महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN की पोस्ट्स

अबकी बार योगी सरकार ।।

बेशर्मों की लगी कतार ।अपना हित भी भूले यार ।दूर करो घटिया सरकार ।यू पी में योगी इस बार ð...  और पढ़ें
3 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
45

जिससे हो देश का उत्थान .....

जिससे हो देश का उत्थान और सनमानदोनों हाथ जोड़ उसे सिर मैं झुकाता हूँराजनीती से नहीं है मेरा कोई सरोकारकवि हूँ मैं कविता से पहचाना जाता हूँकोई दल-बल नहीं आत्मबल से "आनन्द"अपनी उड़ान आसमान को दिखा...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
115

जनता परिवार के विलय पर

अर्ज़ है --जनता ने जिनको दिया था कभी अधिकारवे ही जनता के ठेकेदार बने बैठे हैं ।जिनसे था डर किस्ती के डूब जाने कावही किस्ती के पतवार बने बैठे हैं ।जिसने न छोड़ा भैंस-गाय का चारा "आनन्द"आज वो हमारे वफ...  और पढ़ें
4 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
115

मोदी मोदी मोदी ।।

भारत माता की जयआतंक और अन्‍याय विवश हमने जब हिम्‍मत खो दी ।फिर देश महाचीत्‍कार कर उठा, मोदी मोदी मोदी ।।सन् 47 से हमने सत्‍ता कांगरेस के हाँथ दिया ।पर भ्रष्‍ट कांगरेसी नेताओं ने जनता को भुला दि...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
113

सिंहन कै शासन खतम हुआ अब देश सियार संभालेंगे ।।

यहि राष्‍ट्रधर्म कै बात आज हम हिरिदय माँझ छुपा लेंगे । सिंहन कै शासन खतम हुआ अब देश सियार संभालेंगे ।।इ गठबन्‍धन कै दौर हुवै का फरक कउन जीता हारा जौ अबकी बहुमत पूर्ण मिला बनवाइब इक बंगला न्‍या...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
144

तुम ही कहो मनमीत मैं क्‍या गीत गाऊँ ।।

तुम ही कहो मनमीत मैं क्‍या गीत गाऊँकिस बात पे हँसूं कहाँ आँसू बहाऊँ ।।वेदों से उपजी हिन्‍दु संस्‍कृति नित्‍य नयी इसके आगे उपराम हुईं सभ्‍यता कईइसने जीना सिखलाया पशु से पृथक कियासद्भाव सिख...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
120

हिन्दू तुम कट्टर बन जाओ ।।

     अभी हाल ही में हुए फैजाबाद जिले के दंगे में हिन्‍दुओं की दुर्गति के बाद मन बहुत खिन्‍न हुआ ।  इसी खिन्‍नता ने काव्‍य का रूप ले लिया ।  यह काव्‍य सभी हिन्‍दुओं को समर्पित है ।अपना देश ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
322

हिन्‍दी-हिन्‍दुस्‍थान हमारा - हिन्‍दी दिवस विशेष काव्‍य

हिन्‍दू का बुलन्‍द हो नारा हिन्‍दी-हिन्‍दुस्‍थान हमारा हिन्‍दु-धर्म इतिहास पुराना कौन भला इससे अनजाना प्रेम-धर्म का ताना-बाना सुरमय जीवन-गीत सुहाना अमृतमय जीवन-रस-धारा हिन्‍दी-...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
119

तब लेखनी चली - वर्तमान दशा पर कुठाराघात करती कवि 'आनन्‍द फैजाबादी' की यह कविता

अरसों के बाद मन की आज पोटली खुलीतब लेखनी चली, तब लेखनी चली ।।भरसक प्रयास पर भी जब रसना नहीं हिली तब लेखनी चली, तब लेखनी चली ।।1- हर ओर अत्‍याचार है , हर हाँथ में तलवार है नीरस हुआ संसार है, अब...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
89

मुश्किल है अपना मेल प्रिये

मुश्किल है अपना मेल प्रियेये प्यार नहीँ है खेल प्रियेतुम M.A. फर्स्ट डिवीजन होमैँ हुआ मैटरिक फेल प्रियेमुश्किल है अपना मेल प्रियेये प्यार नहीँ है खेल प्रिये~तुम फौजी अफसर की बेटीमैँ तो किसान क...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
195

