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नई हलचल

भेद ये गहरा बात ज़रा सी ......

सड़क किनारे बने हुए हवेलीनुमा मकानों के सामने  की सड़के हमेशा खूब साफ सुथरी होती हैं | उन घरों के नौकर रोज ही घरों से कचरे की बड़ी बड़ी पन्नियाँ उठा कर पास ही  बनी झोपड़ पट्टी के सामने फेंक आत...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
mamta vyas
मनवा
86

वनवास

ध्यान, साधना, सत्संग से कोसों दूरकंक्रीट के जंगल में सांसारिक वासनाओं और अहंकार तलेआध्यात्म रहित वनवासभोग रहा हूँ इन दिनों,मैं फिर से लौट कर आऊँगा जानता हूँ की तुम मुझे माफ करोगे  और ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
nilesh mathur
आवारा बादल
59

"इश्क..!!"

एक इश्क है दुनिया में जो दौलत से नहीं मिलती कहने को तो दुनिया में बाज़ार हजारों हैंइस हुस्न की दुनिया में दिलदार हजारों हैंएक तुम्ही को हमने इस दिल में बसाया हैकहने को तो दुनिया मे...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
suman sourabh
..Tum Suman..!!
58

हर दिन की शुरुवात....!!

मेरेप्यारे दोस्तों, आज का दिन एक और नया दिन है आपके जीवन में .इसके लिएप्रभु को धन्यवाद देना न भूले और इस दिन की तथा हर दिन की शुरुवात कुछ इस तरह से करे. १.      आँखे बंद करके दुनिया के लिए प्...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
THE INNER JOURNEY ::: अंतर्यात्रा
55

जीने की वजह .........

वैरी गुड morning .....कभी कभी सुबह की पहली किरण हमारे घर के दरवाजे की घंटी बजाकर हमारे हाथ में कुछ तोहफे दे जाती हैं ...सुंदर ..सलोने चमकदार कागज़ के एक लिफाफे में बंद होती हैं हमारी जिंदगी की सबसे बड़ी च...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Dr.Radhika Budhkar
आरोही
52

"मिलने आना तुम बाबा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

पापा की लग गई नौकरी,देहरादून नगर बाबा।कैसे भूलें प्यार आपका,नहीं सूझता कुछ बाबा।।छोटा घर है, नया नगर है,सर्द हवा चलती सर-सर है,बन जायेंगे नये दोस्त भी,अभी अकेले हैं बाबा।प्यारे चाचा-दादी जी की,...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
61

"देहरादून नगर बाबा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

पापा की लग गई नौकरी,देहरादून नगर बाबा।कैसे भूलें प्यार आपका,नहीं सूझता कुछ बाबा।।छोटा घर है, नया नगर है,सर्द हवा चलती सर-सर है,बन जायेंगे नये दोस्त भी,अभी अकेले हैं बाबा।प्यारे चाचा-दादी जी की,...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
59

मिटटी में खेलता बचपन

खो ना जाए मिटटी ही में उसे पनपने दोगे ना !अपने भागते जीवन में उसे भी जगह दोगे ना !कुचल तो नहीं दोगे ?अंधी दौड़ में कोई बचपन गति अन्धविकास कीथाम कर कुछ क्षण उसे राह दोगे ना !वो क्या ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
तरुण
Tarun's Diary-"तरुण की डायरी से .कुछ पन्ने.."
18

नींद उसकी ख़्वाब उसके ज़िक्र उसका हर घड़ी

सिराज फैसल खान की ग़ज़लें 1मुल्क़ को तक़सीम करके क्या मिला हैअब भी जारी नफरतों का सिलसिला हैदी है कुर्बानी शहीदोँ ने हमारेमुल्क तोहफे में हमें थोड़ी मिला हैहुक्मरानोँ ने चली है चाल ऐसीआम लोगोँ क...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Shahroz
Hamzabaan हमज़बान ھمز با ن
213

डाक-टिकट-संग्रह:शॊक ही नहीं,व्यवसाय भी

दुनिया में अलग-अलग किस्म के लोग पाये जाते हॆं.कुछ हॆं कि खाया-पीया,काम-धंधे पर गये ऒर रात को चद्दर तानकर सॊ गये.बस!यही हॆ उनकी दिनचर्या.न कोई फालतू का लफडा ऒर न ही कोई टॆंशन.समाज में कुछ लोग ऎसे भी...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
विनोद पाराशर Vinod Parashar
दिल्ली ब्लागर्स एसोशिएशन DELHI BLOGGERS ASSOCIATION
107

ऐसे में जनता कहां जाए...?

