अपना ब्लॉग जोड़ें

अपने ब्लॉग को  जोड़ने के लिये नीचे दिए हुए टेक्स्ट बॉक्स में अपने ब्लॉग का पता भरें!
आप नए उपयोगकर्ता हैं?
अब सदस्य बनें
सदस्य बनें
क्या आप नया ब्लॉग बनाना चाहते हैं?
नवीनतम सदस्य

नई हलचल

sanket 5

 khadija khan ki kavita...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
anwar suhail
संकेत
90

महाविनाश और विलुप्तीकरण (Mass Extinction)

दुनिया मे विनाश और जातियोँ का विलुप्तीकरण एक प्रक्रिया है और उसे ईश्वर का समर्थन हासिल है। धरती पे पहले बहुत बार ऐसा हुआ है और आगे भी होगा इसमेँ कोई शक नही। कब होगा ये नहीँ पता। मगर होगा ही। धरत...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
vivek mishra
33

नरेन्द्र ही बनते है विवेकानंद बिरले !

स्खलित होता कुंठित ढोता अपेक्षाएं सहता उपेक्षाए प्रवंचना दू:साहस और स्वप्न के बीच भ्रम को ब्रह्म मानचौराहों पर बिकता कुचला जाता मेरे भारत का गौरव बन सको तो स्वयं...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
तरुण
Tarun's Diary-"तरुण की डायरी से .कुछ पन्ने.."
8

कुछ ख़त अजनबी पते पर अपनो के नाम ...

पहला ख़त मेरे गाव की मिटटी को जिससे ही पाया प्यार दुलार जहा अंकित हुवे स्वप्न आज भी अमिट है हे मातृभूमि !सदा वंदनीया !तुझे प्रणाम !भूली नहीं होगी तू मुझे मैं भले भूल जाऊं&nbs...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
तरुण
Tarun's Diary-"तरुण की डायरी से .कुछ पन्ने.."
8

‘‘अद्भुत है मेथी की माया’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

सब्जी है यह प्यारी-प्यारी।मेथी की महिमा है न्यारी।।गोल-गोल पत्तों वाली है।इसमें कितनी हरियाली है।।घोट-पीसकर साग बनाओ।या आलू संग इसे पकाओ।।यकृत को ताकत यह देगी।तन के सभी रोग हर लेगी।।इस...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
106

एक अज़नबी बनकर

“जिंदगी मिली एक अज़नबी बनकर,रोज़ आखोँ में कुछ नमी बनकर।“वो सोता रहा खुली आँखो से,सपने आते थे बेबसी बनकर,“एक चेहरा था सामने हर पल,और वादे थे परेशानी बनकर,“वो गुज़र रहा था यादोँ से,उस ज़माने की इक...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
vivek mishra
23

साहिल

जब हम बीच दरिया में थे,तो किनारों की ख्वाहिश थी,थपेड़े खाती कश्ती से रंजिश थी,देख नीर अपार नैनो में नीर था,पर इरादा कुछ और था तक़दीर का,आज धरा पर है कदम मेरे ,हर ओर हरियाली की चादर ओढ़े,खुशियों के ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
अखिलेश रावल
"मेरे भाव मेरी कविता"
50

No Title

23 मार्चकेबाद......जबखुदकोभगतसिंहका अनुयायीमाननेवालेसोनेलगेंपलकोंकीछांवमें....छुपनेलगेंज़ुल्‍फोंकेघेरेमें....ढूंढनेलगेंमोहब्‍बतकीगोद.....तबसहीहीहैभगततुम्‍हेंसिर्फएकयादकरारदेनाऔरतुम...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Anuja Shukla
अग्निगर्भा अमृता
47

संबंध...

संबंधों कोतोड् देते हैंकितनी निर्ममता से.......याबनने ही नहीं देते......याबनते हुए संबंध को ठहरा देते हैंकुछ संकोच..कोई हिचक..कुछ झूठ..कुछ अभिमान..कुछ अहं..कुछ आक्रोश..कुछ पूर्वाग्रह..कुछ दुख.. कुछ भय..क...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Anuja Shukla
अग्निगर्भा अमृता
53

No Title

भारत माता की जयकिअब भीइस रात जब क्रिकेट वर्ल्‍ड कप की जीत में दीवाली मनाई जा रही हैन जाने कितने कोनों में कितने बच्‍चे भूखे ही सो रहे हैंकितनी औरतें अपनी अस्‍मत का सौदा कर रही हैंन जाने कितने ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Anuja Shukla
अग्निगर्भा अमृता
38

No Title

सबसे ज्यादा पाई जाती हैं औरतें कविता में...पर वो औरतों की कविता नहीं होतींउन कविताओं का विषय औरतें नहींहोता है प्रेम .....प्रेम भी औरतों का नहीं होताहोता है औरतों से प्रेम...,सभी औरतों से प्रेम भी न...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Anuja Shukla
अग्निगर्भा अमृता
38

नए बरस का पहला दिन.....

तेज बारिश..छत से अविरल बहती पानी की धार...बिजली से आहत होबंद हुई ब्रॉडकास्टिंग को फिर से शुरू करने की जद्दोजहदघर का हुलिया दुरूस्‍त करते हुएझूमती हवा की ताल पर लहराती डालियों से आंखें चार करते ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Anuja Shukla
अग्निगर्भा अमृता
42

मकर सक्रांति की शुभकामनाये!

एकता व आस्था का त्योहार- मकर सक्रांति की शुभकामनाये,************************ एक ब्लॉग सबका में अपने ब्लॉग शामिल करने के लिए निम्न ई-मेल पर अपने ब्लॉग का यू.आर.एल.{URL} भेज दीजिए। sawaisinghraj007@gmail.com,  और   आप कमे...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
  Sawai Singh Rajpurohit
130

Sai Baba

There are no words to describe God..but yes, his hands are always on my head..Om Sai Ram...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
parul chandra
59

अधूरे ख़त ...

