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नई हलचल

दशा सुधरती नहीं पर, धरती धरती धीर-

कदम धरती पर ,मन में आसमान हो.Maheshwari kaneri  अभिव्यंजना कुलाचार का निर्वहन, कुलगरिमा विस्तार |स्वाति वारि से तृप्त जग, करे प्रगट आभार |करे प्रगट आभार, मोतियाँ मस्त पिरोये |पाए जीवन-सार, नाम दुनिया मे...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
"लिंक-लिक्खाड़"
35

जब इश्क तुम्हे हो जाएगा!

सब को प्यार दिखाओगे, जब इश्क तुम्हे हो जाएगा!जल्दी काम निपटाओगे , जब इश्क तुम्हे हो जाएगा!या बैठे ही रह जाओगे , जब इश्क तुम्हे हो जाएगा!तुम खोए से रह जाओगे, जब इश्क तुम्हे हो जाएगा!नमकीन चाय पिलाओ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
सरिता भाटिया
गुज़ारिश
50

No Title

"रजत जयंती स्वर्ण बनाओ"एक दूजे से प्यार बहुत  दुनिया में दीवार बहुत किसने किसको दी तरजीहवैसे तो अधिकार बहुत लगता कम खुशियों के पल हैं पर उसमे श्रृंगार बहुत देखोगे नीचे संग में...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
44

Before the storm - Prima del temporale - तूफ़ान से पहले

Salvador, Bahia, Brazil: After a hot and humid night, in the morning the waves of the sea crested by the foam whipped by the wind and the air smelling of the arriving storm.साल्वादोर, बाहिया, ब्राज़ीलः उमस भरी गर्म रात के बाद सुबह सुबह तेज़ हवा से उफनती सागर की लहरें और हवा में आने वाले तूफ़ान की खु...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SUNIL DEEPAK
Chayachitrakar - छायाचित्रकार
34

मोदी जब भी बोलते हैं, देश को बांटने और भड़काने वाली भाषा बोलते हैं

नरेन्द्र मोदी जब भी बोलते हैं, देश को बांटने वाली बातें कहते हैं। पिछले कुछ दिनों में उन्हांेने कम से कम तीन आपत्तजनक बातें कही हैं। पहली आपŸिाजनक बात यह है कि उन्होंनेे सन् 2002 के राज्य प्रायोज...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
loksangharsha
लो क सं घ र्ष !
43

कुण्डली छंद..... डा श्याम गुप्त ....

                            कुण्डली छंद ( डा श्याम गुप्त )       कुण्डली छः पंक्तियाँ व बारह चरण का विषम-मात्रिक मिश्रित छंद है इसे कुण्डलिया छंद, कुण्...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
60

किन्तु जा रही जान, मची है अफरा तफरी -

मिड डे मील से बच्चों की मौत पर .... Amrita Tanmay  Amrita Tanmayअफरा-तफरी मच गई, खा के मिड-डे मील |अफसर तफरी कर रहे, बीस छात्र लें लील |बीस छात्र लें लील, ढील सत्ता की दीखे |मुवावजा ऐलान, यही इक ढर्रा सीखे |आने लगे बय...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
"लिंक-लिक्खाड़"
39

बीस छात्र लें लील, ढील सत्ता की दीखे-

अफरा-तफरी मच गई, खा के मिड-डे मील |अफसर तफरी कर रहे, बीस छात्र लें लील |बीस छात्र लें लील, ढील सत्ता की दीखे |मुवावजा ऐलान, यही इक ढर्रा सीखे |आने लगे बयान, पार्टियां बिफरी बिफरी |किन्तु जा रही जान, मच...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
"कुछ कहना है"
40

भारत भूषण :Bharat Bhushan

भारत भूषण (अंग्रेज़ी:Bharat Bhushanजन्म:1920 - मृत्यु: 27 जनवरी 1992) हिन्दी फ़िल्मों के एक प्रसिद्ध अभिनेता थे। अपने अभिनय के रंगों से कालिदास, तानसेन, कबीर और मिर्ज़ा ग़ालिब जैसे ऐतिहासिक चरित्रों को नया र...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Praveen Gupta
हमारा वैश्य समाज - HAMARA VAISHYA SAMAJ
76

"अपने कविता संग्रह "धरा के रंग" की सामग्री को क्रमशः प्रकाशित करूँगा" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री ‘मयंक’)

