"कुछ कहना है" की पोस्ट्स

उत्तम दोहे

रस्सी जैसी जिंदगी, तने तने हालात |एक सिरे पे ख्वाहिशें, दूजे पे औकात ||पहली कक्षा से सुना, बैठो तुम चुपचाप।यही आज भी सुन रहा, शादी है या शाप।।रहा तरस छह साल से, लगे निराशा हाथ |दिखी आज आशा मगर, दो बच्...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
"कुछ कहना है"
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चंद चुनिंदा मित्र रख, जिंदा रख हर शौक-

चंद चुनिंदा मित्र रख, जिंदा रख हर शौक।हारे तब बढ़ती उमर, करे जिक्र हर चौक।|कह दो मन की बात तो, हो फैसला तुरंत।वरना बढ़ता फासला, हो रिश्ते का अंत।।अपनी हो या आपकी, हँसी-खुशी-मुस्कान।रविकर को लगती भल...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
"कुछ कहना है"
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दोहे-

मार्ग बदलने के लिए, यदि लड़की मजबूर |कुत्ता हो या मर्द हो, मारो उसे जरूर ||हाथ मिलाने से भला, निखरे कब सम्बन्ध।बुरे वक्त में थाम कर, रविकर भरो सुगन्ध।।नंगे बच्चे को दिया, माँ ने थप्पड़ मार।लेकिन नंग...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
"कुछ कहना है"
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पर उसूल पर जब चले, चुभते शूल अनेक

रविकर संस्कारी बड़ा, किन्तु न माने लोग।सोलहवें संस्कार का, देखें अपितु सुयोग।।जीवन-फल हैं शक्ति धन, मूल मित्र परिवार।हो सकते फल बिन मगर, मूल जीवनाधार।।कहो न उसको मूर्ख तुम, करो न उसपर क्रोध।आप ...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
13

पत्नी-पीड़ित संघ का प्रतिवेदन

बच्चों को नहला धुला, करता हूँ तैयार। फिर भी नहला पर रही, बीबी दहला मार।।रहे पड़ोसी तभी कुँवारा।पति पहली तारीख पर, पाता छप्पन-भोग।भोग रहा फिर माह भर, कर कर गृह उद्योग।।हाय हाय रे पति बेचारा।दही...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
14

दिया कहाँ परिचय दिया, परिचय दिया उजास-

रखे व्यर्थ ही भींच के, मुट्ठी भाग्य लकीर।कर ले दो दो हाथ तो, बदल जाय तकदीर।।प्रेम परम उपहार है, प्रेम परम सम्मान।रविकर खुश्बू सा बिखर, निखरो फूल समान।।फेहरिस्त तकलीफ की, जग में जहाँ असीम।गिनती...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
13

मगर मंज़िल नही मिलती, बिना मेहनत किए डटकर-

किसी की राय से राही पकड़ ले पथ सही अक्सर।मगर मंज़िल नही मिलती, बिना मेहनत किए डटकर।तुम्हें पहचानते होंगे प्रशंसक, तो कई बेशकमगर शुभचिंतकों की खुद, करो पहचान तुम रविकर।।बहस माता-पिता गुरु से, न...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
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जिन्दगी के दोहे

भँवर सरीखी जिंदगी, हाथ-पैर मत मार।देह छोड़, दम साध के, होगा बेडा पार ।।चार दिनों की जिन्दगी, बिल्कुल स्वर्णिम स्वप्न।स्वप्न टूटते ही लुटे, देह नेह धन रत्न।।प्रश्न कभी गुत्थी कभी, कभी जिन्दगी ख्...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
11

लल्ली लगा ली आलता लावा उछाली चल पड़ी

अलमारियों में पुस्तकें सलवार कुरते छोड़ के।गुड़िया खिलौने छोड़ के, रोये चुनरियाओढ़ के।रो के कहारों से कहे रोके रहो डोली यहाँ।माता पिता भाई बहन को छोड़कर जाये कहाँ।लख अश्रुपूरित नैन से बारातियों...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
14

जिन्हें थी जिंदगी प्यारी, बदल पुरखे जिए रविकर-

(1)विदेशी आक्रमणकारी बड़े निष्ठुर बड़े बर्बर |पराजित शत्रु की जोरू-जमीं-जर छीन लें अकसर |कराओ सिर कलम अपना, पढ़ो तुम अन्यथा कलमा  जिन्हें थी जिंदगी प्यारी, बदल पुरखे जिए रविकर ||(2)उमर मत पूछ औरत की, ब...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
15

