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नई हलचल

कौन कहता है कि 'पा' अमिताभ बच्चन की फिल्म है

पामें न अमिताभ दिखते हैं, न उनकी एक्टिंग की ऊंचाई। दरअसल, उस करेक्टर में अभिनय की गुंजाइश ही नहीं थी। अमिताभ की एक्टिंग देखनी हो तो ब्लैक जैसी दर्जनों फिल्में हैं। इसलिए कहना पड़ता है कि यह फि...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
अनुराग अन्वेषी
67

उसे बचाए कोई कैसे टूट जाने से

{श्री संदीप शर्मा 'साहिल' खबरों के छापेखाने के बाशिंदे हैं. दैनिक 'आज समाज' दिल्ली में crime reporting  की धांय-धांय के बीचोबीच दिल की धक्-धक् पर भी नज़र रख पाते हैं..एक बानगी पर आप भी गौर फरमाइए..!शीशे स...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
नवोत्पल
42

राम मेरा भाई तेरे राम से...

राम मेरा भाई तेरे राम सेइतना यार झगड़ता क्यों हैमेरे राम मुझे तारेंगेंतारें तुझे तेरे रघुवीरसहज-सरल सी बात है लेकिनतू फ़िर भी नहीं समझता क्यूँ हैराम मेरा भाई तेरे राम से....राग-द्वेष अपने अंतर्&nb...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Reetesh Gupta
भावनायें...
64

माँ

सच है माँ के कर्तव्य कभी ख़तम नहीं होते.. !डा. अनुराग जी की पोस्ट यथार्थ का क्रास वेरिफिकेशन पढ़ते हुए एक बेहद अच्छी कविता याद आ गयी जो मैंने कभी कादम्बिनी में पढी थी और जिसे राहुल राजे...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
44

लेकॉनिक टिप्पणी का अभियोग ........ऐसा है क्या....? प्रेरणा : आदरणीय ज्ञानदत्त जी...

लेकॉनिक टिप्पणी का अभियोग ........ऐसा है क्या....? प्रेरणा : आदरणीय ज्ञानदत्त जी... भूमिका :आजकल व्यस्त हूँ, या यूँ कहें कुछ ऐसा ही रहना चाहता हूँ. मै जिस मध्यम स्तरीय पारिवारिक विन्यास से हूँ वहां अभ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
39
अल्लम्...गल्लम्....बैठ निठ्ठ्लम्...
49

तुमसे...!!!

सुबह एक अनगढ़ गजल सी रचना डाल थी, मैंने.."अब सवाल ज्यादा सुकून देते हैं.." उस वक़्त भी जानता था कि इसमे ठीक-ठाक कमियां हैं..आदरणीय गिरिजेश राव साहब ने एक मीठी झिड़की दी मेल पर और फिर उसी रचना को अ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
44

अब सवाल ज्यादा सुकून देते हैं.

मुझे पता है कि मै बस लिखने लगता हूँ. ईमानदारी से मुझे शिल्प का अभ्यास नहीं है. गलतियाँ बर्दाश्त करियेगा..और बदले में मुझे एक मुस्कान दीजियेगा...अब सवाल ज्यादा सुकून देते हैं.अब सवाल ज्यादा सुकून...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
46

राम सिया राम सिया राम जय जय राम....

हो, मंगल भवन अमंगल हारीद्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारीराम सिया राम सिया राम जय जय राम - २हो, होइहै वही जो राम रचि राखाको करि तरक बढ़ावें साखाराम सिया राम सिया राम जय जय राम - २हो, धीरज धरम मित्र अरु नारीआ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Reetesh Gupta
मेरी पसंद...
85

कि;

आज एक बेहद हलकी सी कुछ पंक्तियाँ..कि;कि; वे दोनों एक-एक जगह के रईस हैं..!कि; उन दोनों की पहुँच बाकी की पहुँच से बाहर है..!कि; वे दोनों एक दूसरे को अपनी बता देना चाहते हैं..!कि; दोनों सामने वाले को अपन...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
43

