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कुख्यात शिकारी दरिया गिरफ्तार

कॉर्बेट नॅशनल पार्क के बिजरानी रेंज में 24 मई 2012 को बाघ को पकड़ने के लिए कुछ कड़के बरामद हुए थे। इसके साथ ही यहाँ किसी वन्यजीव की आंते और मांस भी बरामद हुआ था। जिसे उस समय पार्क प्रशासन ने सेही का ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
ATUL WAGHMARE
0

कुख्यात शिकारी दरिया गिरफ्तार

कॉर्बेट नॅशनल पार्क के बिजरानी रेंज में 24 मई 2012 को बाघ को पकड़ने के लिए कुछ कड़के बरामद हुए थे। इसके साथ ही यहाँ किसी वन्यजीव की आंते और मांस भी बरामद हुआ था। जिसे उस समय पार्क प्रशासन ने सेही का ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
corbettnews
कॉर्बेट न्यूज़
83

एन टी सी ए की नयी गाईडलाइन

इस ब्लॉग के लिए यह जानकारी महेंद्र सिंह पंवार ने भेजी है, श्री पंवार एक वन्यजीव प्रेमी हैं, और रामनगर के स्थानीय नागरिक हैं, वन और वन्यजीवों के संरक्षण में प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से इनका योगद...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
ATUL WAGHMARE
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एन टी सी ए की नयी गाईडलाइन

इस ब्लॉग के लिए यह जानकारी महेंद्र सिंह पंवार ने भेजी है, श्री पंवार एक वन्यजीव प्रेमी हैं, और रामनगर के स्थानीय नागरिक हैं, वन और वन्यजीवों के संरक्षण में प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से इनका योगद...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
corbettnews
कॉर्बेट न्यूज़
74

तस्वीर

जो जिंदगी धड़कनों में गुजरीशमा उसकी तस्वीर ही तो हैयाद से दिल बहलता रहाइक तमन्ना सताती तो हैआसमां जो पड़ गया नीलाये दर्द की तासीर ही तो हैजंजीरे-दर उदास सी रहीसबा कुछ गुनगुनाती तो हैदिन यूं ब...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
ATUL WAGHMARE
0

तस्वीर

जो जिंदगी धड़कनों में गुजरीशमा उसकी तस्वीर ही तो हैयाद से दिल बहलता रहाइक तमन्ना सताती तो हैआसमां जो पड़ गया नीलाये दर्द की तासीर ही तो हैजंजीरे-दर उदास सी रहीसबा कुछ गुनगुनाती तो हैदिन यूं ब...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
बृजेश नीरज
Voice of Silent Majority
49

"क्या हो गए हैं यारों"

Print this pageहम क्या थे अब क्या हो गए हैं यारों, भूल अपनी मर्यादा बेपर्दा हो गए यारों।चारो तरफ है फैला जुर्म का काला साया,               अब साये से भी डर लगने लगा है यारों।    रौ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
ATUL WAGHMARE
0

"क्या हो गए हैं यारों"

Print this pageहम क्या थे अब क्या हो गए हैं यारों, भूल अपनी मर्यादा बेपर्दा हो गए यारों।चारो तरफ है फैला जुर्म का काला साया,               अब साये से भी डर लगने लगा है यारों।    रौ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Rajendra kumar
भूली-बिसरी यादें
61

लेकिन पाकिस्तान, हिन्दु का करे कलेवा-

मेवा खा के पाक का, वाणी-कृष्णा-लाल |ठोके कील शकील नित, वक्ता करे हलाल  |वक्ता करे हलाल, कमाई की कमाल की |मनमोहन ले पाल, ढाल यह शत्रु-चाल की |लेकिन पाकिस्तान, हिन्दु का करे कलेवा |खावो कम्बल ओढ़, मियाँ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
रविकर की कुण्डलियाँ
48

पुरस्कार जो पाय, आय हमको वह विधि- ना

वाह, वाह!...क्या कहने! Aruna Kapoor  मेरी माला,मेरे मोती... विधिना लिखकर सो गए, अपने अतुल विधान |सरेआम अदना अकल, डाले नए निशान | डाले नए निशान, शान से कविता रचते |उद्वेलित हो हृदय, तहलके जमके मचते |स्वान्...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
"कुछ कहना है"
54

’कथादेश’ की मौजूदा बहस और उद्भ्रांत

प्रिय मित्रों, आपको स्मरण होगा कि गत वर्ष ‘कथादेश’ के मई, 2012 अंक में प्रकाशित, दो पूर्ण कविताओं के संदर्भ में सुश्री शालिनी माथुर के लेख पर मेरी पहली स्वतःस्फुट टू दी प्वाइंट टिप्पणी को पत्रि...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
44

’कथादेश’ की मौजूदा मैराथन बहस और उद्भ्रांत की टिप्पणी

प्रिय मित्रों, आपको स्मरण होगा कि गत वर्ष ‘कथादेश’ के मई, 2012 अंक में प्रकाशित, दो पूर्ण कविताओं के संदर्भ में सुश्री शालिनी माथुर के लेख पर मेरी पहली स्वतःस्फुट टू दी प्वाइंट टिप्पणी को पत्रि...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
23

