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नई हलचल

उसका सच
61

हार

 अपनी हर में भी बड़ा सुकून था फराज उसने गले लगाया जीतने के बाद ....  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
rakesh jain
आउट आफ़ बाक्स
43

ए जिंदगी ये खेल कैसा है

“न तू मेरे न मै तेरे काबू में,ए जिंदगी ये खेल कैसा है।“वक्त की कहानी दिल पे लिखी गयी,ऐ खुदा तेरा ये अन्दाज़ कैसा है।“शाम तक कुछ पता न चला कहाँ हूँ,जिंदगी तेरी सहर का सूरज कैसा है।“वो आये तो अंदाज क...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
vivek mishra
15

ऊर्जा बचाने में अब ये चिप आपकी मदद करेगी

ऊर्जा का बढता प्रयोग आज हमारे जीवन का एक अहम् हिस्सा बन गया है . हमारे दैनिक जीवन के अधिकतर काम आज के समय में बिजली से चलने वाले यंत्रो की मदद से किये जाते है.इसलिए ऊर्जा का अपना एक विशेष महत्व ह...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Manoj
डायनामिक
28

रचनाकार: भूपेन हजारिका की जीवनी : दिल हूम हूम करे

रचनाकार: भूपेन हजारिका की जीवनी : दिल हूम हूम करे...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
sakhi
sakhi with feelings..kahaniya/Articles
64
कुछ पुरानी यादें... (कविताएं, गीत, भजन, प्रार्थनाएं, श्लोक, अनूदित रचनाएं)
69

खिड़कियाँ खोल झाँक रहा है मकान ….

इससे पहले कि’शब्द’ शब्दों से मिलकरबुन दें एक अभेद्य तिलिस्म, तुम लिखो एक खतशब्दों के बिना ।.तत्पर हैं संवादों के आखेटक; बनाने को इनकोविस्फोटक,खिड़कियाँ खोल झाँक रहा हैहर मकान; तैनात किए गए है स...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
M Verma
जज़्बात
60

बचपन की सीख

बचपन की सीखवे दिन भी कितने सुहाने होते हैं, जबजिम्मेदारी नाम की चिड़िया दूर दूर तक भी नजर नहीं आती. सुबह उठो, नहओ धोओ, नाश्ताकरो, होम वर्क करो. फिर स्कूल जाओ, क्लासमें पढाई और फुरसत में शरारतें कर...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
रंगराज अयंगर
43

बेरंग जिंदगी

क्यूँ जिंदगी हमसे आँख मिचोली करती है      सुबह खुशी में खिलकर क्यूँ शाम गम में ढलती हैकहते हैं जिंदगी हर पल रंग बदलती है            फिर क्यूँ हमें तस्वीर इसकी बेरंग सी झलकती ह...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
सु-मन (Suman Kapoor)
अर्पित ‘सुमन’
59

तलाश

जब भी होती हो आस पास तुझे देखने की रहती है प्यास नज़रें सख्त चट्टान साथ करती है दीदार साँस दर साँस पलकों का पीछा करते गीरे जैसे आकाश और उस अँधेरे में ख्याल है तेरा खास और उठे तो खोले खजाने ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Kshitij Ranjan
क्षितिज
61

भावभीनी श्रधांजलि भूपेन हजारिका जी को

ओ गंगा बहती हो क्यों ............................विस्तार है अपार, प्रजा दोनो पार, करे हाहाकार, निःशब्द सदा, ओ गंगा तुम, ओ गंगा तुम. .. ओ गंगा… बहती हो क्यूँ ..नैतिकता नष्ट हुई, मानवता भ्रष्ट हुई, निर्लज्ज भाव से बहती ह...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
sakhi
sakhi with feelings..kahaniya/Articles
91

प्यारी तितली ;

                    रंग बिरंगी ,नीली -पीलीचंचल ,चपल -थिरकती तितली ;                   फूल के ऊपर छतरी बनकरनाच रही है प्यारी तितली ;                   टिंकू, मिंकू , पिंकी...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
मेरा आपका प्यारा ब्लॉग
57

" भगवान के घर देर है, अन्धेर नहीं!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

डी.आई.जी. - डी.डी.मिश्र    भ्रष्टाचार के मुद्दे पर डी.आई.जी. - डी.डी.मिश्र ने अपनी जबान खोली तो सत्ताधीशों ने उनकी मानसिक स्थिति खराब बताकर उन्हें जबरन मानसिक चिकित्सालय में भर्ती करवा दिया।य...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
50

“ढक्कन वाली रोटी” की याद...

