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नई हलचल

कि;

आज एक बेहद हलकी सी कुछ पंक्तियाँ..कि;कि; वे दोनों एक-एक जगह के रईस हैं..!कि; उन दोनों की पहुँच बाकी की पहुँच से बाहर है..!कि; वे दोनों एक दूसरे को अपनी बता देना चाहते हैं..!कि; दोनों सामने वाले को अपन...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
41

यूँ ही बस इधर-उधर विचरना मन का

डायरी के पन्नों में क्या कुछ आ जाता है..कई बार उसकी कोई खास वज़ह नहीं होती, यूँ ही बस इधर-उधर विचरना मन का...कोई सन्दर्भ- प्रसंग नहीं..बिलकुल ही उन्मुक्त....उनमे से कुछ आपके समक्ष...किस्मत से मै भिखार...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
49

सुनहरी रेत का.घरौंदा

बचपन में रेत के घरौंदे तो हम सभी ने बनायें हैं ...वो सुनहरी..गीली रेत का गुम्बदनुमा घर बनाकर उसके भीतर हाथों से सुरंगें बनाना.....मैं और मेरी सहेली भी यूँ ही खेला करते थे...ये सुरंगें जब पूरी हो जातीं...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
neha sharma
मेरी कहानी
48

सुन्दरतम है...!!!

आज की कविता अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी  जी की लेखनी से है. आप जवाहरलाल नेहरू विश्विद्यालय, नई दिल्ली में आचार्य नामवर सिंह के निर्देशन में शोधरत हैं . आप  फैजाबाद के मूल निवासी हैं और ब्...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
नवोत्पल
44

बिलासपुर में नन्हें फूल बिखेर रहे कविता की ख़ुशबू

बच्चों को कविता लेखन के प्रोत्साहन हेतु एक कार्यशाला का आयोजन50 बच्चे ले रहे भागबेटियों की प्रतिभागिता अधिकइन दिनों हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में ज़िला भाषाधिकारी डॉ0 अनिता के आग्रह पर मैं एक...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
प्रकाश बादल
प्रकाश बादल
89

पचासवीं पोस्ट और मेरी पहली कहानी..."उन्माद की उड़नतश्तरी"

पचासवीं पोस्ट और मेरी पहली कहानी..."उन्माद की उड़नतश्तरी"यह आज मेरी 50 वीं प्रविष्टि है. शुरू-शुरू में बस ब्लोगिंग क्या होती है; इस आशय से शुरू किया था. पर जब मैंने देखा कि एक विशाल और विज्ञ पाठक सम...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
34

नायक नेपथ्य में चला जा रहा था-- गाँधी और मै: सुशील यादव

[देखिये ना गाँधी किन-किन के लिए क्या-क्या हैं .इसतरहा है महामना गाँधी की व्यापकता..सुशील जी गहरे सरोकारों के लेखक हैं. इनकी कुछ बेहतर रचनाएँ "हम तो कागज मुड़े हुए हैं" पर जाकर पढ़ी जा सकती ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
96

एक बात पूछना वह कभी नहीं भूलती...‘ कल आओगे न..!!!

 [नवोत्पल के ब्लॉग-संस्करण का शुभारम्भ कर रहा हूँ, अभिनव उपाध्याय जी की कविता से. दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविध्यालय में राजनीति शास्त्र में शोधरत और 'दैनिक आज समाज' दिल्ली में सक्र...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
नवोत्पल
46

यदि हर राज्य की शिक्षा प्रणाली में एक स्तर पर मौलिक समानता होती..कई जरूरी विभिन्नताओं के साथ तो...

