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नई हलचल

चुटकुले और हंसगुल्ले (कुछ हल्के-फुल्के पल...)
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मृत्यु के पहले अवश्य जी ले.....!!

मेरे प्रिय मित्रो ;नमस्कार !जब हम मृत्यु को प्राप्त होंगे , तब सिर्फ तीन ही प्रश्न विचारणीय होंगे ::१. क्या हमने जीवन जिया २. क्या हमने प्रेम किया३. क्या हमने इस संसार को वापस कुछ दिया /कुछ बांटाऔर ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
THE INNER JOURNEY ::: अंतर्यात्रा
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समस्या पूर्ति

सबसे बड़ा अभिनेता हूँ मैं,कोई नहीं अब तेरे सिवाकोई नहीं अब मेरे सिवावादे ही वादे देता हूँ मैंसबसे बड़ा अभिनेता हूँ मैं,बताओ तुमको क्या चाहिये,जमीं चाहिये आसमां चाहिये,अभी के अभी देता हूँ मैं,...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
भारतीय नागरिक
भारतीय नागरिक-Indian Citizen
64

फार्म 17ए ने कराई फजीहत

इटावा- जि‍ले में एक ओर केन्द्रीय चुनाव आयोग ने इस बार के चुनाव में मतदाताओं को अपनी पसंद के साथ-साथ अपनी नापंसदी जताने का अधि‍कार तो दि‍या, लेकि‍न चुनाव आयोग का यह ब्रहमास्त्र इटावा में फजीहत ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Acharya Devesh  awasthi (Devesh Shastri)
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"मुझको दो वरदान प्रभू!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

मैं अपनी मम्मी-पापा के,नयनों का हूँ नन्हा-तारा। मुझको लाकर देते हैं वो,रंग-बिरंगा सा गुब्बारा।।मुझे कार में बैठाकर,वो रोज घुमाने जाते हैं।पापा जी मेरी खातिर,कुछ नये खिलौने लाते हैं।।मैं जब ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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कुछ पुरानी यादें... (कविताएं, गीत, भजन, प्रार्थनाएं, श्लोक, अनूदित रचनाएं)
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चंदा मामा

मामा बनते हो तुम चंदामेरे घर पर कभी न आते.तारों साथ रात भर रहतेपर बच्चों के पास न आते.घटते बढ़ते रोज रोज क्यों,पूरे तुम अच्छे लगते हो.इसका राज बताओ हमको,क्या तुम दूध नहीं पीते हो?कभी चांदनी लेक...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Kailash Sharma
बच्चों का कोना
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जान हमने भी गंवाई है वतन की ख़ातिर...

फ़िरदौस ख़ानइस देश के लिए मुसलमानों ने अपना जो योगदान दिया है उसे किसी भी हालत में नज़र अंदाज़ नहीं किया जा सकता। कितने ही शहीद ऐसे हैं जिन्होंने देश के लिए अपनी जान तक कुर्बान कर दी, लेकिन उन्...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
मेरी डायरी
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परीक्षा के दिन!

परीक्षा कैसी भी हो और किसी की भी हो, परीक्षा परीक्षा होती है । यह परीक्षा के दिन अन्य दिन के मुकाबले किस तरह भारी पड़ते हैं, यह वही अच्छी तरह समझ सकता है, जो परीक्षा के दौर से गुजर रहा होता है । हर ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Kavita Rawat
KAVITA RAWAT
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भारतीय नागरिक-Indian Citizen
69

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर विशेष : उर्दू-हिन्दी-बांग्ला-पंजाबी के मार्फ़त

                                                                                   &n...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Shahroz
Hamzabaan हमज़बान ھمز با ن
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यहाँ न तो लिंग भेद है और न ही गुलाब

पिछली पोस्ट पर जिसमें मैंने गुलाब की एक कली की तस्वीरें लगाई थीं,आशुतोष जी की ह्रदय को छूने वाली एक  टिप्पणी ने मुझे गेंहूँ और गुलाब की याद दिला दी. यह निबंध शायद हाईस्कूल में पढ़ा था और उस समय...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
भारतीय नागरिक
भारतीय नागरिक-Indian Citizen
62

वो... मेरा... अंतहीन एहसास है...

जाने क्या है वो ?कभी लगता है बस एक आवाज है वो...और कभी लगता हैके एक अजनबी एहसास है वो... रोज ख्वाबों मे ही होती है बस उससे मुलाकात और चुप चुप के होती है हर रात उससे फोन पे बात...कभी वो हँसती है कभी रोतीत...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Mahesh Barmate
माही....
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"अनिश्चित..!!"

कुंवारी नींद जब चल कर आती हैआखें बन जाती हैं मेरी स्वप्न नयना कौन जाने कल सवेरा हो न हो इस संसार में है निश्चित कुछ भी नहींसिर्फ अनिश्चित है, निश्चित हर क्षण में यहाँये तो पता नहीं कि हम फिर ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
suman sourabh
..Tum Suman..!!
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भारतीय नागरिक-Indian Citizen
259

गाहे-बगाहे हैं!