मित्रों !नवम्बर, 2011 में प्रकाशित अपने कविता संग्रह "धरा के रंग" की सामग्री को क्रमशः प्रकाशित करूँगा। मुझे विश्वास है कि इस पुस्तक की कविताएँ आप तक पहुँचेंगी और आपका स्नेह मुझे प्रा...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
181

sandhya hotel , janjehli, Mandi , himachal ,संध्या होटल , जंजैहली , हिमाचल

जंजैहली में रूकने के लिये वन विभाग का रेस्ट हाउस भी है और हां यहां की ग्राम पंचायत ने भी चार पांच कमरो वाला गेस्ट हाउस बना रखा है जो कि काफी सस्ता भी है । मै जब यहां पर आया तो जैसा कि मैने आपको पहल...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Manu
yatra (यात्रा ) मुसाफिर हूं यारो .............
114

उफ़ ये बारिश और पुरसूकून जिंदगी ..........बुधवारीय चर्चा १३७५

बुधवारीय चर्चा में मै  शशि पुरवार आपका स्वागत करती हूँ ....बारिश का मौसम और मन में उमंगो का रंग भरना ...ऐसे ही जीवन के अनेक रंगों के साथ आज के लिनक्स की और हम प्रस्थान करते है , आप सभी का दिन मंगलमय ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
85

एक हास्य कुण्डली- डा.राज सक्सेना

थे टाप-जीन्स टल्ले सहित, कटिस्पर्शी केश |शौहदे पीछे लग लिये,  देख  'पृष्ट  परि-वेश' |देख  पृष्ट  परिवेश,   कमेण्टस भद्दे कह डाले,मुड़ी   हसीना,   धमकी  दे  कर बोलीं 'साले' |कहे 'राज' कवि म...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
53

'' ये एच.एम् क्या है ?''लघु कथा

'' ये एच.एम् क्या है ?''लघु कथाDO NOT COPYरात के आठ बजे 'चोर..चोर..चोर ' का शोर सुनते ही गली के सभी लोग घरों से बाहर निकल आये .शर्मा जी ने एक किशोर का कॉलर कसकर पकड़ रखा था .शर्मा जी का चेहरा गुस्से से लाल था .अग्...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
WORLD's WOMAN BLOGGERS ASSOCIATION
55

कहो "कुपोषण भारत छोड़ो"

आजकल अभिनेता आमिर खान को भारत से कुपोषण हटाने का जिम्मा या कहे तो ठेका मिला हुआ है, वह दूरदर्शन पर हर 15 मिनट में लोगों को बताते रहते है की कैसे कुपोषण को दूर भगाना है जिसमे वह कहते है की लड़की की श...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Deen Dayal Singh
बचपन के रंग
183

'' ये एच.एम् क्या है ?''लघु कथा

'' ये एच.एम् क्या है ?''लघु कथाDO NOT COPY रात के आठ बजे 'चोर..चोर..चोर ' का शोर सुनते ही गली के सभी लोग घरों से बाहर निकल आये .शर्मा जी ने एक किशोर का कॉलर कसकर पकड़ रखा था .शर्मा जी का चेहरा गुस्से से लाल था .अ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
मेरी कहानियां
53

58. "हरियाली और घर"

       बीते रविवार को जयचाँद घर आया था। उसने शायद घर के आस-पास फैली हरियाली पर "कलाकार वाली" एक नजर डाली होगी। रात जब मैं उससे मिला और बातों-ही-बातों में जिक्र किया कि अगले रविवार से अभिमन...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
जयदीप शेखर
कभी-कभार
127

कारण

मुलगा : डाँक्टर माझीगर्लफ्रेँड प्रेंगनंट आहे.. मी तर प्रोटेक्शन वापरला होता......डाँक्टर : तुला एक गोष्ट सांगतो..एकदा एक माणुस जंगलात जातो आणि समोरुन एक वाघ येतो. त्या माणसाकडे बंदुक नसते पण हाता...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
vaghesh
विनोद नगरी
43

लोकतंत्र

मुद्दों को हम दें भुला , डालें जब भी वोट |लोकतंत्र में फिर सभी , निकालते हैं खोट ||निकालते हैं खोट , भूलकर अपनी गलती |पछताते उस वक्त , चोट जब गहरी लगती ||जब भी डालो वोट, जाति-धर्म सब भुला दो |कहता स...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
42

"मेरा काव्य संग्रह सुख का सूरज" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों!        जनवरी 2011 में मेरी दो पुस्तकों  "सुख का सूरज" और "नन्हे सुमन"  का विमोचन उत्तराखण्ड के तत्कालीन मुख्यमन्त्री  मा. रमेश पोखरियाल निशंक जी ने किया था। आज से इस ब्लॉग पर "सुख ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
72

...जहां साथ फहराते हैं तीन धर्मों के पताके!

