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नई हलचल

शैलेश भारतवासी को जानते हैं ?

हिन्दी की ई-संस्था है शैलेशअगर आप इंटरनैट पर हिन्दी टाईप करने में किसी दिक्कत का सामना कर रहे हों या फिर आप इंटरनैट पर आप हिन्दी लिखने पढने में रुचि रखते हैं तो ये लेख आपके लिए ही है।-----------------------------...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
प्रकाश बादल
प्रकाश बादल
76

ऐसा नहीं कि ज़िन्दा जंगल नहीं है....

ऐसा नहीं के ज़िंदा जंगल नहीं है। गांव के नसीब बस पीपल नहीं है। ये आंदोलन नेताओं के पास हैं गिरवी, दाल रोटी के मसलों का इनमें हल नहीं है। चील, गिद्ध, कव्वे भी अब गीत गाते हैं, मैं भी हूं शोक में, अकेल...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
प्रकाश बादल
प्रकाश बादल
80

दो कवितायें - मूक प्रश्न / संवाद

- मूक प्रश्न - (कविता)बीजगणित के "इक्वेशन"भौतिकी के "न्युमैरिकल"और जैविकी की "एक्स्पैरिमेंट्स"से परे भी,एक दुनिया हैभूख और गरीबी से सनी हुयी !वहीँ मिलूँगा मैं तुम्हेंयदि तुम मेरे मित्र हो तो आओइ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
prakash govind
63

आस

आसबड़ी आस थीउनदिनों,के मेरे ज्वलंत मस्तक परतुम अपने होंठों से ठंडी ओस मलते,औरमेरी समस्याएंछनछनाकर भाप बन उड़ जातीं.तुम्हारी बाहों मेंमेरा हर भार होताऔर मैं पेंग बढाकरआसमान तक हो आती.तुम्हारे...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
AJANTA SHARMA
अजन्ता शर्मा
44

WELCOME

Dear Friends, very soon I will take you all to the world of comics. Enjoy your childhood . Regards Vijay M : +91 9849746500 E : vksappatti@gmail.com...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
THE INDIAN COMICS भारतीय कॉमिक्स
87

महाभारत

(१९८९मेंबनीपीटरब्रुक्सकीफ़िल्म'महाभारत'काएकदृश्य)महाभारतकथा नहींसत्य है हमारे समय काऔर हर उस समय काजहाँकन्फ्यूज्ड प्रतिबद्धताएं,मिसप्लेस्ड आस्थाएं,मूल्यहीनता और अवसरवादहों जीवन के म...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
71

आग

१-दीये की लौ सेचिता की लपटों तकजीवन का रिश्ताआग का रिश्ता।२-सात फेरे अग्नि के....चलेंगे साथ-साथजीवन केअग्निपथ पर।३-न जली आगचूल्हे मेंन बुझ सकी आगपेट की।४-आग सुलगेदिलों में तोप्रेमगीत ,दिमागों ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
72

समझ सको तो समझ कर देखो, इस्लाम सरापा रहमत है

मुस्लिम तंज़ीमों ने दहशतगर्दी को इस्लाम से जोड़ने पर गुस्से का इज़हार किया है... गुज़श्ता रोज़ नई दिल्ली में मुंअक़द अहले-हदीस की कांफ्रेंस में मुक़र्रेरीन ने कहा कि जो ज़ालिम है वही आज दहशतगर्...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
جہاںنُما
115

यूरोप की सबसे बड़ी मस्जिद अवाम के लिए खोली

और...अब एक ख़ुशख़बरी... रूस के जनूबी सूबे चेचन्या के दारूल हुकूमत गरोजनी में यूरोप की सबसे बड़ी मस्जिद की तामीर का काम मुकम्मल होने के बाद इसे अवाम के लिए खोल दिया गया है...तफ़सील के लिए http://www.urdusahara.net/news.aspx...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
جہاںنُما
64