यूँ ही बस इधर-उधर विचरना मन का

डायरी के पन्नों में क्या कुछ आ जाता है..कई बार उसकी कोई खास वज़ह नहीं होती, यूँ ही बस इधर-उधर विचरना मन का...कोई सन्दर्भ- प्रसंग नहीं..बिलकुल ही उन्मुक्त....उनमे से कुछ आपके समक्ष...किस्मत से मै भिखार...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
52

सुनहरी रेत का.घरौंदा

बचपन में रेत के घरौंदे तो हम सभी ने बनायें हैं ...वो सुनहरी..गीली रेत का गुम्बदनुमा घर बनाकर उसके भीतर हाथों से सुरंगें बनाना.....मैं और मेरी सहेली भी यूँ ही खेला करते थे...ये सुरंगें जब पूरी हो जातीं...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
neha sharma
मेरी कहानी
53

सुन्दरतम है...!!!

आज की कविता अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी  जी की लेखनी से है. आप जवाहरलाल नेहरू विश्विद्यालय, नई दिल्ली में आचार्य नामवर सिंह के निर्देशन में शोधरत हैं . आप  फैजाबाद के मूल निवासी हैं और ब्...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
नवोत्पल
49

बिलासपुर में नन्हें फूल बिखेर रहे कविता की ख़ुशबू

बच्चों को कविता लेखन के प्रोत्साहन हेतु एक कार्यशाला का आयोजन50 बच्चे ले रहे भागबेटियों की प्रतिभागिता अधिकइन दिनों हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में ज़िला भाषाधिकारी डॉ0 अनिता के आग्रह पर मैं एक...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
प्रकाश बादल
प्रकाश बादल
91

पचासवीं पोस्ट और मेरी पहली कहानी..."उन्माद की उड़नतश्तरी"

पचासवीं पोस्ट और मेरी पहली कहानी..."उन्माद की उड़नतश्तरी"यह आज मेरी 50 वीं प्रविष्टि है. शुरू-शुरू में बस ब्लोगिंग क्या होती है; इस आशय से शुरू किया था. पर जब मैंने देखा कि एक विशाल और विज्ञ पाठक सम...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
36

नायक नेपथ्य में चला जा रहा था-- गाँधी और मै: सुशील यादव

[देखिये ना गाँधी किन-किन के लिए क्या-क्या हैं .इसतरहा है महामना गाँधी की व्यापकता..सुशील जी गहरे सरोकारों के लेखक हैं. इनकी कुछ बेहतर रचनाएँ "हम तो कागज मुड़े हुए हैं" पर जाकर पढ़ी जा सकती ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
97

एक बात पूछना वह कभी नहीं भूलती...‘ कल आओगे न..!!!

 [नवोत्पल के ब्लॉग-संस्करण का शुभारम्भ कर रहा हूँ, अभिनव उपाध्याय जी की कविता से. दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविध्यालय में राजनीति शास्त्र में शोधरत और 'दैनिक आज समाज' दिल्ली में सक्र...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
नवोत्पल
48

यदि हर राज्य की शिक्षा प्रणाली में एक स्तर पर मौलिक समानता होती..कई जरूरी विभिन्नताओं के साथ तो...

आज सोचा कुछ कैम्पस-चर्चा हो जाए. JNU की प्रवेश परीक्षा प्रणाली बड़ी अलहदा है. लगभग हर स्कूल के हर सेंटर की थोड़ी अलग-अलग. देश भर में और कुछ देश से बाहर भी इसके सेंटर बनाये गए हैं जहाँ प्रवेश परीक्षा...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
86

नवोत्पल साहित्यिक मंच

मै हमेशा सोचता हूँ कि ब्लॉग से लोगों की डायरियों के भीतर रचा जा रहा साहित्य बाहर निकला है. साहित्य यदि समाज का दर्पण है तो इसे रचने-गढ़ने और पढ़ने में समाज का हर व्यक्ति शामिल होना चाहिये. ब्लाग...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
नवोत्पल
52

सड़क

[गोरखपुर से सीधे दिल्ली आया तो बहुत कुछ झेलना पड़ा था..उन्हीं दिनों में लिखी थी एक कविता अनगढ़ सी..एक शाम का सच है ये..मै भीड़-भाड़ वाली सड़क से चला जा रहा हूँ और क्या-क्या सोचते जा रहा हूँ..लोग टकर...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
47