बदनसीबी,

मुझे जिन्दगी ने रुलाया बहुत है, मेरे दोस्त ने आजमाया बहुत है!कोई आ के देखे मेरे घर की रौनक,मेरा घर गमो से सजाया बहुत है!हटा लो ये आँचल मुझे भूल जाओ,सर पे बदनसीबी का साया बहुत है! घर तो क्या मै य...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
dheerendra singh bhadauriya
काव्यान्जलि
71

मैं मरने के पहले एक बार चीखूंगा जरूर

जीने से पहले मर जाना बुजदिली है तो चीखो ............. मरने से पहले खुली सांस लो हवाओं को आत्मसात करो ............मैं भी चीखना चाहती हूँ मरने से पहले और चीखूंगी ज़रूर ....रश्मि प्रभा ================================================...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
परिकल्पना
54

टीस-

बाह्य बोल रहा है - निरंतर अन्दर की ख़ामोशी चट्टान हो गई है तुम किससे मिलना चाहते हो उससे जो उदासीन है दर्द से या उससे जिसके भीतर दर्द ने पनाह ले ली है गहरे रिश्ते की तरह ...उदासीनता तुम्हे...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
वटवृक्ष
65

गरीबी दूर हो सकती है

इस 'ग्रीष्मप्रधान' देश में भी बारहों महीने 'टाई' पहनने के लिए अभिशप्त जो लोग देश के लिए नीतियाँ बनाते हैं (या नीतियाँ बनाने के लिए नेताओं को सलाह देते हैं), वे अपनी अक्ल इस्तेमाल करने के बजाय नकल ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
जयदीप शेखर
देश-दुनिया
112

राम-सेतु का अंश सुन, खफा हो रहे शाह

महाकुंभ में इन दिनों एक पत्थर पूरे मेलें में सुर्खियां बटोर रहा है। इस अद्भुत पत्थर पर प्रभु राम का नाम भी लिखा गया है।  BharatYogi.net * भारत योगी*  पत्थर पानी में पड़ा, करे तैर अवगाह |राम-सेतु का अ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
रविकर-पुंज
54

दहेज

मैंने ये लाइनें एक किताब में पढ़ी थी जो आज मैं आप सबके साथ बांटना चाहता हूँ ........पैसे की हवस ने जगाया, मन मे जब असन्तोष,उचित – अनुचित का रहा ना मानव को तब होश।बाजार में फल स्वरूप लड़के लगे बिकने,ल...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
KARTIKEY RAJ
समाज
86

राजनीतिक सोच :भुनाती दामिनी की मौत

राजनीतिक सोच :भुनाती दामिनी की मौत''आस -पास ही देख रहा हूँ मिट्टी  का व्यापार ,चुटकी भर मिट्टी की कीमत जहाँ करोड़ हज़ारऔर सोचता हूँ आगे तो होता हूँ हैरान ,बिका हुआ है  मिट्टी के ही हाथों इंसान .'...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHALINI KAUSHIK
! कौशल !
78
Copy & Pest
105

ज़माना ख़ुदा को खु़दा जानता है- यगाना चंगेज़ी

ज़माना खु़दा को ख़ुदा जानता हैयही जानता है तो क्या जानता हैवो क्यों सर खपाए तेरी जुस्तजू मेंजो अंजामे-फ़िक्रेरसा जानता हैख़ुदा ऐसे बंदों से क्यों फिर न जाएजो बैठा हुआ माँगना जानता हैवो क्यो...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Devendra Gehlod
Jakhira, Shayari Collection | जखीरा, उर्दू शायरी संग्रह
136

फेसबुक के 9 साल

"फेसबुक" ने आज 9 साल पूरे कर लिए हैं। मार्क जुकरबर्ग ने जब फेसबुक का निर्माण किया, तब वह मात्र 20 वर्ष के थे। मार्क जुकरबर्ग का जन्म 14 मई, 1984 को न्यूयार्क (अमेरिका) में हुआ। इनके पिता एडवर्ड एक ड...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
YASHVARDHAN SRIVASTAV
87

क्लेष मिट गए

क्लेषमिटगएहाथमिलाकरगलेमिलघोषणाहुईदिलमेंझांककरदेखानहींनिवालेछीननेकोबढ़ेहाथोंनेमुंहमीठाकरायाखाबदानफिरशुरूहोगयाकसैलापनस्वादखराबकररहाहैगलेकाटनेकोखिंचीतलवारेंम्यानमेंरखदीग...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
ATUL WAGHMARE
0

क्लेष मिट गए

क्लेषमिटगएहाथमिलाकरगलेमिलघोषणाहुईदिलमेंझांककरदेखानहींनिवालेछीननेकोबढ़ेहाथोंनेमुंहमीठाकरायाखाबदानफिरशुरूहोगयाकसैलापनस्वादखराबकररहाहैगलेकाटनेकोखिंचीतलवारेंम्यानमेंरखदीग...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
बृजेश नीरज
Voice of Silent Majority
60

गयी कहाँ तुम मुझे छोड़कर...

गयी कहाँ तुम मुझे छोड़कर, तुझ बिन मैँ बैचेन यहाँ। मैँ भटक रहा हूँ इधर-उधर, बस तुम्हे ढ़ूँढ़ता यहाँ-वहाँ॥ मत लो मेरे सब्र का इम्तिहान, मुझमेँ अब इतना धैर्य कहाँ। तुम आ जाओ करीब मेरे, चल दूंगा तेरे संग...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Dharm Raj Sharma
Dharm Raj Sharma
57


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