बेटियाँ

वे हमारे चारो ओरबिखरी रहतीं हैं सुगन्धि की तरह , सौंदर्य और मासूमियत के एहसास की तरह ,ईश्वर के होने की तरह। जन्म के पूर्व ही मिटा दिए जाने की हमारी छुद्र साजिशों के बीच वे ढीठ उग आती हैं हरी डूब क...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
48

रोजाना

(कविता)देखिये जनाब,आज का दिन,फिर ऐसे ही गुजर गया,मै सुबह उठा,चाय, सिगरेट, अखबार,यानी वही सब रोजाना के बाद,मै यही सोचता रहा,किआख़िरऐसाकबतकचलेगा !!********************************फिर जनाब मै दफ्तर गया,फाइल, दस्तखत, साह...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
prakash govind
61

दास्तान - ए - लोकतंत्र

- व्यंग कथा -उसबस्तीसेबाहरजानेवालेरास्तेपरएकविशालपत्थरपड़ाथा ! बस्तीवालोंनेकईबारसरकारीसंस्थाओंसेगुहारकीथीकिउसपत्थरकोहटादियाजाएक्यूंकिउससेआमजनताकोबड़ीपरेशानीहोतीहै , लेकिनजैसा...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
prakash govind
66

नदी जो कभी थी ...

नदीदेर तक इठलाती रहतीआलिन्गनबद्ध,बातें करतीन जाने कितनी देर।छोटी सी नाव मेंहिचकोले लेती , निहारतीलहरों और चन्द्रमा कीलुकाछिपी।नदी तब छेड़ देतीवाही पुराना गीतजो बरसों से गाती हैं'गवांर' और...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
48

पहले हम तो सुधरें .......

ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल के ताजा आँकड़ों के मुताबिक भारत भ्रष्ट देशों की सूची में ८५ वें पायदान पर है ! पिछले साल के मुकाबले भारत १२ पायदान ऊपर चढ़ा है ! पिछले साल हम चीन के साथ ७२ वें स्थान पर थ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
prakash govind
61

खिड़की के पास वाला पेड़

रात के चौथे पहरअंधेरे मेंतन कर खड़ा वह पेड़ ,यौवन से आप्लावितमानो प्रतीक्षा मेंप्रेयसी की।निर्भीक , निश्चिंतहवा के झोकों संग हिलतान हो उतरा नशामानो अभी तकरात की मदिरा का।मद्धम चाँदनी मेंपत्...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
52

क्यूँ बदल रहा है बचपन ?

यूँतोबड़ोंजैसादिखनाऔरबननाहमेशाहीबच्चोंकीफितरतहोतीहैलेकिनआजकलयहप्रवृत्तिकाफ़ीबढ़गईहैऔरग़लतरूपमेंविकसितहोरहीहैयहीवजहहैकिवेकमउम्रमेंहीबड़ोंकितरहव्यवहारकरनेलगतेहैंउनकीमास...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
prakash govind
60

कौन हूँ मैं...

प्रश्न कुछ ऎसे हैं जिनसेरोज होता रूबरू मैंकौन हूँ क्या चाहता हूँजानने की पीर हूँ मैंइंतहानों को दिये अबसाल बीते हैं बहुतअब भी मगर ये स्वप्न मेंआकर डराते हैं बहुतज्ञान जो निर्भय बनायेपाने क...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Reetesh Gupta
भावनायें...
88

दहशतगर्द

तुमस्कूल जाते बच्चों केबस्तों मेंभर दोगे बारूदपरियों की कहानियों वालीकिताबों की जगह।उनके नन्हे-मुन्ने हाथों मेंपकड़ा दोगेबंदूकें,कलम की जगह ।इमले की जगहउनकी तख्ती परलिख दोगे इबारतआतंक क...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
49

विस्मृति

पूर्वज,चौराहों पर लगे,कौओं और कबूतरों कीबीट से लिथड़ेतुम्हारे बुत।तुम्हारी विस्मृति केस्मृति-चिह्न ।...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
51

भरे पेट का ज्ञानयोग...