हमारा प्रेरणा स्त्रोत

लोग कहते है कि माजी* इतिहास बनता है।लेकिन हम कहते है कि मेरा माजी प्रेरणा और एक आश बनता है॥*माजी का तत्पर्य है बीता हुआ कल...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
VIVEK SACHAN
khuch bhikhri yaden --कुछ बिखरी यादें
68

प्रभाष जी को गोरखपुर ने निराश नहीं किया-रोहित पाण्डेय

[अब जबकि लोग इस पर भी लिखने लगे हैं कि 'प्रभाष जी पर इतना रूदन क्यूँ और पहले भी तो शलाका पुरुष गुजरे हैं'....फिर सदाग्रह पर एक और लेख देना कैसा होगा..? मै सोचने लगा. सोचने मै ये भी लगा कि लोग इतना क्यूं ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
86

मी मंदबुद्धि मुंबईकर बोलतो आहे

रामदास कदम को एनडीटीवी पर बोलते सुना। शुक्र है उनका कि यहां वह हिंदी में बोल रहे थे। उसी हिंदी में जिसमें शपथ लेते समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी के साथ उन्होंने हाथापाई की। इसे कहते हैं द...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
अनुराग अन्वेषी
57

वह प्राणवान भावावेश-प्रभाष जोशी

{प्रखर पत्रकार और गाँधीवादी विचारक प्रभाष जोशी का असमय गुजर जाना.......}रात दो बजे मोबाइल की घंटी बजी तो एक बार तो बंद कर दी। पर वह फिर बजी। दूसरी तरफ रवीन्द्र त्रिपाठी थे। एक दुखद खबर, इससे शुरू कर ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
102

शब्द मेरी माँ जैसे हैं..

{आजकल खासा व्यस्त हूँ, और शायद आगे भी रहने वाला हूँ. चाहकर भी मित्रों की ब्लॉग-प्रविष्टियाँ पढ़ नहीं पा रहा हूँ. एहसास है कि क्या खो रहा हूँ...कुछ लिख भी नहीं पा रहा हूँ. पर जल्दी ही सबकुछ व्यवस्थित...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
73

Meeting with Life

Disclaimer: This piece of writing “Meeting with life” is an old product of my thoughts  …..I have written it in 2009 and put it on my blog, however recently by mistake I deleted it, so again putting it here.It was a cold morning of November 2009 but since I am in Hyderabad so this is not that much cold as you imagine it….. :)  that morning I met my life,...yes my life...... her emergence was beautiful, she was looking like my dream girl; long hair, innocent face, black eye...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Pritesh Dubey
Pritesh - Cut to Cut
71
Vivek Vaishnav
20

अब कौन करेगा 'कागद कारे'

खामोश हो गई एक मुखर आवाज। हमेशा के लिए खामोश हो गए प्रभाष जोशी। हिंदी पत्रकारिता का एक युग खत्म हो गया। पत्रकारिता जगत में प्रभाष जोशी के मुरीद भी हैं और आलोचक भी। पैसे लेकर चुनावी खबरें छापने...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
RAVINDRA RANJAN
आशियाना Aashiyana
59

घर की याद

भवानी प्रसाद मिश्र ने यह कविता जेल में लिखी थी। चूंकि वह भी देश की आजादी के लिए अंग्रेजों से लड़ रहे थे, लिहाजा, कुछ वक्त के लिए अंग्रेजों ने उन्हें भी जेल में कैद कर लिया था। जब वह जेल में थे बार...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
अनुराग अन्वेषी
55

"रोज सुबह मन में एक गांधी को लेकर उठता हूं" गाँधी और मै-अभिनव उपाध्याय

मुझे लगता है कि मैं आज तक गांधी को ठीक से जान नहीं पाया। बहुत सारी छोटी, बड़ी, पतली मोटी किताबें पढीं,लोगों की टिप्पणियां  पढ़ी लेकिन हर बार लगा गांधी केवल इतने ही नहीं हैं अभी इससे अलग हैं।  ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
78


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