फ़िरदौस ख़ानदेश की राजधानी दिल्ली में विकास के प्रतीक लंबे-चौ़डे पुलों के नीचे ठंड से सिकु़ड़ते लोग आती जाती गाड़ियों से बेख़बर ख़ुद में ही सिमटे नज़र आते हैं. इन दिनों पूरा उत्तर भारत ठंड की ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
मेरी डायरी
43

प्याऊ वाली माई

आज वो चेहरा ज़हन में आ गया,मेरे मुश्कुराते चेहरे से हंसी ले गया,मन मुझसे आज पूछता है,क्यूँ तू इतना इठलाता है,अपनी कामयाबी के ऊपर,क्या चूका पाया तू अब तक,उस एक ग्लास पानी की कीमत,क्या है आज तुझमे व...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
अखिलेश रावल
"मेरे भाव मेरी कविता"
69

बड़ी मुश्किल से नींद आती है

ख्वाबो की दुनिया में रहने दो,कुछ पल गमो से दूर ले जाती है,सच का  भयावह चेहरे कोभूलने की महज एक यहीराह मुझको नज़र आती है,कुदरत कितनी खूबसूरत है,इसका अहसास मुझको कराती है,मुझको तुम जगाना नहीं बड...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
अखिलेश रावल
"मेरे भाव मेरी कविता"
66

अज्ञेय : कठिन परिचय की सरल इबारत

             अज्ञेय : कठिन परिचय की सरल इबारत  एक व्यक्ति था अज्ञेय। सच्चिदानंद, हीरानंद वात्स्यायन। अप्रैल को ‘है’ से ‘था’ होगया। सुंदर, भव्य, विराट, निर्बंध, अभेद्ध, अवेध्य व्यक्तित्...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Dr. Rahul Mishra
कही-अनकही-बतकही
83

हमसे साल नया फिर मिलने को है

उम्मीद को नया बहाना मिलने को हैहमसे साल नया फिर मिलने को हैदोस्त हमारे ये कह कर बुला लेते हैंमैखाने में हम से कोई मिलने को हैउनकी बातें सुनने बादल भी चले आयेबेमौसम पानी की बूँदें मिलने को हैवो...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Shankar M
Thoughtscroll
69

रचनाकार अपने आसपास घट रही घटनाएँ निरंतर देखें... (प्रमोद वर्मा संस्थान का तीसरा युवा रचना शिविर सम्पन्न)

नये रचनाकारों को लिखने से अधिक पढ़ना चाहिए। वरिष्ठ साहित्यकारों की रचनाओं को पढ़ना, आत्मसात करना फिर लिखना ही एक मंत्र है। अधिकांश नया लेखक हड़बड़ी में रहता है जबकि साहित्य की कोई भी विधा मु...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
- अरविन्द श्रीवास्तव
80

समझो सपनो का सच

छोड़ सपनो की दुनिया,हकीकत में आने का दर्द,सबको है खबर मगर,कोई ज़िक्र करता नहीं,मगर उस दुनिया की छाया यहाँ लाने की सबको चाहत है,नहीं कुछ भी असम्भव,बस एक बार पाने का,यत्न करने की देरी है|है यही इस द...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
अखिलेश रावल
"मेरे भाव मेरी कविता"
73

पिछले दिनों प्रकाशित कुछ आलेख

पिछले दिनों ,डाक से प्राप्त हुए कुछ प्रकाशित आलेख ।आलेखों को पढने के लिए छवि के ऊपर चटका भर लगा दें । आलेख अलग खिडकी में बडे होकर खुल जाएंगे जिन्हें सुविधानुसार पढा जा सकता है ।वीर प्रताप ,जालं...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
अजय कुमार झा
झा जी कहिन
77

ज्योतिषी भयो गुरु घंटाल,जनता भयो बेहाल...

