"लिंक-लिक्खाड़" की पोस्ट्स

रविकर के कुछ विशेष दोहे-

रंगमंच पर दो जमा, रविकर ऐसा रंग। अश्रु बहे, पर्दा गिरे, ताकि तालियों संग।।रस्सी जैसी जिंदगी, तने तने हालात |एक सिरे पे ख्वाहिशें, दूजे पे औकात ||धत तेरे की री सुबह, तुझ पर कितने पाप।ख्वाब दर्जनो...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
3

चित्र-विचित्र

शुभ अवसर देता सदा, सूर्योदय रक्ताभ।हो प्रसन्न सूर्यास्त यदि, उठा सके तुम लाभ।।रविकर उफनाती नदी, उफनाता सद्-प्यार।कच्चा घट लेकर करे, वो वैतरणी पार।।सूर्य उगा प्रेमी मिले, आलिंगन मजबूत।अस्ता...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
2

मेरे गुरु जी : डॉ रूपचंद शास्त्री मयंक

ड्राफ्ट दोहा दुर्बल शाखा वृक्ष की, पर "गुरु-पर"पर नाज | कभी नहीं नीचे गिरे, उड़े खूब परवाज ||  कुछ तो गुरु में ख़ास है, ईर्ष्या करते आम | वृक्ष देख फलदार वे, लेते पत्थर थाम ||  कुण्डलियाँ ...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
10

दोहे,

बत्ती कली सुबुद्धि जब, गुल हो जाय हुजूर।चोर भ्रमर दीवानगी, मौज करें भरपूर।।कलियों के सौंदर्य का, करे मधुप गुणगान।गुल बनते ही वह कली, करे कैद ले जान।तेज छात्र मैं मैथ का, करना कठिन प्रपोज़।तुम ह...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
3

चमत्कार हो कथ्य में, हो दोहे में धार-

उधर तमन्ना रो उठी, इधर सिसकती पीर।कहाँ करे फरियाद फिर, रविकर अधर अधीर।।लगी "महान गरीयसी", सोच महानगरीय।किन्तु महानगरीय दिल, की हालत दयनीय।।उछल-उछल अट्टालिका, ले शहरों को घेर।वायु-अग्नि-क्षित...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
4

बुझी-बुझी आँखे लिए, ताके दुर्ग बुजुर्ग-

सह सकता सारे सितम, सुन सम्पूरक स्नेह।किन्तु कृपा-करुणा-दया, सह न सके यह देह।।इंद्रजाल पर भी किया, जो कल तक विश्वास।उसे हकीकत भी नहीं, अब आती है रास।।हौले हौले हौसले, हों प्रियतम के पस्त।हो ली हो...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
12

असफलता बोती रहे, नित्य सफलता बीज-

शुभ अवसर देता सदा, सूर्योदय रक्ताभ।हो प्रसन्न सूर्यास्त यदि, उठा सके तुम लाभ।।असफलता बोती रहे, नित्य सफलता बीज।उगे बढ़े निश्चय फले, रे रविकर मत खीज।।रविकर इच्छा स्वप्न का, यूँ मत करना खून।बल्...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
13

आध्यात्म

अदालत में गवाही हित निवेदन दोस्त ठुकराया।रहे चौबीस घण्टे जो, हमेशा साथ हमसाया।सुबह जो रोज मिलता था, अदालत तक गया लेकिनवहीं वह द्वार से लौटा, समोसा फाफड़ा खाया।बहुत कम भेंट होती थी, रहा इक दोस्त...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
12

हरिगीतिका छंद

कैलाश पति त्रिपुरारि भोलेनाथ भीमेश्वर नमः।नटराज गोरापति जटाधारी किरातेश्वर नमः।जागेश बैजूनाथ पशुपति सोम-नागेश्वर नमः।भूतेश त्रिपुनाशक नमः भद्रेश रामेश्वर नमः।।...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
9

बिन डगमग करते दिखे, दो डग मग में कर्म

पानी मथने से नहीं, निकले घी श्रीमान |साधक-साधन-संक्रिया, ले सम्यक सामान ||सत्य बसे मस्तिष्क में, होंठों पर मुस्कान।दिल में बसे पवित्रता, तो जीवन आसान।।खड्ग तीर चाकू चले, बरछी चले कटार।कौन घाव गह...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
12

