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नई हलचल

प्रतिघात

मेरे  मन  में  वेदना  है विस्मृत  सी  अर्चना  है ;आँखे  ढकी  हैं  मेरी मुझे  विश्व  देखना  है.नयनो  पे  है  संकट पलकें  गिरी   हुई  हैं; कुछ विम्ब भी न दिखता दृष्टि  बुझ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
45

"प्रीत उपहार हो जायेगा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों!अपने काव्य संकलन सुख का सूरज सेएक गीत"प्रीत उपहार हो जायेगा"गीत गाते रहो, गुनगुनाते रहो,एक दिन मीत संसार हो जायेगा।चमचमाते रहो, जगमगाते रहो,एक दिन प्रीत उपहार हो जायेगा।। जीतनी जंग ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
73

मुझे अनुभव रेत के महलो का है.....(कुँवर जी)

मेरे शब्दकोष में कितने शब्दों के  अर्थ बदल गए, अरमानो के सूरज कितने चढ़ शिखर पर ढल गए,फौलादी इरादे वक़्त की तपन से मोम के जैसे पिघल गये,सपनो तक जाने वाले रस्ते भौर होते ही मुझको छल गये,इसी लिए तो आ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
hardeep rana
kunwarji's
27

देह चाहती मेह पर, होवे "रविकर" *रेह

 प्रभु से जो डरकर चले, होय नहीं पथभ्रष्ट |किन्तु दुष्ट रोमांच हित, चले बाँटते कष्ट ||1||"आकांक्षा के पर क़तर, तितर बितर कर स्वप्न |दें अपने ही दुःख अगर, निश्चय बड़े कृतघ्न || 2||माटी का पुतला पुन:, माटी ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
"कुछ कहना है"
44

तेरा साथ

       तुम्हारा साथतुझे चाहूँ, तुझे प्यार करूँ ,मेरे हालात, मेरी औकात,तुझे चाहने की, इज़ाजत नहीं देता.ऐशो-आराम, नाज़ो-नखरे तेरे,मेरे हालात, मेरी औकात,इसे उठाने की, इज़ाजत नहीं देता.तेरे संग...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
राकेश श्रीवास्तव
68

चिरंतन काल से रहा है यह धर्म क्योंकि जो रास्ता ईश्वर की तरफ जाता है वह कभी नष्ट नहीं होता। न इसका कोई आदि है न अंत अनादि है यह आचरण जिसे धारण किया जाता है।

वेद ईश्वर प्रसूत हैं ईश्वर की वाणी हैं। भूतं भव्यं भविष्यं च सर्वं वेदात प्रसिध्यति (मनु स्मृति-१२. ९७  )उसी  आध्यात्मिक सिद्धांत को मान्यता मिलती है जो वेदों के अनुरूप होता  है।"Any ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
41

नारी तुम हो प्रकृति का सबसे सुन्दर रूप.

सागर , सरिता , निर्झर , मरू कलरव करते विहग.सुन्दर फूल , गिरि , तरु अरुणाई उषा की.रजनी से मिलन  शशि का.जल,  वर्षा , इन्द्रधनुष,कोटि जीव , वीर पुरुष.  सब कितना मंजुल  जग में प्रकृति का रूप अनूप,लेकि...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
KAVYASUDHA (काव्य सुधा)
KAVYA SUDHA (काव्य सुधा)
107

Valour & cowardice - Coraggio e codardia - साहस व भय

London, UK: These sculptures of Alfred Stevens are from V&A museum. Later these statues were cast in bronze for the Wellington memorial in St Paul church. They show the courage sitting on a shield and the fear hiding below. However, I don't see the expressions of courage or fear on their faces, they look like persons lost in thoughts.लँडन, ब्रिटेनः अल्फ्रेड स्टीवन की यह मूर्तियाँ विक्टोरिया व ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SUNIL DEEPAK
Chayachitrakar - छायाचित्रकार
49

नई अंतर्दृष्टि : मंजूषा कला

                                                                          बिहार में मधुबनी पेंटिंग के अलावा मंजूषा कला का भी अहम् स्थान है.मंजूषा कला अंग देश की प्राच...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
राजीव कुमार झा
120

परमात्मा : ईश्वर : सर्वभूतानां हृद्देशेर्जुन तिष्ठति (भगवद गीता १८. ६१ )