तुझे लिखूं तो क्या !तेरे कितने नाम लिखूं तू मेरा है सिर्फ मेरा तो नहीं तुझे क्या कहूँ इसी उलझन में कई ख़त अधूरे ही बिना नाम पता स्थगित / अनुत्तरित ही पड़े है ...कब से मानस के ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
तरुण
Tarun's Diary-"तरुण की डायरी से .कुछ पन्ने.."
8

खता

अश्को की सलामी देकर हम,उनकी राहों से विदा हो जाते,फिर ना कोई राह मिला दे,इस खातिर चलना छोड़ देते,उनके एक अश्क मोती से कम,कीमत है इस जान की ,मांग कर तो देखते एक बार,मुश्कुराते हुए अर्थी पर लेट जाते...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
अखिलेश रावल
"मेरे भाव मेरी कविता"
48

भ्रष्टाचार का हमाम और वोट की ताक़त!

बाबु सिंह कुशवाहा का नाम लेकर शोर मचाने वाले दलों में सबसे आगे रहने वाली कांग्रेस का दामन भी भ्रष्टाचार में अन्य पार्टियों की तरह ही मैला है। एक ओर तो कांग्रेसी युवराज राहुल गाँधी सीना ठोककर ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Shah Nawaz
37

कब तक तेरी जुदाई, सहता रहूंगा मैं

कब तक तेरी जुदाई, सहता रहूंगा मैं रो - रो के कबतलक यूँ, फिरता रहूंगा मैंक्यों सोचती नहीं तू, हालात एक बारतेरे बगैर मुश्किल, चलता रहूंगा मैंहै तय जो रास्ता मेरा, मुड़ता बहुत मगरयूं कबतलक हर मोड़ प...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
sidharth sarthi
सारथी...
55

वो मेरा अपना है...

उसके बारे में सोचूं...तो कुछ अजीब लगता हैवो मेरा अपना है, मेरे हर पल करीब रहता हैकभी लगता है इसने ऊंचाइयां तमाम छू लींइतना खुश तो इसे कभी कभी देखा हैये कभी अपनी उड़ान थाम लेता हैसहम जाता है कभी, ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
parul chandra
30

O welcome night !!

I am fond of photography, but yes...I don't have a SLR camera. I quench my thirst with my digital camera.:) This photo was clicked when i visited 'Chokhi Dhani' in Indore. The night was knocking...and i just welcomed it. ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
parul chandra
25

मेरी वसीयत - कर्नल गद्दाफी

"यह मेरी वसीयत है. मैं मोहम्मद बिन अब्दुल्लस्सलाम बिन हुमायद बिन अबू मानयर बिन हुमायद बिन नयिल अल फुह़शी गद्दाफ़ी, कसम खाकर कहता हूँ कि दुनिया में अल्लाह़ के अलावा कोई खुदा नहीं, और मोहम्मद ही ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Shah Nawaz
25

कागज़ की नाव है कविता

कविता जैसे कागज़ की नाव समय सागर में किनारे ढूंढ़ती सी तैरती रहती है नि:स्पृह ...छूती है परम को सहज ही नहीं छूती समय को या समय ही तैरता है उस नाव के नीचे उसी परम-आदर का शब...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
तरुण
Tarun's Diary-"तरुण की डायरी से .कुछ पन्ने.."
8

No Title

6 वर्ष पूर्व
yogendra pal
योगेन्द्र पाल की सूचना प्रौद्योगिकी डायरी
90

आशा के गानों के दीवाने हजारों हैं.....

(आधी सदी से भी ज्यादा समय से अपनी आवाज के जादू से लोगों को मदहोश करती आ रहीं आशा भोंसले इस इतवार 08.01.2012 को रांची में थी.कुछ पैसे वालों की मदद से इक अखबार ने उनका लाइव प्रोग्राम आयोजित किया था.यह खबर...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Shahroz
Hamzabaan हमज़बान ھمز با ن
60

O Ganesha !

This is my very first post. For a new beginning, I need the blessings of Lord Ganesha.This is a form of Ganesha, acrylic on paper.   ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
parul chandra
33

एक नि:शब्द कविता के लिए !

सोचता हूँ एक कविता ऐसी भी लिखूं जिसमे कोई शब्द ना हों जो शोर ना करे सुनाई ना दे दिखाई ना दे जो शांत हो ...जैसे बुद्ध है जैसे समय है नहीं वो घडी है जो टिक टिक है समय तो...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
तरुण
Tarun's Diary-"तरुण की डायरी से .कुछ पन्ने.."
9

"तितली रानी कितनी सुन्दर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

मन को बहुत लुभाने वाली,तितली रानी कितनी सुन्दर।भरा हुआ इसके पंखों में,रंगों का है एक समन्दर।।उपवन में मंडराती रहती,फूलों का रस पी जाती है।अपना मोहक रूप दिखाने,यह मेरे घर भी आती है।।भोली-भाली ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
109

मुसाफ़िर.....!!

इंजिन की तेज सीटी ने  मुझे नींद से उठा दिया ... मैंने उस इंजिन को कोसा; क्योकि मैं एक सपना देख रहा था.. उसका सपना !!!ट्रेन , पता नहीं किस स्टेशन से गुजर रही थी, मैंने अपने थके हुए बुढे शरीर को खिड़की वा...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
कहानियो के मन से .....
118


Postcard
फेसबुक द्वारा लॉगिन