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नई हलचल

मोहब्बत

मोहब्बत कुछ तुझमे ,कुछ मुझमे अब तलक है बाकी ....दिल में तेरे और मेरे भी , आग अब तलक है बाकी ...तुम कहते हो कि राख का ढेर है ;मैं कहता हूँ कि थोडा सा कुरेदो ;तुम पाओंगे कि इश्क की चिंगारियां अब तलक है बाकी...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
बस यूँ ही..........WRITINGS OF SILENCE......
76

जिन्हें नाज़ है हिंद पर वो यहां हैं...खुशदीप

दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है भारत...लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर है संसद...लेकिन देश की शान इसी संसद में एफडीआई जैसे गंभीर मुद्दे पर बहस के दौरान ये हैं हमारे कुछ माननीयों के मुखारबिंदुओं से न...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
ATUL WAGHMARE
0

मिर्ज़ा ग़ालिब परिचय

ग़ालिब का जन्म 27 दिसम्बर, 1796 ई. को अकबराबाद में हुआ जो कि अब आगरा के नाम से जाना जाता है | उनके दादा कौकान बेग खां, शाह आलम के अहद ( शासन काल) में समरकंद से आगरा ( अकबराबाद) आए थे ग़ालिब के परदादा तर्संमखा...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Devendra Gehlod
Jakhira, Shayari Collection | जखीरा, उर्दू शायरी संग्रह
162

आँचल..

           जब जब तेरी छाया,             इस धरती पर पड़ी,           तब तब मेरे सर पर,             आँचल की छाँव पड़ी.           तुम गीत पुराना मत गाओ,           मेरे अ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रंगराज अयंगर
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सरहद

मेरी सोच मेरे अहसास कीसरहद नहीं कोई लफ़्ज़ों को उड़ान भरने दोउस छोर तक शायद कोई हद मिल जाये इनको और वापिस लौट आएँतो.....बता सकूँ तुम्हें-किदेखो हद ढूंढ ली है मैंने भीतुम्हारी तरह पर....जब तक वो लौट ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
सु-मन (Suman Kapoor)
अर्पित ‘सुमन’
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ठंडी हवाएँ

ऐसे चलती ठंडी हवाएँ,जैसे कोई गीत गाएँ ,जब चली ठंडी पवन ,खुश हुआ नीला गगन ।आसमान में काले बादल आयें ,छम - छम कर बरस जाएँ ,जब - जब मेघा बरसे ,खेतों में हरियाली फैले ।।दिल को भी छू जाते ,हरे - भरे पेड़ - पौध...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
YASHVARDHAN SRIVASTAV
37

माँ ...

आज नवरात्रि की पूजा समाप्त कर रमा कुछ देर माता दुर्गा की तस्वीर के आगे बैठे बैठे सोच रही थी कि इस जहान में माँ की महिमा कितनी बड़ी है ,यह नयी क्या कोई किसी को बताने वाली बात है। तस्वीर में बैठी मा...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Shanti
ज्योति-कलश
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चुकीच्या प्रश्नाचे गुण वाढवून मिळावेत

मा. संचालक , दि.०५/१२/ २०१२पुणे विद्यापीठ उपकेंद्र, अहमदनगर.विषय- एम ए च्या प्रश्नपत्रिकेतील चुकीच्या प्रश्नाचे गुण वाढवून मिळणे बाबत.....महोदय,पुणे विद्यापीठातर्फे गेल्या नोव्हेंबर महिन्यात...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Kedar bhope
केदार भोपे
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केदार भोपे
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"हम साथ-साथ हैं" (कार्टूननिस्ट-मयंक)

हम तुम्हारे लिए...तुम हमारे लिए........  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
कार्टूनिस्ट-मयंक खटीमा (CARTOONIST-MAYANK)
118

कोई संसद के बहार से हमला करता है... और कोई अन्दर से..!(कुँवर जी)

देश की जो रीढ़ है लोकतंत्र.,(?) वही सबसे बड़ी कमजोरी मुझे दिखाई पड़ती है!कम से कम पिछले कुछ द...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
hardeep rana
kunwarji's
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मेरे प्याज बड़े हैं! क्या नहीं है...खुशदीप

रिटेल सेक्टर में एफडीआई (विदेशी प्रत्यक्ष निवेश) पर लोकसभा की मंज़ूरी मिलने से सत्ता पक्ष फूले नहीं समा रहा....वहीं विपक्ष का कहना है कि आंकड़ों में बेशक उनकी हार हो गई लेकिन नैतिक तौर पर उनकी ज...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
ATUL WAGHMARE
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मम्मी की डांट अच्छी है !