ब्रह्म ,परमात्मा और भगवान् ईश्वर परिपूर्ण है अक्षय ऊर्जा का स्रोत है। दिव्य उनका रूप है ,दिव्य नाम और दिव्य धाम ,साथी और सखा,  दिव्य उनकी लीलाएं हैं। अनेकरूपा ईश्वर अपरम्पार है। अलग अलग न...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
43

निविया की एक गुजारिश -- हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल चर्चा अंक : 016

पितृ पक्ष का आखिरी दिन , शुभ कार्यो  की शुरुवात   करने का इंतज़ार  ख़तम ..  शनिवार से  शक्ति की उपासना का पर्व शारदेय नवरात्र प्रतिपदा से नवमी तक निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नौ शक्तियो...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
ललित चाहार
हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल
56

लोग जान जायेंगे (चर्चा -1388)

नमस्कार मित्रों, मैं राजेंद्र कुमार चर्चा मंच पर अपने प्रथम चर्चा में आपका हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ। चर्चा मंच से जुड़ना सौभाग्य की बात है,चर्चा मंच परिवार का हार्दिक आभार व्यक्त करते हु...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
197

रावण का प्रायश्चित

श्री राम का वाण लगा जाकर ,नाभि का अमृत गया सूख ,फिर कटे दश-आनन् एक एक कर ,गिरा राम चरण में दम्भी -मूर्ख !**************************************अंतिम श्वासें भरता-भरताकरता प्रायश्चित बोला रावण ,श्री राम किया उपकार बड़ा ,म...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
WORLD's WOMAN BLOGGERS ASSOCIATION
50

रावण का प्रायश्चित

श्री राम का वाण लगा जाकर ,नाभि का अमृत गया सूख ,फिर कटे दश-आनन् एक एक कर ,गिरा राम चरण में दम्भी -मूर्ख !**************************************अंतिम श्वासें भरता-भरताकरता प्रायश्चित बोला रावण ,श्री राम किया उपकार बड़ा ,मै...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
23

भरोसा

भरोसा क्या है ?एक पलवह मन्दता भरा क्षणजिसमें कोई अपने सभी कवचउतार फेंकता हैअपनी सभी अरक्षितता कोकिसी के समक्ष खोलता हैपर ऐसा कोई क्यों चाहता है ?ऐसा मैं क्यों चाहता हूँ ?क्या यह संभव हैबारम्ब...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
तुषार राज रस्तोगी
तमाशा-ए-जिंदगी
45

भगवान ने स्वयं बनवाई रामानंद सागर जी से रामायण .

भगवान ने स्वयं बनवाई रामानंद सागर जी से रामायण .आजकल विजयदशमी की तैयारियां ज़ोरों पर हैं .जहाँ देखो रामलीला और रामायण की धूम है .आज बहुत से फिल्म निर्देशक और निर्माता रामायण की लोक प्रियता को ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHALINI KAUSHIK
! कौशल !
122

केशव तिवारी की कविताएँ

 डरडर कहीं और थामैं कहीं और डर रहा थाडर उस जर्जर खड़ेपेड़ की छाँव में थाऔर मैं धूप से  डर रहा था दुनिया भर की तमामपवित्र किताबेंभय और आतंक सेभरी पडी थींऔर मैंअपने सबसे डरे समय मेंउन्ही को पढ़ र...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Shahroz
Hamzabaan हमज़बान ھمز با ن
114

घर संग-ए-मरमर फर्श पर है मखमली दीवारों दर है मकां ये खूबसूरत पर नहीं लगता ये घर न चहकते हैं परिंदे न यहाँ बच्चों का शोर छत से गुजरी जब पतंगे न किसी खींची डोरन कभी आया कोई ख़तन ठहाक...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
ranjana deane
10

मैं हूँ

मासूम सी हूँ मैं .... नाजुक सी |
अभिलाषा भी .... एक नन्हीं सी |
जीवन ये जो ...दिया विधाता ने |
जियूँ ना जीवन क्यूँ अधिक...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Alka Gupta
10