सारे भोंपू बेंच दे, यदि यह हिंदुस्तान-

मुल्क सुपर पावर बने, जनगणमन धनवान।सारे भोंपू बेंच दे, यदि यह हिंदुस्तान।|करे आत्महत्या कृषक, दे किस्मत को दोष।असली दोषी मस्त क्यों, क्यों विपक्ष में रोष।।रस्सी रिश्ते एक से, अधिक ऐंठ उलझाय।ह...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
12

फ़ायलुन × 4

मैंने* तुझसे कहा, तूने* मुझसे कहा।तू तो* समझी नहीं, मैं भी* उलझा रहा।।देती* चेतावनी, ठोकरें भी लगींतू तो* पत्थर उठा किन्तु देती बहा।तंग करती रही, हिचकियां भी मे*री पानी* पी पी मगर तू तो* लेती नहा।द...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
10

फिर सोने के दुर्ग में, पति बिन कौन उदास-

सच्चे शुभचिंतक रखें, तारागण सा तेज़।अँधियारे में झट दिखें, रविकर इन्हें सहेज।।शीशा सिसकारी भरे, पत्थर खाये भाव।टकराना हितकर नहीं, बेहतर है अलगाव।।खोज रहा बाहर मनुज, राहत चैन सुकून।ताप दाब म...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
17

पर दूसरे की गलतियों पर रह सका वह मौन कब-

जब मैल कानों में भरा, आवाज देना व्यर्थ तब।आवाज़ कब अपनी सुने, मन में भरा हो मैल जब।करता नजर-अंदाज खुद की गलतियाँ रख पीठ पे-पर दूसरे की गलतियों पर रह सका वह मौन कब।।...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
12

यद्यपि सहारे बिन जिया वह लाश के ही भेष में-

जिंदा मिला तो मारते, हम सर्प चूहा देश में।लेकिन उसी को पूजते, पत्थर शिला के वेश में।कंधा दिया जब लाश को तो प्राप्त करते पुण्य हमयद्यपि सहारे बिन जिया वह लाश के ही भेष में।।खिचड़ीहुआ गीला अगर आट...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
14

समस्यायें सुनाते भक्त दुखड़ा रोज गाते हैं-

प्रवंचक दे रहे प्रवचन सुने सब अक्ल के अंधे।बड़े उद्योग में शामिल हुये अब धर्म के धंधे।।अगर जीवन मरण भगवान के ही हाथ में बाबा।सुरक्षा जेड श्रेणी की चले क्यों साथ में बाबा।हमेशा मोह माया छोड़ना ...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
13

तलाशे घूर में रोटी, गरीबी व्यस्त रोजी में।-

तलाशे घूर में रोटी, गरीबी व्यस्त रोजी में।अमीरी दूर से ताके डुबा कर रोटियाँ घी में।प्रकट आभार प्रभु का कर, धनी वो हाथ फिर जोड़े।गरीबी वाकई रविकर, कहीं का भी नहीं छोड़े।।विचरते एक पागल को गरीबी द...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
15

मुक्तक

जद्दोजहद करती रही यह जिंदगी हरदिन मगर।ना नींद ना कोई जरूरत पूर्ण होती मित्रवर।अब खत्म होती हर जरूरत, नींद तेरा शुक्रियायह नींद टूटेगी नहीं, री जिंदगी तू मौजकर।।व्यवहार घर का शुभ कलश, इंसानिय...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
17

दोहे

दानवीर भरसक भरें, रविकर भिक्षा-पात्र।करते इच्छा-पात्र पर, किन्तु कोशिशें मात्र।।भरता भिक्षा-पात्र को, दानी बारम्बार।लेकिन इच्छा-पात्र पर, दानवीर लाचार।।है सामाजिक व्यक्ति का, सर्वोत्तम व्...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
14

मगर शुभचिंतकों की खुद, करो पहचान तुम प्यारे

बहस माता-पिता गुरु से, नहीं करता कभी रविकर ।अवज्ञा भी नहीं करता, सुने फटकार भी हँसकर।कभी भी मूर्ख पागल से नहीं तकरार करता पर-सुनो हक छीनने वालों, करे संघर्ष बढ़-चढ़ कर।।किसी की राय से राही पकड़ ले ...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
15