आज सोचा कुछ कैम्पस-चर्चा हो जाए. JNU की प्रवेश परीक्षा प्रणाली बड़ी अलहदा है. लगभग हर स्कूल के हर सेंटर की थोड़ी अलग-अलग. देश भर में और कुछ देश से बाहर भी इसके सेंटर बनाये गए हैं जहाँ प्रवेश परीक्षा...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
84

नवोत्पल साहित्यिक मंच

मै हमेशा सोचता हूँ कि ब्लॉग से लोगों की डायरियों के भीतर रचा जा रहा साहित्य बाहर निकला है. साहित्य यदि समाज का दर्पण है तो इसे रचने-गढ़ने और पढ़ने में समाज का हर व्यक्ति शामिल होना चाहिये. ब्लाग...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
नवोत्पल
49

सड़क

[गोरखपुर से सीधे दिल्ली आया तो बहुत कुछ झेलना पड़ा था..उन्हीं दिनों में लिखी थी एक कविता अनगढ़ सी..एक शाम का सच है ये..मै भीड़-भाड़ वाली सड़क से चला जा रहा हूँ और क्या-क्या सोचते जा रहा हूँ..लोग टकर...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
45

हमारा प्रेरणा स्त्रोत

लोग कहते है कि माजी* इतिहास बनता है।लेकिन हम कहते है कि मेरा माजी प्रेरणा और एक आश बनता है॥*माजी का तत्पर्य है बीता हुआ कल...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
VIVEK SACHAN
khuch bhikhri yaden --कुछ बिखरी यादें
67

प्रभाष जी को गोरखपुर ने निराश नहीं किया-रोहित पाण्डेय

[अब जबकि लोग इस पर भी लिखने लगे हैं कि 'प्रभाष जी पर इतना रूदन क्यूँ और पहले भी तो शलाका पुरुष गुजरे हैं'....फिर सदाग्रह पर एक और लेख देना कैसा होगा..? मै सोचने लगा. सोचने मै ये भी लगा कि लोग इतना क्यूं ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
82

मी मंदबुद्धि मुंबईकर बोलतो आहे

रामदास कदम को एनडीटीवी पर बोलते सुना। शुक्र है उनका कि यहां वह हिंदी में बोल रहे थे। उसी हिंदी में जिसमें शपथ लेते समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी के साथ उन्होंने हाथापाई की। इसे कहते हैं द...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
अनुराग अन्वेषी
53

वह प्राणवान भावावेश-प्रभाष जोशी

{प्रखर पत्रकार और गाँधीवादी विचारक प्रभाष जोशी का असमय गुजर जाना.......}रात दो बजे मोबाइल की घंटी बजी तो एक बार तो बंद कर दी। पर वह फिर बजी। दूसरी तरफ रवीन्द्र त्रिपाठी थे। एक दुखद खबर, इससे शुरू कर ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
98

शब्द मेरी माँ जैसे हैं..

{आजकल खासा व्यस्त हूँ, और शायद आगे भी रहने वाला हूँ. चाहकर भी मित्रों की ब्लॉग-प्रविष्टियाँ पढ़ नहीं पा रहा हूँ. एहसास है कि क्या खो रहा हूँ...कुछ लिख भी नहीं पा रहा हूँ. पर जल्दी ही सबकुछ व्यवस्थित...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
71

Meeting with Life

Disclaimer: This piece of writing “Meeting with life” is an old product of my thoughts  …..I have written it in 2009 and put it on my blog, however recently by mistake I deleted it, so again putting it here.It was a cold morning of November 2009 but since I am in Hyderabad so this is not that much cold as you imagine it….. :)  that morning I met my life,...yes my life...... her emergence was beautiful, she was looking like my dream girl; long hair, innocent face, black eye...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Pritesh Dubey
Pritesh - Cut to Cut
70
Vivek Vaishnav
18

अब कौन करेगा 'कागद कारे'

खामोश हो गई एक मुखर आवाज। हमेशा के लिए खामोश हो गए प्रभाष जोशी। हिंदी पत्रकारिता का एक युग खत्म हो गया। पत्रकारिता जगत में प्रभाष जोशी के मुरीद भी हैं और आलोचक भी। पैसे लेकर चुनावी खबरें छापने...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
RAVINDRA RANJAN
आशियाना Aashiyana
58