चलते चलते इतनी दूर चला आया मैंफिर भी लगती अजनबी सी राहें हैं लाख नज़ारे देखे होंगे राह-ए-सफ़र मेंना जाने क्यों फिर भी सूनी सी निगाहें हैंयूं तो तेरी यादों को साथ ले के चला थाअब गहराइयों में दिल क...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
surender
"ख़्वाबों का तसव्वुफ़"
113

Cellphone Clicks..

These are some pictures I've taken in the past using my 2 megapixel cellphone camera.. In fact that was my first taste of digital shooting, earlier I used to shoot on films.. Though I clicked so much on films using many of Kodaks and Yashikas but my passion for photography aroused only when I've got my first camera phone which is a 2 megapixel Nokia (Nokia N70-M), after that I experimented a lot and learned a lot, though it's very limited as one can not go through all the settings whic...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Prashant Suhano
SUHANO DRISHTI
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खुद पर खुद ही ख़ुफ़िया निगाह रखिये ….

अपनी बेगुनाही का हरपल गवाह रखियेखुद पर खुद ही ख़ुफ़िया निगाह रखिये.दस्तूरन ‘सच’ जब शक के दायरे में होहो सके तो ‘झूठ’ को गुमराह रखिये.बचना चाहो जो बेवजह के ‘सलाहों’ से औरों को लिए आप भी सलाह रखिय...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
M Verma
जज़्बात
75

कौन लौटाएगा उसके १४ साल जो निर्दोष ने जेल में गुज़ारे

१८ साल के आमिर को बना दिया गया था आतंकवादीआमिर अपनी माँ के साथ पुरानी दिल्ली के घर में चित्र साभार: हिन्दू  परवाज़ रहमानी की कलम से जब वह सिर्फ 18 साल का थावो गरीब माँ बाप का इकलौता बेटा था उम्र 1...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Shahroz
Hamzabaan हमज़बान ھمز با ن
67

jagit singh ji ko samrpit

visit.. http://www.mahaktepal.comहर एक शब्द तेरी रूह में जब उतरा है, पाके आवाज तेरी लफ्ज लफ्ज जिन्दा हुआ....तोड़ कर दिल तुमको बुला पास अपने, खुदा क्यों इस खता पर अपनी ना शर्मिंदा हुआ.तेरी गज़लों के नरम साये है ,आज हम तु...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
sakhi
sakhi with feelings
91

एक दीवाना था ..एक जिंदगी दो से एक बनी

एक नज़र पढते ही वो कोमलता के साथ कैसे हृदय में उतरी,  उसकी  उसको भी खबर न हुई . खबर हुई तब जब उसके अंदर एक बैचैनी ने जन्म ले लिया और कर दिया जुदा खुद से उसे.उसके भीतर ही भीतर रहने लगी थी वो बनके रूह ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
sakhi
sakhi with feelings..kahaniya/Articles
95

खेद प्रकाश....

6 वर्ष पूर्व
भारतीय नागरिक
भारतीय नागरिक-Indian Citizen
69

लाखो घर बर्बाद हो गए इस दहेज़ की होली में

मैंने एक जगह इस लाइन को पढ़ा था जो मैं आपके साथ शेयर करना चाहता हूँ लाखो घर बर्बाद हो गए इस दहेज़ की होली में]कितनी कन्यायें बेचारी बैठ न पाई डोली में]कितनो ने अपने कन्या के हाथ पीले करने में]कहाँ ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
KARTIKEY RAJ
समाज
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सच को खंगालती कविताएं ‘बीड़ी पीती हुई बूढ़ी औरत’

कोई भी रचना चाहे वह किसी भी विद्या मे हो, उन सभी की संरचनात्मक मांग वक्त की तमाम हालतों को अपने में अंतर्निहित करने की होती है। सच है कि उस समय के सम्पूर्ण संयोजन के अभाव में किसी बेहतर रचना का व...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
- अरविन्द श्रीवास्तव
67

वार

 वारतुम नजरों ही से बोला करो,तुम्हारे जुबाँ की फितरत,कुछ और होती है,नजरों से बयाँ करने की अदा,जुबाँ में नहीं मिलती.जुबाँ से किया हुआ वार,अश्लीलता की बौछारें लिए आता है,और नजरों की कटारी का मार...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
रंगराज अयंगर
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कुछ पुरानी यादें... (कविताएं, गीत, भजन, प्रार्थनाएं, श्लोक, अनूदित रचनाएं)
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"छुक-छुक करती आयी रेल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

धक्का-मुक्की रेलम-पेल।छुक-छुक करती आयी रेल।।इंजन चलता सबसे आगे।पीछे -पीछे डिब्बे भागे।।हार्न बजाता, धुआँ छोड़ता।पटरी पर यह तेज दौड़ता।।जब स्टेशन आ जाता है।सिग्नल पर यह रुक जाता है।।जब तक ब...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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