होली फाग एवं मनहरवा - कवि आर्त के स्‍वर में ।

मित्रोंहोली बिलकुल सन्निकट ही है ।  इस मौसम में सबसे अधिक जो वस्‍तु प्रचलित है वह है फाग गीत तथा मनहरवा (मतवाला) ।  इस मामले में फैजाबाद जिला (उत्‍तरप्रदेश) काफी समृद्ध है ।  फाग विधा के प्र...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
99

नव वर्ष पर कवि आर्त की शुभकामनाएँ इस सरस काव्‍य के माध्‍यम से ..........

अन्‍तत: इन्‍सान हैं हम......                                ०१/०१/१२सृष्टिकर्ता की अनूपम कृति, अमित क्षमता समाहितधरा-नभ-पाताल में गतिमान नित परहित समर्पि...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
89

कह विदा इक आब्‍द बीता, आ गया नव वर्ष फिरसे

नववर्ष मंगलमय हो .................              कह विदा इक आब्‍द बीता, आ गया नव वर्ष फिरसेकुछ नयन हर्षित, निमीलित कुछ हुए, कुछ नीर बरसे कुछ मिले, मिलने चले अपनो से, कुछ मिलने को तरसेवर्ष ये ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
102

रावण नहीं मरा इस बार

रावण रावण नहीं मरा इस बारमेरे मन का रावण थाघर-घर में अब फैल गया, एक सर को काटा तो,दस ने जन्म ले लियादस का सौ,सौ का हजार,फैल गया जग में अब रावणरावण नहीं मरा इस बार।रामलीला में जल जाऐगा?रावण?मनलीला म...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
95

मुकेश डोलिया जी की रचना --

आओ बच्चों तुम्हें दिखाए झाकी घपलिस्तान की.इस मिट्टी पे सर पटको ये धरती है बेईमान की.बंदों में है दम, राडिया-विनायकयम्.बंदों में है दम, राडिया-विनायकम्.उत्तर में घोटाले करती मायावती महान हैदक्...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
112

नेताजी निष्कलंक और पवित्र,

नेताजी निष्कलंक और पवित्र,गांधीजी लांछनों से परिपूर्ण और विचित्र।...... नेताजी निर्मल हृदय और उदार,गांधीजी ईर्ष्यालु और अनुदार।नेताजी निर्भय और निर्भीक,गांधीजी कायरता प्रतीक।नेताजी ने गांध...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
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97

श्रीकृष्‍ण जन्‍मोत्‍सव की हार्दिक शुभकामना

   श्रीकृष्‍णाय वासुदेवाय हरये परमात्‍मने प्रणत् क्‍लेशनाशाय श्रीकृष्‍णाय वयं नम: ।।  श्रीकृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी के पावन अवसर पर सम्‍पूर्ण संस्‍कृतजगत् परिवार आप सभी को हार्दिक शुभक...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
217

सारे हिन्‍दी चिट्ठासंकलकों का पता एक जगह ।।

           संस्‍कृत सीखने की इच्‍छा रखने वाले दोस्‍तों तथा संस्‍कृतजगत् से निरन्‍तर जुडे रहने वालों के लिये एक खुशखबरी है  ।  संस्‍कृतजगत् ने आप के लिये अपना नया टूलबार प्रस...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
93

कारगिल शहीद दिवस (26 जुलाई) के उपलक्ष्‍य में एल.ओ.सी. कारगिल फिल्‍म का गीत डाउनलोड करें ।

दस वर्ष से अधिक हो गये कारगिल के युद्ध की विजय के । कारगिल युद्ध विजय के उपलक्ष्‍य में भारतसरकार द्वारा घोषित किये गये विजय दिवस 26 जुलाई को भी अधिकतम लोग भुला चुके हैं । पर हम कैसे भूल जाएँ कि इन...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
153

प्रेम

बातें तो यहाँ कर रहा हूँ प्यार की मगर,                      दिल में मेरे किसी के लिए प्यार नहीं है.शादी नहीं हुई है पर बारात गया हूँ,               &n...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
92