कुछ जज्ब-ए-सादिक हो, कुछ इखलासो इरादतहमें इससे क्या बहस वह बुत है कि खुदा हैप्रणव प्रियदर्शीरांची : एक तरफ अजान के स्वर, दूसरी तरफ बौद्ध मंदिर से आती मृदंग की आवाज और कुछ ही देर बाद शिव मंदिर से उ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
pranav priyadarshi
समय से संवाद
141

janjehli town,mandi , himachal,जंजैहली , मंडी , हिमाचल

जंजैहली वैसे तो मंडी का एक गांव ही था और कुछ साल पहले तो यहां तक आने के लिये भी कोई बहुत बढिया सडक नही थी । पर अब हालात बेहतर हैं । वैसे जंजैहली की भौगोलिक स्थिति इस तरह की है कि आप यहां पर करसोग घा...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Manu
yatra (यात्रा ) मुसाफिर हूं यारो .............
163

जिंदगी का तो एक अलग ही फसाना

प्रणव प्रियदर्शीकल रात अचानक जिंदगी ने दिए थे मेरे हाथों में अपने हाथ। कहा था उसने यूं ही नहीं है जिंदगी में स्वर और साज। तू क्यों परेशान हुआ जाता है, देख कर सरोकारों का वीभत्स अंदाज। मैं हैरा...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
pranav priyadarshi
समय से संवाद
72

आज भी सिहर उठता है बथानी टोला

बिहार : 11 जुलाई, 1996 को भोजपुर में हुआ था बथानी टोला नरसंहारपाश ने कहा है-सबसे खतरनाक वह चांद होता है/ जो हर हत्याकांड के बाद/ वीरान हुए आंगनों में चढ़ता है/ पर आपकी आंखों में/ मिर्ची की तरह नहीं गड़त...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
pranav priyadarshi
समय से संवाद
75

मायावी गिनतियाँ : भाग 9

पीरियड अभी अभी खत्म हुआ था। नेहा अपनी सहेलियों पिंकी और तनु के साथ बाहर निकल आयी।''आज क्लास में रामू नहीं दिखाई दिया, कहां रह गया?" नेहा ने इधर उधर देखा।''कालेज तो आया था वह। कहीं चला गया होगा।"...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Dr. Zeashan Zaidi
Hindi Science Fiction हिंदी साइंस फिक्शन
73

"चला है दौर ये कैसा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सियासत में विरासत का, चला है दौर ये कैसाइबारत में बनावट का, चला है दौर ये कैसाजहाँ लाचार हो जनता, जहाँ मजदूर हों घायल,खनक कैसे सुनायेगी, दुल्हन के पाँव की पायल,नफासत में हिदायत का, चला है दौर ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
45

कहा है ये सावन ने मुझसे...

प्कृति ने मेरा स्वागत किया,जैसे धरा ने नव रूप लिया,गा रहे है झरने,  नदियां  गान, भर रहे हैं पंछी ऊंजी उड़ान,आ रहे हैं मेघ मुझे मिलने,कहा है  ये सावन ने मुझसे...पर पाषाण हो गया आज आदमी,जिसे सुद नह...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
kuldeep thakur
man ka manthan. मन का मंथन।
60

अन्तर दिखता साफ़, विकट अन्तर सिसकारे-

सिसकारे बिन सह गया, सत्तर सकल निशान |उन घावों को था दिया, हमलावर अनजान |हमलावर अनजान, किन्तु यह घाव भयंकर |एक अकेला घाव, दिया अपनों ने मिलकर |प्राणान्तक यह घाव, खाय कर रविकर हारे |अन्तर दिखता साफ़, व...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
52

एक अकेला घाव, दिया अपनों ने मिलकर-

लघु कथा : दर्द (गणेश जी बागी)सिसकारे बिन सह गया, सत्तर सकल निशान |उन घावों को था दिया, हमलावर अनजान |हमलावर अनजान, किन्तु यह घाव भयंकर |एक अकेला घाव, दिया अपनों ने मिलकर |प्राणान्तक यह घाव, खाय कर रवि...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
रविकर-पुंज
66

मयंक को निहार कर, स्वयं व्यथित वह सोचती ,,

सांस रोक -रोक कर, उस विरह को सह रही ,
चाह और विराग की , वेदना में जल रही ,,
उस समय की प्रेम भाव , सोच रजनी जगती ,...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
RAJKISHOR MISHRA
9


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