हाहा हहा क्या बात है। हालात् है।।

दरमाह दे दरबान को जितनी रकम होटल बड़ा।परिवार सह इक लंच में उतनी रकम दूँ मैं उड़ा।हाहा हहा क्या बात है। उत्पात है।तौले करेला सेब आलू शॉप पर छोटू खड़ा।वह जोड़ना जाने नहीं, यह जानकर मैं हँस पड़ा।हाहा...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
13

मनाओ मूर्ख अधिकारी, अधिक सम्मान दे करके

अपेक्षा मत किसी से रख, किसी की मत उपेक्षा कर ।सरलतम मंत्र खुशियों का, खुशी से नित्य झोली भर।समय अहसास बदले ना, बदलना मत नजरिया तुमवही रिश्ते वही रास्ता वही हम सत्य शिव सुंदर।।आलेख हित पड़ने लगे ...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
17

सात वचन

चले जब तीर्थ यात्रा पर मुझे तुम साथ लोगे क्या।सदा तुम धर्म व्रत उपक्रम मुझे लेकर करोगे क्या।वचन पहला करो यदि पूर्ण वामांगी बनूँगी मैंबताओ अग्नि के सम्मुख, हमेशा साथ दोगे क्या।।सात वचन/2कई रि...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
15

चढ़े बदन पर जब मदन, बुद्धि भ्रष्ट हो जाय

है भविष्य कपटी बड़ा, दे आश्वासन मात्र।वर्तमान से सुख तभी, करते प्राप्त सुपात्र।।मक्खन या चूना लगा, बोलो झूठ सफेद।यही सफलता मंत्र है, हर सफेद में भेद।चढ़े बदन पर जब मदन, बुद्धि भ्रष्ट हो जाय।खजुर...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
15

खिचड़ी

अमीरी में गरीबी में बराबर ही पली खिचड़ी।तभी तो देश को लगती हमेशा ही भली खिचड़ी।लिया जब पूर्व से चावल, नमक घी तेल पश्चिम से।मिलाया दाल उत्तर की, मसाला मिर्च दक्षिण से।उड़ीसा ने दिया हल्दी, करी पत्...  और पढ़ें
7 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
13

उसको फिर भी दूँ दुआ, फूले-फले अघाय

प्रश्न कभी गुत्थी कभी, कभी जिन्दगी ख्वाब।सुलझा के साकार कर, रविकर खोज जवाब।।फूले-फूले वे फिरें, खुद में रहे भुलाय |उसको फिर भी दूँ दुआ, फूले-फले अघाय ||दीदा पर परदा पड़ा, बहू न आये बाज।परदा फटते फट ...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
17

मुक्तक

समस्यायें समाधानों बिना प्राय: नहीं होती।नजर आता नहीं हल तो, बढ़ा है आँख का मोती।करो कोशिश मिलेगा हल, समस्या पर न पटको सिर।नही हल है अगर उसका, उसे प्रभु-कोप समझो फिर।।परिस्थितियाँ अगर विपरीत, य...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
14

भावानुवाद (पाब्लो नेरुदा की नोबल प्राइज प्राप्त कविता)

जो पुस्तकें पढ़ता नहीं, जो पर्यटन करता नहीं, अपमान जो प्रतिदिन सहा, जो स्वाभिमानी ना रहा,जो भी अनिश्चय से डरे।तिल तिल मरे, आहें भरे।।जो जन नहीं देते मदद , जो जन नहीं लेते मदद,संगीत जो सुनता...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
17

दोहे-

बिके झूठ सबसे अधिक, बहुत बुरी लत मोह।मृत्यु अटल है इसलिए, कभी बाट मत जोह।।चार दिनों की जिन्दगी, बिल्कुल स्वर्णिम स्वप्न।स्वप्न टूटते ही लुटे, देह नेह धन रत्न।।हिंसा-पत्नी जिद-बहन, मद-भाई भय-बा...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
16

शुभ विवाह/ सात वचन

अभिमुख ध्रुव-तारा लखे, पाणिग्रहण संस्कार | हुई प्रज्ज्वलित अग्नि-शुभ, होता मंत्रोच्चार | होता मंत्रोच्चार, सात फेरे लगवाते | सात वचन के साथ, एक दोनों हो जाते | ले उत्तरदायित्व, परस्पर बाँ...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
14