भारत विश्‍व कप का विजेता हो इस शुभकामना के साथ यह काव्‍य

हर गली कूँचा मँ आज बाजती बधायो हैआयो तेन्‍दूलकर को विजय सैन्‍य आयो है  ।।1- सालौं भागि मन्‍द‍ि रहा , कई ठू प्रतिद्वन्दि रहागेंद धारि कुन्‍दि रहा , तबै अरि निर्द्वन्‍द‍ि रहाडेढ अरब दुआ पाई आज ई ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
95

होली फाग ( मन प्रीति बढा प्रभुचरणन से )- HOLI FAAG, KAVI AART

होली फाग ( मन प्रीति बढा प्रभुचरणन से )मन प्रीति बढा प्रभुचरणन से कलि दारूण क्‍लेश कटेंगे विषाद मिटेंगे   ।।नित उठि राम भजन कर प्‍यारे, कृष्‍ण कथा में तूँ मनवा लगा  रे  ममता मेघ छँटेंगे  ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
98

होली फाग ( अधरन पर मुरली मधुर धरिकै )- HOLI FAAG- KAVI AART

होली फाग ( अधरन पर मुरली मधुर धरिकै )अधरन पर मुरली मधुर धरिकै,  टेरत मृदुतान मुरारी गोवर्धन धारी  ।।रवि तनया तट तरू कदम्‍ब तर, ठाढे त्रिभंगी लाल मुरली धर राकापति उजियारी  ।।मधुर तान तन राग ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
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102

होली मतवाला ( हरि कँ बिसराय )- KAVI AART

होली मतवाला ( हरि कँ बिसराय )हरि कँ बिसराय , काहें फिरे तूँ भुलाना  ।।सुन्‍दर देहियाँ से नेहिया लगाया डहँकि डहँकि धन सम्‍पति कमाया तबहूँ न कबहुँ सुखी होई पाया , भूल्‍या तूँ कौल पुराना कोई साथ न...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
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89

होली मतवाला - HOLI FAAG, KAVI AART

होली मतवाला ( मन से प्रभू का भजन करना )मन से प्रभू का भजन करना देखो न दामन मे दाग लग जाये , गन्‍दी डगर न कदम धरना ।।काल गहे कर्मों का लेखा  , जैसा करे फल वैसा ही देखा’आर्त’ मगन मन प्रभू गुन गाये , भव ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
98

होली का सच्‍चा आनन्‍द तो गाँव के इन्‍ही गीतों में है ।

            होली के पावन पर्व का यूँ तो अपना अलग ही मजा है  ।  प्राय: हर गाँव हर शहर में होली की धूम देखती ही बनती है किन्‍तु फिर भी कवि 'आर्त' के गाँव ईशपुर की बात ही कुछ और है  ।यह...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
97

बिन्‍दु जी के दुर्लभ भजन ।।

यह कवि श्री गोस्‍वामी बिन्‍दु जी के दुर्लभ भजनों में से एक है जिसे कवि श्री आर्त ने गाया है  ।सुनिये और आनन्‍द लीजिये  ।।...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
269

विनय पचीसी - विनय कुंज ।। वीडियो

कवि आर्त कृत विनयपचीसी अब MP3 और  MP4 में भी उपलब्‍ध है  ।सबसे विशिष्‍ट बात यह है कि इसको कवि आर्त ने स्‍वयं ही गाया है  ।  तो अब सुनिये और डाउनलोड कीजिये  ।।...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
94

उनको गम की बात ही क्‍या ।।

मन में उमंग साहस अदम्‍य, जिनके ललाट चमकें चम-चम फिर पथ कितना भी हो दुर्गम पर, उनको गम की बात ही क्‍या ।।उँचे पहाड, गहरा सागर, या हो कांटों से भरी डगर वो करें पार हर विपति मार, बढते जाते निज मंजिल पर ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
93

कवि आर्त कृत कजली ।।

कजलीहरे रामा ब्रजवीथिन्ह विच बहुरि बाँसुरी बाजे रे हारी ॥चली बिहाइ कन्त ब्रज बनि तन्हि विकल विरह बौरानी रामाहरे रामा कृष्ण कालिन्दी कूल कदम्ब तर राजे रे हारी ॥चुम्बति चरन चहकि चंचलि कोई चि...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
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