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नई हलचल

अलविदा तार ! अलविदा तार ! अलविदा तार

जब से हुआ है बे तार तार ओझल मन है मेरा कुछ बोझिल मुझे भी तो एक तार मिला था मेरा सबसे पहला और आखिरी तार मैंने रखा है उसे आज तक संभाल क्योंकि उसमें था मेरे पिता का प्यार जो चले गए बैकुंठ ह...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
सरिता भाटिया
गुज़ारिश
54

कार्टून: सबसे आखिरी 'तार' राहुल गाँधी को मिला

मेरा द्वारा बनाया तीसरा कार्टून आपकी खिदमत में पेश है ;-)Keywords: cartoon, rahul gandhi, last telegram, dialogue, gangs of wasseypur, sonia gandhi, congress, critics...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Shah Nawaz
43

जब अचानक खुशियाँ मिले और दामन छोटा पड़ जाये ....?

कहते हैं , नदी की मानिंद होती हैं बेटियाँ, जिसके चुलबुले कदमों के प्रवाह मे समाहित होती है पिता की छोटी-छोटी खुशियाँ। पर जब अचानक चुलबुले कदमों का प्रवाह सधे हुये कदमों में बदल जाये और मिलने वा...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
परिकल्पना
51

बेटियाँ

5 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
भारतीय नारी
53

अभी भी आशा है,

वेंकटनगर में  हमारे बहुत करीबी पारिवारिक मित्र और पड़ोसी,दायें से -श्री रामकृष्ण गुप्ता,उनकी बहन और जीजाजी, केदार नाथ  त्रासदी में लापता,  अभी भी आशा है, हिम्मत  न   हारो  तुम ,अभी  ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
dheerendra singh bhadauriya
काव्यान्जलि
64

आज

5 वर्ष पूर्व
Imran Ansari
जज़्बात...दिल से दिल तक
76

सुख -दुःख

दिन के उजाला में लोग भूल जाते है काली रात को  काली रात फिर आएगी ,तुम याद रखकर तो देखो। रौशनी के आने पर ,तम भाग जाता है गम को भुलाकर एकबार, हंसकर तो देखो।तुम को  दुखी देखकर ,दुखी है अपने सारे  ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Kalipad
अनुभूति
99

कौन हूं मैं........

दफ्तर में लोग मैडम कहते हैं....किसी के लिए दीदी हूं....किसी के लिए दोस्‍त हूं....अपनों के लिए प्‍यार हूं....दुखिया के लिए आवाज़....दुनिया के लिए संवेदना भी हूं.....जिज्ञासा भी....सवाल भी....किसी के लिए बेबाकी ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Anuja Shukla
अग्निगर्भा अमृता
49

मेघ राजा जल्दी आ

बाल कविता-86मेघ राजा जल्दी आमेघक राजा जल्दी आबाल्टी भरि भरि पानि लासुखलै आम, मौलाएल लताममरल जन्तुकेँ आबि जियामेघक राजा जल्दी आपियासल धरती कानै छैसूरज सीमा फानै छैमोर-मोरनीकेँ आब नचाबेंगक सऽ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
AMIT MISHRA
29

Body pins - Pin per corpo - शरीर में पिन

Bologna, Italy: I believe that the courage to be who you feel to be, is very important. This means accepting ourselves as we are and not try to hide it. However, why does that include showing your differences by putting pins in your nose, ears, cheeks and lips? In India one can say that it is part of our culture and traditions. In China, one can say that it is natural acupunture and it helps you to remain healthy, but the young people in Europe, why do they give pain to themselves like this?ब...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SUNIL DEEPAK
Chayachitrakar - छायाचित्रकार
36

गैम के दीवानों के लिए एक बेहतरीन गैम

आज आपको एक ऐसे ब्लॉग पर लेकर चलता हु जिस पर कंप्यूटर की सारी जानकरी मिलेगी  इसके मालिक का नाम  मयंक भारद्वाज है उसके ब्लॉग पर जाने के लिए यहाँ क्लिक करे  उसी के ब्लॉग से आपके लिए एक गेम ले...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
bheemraj
internet ki bate
185

KAILASH PARVAT - महान कैलाश पर्वत

कैलाश पर्वत .......दुनिया का सबसे बड़ा रहस्यमयी पर्वत, अप्राकृतिक शक्तियों का भण्डारकएक्सिस मुंडी को ब्रह्मांड का केंद्र, दुनिया की नाभि या आकाशीय ध्रुव और भौगोलिक ध्रुव के रूप में, यह आकाश और प...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Praveen Gupta
हिन्दू - हिंदी - हिन्दुस्थान - HINDU-HINDI-HINDUSTHAN
447

"मुक्तक और अशआर" दिलीप कुमार तिवारी 'घायल'

