग्य : आँख दिखाना--आज उन्होने फिर आँख दिखाईऔर आँख के डा0 ने अपनी व्यथा सुनाई--"पाठक जी !यहाँ जो मरीज़ आता है ’आँख दिखाता है " - फीस माँगने पर ’आँख दिखाता है ’। क्या मुसीबत है ---।--"यह समस्या मात्र ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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मेरी सद्य प्रकाशित ग़ज़ल संग्रह------पीर ज़माने की -----डा श्याम गुप्त ---

डा श्याम गुप्त की  सद्य प्रकाशित ग़ज़ल संग्रह------पीर ज़माने की -----अनुशंसा         महाकवि डा श्यामगुप्त का नया ग़ज़ल-संग्रह ‘पीर ज़माने की’प्रकाशित होरहा है जिसमें उन्होंने उनके मन-लुभाव...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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एक ग़ज़ल : लोग क्या क्या नहीं --

एक ग़ज़ल : लोग क्या क्या नहीं --लोग क्या क्या नहीं कहा करतेजब कभी तुमसे हम मिला करतेइश्क़ क्या है ? फ़रेब खा कर भीबारहा इश्क़ की दुआ करतेज़िन्दगी क्या तुम्हे शिकायत हैकब नहीं तुम से हम वफ़ा करतेदर्द अपन...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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Laxmirangam: जिंदगी का सफर

Laxmirangam: जिंदगी का सफर: जिंदगी का सफर आलीशान तो नहीं , पर था शानदार, वो छोटा   सा मकान, उसमें खिड़कियाँ भी थे, दरवाजे भी थे और रोशनदान भी, पर कभी ......  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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एक ग़ज़ल : इधर आना नहीं ज़ाहिद--

एक ग़ज़ल : इधर आना नहीं ज़ाहिदइधर आना नहीं ज़ाहिद , इधर रिन्दों की बस्ती हैतुम्हारी कौन सुनता है ,यहाँ अपनी ही मस्ती  हैभले हैं या बुरे हैं हम ,कि जो भी हैं ,या जैसे भीहमारी अपनी दुनिया है हमारी अपनी ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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एक ग़ज़ल : आज इतनी मिली है--

एक ग़ज़ल : आज इतनी मिली है--आज इतनी मिली है  ख़ुशी आप सेदिल मिला तो मिली ज़िन्दगी आप सेतीरगी राह-ए-उल्फ़त पे तारी न होछन के आती रहे रोशनी  आप सेबात मेरी भी शामिल कहीं न कहींजो कहानी सुनी आप की आप सेरा...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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महात्मा गांधी के आदर्शों से प्रभावित रहा पद्मश्री श्यामलाल का जीवन

छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कवि व पत्रकार स्वर्गीय श्यामलाल चतुर्वेदी का 7 दिसंबर 2018 की सुबह बिलासपुर स्थित एक निजी चिकित्सालय में इलाज के दौरान निधन हो गया। वह 92 वर्ष के थे। उनका जीवन महात्मा गांधी के ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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हानिकारक पटाखों के उत्पादन और बिक्री पर लगे रोक

आजकल पटाखे फोड़ना ‘दबंग’ संस्कृति वाले लोगों के बीच खुशी का इजहार करने का फैशन बन गया है। शायद उन्हें नहीं पता कि इन पटाखों के फोड़ने से किस कदर प्रदूषण फैल रहा है और हमारी जलवायु जहरीली होती जा ...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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एक व्यंग्य : सम्मान कर लो---

एक लघु व्यथा : सम्मान करा लो---जाड़े की गुनगुनी धूप । गरम चाय की पहली चुस्की --कि मिश्रा जी चार आदमियों के साथ आ धमके।[जो पाठक गण    ’मिश्रा’ जी से परिचित नहीं है उन्हे बता दूँ कि मिश्रा जी मेरे वो&n...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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चन्द माहिया : क़िस्त 56

चन्द माहिया : क़िस्त 521जब जब घिरते बादलप्यासी धरती क्योंहोने लगती पागल ?:2:भूले से कभी आतेमेरी दुनिया मेंरिश्ता तो निभा जाते:3:कुछ मन की उलझन हैधुँधला है जब तकयह मन का दरपन है:4:जब छोड़ के जाना थाक्यो...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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एक ग़ज़ल : वक़्त सब एक सा नहीं---

एक ग़ज़ल :वक़्त सब एक सा  नहीं होतारंज-ओ-ग़म देरपा नहीं होताआदमी है,गुनाह  लाज़िम हैआदमी तो ख़ुदा  नहीं  होताएक ही रास्ते से जाना  हैऔर फिर लौटना नहीं होताकिस ज़माने की बात करते होकौन अब बेवफ़ा न...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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Laxmirangam: अतिथि अपने घर के

Laxmirangam: अतिथि अपने घर के: अतिथि अपने घर के बुजुर्ग अम्मा और बाबूजी साथ हैं,  उन्हे सेवा की जरूरत है, घर में एक कमरा उनके लिए ही है  और दूसरा हमारे पा......  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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एक ग़ज़ल : एक समन्दर मेरे अन्दर---

एक ग़ज़ल : एक समन्दर ,मेरे अन्दर...एक  समन्दर ,  मेरे  अन्दर शोर-ए-तलातुम बाहर भीतरएक तेरा ग़म  पहले   से हीऔर ज़माने का ग़म उस परतेरे होने का ये तसव्वुरतेरे होने से है बरतर चाहे जितना दूर रहूँ&nbs...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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ग़ज़ल : हमें मालूम है संसद में फिर ---

ग़ज़ल  : हमें मालूम है संसद में फिर ---हमें मालूम है संसद में कल फिर क्या हुआ होगाकि हर मुद्दा सियासी ’वोट’ पर  तौला  गया होगावो,जिनके थे मकाँ वातानुकूलित संग मरमर  केहमारी झोपड़ी के  नाम हंग...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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आंसुओं को पनाह नहीं मिलती!

तोहमतें हजार मिलती हैं,नफरतें हर बार मिलती हैं,टूट कर बिखरने लगता है दिल,आंखें जार-जार रोती हैं,देख कर भी अनदेखा कर देते हैं लोग,आंसुओं को पनाह नहीं मिलती।।मुफलिसी के आलम में गुजरती जिंदगी,सपन...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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