दीवाल पथ पर पार्क में यूँ थूकना अच्छा नहीं-

कूड़ा यहाँ कचड़ा वहाँ मत फेंकिए यूँ मार्ग पर।उपयोग कूड़ेदान का नियमित करें हे मित्रवर।दीवाल पथ पर पार्क में यूँ थूकना अच्छा नहींलघु-दीर्घ-शंका के लिए संडास हैं उपयोग कर।।अब नोट पर दीवार पर ड्...  और पढ़ें
8 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
14

मुक्तक

हक छोड़ते श्रीराम तो, शुभ ग्रन्थ रामायण रचा।इतिहास उन्नति का समाहित विश्व में मानव बचा।लेकिन बिना हक जब हड़पता सम्पदा बरबंड तबइतिहास अवनति का रचा रविकर महाभारत मचा।।कामार्थ का बैताल जब शैतान...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
13

निमंत्रण बिन गई मैके, करें मां बाप अन्देखी-

विधाता छंदनिमंत्रण बिन गई मैके, करें मां बाप अन्देखी।गई जब यज्ञशाला में, बघारे तब बहन शेखी।कहीं भी भाग शिव का जब नहीं देखी उमा जाकर।किया तब दक्ष पुत्री ने कठिन निर्णय कुपित होकर।स्वयं समिधा ...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
13

रजाई ओढ़कर सोता, मगर ए सी चलाता है

खलिश बढ़ती रही घर में, मगर कुछ बोल ना पाता।फजीहत जब हुई ज्यादा, शहर को रंग दिखलाता।रजाई ओढ़कर सोता, मगर ए सी चलाता है।नहाकर पूत गीजर को, खुला ही छोड़ जाता है।सतत् चलता रहे टी वी, जले दिन रात बिजली भी...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
21

मुक्तक-

बहस माता-पिता गुरु से, नहीं करता कभी रविकर ।अवज्ञा भी नहीं करता, सुने फटकार भी हँसकर।कभी भी मूर्ख पागल से नहीं तकरार करता पर-सुनो हक छीनने वालों, करे संघर्ष बढ़-चढ़ कर।।~ dhanyavaad ~...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
17

सुबह से ही मगर घरपर, बड़ी सी भीड़ है घेरी-

मिली मदमस्त महबूबा मुझे मंजिल मिली मेरी।दगा फिर जिन्दगी देती, खुदारा आज मुँहफेरी।कभी भी दो घरी कोई नहीं यूँ पास में बैठासुबह से ही मगर घरपर, बड़ी सी भीड़ है घेरी।अभी तक तो किसी ने भी नहीं कोई दिय...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
12

कहीं कुछ रह तो नहीं गया-

पिलाकर दूध झट शिशु को, फटाफट हो गई रेडी। उठाई पर्स मोबाइल घड़ी चाभी चतुर लेडी। इधर ताके उधर ताके नहीं जब ध्यान कुछ आया। लगा आवाज आया को, वही फिर प्रश्न दुहराया। कहीं कुछ रह तो नहीं गया। हाय री ममत...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
17

100 दोहे

रस्सी जैसी जिंदगी, तने तने हालात |एक सिरे पे ख्वाहिशें, दूजे पे औकात ||है पहाड़ सी जिन्दगी, चोटी पर अरमान।रविकर झुक के यदि चढ़ो, हो चढ़ना आसान।।खले मूढ़ की वाह तब, समझदार जब मौन।काव्य शक्ति-सम्पन्न तो...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
17

तरु-शाखा कमजोर, पर, गुरु-पर, पर है नाज

दोहेतरु-शाखा कमजोर, पर, गुरु-पर, पर है नाज ।कभी नहीं नीचे गिरे, ऊँचे उड़ता बाज।।सत्य बसे मस्तिष्क में, होंठों पर मुस्कान।दिल में बसे पवित्रता, तो जीवन आसान।।कुंडलियाँ गुरुवर करूँ प्रणाम मैं, र...  और पढ़ें
9 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
15

आज के रावण

(1)विजयदशमी मना मानव, जलाता जो बड़ा रावण।वही तो वर्ष भर हरदिन जलाता भूमि बिन कारण।सिया सी देवि को हर के, सियासी दांव चलता हैसदा सच्चा करे सौदा, मगर आफ़त असाधारण।।(2)दिया हनुमान को दानव, नहीं संजीव...  और पढ़ें
10 माह पूर्व
"कुछ कहना है"
15
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