दुनिया के रंजो गम मेँ पलना ही गजल है बेजान जिन्दगी में सपना ही गजल है तकदीर की तस्वीर को अक्सर बनाये जोइन झील सी आँखो मेँ बसना ही गजल हैक्या खवाब बेहिसाब बताये कोई घायलदुःख दर्द के जलन मे जल...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
182

माँ

माँ के ऋण से कब हुई,उऋण कभी सन्तान |माँ के कारण ही मिली, हमको हर  पहचान |हमको हर  पहचान, ऋणी  हर रोम हमारा ,इसके कण-कण से बनता यह तनमन  सारा |कहे 'राज'  कवि,  करें हितों की रक्षा माँ के ,तन-मन-धन ,...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
64

मंगलवारीय चर्चा --1308--- भुंजे तीतर सा मेरा मन

आजकीमंगलवारीय चर्चामेंआपसबकास्वागतहैराजेशकुमारीकीआपसबकोनमस्ते , आपसबकादिनमंगलमयहो अबचलतेहैंआपकेप्यारेब्लॉग्स पर                                            स...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
42

तेरी यादें

visit.. http://www.mahaktepal.comतेरी यादों को मैं रातों को कुछ ऐसे जगाती  हूँ महकती चांदनी के नरम फाहों में सुलाती हूँ.दिए तो जल ही उठते है बस तेरे ख्यालों सेमैं घर के सारे ही  दीपक खुद ही बुझाती हूँ.है प्यासी...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
sakhi
sakhi with feelings
25

धरती के दावेदार

 उज्जवला ज्योति तिग्गाकी क़लम से अभिशप्त इतिहासनहीं चाहिए मुझेतुम्हारे उस असीम साम्राज्य कानाम मात्र का राजपाटजहां रचा जाता हैमेरे खिलाफ़हर पल षडयंत्रो का खेलमेरी इच्छाओं/अनिच्छाओंआकाक...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Shahroz
Hamzabaan हमज़बान ھمز با ن
61

देखिये नए ऑफिस 2013 को भी

जो भी विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम इस्तेमाल करते हैं उनके लिए एक जरुरी सॉफ्टवेयर हैं माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस, और अपने इस सॉफ्टवेयर पैक को माइक्रोसॉफ्ट बेहतर बनता ही रहता है । इसी कर्म में माइक्रोसॉफ्ट ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
ललित चाहार
Tech Education HUB
78

धर्म क्या है ? | What is Dharma ?

दोस्तों आज दुनिया में धर्म की काफी वैराईटी आ गयी है । आज ईसाईयत , इस्लाम , बोद्ध, जैन तथा हिन्दू ....... आदि सभी को धर्म कहा जा रहा है यही कारण  है की आज लोग धर्म के नाम पर कुत्तों की तरह लड़ रहे है ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
हंसराज 'सुज्ञ'
॥ भारत-भारती वैभवं ॥
134

धर्म क्या है ? | What is Dharma ?

दोस्तों आज दुनिया में धर्म की काफी वैराईटी आ गयी है । आज ईसाईयत , इस्लाम , बोद्ध, जैन तथा हिन्दू ....... आदि सभी को धर्म कहा जा रहा है यही कारण  है की आज लोग धर्म के नाम पर कुत्तों की तरह लड़ रहे है ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
प्राचीन सम्रद्ध भारत
31

अपने कंप्यूटर को सुधारे आसानी से

हम कंप्यूटर की खराबियों से अपना कीमती वक्त और डाटा गवां देते है पर कंप्यूटर की खराबियों को ठीक करने बस फॉर्मेट करना ही एकमात्र विकल्प नहीं होता ।एक छोटा मुफ्त पोर्टेबल टूल जो आपके कंप्यूटर क...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
ललित चाहार
Tech Education HUB
72
लो क सं घ र्ष !
39
लो क सं घ र्ष !
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लो क सं घ र्ष !
50
लो क सं घ र्ष !
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"गुरुवर डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' का आभार दर्शन" (दिलीप कुमार तिवारी 'घायल')

मित्रों!    आप सबको बड़े हर्ष के साथ सूचित कर रहा हूँ कि मैंने गुरुवर डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' जी से अपना ब्लॉग "घरौंदा घायल का" बनवा लिया है।    मैं आदरणीय डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'म...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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ग़ज़ल ( अपने दिल बात)

सोचकर हैरान हैं  हम , क्या हमें अब हो गया है चैन अब दिल को नहीं है ,नींद क्यों  आती नहीं है बादियों में भी गये  हम ,शायद आ जाये सुकून याद उनकी अब हमारे दिल से क्यों  जाती नहीं हैहाल क्या है आज ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Madan mohan saxena
मदन मोहन सक्सेना की ग़ज़लें
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लो क सं घ र्ष !
43
लो क सं घ र्ष !
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