हिमाचल का पहला लघुकथाकार सम्मेलन

हिम साहित्यकार सहकार सभा पंजीकृत  प्रदेश कार्यालय   मिश्रा भवन रौड़ा सेक्टर बिलासपुर 174001हिम साहित्यकार सहकार सभा द्वारा आगामी 28 नवंबर 2013 को हिमाचल प्रदेश के दिल बिलासपुर के नगर परिषद सभाग...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रौशन जसवाल विक्षिप्‍त
80

जीवन: एक संघर्ष (LiFe :A StRuGgLe) : दास्तां-ए-सिगरेट by श्रवण शुक्ल

जीवन: एक संघर्ष (LiFe :A StRuGgLe) : दास्तां-ए-सिगरेट by श्रवण शुक्ल: ((C) Copyright   @  श्रवण शुक्लसिगरेट की दास्तां है अजीब! डिब्बी से निकलीमाचिस की तिल्ली के साथ होंठों परफिर खत्म होते ही पैरों तले!क्या अजीब ह...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
भारतीय नारी
46

द्वे वाव ब्रह्मणों रूपे मूर्तं चैव अमूर्तं च। अर्थात परमात्मा निराकार (निराकारी )है ,सर्वव्यापक है ,एक साथ सब जगह उसकी व्याप्ति है लेकिन वह वैयक्तिक रूपाकार (Personal Form )में भी प्रकट हो सकता है।

 ईश्वर अल्लाह तेरो नाम एक ही परमात्मा के अनेक नाम हैं। हिन्दू भगवान् को पूजते हैं ईसाई मसीह (ईशु )को मुसलमान अल्लाह -ताला की इबादत करते हैं यहूदी जेहोवा ,पारसी अहुरा माजदा (Ahura Mazda)की। जैन सम्प्...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
42

Dream

Dream is after all A Bubble of soapWhich will burst intothousands of beautiful fragmentsif you done to clasp itDream never diesnever dream of pastwhich is dead and gonenever dream of futurewhich is yet to comeDream brings joysand sorrowsdream brings youto unseen worlddream is after alla bubble of soap. ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Rajeev Kumar Jha
khamosh dil ki dhadkane
94

औपचारिक बनाम सच्चा न्याय

                               निर्दोष मुसलमानों की प्रताड़ना पर शिन्दे का पत्रकेन्द्रीय गृहमंत्री श्री सुशील कुमार शिन्दे ने दिनांक 30 सितम्बर 2013 को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियो...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
loksangharsha
लो क सं घ र्ष !
34

"कौआ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरी बालकृति नन्हें सुमन से एक बालकविता"कौआ"कौआ बहुत सयाना होता।कर्कश इसका गाना होता।।पेड़ों की डाली पर रहता।सर्दी, गर्मी, वर्षा सहता।।कीड़े और मकोड़े खाता।सूखी रोटी भी खा जाता।।सड़े मा...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
66
उसका सच
166

तुम्हारे बाद... 3

इस सड़क पर इस नीम के नीचे.....अपनी पीली उजास के साथ तुम्हारे इन्तज़ार में.....अब कभी इधर नहीं देखती मैं....न पीली उजास है न तुम्हारा इंतजार....बस केवल वह नीम इकलौता अपने साथ....केवल अपने साथसमेटे अप...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Anuja Shukla
अग्निगर्भा अमृता
67

तुम्‍हारे बाद...2

शाम आज फिर उदास हो गयी है......तुम्हारे जाने के बाद सन्नाटे ने समेट लिया है अपनी बाहों में  मुझे......!27.05.06अनुजा...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Anuja Shukla
अग्निगर्भा अमृता
63

"संसद का शैतान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

बेचारों के चारे को वो पचा न पाया।संसद का शैतान स्वयं को बचा न पाया।।माना थे हम मूक, मगर आहें थीं मोटी,लगी उसे ही, जिसने छीनी अपनी रोटी,रास महल में रहने वाला, रचा न पाया।संसद का शैतान स्वयं को बचा ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
36

गौमाता... गौहत्या ............ {darshan jangra}

03/10/2013. State हरयाणा.... jila भिवानी के गावों ईशरवाल के पास आज गौमाता से भरी गाडी पकड़ी गयी ... में सुबह सुबह घर आ रहा था रस्ते में गावों ईशरवाल के पास मेने देखा बहुत लोग इकठे थे मेने अपनी बाइक वही रोकी ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
darshan jangra
प्रेम के फूल
122


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