भरा पेट खाली पेट पर आसन जमायेपास रखी रोटी को पाने कीअसफ़ल कोशिश कर रहेखाली पेट से कहता हैरोटी तक पहुँचने काआसान रास्ता न चुनो मित्रभूख पर विजय हीहमारे स्वर्णिम भविष्य...भविष्य शब्द पर अचानक भर...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Reetesh Gupta
भावनायें...
75

ग़ज़ल

ग़ज़ल पढ़ने के लिए ग़ज़ल पर क्लिक करें......  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
جہاںنُما
64

इन्द्र धनुष

मुंडेर से उतर करधूपबरांडे केदूर वाले छोर परअटक जाती है।न जाने क्यों ?घिर जाता है मनएक उदास खामोशी से।सुगन्धि का एक वलयतैर जाता हैआंखों के आगेयादों का इन्द्र धनुषखिंच जाता हैमन के एक सिरे सेद...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
53

अमर शहीद नवाब अब्दुर्रहमान खां को सलाम

पेशकश : सरफ़राज़ खान1857 की जंगे-आज़ादी में हरियाणा का भी अहम योगदान रहा है। जंगे-आज़ादी का बिगुल बजते ही झज्जर के नवाब अब्दुर्रहमान ख़ां ने भी अपने देश को गुलामी की जंजीरों से आजाद कराने के लिए तलवा...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
جہاںنُما
66

आम आदमी की कविता

वह अधनंगा,मरियल सा आदमीजो अभी-अभीतुम्हारी विदेशी कार केनीचे आते आते बचा है।और जिसके बारे मेंसोच रहे हो तुमकि क्यों बनाता है ऊपर वालाऐसे जाहिलों को,नहीं है जिन्हें तमीजठीक से सड़क पर चलने तक क...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
53

आतंकवाद का महिमा मंडन कब तक ?

आतंक का नंगा नाच जारी है कब कहाँ बम फट जाए कुछ नही कहा जा सकता आतंकवादी पूरे देश में खून की होली खेल रहे हैं जैसे ही कहीं बम फटता है मीडिया का पूरा लाव लश्कर वहां पहुँच जाता है। उसके बाद टीवी के द...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
prakash govind
63

गेट वेल सून ..... राज मामू

अभीजबचीनमेंओलम्पिकहोरहाथातोभारतसेकाफ़ीलोगगएथे , जिसमेअनेकमीडियाकर्मीभीशामिलथेवहांभारतीयभोजनकीकाफ़ीदिक्कतथी, कुछहोशियारलोगोंनेइन्टरनेटकीमददलीऔरवहांभीऐसेदर्जनोंरेस्ट्रोरेन्...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
prakash govind
59

एक ग़ज़ल मेरे शहर के नाम

आख़िर बदइंतजामियों की कोई इन्तिहाँ तो हो।मेरे शहर के हाल पर कोई तप्सरा तो हो।गड्ढों में सड़क गुम हैं, सीवर उफ़ान पर,हाकिम को इंतज़ार कोई हादसा तो हो।बदलेगा ये निजाम भी हर दौर की तरह,सीनों में आग, ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
49

हाय मीडिया

यहकितने शर्म की बात है भारत में टी वी के चैनल्स पर जिन फूहड़ और ऊलजलूल चीजों को समाचार के नाम पर परोसा जा रहा है उनका विरोध उतना नही हो रहा है जितना होना चाहिए. जब हम दूसरे देशों के चैनल्स को देखत...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
prakash govind
62

नई तहजीब

नंगापननया मंत्र हैसभ्यता का।स्वतंत्रता और स्वच्छंदताहैं गडमड।विचार करना है पिछड़ापनसोचना छोड़ो।कपड़े उतार डालोअपने नहीं तो दूसरों के।नंगे हो जाओयही है आज की मांग।नंगापनविचार में,भाषा में,...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
43

शब्द सन्दर्भ

शब्दसांत्वना और संवेदना कीरसधार से संपृक्तस्नेह और पीड़ा केआदिगीत,मास्टर जी की बेंत और अम्मा की लोरी से अभिमंत्रित,सीपियों और कंचों से निर्मल जगमग शब्द। प्रेमपत्रों से आती मेहंदी की सुगंध म...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
53


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