.टिंकू चूहा करे शरारत ;शैतानी की उसको आदत ,मम्मी जब भी डांटे उसको ;टिंकू को लगती वे आफतएक दिन लेकर लम्बा डंडा उसने चारो और घुमाया ,टकराया दीवार से जाकर धक्का खा वो संभल न पाया . लगी चोट फिर नाक पर ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
मेरा आपका प्यारा ब्लॉग
118

सफ़ेद चादर...

सुबह उठ कर खिड़की के परदे हटाये तो आसमान धुंधला सा लगा। सोचा आँखें ठीक से खुली नहीं हैं अँधेरा अभी छटा नहीं है इसलिए ठीक से दिखाई नहीं दे रहा। यहाँ कोई इतनी सुबह परदे नहीं हटाता पारदर्शी शीशो...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Shikha varshney
स्पंदन SPANDAN
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"आज 39 साल पूरे हो गये" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

कभी नरम-कभी गरम, कभी झगड़ा-कभी प्यार!कभी इक़रार-कभी इन्कार,कभी नखरे-कभी मनुहार!!मूल से से मोह-ब्याज से प्यार,यही तो है, जीवन का सार!!चलता रहा अनवरत,कभी न मानी हार!!वक्त कितनी जल्दी गया गुज़र,औ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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ब्लॉग परिचय ''मेरी कलम मेरे जज़्बात ''

न शेर ओ शायरी की अक्ल , न गीत ओ गज़ल की समझ . न ही कविता रचने का शऊर, न नज़्म गढ़ पाने का माद्दा . बस कुछ शब्द टूटे फूटे से, कुछ भाव अनबूझे-अनकहे से. जुबां पर लाने की जुर्रत में , ख्वाब कितने ही फिसल छूटे...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
  Sawai Singh Rajpurohit
एक ब्लॉग सबका
286

तुम मुझसे मिलने आ जाओ

तुम मुझसे मिलने आ जाओ दूर बहुत हो भान है मुझको फिर भी ये अरमान है मुझको सपनो में ही आकर मुझपर प्रेम सुधा बरसा जाओ तुम मुझसे मिलने आ जाओ याद तुम्हारी है जीवन में फिर भी कुछ खली है मन म...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
deepak kumar chaubey
कविता कहानी चर्चा और बहुत कुछ .......
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वो झिलमिल तारों का साथ...

एक रात,बैठा था मैं,कुछ झिलमिल तारों के साथ... ले हम हाथों मे हाथ,कर रहे थे एक दूजे से सुख दुख की बात…हर किसी को ग़म था,किसी न किसी की जुदाई का...फिर भी हम खुश थे,के ये वक़्त न था तनहाई का…हमने बात की,एक ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Mahesh Barmate
माही....
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chalo achcha hua

चलो अच्छा हुआ तुमने खुद कर लिया किनारा तुमने खुद छुडा लिया दामन तुमने खुद बचा लिया खुद को ..................................मुझसेमेरी परछाई भी अब नही पड़ेगी तुम पर तुम निश्चिन्त रहो कागज़ के उन पन्नों से क्यों डरते ह...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
anwar suhail
अनवर सुहैल का रचना संसार
76

अनजाना सा डर ...