अररिया में अपनी बड़ी दीदी के अलावे एक कौशल्या दीदी भी रहती है, जो बरहरवा में मेरे मुहल्ले की ही है तथा मेरी छोटी दीदी की सहेली है। जब उन्होंने गाय ली, तो मैं उनके यहाँ से दूध लेने लगा था। यह पिछले...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
जयदीप शेखर
कभी-कभार
45

"एक अद्भुत संसार - 'नन्हें सुमन'" (समीर लाल 'समीर')

मित्रों!      गतवर्ष बाल कविताओं की मेरी प्रथम बालकृति 'नन्हे सुमन' के नाम से प्रकाशित हुई थी। उन दिनों हिन्दी ब्लॉगिंग के पुरोधा आदरणीय समीर लाल 'समीर' भारत आये हुए थे। दूरभाष पर बातें हुईं ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
72

"कविता के सुख का सूरज" (डॉ. सिद्धेश्वर सिंह)

       डॉ. सिद्धेश्वर सिंह हिन्दी साहित्य और ब्लॉग की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम है। जब कभी विद्वता की बात चलती है तो डॉ. सिद्धेश्वर सिंह को कभी अनदेखा नहीं किया जा सकता है। कर्मनाशा ब्...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
282

बिन ’सारथी’ रथ को नज़र नहीं होता

गर तेरी शोख निगाहों का कहर नहीं होतामेरी जिन्दगी में ऐ दोस्त सहर नहीं होताअब फ़क़्त दुआओं का ही दौर चलने दोदवाओं का अब क्योंकर असर नहीं होतायूँ तो हर वक़्त मिलने की बात करते होक्यों उन बातों प...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
sidharth sarthi
सारथी...
51

साजिशों से बनी दीवारें ...

कभी सर्द हवाओं;तो कभी गर्म थपेड़ों के बहानेउसके इर्द-गिर्द खड़ी कर दी गई बिना छत की दीवारें । वह विभेद करता रहा, उन दीवारों से कान सटाकरअट्टहास और चीत्कार में ।अक्सर रात मेंउसे दिखाये गयेचमकदार ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
M Verma
जज़्बात
65

तेल के खेल में सरकार आउट

तेल के खेल में सरकार आउटकिसी भी उत्पाद के दाम तब ही बडते है जब उत्पाद का नया प्रिंट बाज़ार में आता है ऐसा कभी नहीं होता है और न ही कोई कर सकता है की पुराने प्रिंटेड दाम पर नई कीमत ले ले ..लेकिन एक ब...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Ashish
कानपुर पत्रिका
39

ये सच्चाई है..

कुछ चीजें अनायास ही सामने आ जाती हैंजो अहसास करा जाती हैं वास्तविकता काबताती हैं कि आज जो हम हैं कल वो नहीं होंगेये लड़कपन आज का, कल झुर्रियों में बदल जाएगामजबूरी कभी, सठियाना कभी, तो कभी बुढ़ा...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
parul chandra
30

"खीरा होता है गुणकारी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

सूरत इसकी कितनी प्यारी।खीरा होता है गुणकारी।।हरा-भरा है और मुलायम।सबका मोह रहा है यह मन।।छीलो-काटो नमक लगा लो। नींबू का थोड़ा रस डालो।।भूख बढ़ाता, गैस हटाता।बीमारी को दूर भगाता।।चाहे तो रा...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
114

Love Affair ...........!!!

6 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
MY PHOTOGRAPHIC ROMANCE
119

काकड़ (बार्किंग डियर)

आज हम बात करते हैं कॉर्बेट में पाए जाने वाले चौथे हिरन की प्रजाति के बारे में जिसे हम काकड़ के नाम से जानते हैं. मैं आपको फिर कहना चाहूँगा कि यह सारी जानकारी वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग के अधि...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
ATUL WAGHMARE
0

काकड़ (बार्किंग डियर)

आज हम बात करते हैं कॉर्बेट में पाए जाने वाले चौथे हिरन की प्रजाति के बारे में जिसे हम काकड़ के नाम से जानते हैं. मैं आपको फिर कहना चाहूँगा कि यह सारी जानकारी वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग के अधि...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
corbettnews
कॉर्बेट न्यूज़
54

प्रेम

न्याय, वैशेषिक, सांख्य होया योग मीमांसावेदांत जैसे वैदिक दर्शनघुस टटोला।इन्हें नकारने वाले...चार्वाक, जैन, वैभाषिकसौत्रांतिक, योगाचार औरमाध्यमिक जैसेअवैदिक दर्शन की पनाह भी लीकिंतु मिला न...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
amitabh shrivastava
अमिताभ
59
उसका सच
54

DROP of LIFE ...!!

6 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
MY PHOTOGRAPHIC ROMANCE
98

बहुत दिनों के बाद... आज

बहुत दिनों के बाद...आसमां फिर नीला-नीला है,तारों भरा चमकीला है, आज, बहुत  दिनों के बाद...बहुत दिनों के बाद...बादल हैं छंट चुके, टुकड़ों में बंट चुके, आज...बहुत दिनों के बाद...पेड़ हैं हरे-हरे,फूलों से भर...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Ritika Rastogi
फुर्सत के पल..
97
उसका सच
58


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