आज चौबे जी की चौपाल लगी है राम भरोसे की मडई में । चटकी हुई है चौपाल । चुहुल भी खुबई है । खुले बरामदे में पालथी मारके बैठे हैं चौबे जी महाराज और कह रहे हैं कि "जब से ससुरी चुनाव ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
चौबे जी की चौपाल
77

तेरी महक.......

कुछ लफ्ज़ अपनी मोहब्बत के-बिखेर दो मेरे आँगन....इन हवाओं में घोल दो-अपनी चाहत की नमी...!!बरस जाओ बन के बादलमेरे जिस्म-ओ-जां पर...कि मेरी रूह का इक टुकड़ा भी प्यासा ना रहें...!!उतर आओ सितारों के झीने से इक...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Manav Mehta 'मन'
मानव 'मन'
51

दिल्ली टू मधुबनी ..वाया मोबाइल

जब से जेब में मोबाइल आया है , और कुछ हो न हो , फ़ोटो खींचने की शौक एक आदत सी बन गई है , और जो फ़ोटुएं निकल कर आती हैं तो हम भी खुश हो लेते हैं कि चलो ससुरा नेगेटिव तो नहीं निकल के आया । आप शायद यकीन न करें ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
अजय कुमार झा
कुछ भी...कभी भी..
91

उबाल

हो गयी ज्वाला शांत भले,लहू मगर अब भी लाल है,बहता रगों में यह लावा ,उतना ही विकराल है|दहशत पर दया का दान कब तक दे पाएंगे,गुनाह को गलती समझ,कब तक भुलायेंगे,अभी दिखी है थोड़ी हलचल,अब तमाशा शुरू होने क...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
अखिलेश रावल
"मेरे भाव मेरी कविता"
56

सरकारी स्कूल

राम रहीम सरजू बिरजू पोलियो वाली दुलारी सब कट्ठे ही रास्ता देखते है टीचर दीदी का जिसके सम्मान से गाव का लाला और सरपंच तक ईर्ष्या करते हैयही कही पढ़ाया जाता है पाठ समा...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
तरुण
Tarun's Diary-"तरुण की डायरी से .कुछ पन्ने.."
9

गूगल ब्लॉगर पर नयी सुविधा शुरू,अब आप किसी टिप्पणी पर अपनी राय विकल्प पर क्लिक कर दे सकते हैं

मनोज जैसवाल : गूगल ब्लॉगर पर नयी सुविधा शुरू।  टिप्पणियों को जवाब देने की सुविधा। जो वर्डप्रेस में थी अब ब्लॉगर  पर भी उपलब्ध है यानि अब आप किसी टिप्पणी पर अपनी राय Reply विकल्प पर क्लिक कर दे सकते...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
manojjaiswalpbt
मजेदार दुनियाँ
95

इन्तेज़ार

आखिरी मुलाकात अब भी याद है,कर खुद को राज़ी किया फैसला,इज़हार इश्क का उनसे हम करेंगे,आज दिल को खुली किताब बना देंगे,हर ख्वाब हर ख्वाहिश हर अरमान,हर खता का ज़िक्र कर देंगे|जाने कितनी शायरी करो बेक...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
अखिलेश रावल
"मेरे भाव मेरी कविता"
63

मकर संक्रांति

माघ माह का मकर संक्रांति पर्व 14 जनवरी शनिवार  को मनाया जाएगा। मकर संक्रांति  पर दान का विशेष महत्व है। दान में तिल और गुड़ देना विशेष फल देने वाला माना जाता है। परंपरागत रूप से लोहड़ी पर लोग ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
रौशन जसवाल विक्षिप्‍त
118


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