बंद खिड़की के शीशों से झांकती एक पेड़ की शाखाएं लदी - फदी हरे पत्तों से हर हवा के झोंके के साथ फैला देतीं हैं अपनी बाहें चाहती है खोल दूं मैं खिड़कीआ जाएँ वो भीतर लुभाती तो मुझे भी ह...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Shikha varshney
स्पंदन SPANDAN
59

जो देश अपनी ही भाषा में काम नहीं करते वे हमेशा पिछड़े रहते हैं : नरेश सक्सेना

Written by परिकल्पना संपादकीय टीम | December 4, 2012 | 316 जनवरी 1939 को ग्वालियर में जन्में नरेश सक्सेना उन कुछ विरल कवियों में से एक हैं, जिन्होने बहुत कम लिखकर भी बहुत ख्याति पायी है । वे बिलक्षण कवि है...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
26

आतिश-ओ-गुल

आतिश-ओ-गुल ये तो मैंने माना, ज़िन्दगी एक सज़ा है पर कौन जानता है, इससे बेहतर क़ज़ा है ये परवाने जानते हैं, या जानता है आशिक कि आग में डूबने का, अपना एक मज़ा है नश्तर के ज़ख्म हो तो, हो जाता है दुरुस्...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
निहार रंजन
बातें अपने दिल की
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MAUT KI AAHAT- HINDI GEET BY MARKAND DAVE.

मौत की आहट। (गज़लनुमा गीत)गीतकार-स्वरांकन-संगीत-गायक-मार्कंड दवे ।संगीत-स्वरायोजन-प्रसुन चौधरी.हर  साँस  मे  मौत की आहट सुनाई देती  है ।ज़िंदगी अब तो  गिन-गिन के बदला लेती है ।१. ज़िंद...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Markand Dave
M.K.TVFilms - HINDI ARTICLES
168

बात न करो...

बात न करो इस  वीराने  में  बस्ती   बसाने   की   बात   न  करो, समुन्दर में कागज की कस्ती चलाने की बात न करो!अभी-अभी तो इस गम से पिंड छुड़ाकर बैठा हूँ, अचानक हमसे हँसने- हँसाने की बात न...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
dheerendra singh bhadauriya
काव्यान्जलि
76

इश्क से बढकर है दोस्ती

जिंदगी का हर मोड आशिकी नहीं,यारो तुम्हारे बिन यह जिंदगी नहीं,एक मतवाले की तरह जाने क्यूँ,परछाई को पकड़ने की आस करता था,जाने क्यूँ पवन को मुट्टी में कैद करने का,हर दम असफल असंभव प्रयास करता था,जि...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
अखिलेश रावल
"मेरे भाव मेरी कविता"
75

एक (अ)कवि मित्र के लिए (अ)कविता

कविता मेंकवि – “न्याय सत्त बराबरी सत्त प्यार सत्त वफा सत्त विश्वास सत्त यह भी सत्त वह भी सत्त” कविता के बाहर – सत्त का “राम नाम सत्त...” ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Dalip
कथोपकथन
63

पर्यावरण -एक वसीयत

हे मनुज !वसीयत माँगती  तुम्हारी संतति सुजला   सुफला   धरती पूर्वजों की धरोहर धरती, पशु पक्षी के  कलरव से प्रफुल्लित ,उल्लसित धरती वृक्ष लता से सज्जित सजीव धरती ,प्राणवायु से भरपूर औ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Kalipad
अनुभूति
60

Life in India - have a look

BLOG'S NAME -Life in India BLOG'S OWNER - minyander RECENT POST - फेसबुक के शेर  MY VIEW - TOO GOOD                 SHIKHA KAUSHIK  ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
हम हिंदी चिट्ठाकार हैं
86

ShSsssss ... महफ़िल बहस में है

एक आग सी लगी है वतन को और वीर सारे कही बहस में है ।जला के घर अपना तापते बदहवास सब एक नई बहस में है ।।वतन पे जान देने वाले सोचते है सरहदों पे कब तक यु मरे ।लुट चुकी अस्मत पे टीआरपी गोया स...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
तरुण
Tarun's Diary-"तरुण की डायरी से .कुछ पन्ने.."
54

डिग्री की दौड़

दो दिन पहले एक खबर सुनने मिली कि दिल्ली मे चल रही एक मेडिकल परीक्षा मे फर्जी लड़के-लड़कियां शामिल थे..वो किसी और के बदले परीक्षा दे रहे थे...ये एक बहुत बड़ा रैकेट है और इसका मास्टर माइंड था एक साउथ इं...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Neha Sharma
सोचा ना था....
70


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