घर की याद

भवानी प्रसाद मिश्र ने यह कविता जेल में लिखी थी। चूंकि वह भी देश की आजादी के लिए अंग्रेजों से लड़ रहे थे, लिहाजा, कुछ वक्त के लिए अंग्रेजों ने उन्हें भी जेल में कैद कर लिया था। जब वह जेल में थे बार...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
अनुराग अन्वेषी
52

"रोज सुबह मन में एक गांधी को लेकर उठता हूं" गाँधी और मै-अभिनव उपाध्याय

मुझे लगता है कि मैं आज तक गांधी को ठीक से जान नहीं पाया। बहुत सारी छोटी, बड़ी, पतली मोटी किताबें पढीं,लोगों की टिप्पणियां  पढ़ी लेकिन हर बार लगा गांधी केवल इतने ही नहीं हैं अभी इससे अलग हैं।  ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
75
दुनिया
50
दुनिया
51

अब, जबकि..!

सोचा, आज उस पर एक कविता लिखूंगा, पर.....कैसे..? जबकि, मेरे दिमाग में केवल तुम हो, कविता के लिए शब्द कैसे खोजूं ..?जबकि, मेरे दिल में सिर्फ तुम्हारा रंग छाया है कविता को कोई और रंग कैसे दे दूं..? &nb...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
39

व्यक्ति को , विकार की तरह पढ़ना , जीवन का अशुद्ध पाठ है...गाँधी और मै--अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी

किसी सोच का दायरा इतना बड़ा हो सकता है ; यह गांधी जी पर सोचते हुए महसूस होता है क्योंकि गाँधी जी पर सोचना खुद पर सोचना है परिवेश पर सोचना है, इतिहास पर सोचना है, भविष्य पर सोचना है, संस्कृति पर सोच...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
55

बेनामियों के मारे ब्लॉगर बेचारे

ऐतिहासिक शहर इलाहाबाद में संपन्न हुई दो दिनी 'ब्लॉगर मीट' (कुछ लोगों को इस शब्द पर आपत्ति है) के दौरान वैसे तो बहुत कुछ उल्लेखनीय हुआ। लेकिन मेरे खयाल से इस संगोष्ठी को सबसे ज्यादा याद किया जाएग...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
RAVINDRA RANJAN
आशियाना Aashiyana
61

नयी पौध की नीम के पेड़ पर अर्द्धनारीश्वर चर्चा

अंतरतम से और सर्वत्र से संवाद अल्केमिस्ट में वृद्ध पाउलो कोएलो भी चाहते हैं और जवान चेतन भगत भी. one night @call centre में चेतन भगत inner call की बात करते हैं. सरल इंग्लिश में लिखी गयी किताब, प्रवाहमयी. पर ९०% किताब...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
51

गांधी और मैं -रोहित पाण्डेय

[...जबसे होश सम्हाला है...गांधी की चर्चा सुनी है तो गांधी सबके हैं, सबके भीतर...पर क्या वाकई सबके भीतर हैं...? तो सबसे पहले मैंने खुद को टटोला..और जो पाया वो लिखा था  "गांधी और मै"शीर्षक से..अब बारी है श्...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
60

क्या हम कभी इतने 'सभ्य' नहीं रहे कि 'हाशिया' ही ना रहे...?

आज दीवाली है, खासा अकेला हूँ. सोचता हूँ, ये दीवाली, किनके लिए है, किनके लिए नहीं. एक लड़की जो फुलझड़ियॉ खरीद रही है, दूसरी बेच रही है, एक को 'खुशी' शायद खरीद लेने पर भी ना मिले, और दूसरी को भी 'खुशी' शाय...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
44

इस दीवाली एक सदाग्रह..

सदाग्रह इस दीवाली आप सभी से अपील करता है..१. मोमबत्ती नहीं दीप जलाएं. २. पटाखों में मितव्ययिता बरतें. ३. अपने आस-पास के वातावरण को स्वच्छ बनायें. ४. इस दीवाली पर अपना पर्यावरण प्रेम व्यक्त करें. ५. ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
64


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