तलाक

जो जंग जीती औरतों ने आज भी आधी-अधूरी ।नाराज हो जाये मियाँ तो आज भी है छूट पूरी।शादी करेगा दूसरी फिर तीसरी चौथी करेगा।पत्नी उपेक्षा से मरेगी वह नही होगी जरूरी।पड़ी जब आँख पर पट्टी, निभाती न्याय ...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
20

संगीत से इलाज-

सुना दो राग दरबारी हृदय आघात टल जाये।अनिद्रा दूर हो जाए अगर तू भैरवी गाये।हुआ सिरदर्द कुछ ज्यादा सुना दो राग भैरव तुममगर अवसाद में तो राग मधुवंती बहुत भाये।विहागी राग गा लेना अगर वैराग्य आये...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
18

जंगली पॉलिटिक्स

सरासर झूठ सुन उसका उसे कौआ नहीं काटा।चपाती बिल्लियों को चंट बंदर ठीक से बाँटा।परस्पर लोमड़ी बगुला निभाते मेजबानी जब।घड़े में खीर यह खाया उधर वह थाल भी चाटा।युगों से साथ गेंहूँ के सदा पिसता रहा...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
18

चले यह जिंदगी लेकर हमेशा शाम तक रिश्ते-

कहीं बेनाम हैं रिश्ते, कहीं बस नाम के रिश्ते।चतुर मानुष बनाते हैं हमेशा काम से रिश्ते।मुहब्बत मुफ्त में मिलती सदा माँ बाप से लेकिनलगाये दाम की पर्ची धरे गोदाम में रिश्ते।शुरू विश्वास से होत...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
19

हथियार के सौदागरों यूँ खून तुम पीते रहो।

ग्राहक तुम्हें मिलते रहें, हर मौत के सामान के ।व्यापार खुब फूले फले संग्राम बर्बर ठान के।जब जर जमीं जोरू सरीखे मंद कारक हो गये।तब युद्ध छेड़े जाति के कुछ धर्म के कुछ आन के।विध्वंश हो होता रहे न...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
18

प्रतीक्षा हो रही लम्बी, भुलाओ मत चले आओ-

अजी अब देर क्यों करते, चले आओ चले आओ।प्रतीक्षा हो रही लम्बी, भुलाओ मत चले आओ।।यहाँ तू शर्तिया आये,खबर सुन मौत की मेरी।दुखी जब सब सुजन मेरे, सुनें वे सांत्वना तेरी।नहीं मैं सुन सकूँगा तब, अभी आके...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
17

रविकर के दोहे

जब गठिया पीड़ित पिता, जाते औषधि हेतु।डॉगी को टहला रहा, तब सुत गाँधी सेतु।।यदि दुख निन्दा अन्न सुख, पचे न अपने-आप।बढ़े निराशा शत्रुता, क्रमश: चर्बी पाप ।।अपनी गलती पर बने, रविकर अगर वकील।जज बन के ख...  और पढ़ें
12 माह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
23

नारी कटा के चोटियाँ तब चोटियाँ चढ़कर दिखाये।

पुचकारते पापा मगर भाई लताड़े मर्द ताड़े।आँखे तरेरे पुत्र भी तो आ रहा पति दम्भ आड़े।जब पैर की जूती कहे जग अक्ल चोटी में बताये।नारी कटा के चोटियाँ तब चोटियाँ चढ़कर दिखाये।।...  और पढ़ें
12 माह पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
19

है पहाड़ सी जिन्दगी, चोटी पर अरमान

इनके मोटे पेट से, उनका मद टकराय।कैसे मिल पाएं गले, रविकर बता उपाय ।।सरिता जैसी जिन्दगी, रास्ता रोके बाँध।करो सिंचाई रोशनी, वर्ना बढ़े सड़ाँध।।है पहाड़ सी जिन्दगी, हैं नाना व्यवधान।रविकर झुक के य...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
22

भली करेंगे राम

झाड़ी में हिरणी घुसी, प्रसव काल नजदीक।इधर शिकारी ताड़ता, उधर शेर की छींक।उधर शेर की छींक, गरजते बादल छाये।जंगल जले सुदूर, देख हिरणी घबराये।चूक जाय बंदूक, शेर को मौत पछाड़ी। मेह बुझाए आग, सुने कि...  और पढ़ें
1 वर्ष पूर्व
"लिंक-लिक्खाड़"
21
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