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नई हलचल

दुनिया
51
दुनिया
52

अब, जबकि..!

सोचा, आज उस पर एक कविता लिखूंगा, पर.....कैसे..? जबकि, मेरे दिमाग में केवल तुम हो, कविता के लिए शब्द कैसे खोजूं ..?जबकि, मेरे दिल में सिर्फ तुम्हारा रंग छाया है कविता को कोई और रंग कैसे दे दूं..? &nb...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
40

व्यक्ति को , विकार की तरह पढ़ना , जीवन का अशुद्ध पाठ है...गाँधी और मै--अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी

किसी सोच का दायरा इतना बड़ा हो सकता है ; यह गांधी जी पर सोचते हुए महसूस होता है क्योंकि गाँधी जी पर सोचना खुद पर सोचना है परिवेश पर सोचना है, इतिहास पर सोचना है, भविष्य पर सोचना है, संस्कृति पर सोच...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
60

बेनामियों के मारे ब्लॉगर बेचारे

ऐतिहासिक शहर इलाहाबाद में संपन्न हुई दो दिनी 'ब्लॉगर मीट' (कुछ लोगों को इस शब्द पर आपत्ति है) के दौरान वैसे तो बहुत कुछ उल्लेखनीय हुआ। लेकिन मेरे खयाल से इस संगोष्ठी को सबसे ज्यादा याद किया जाएग...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
RAVINDRA RANJAN
आशियाना Aashiyana
62

नयी पौध की नीम के पेड़ पर अर्द्धनारीश्वर चर्चा

अंतरतम से और सर्वत्र से संवाद अल्केमिस्ट में वृद्ध पाउलो कोएलो भी चाहते हैं और जवान चेतन भगत भी. one night @call centre में चेतन भगत inner call की बात करते हैं. सरल इंग्लिश में लिखी गयी किताब, प्रवाहमयी. पर ९०% किताब...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
52

गांधी और मैं -रोहित पाण्डेय

[...जबसे होश सम्हाला है...गांधी की चर्चा सुनी है तो गांधी सबके हैं, सबके भीतर...पर क्या वाकई सबके भीतर हैं...? तो सबसे पहले मैंने खुद को टटोला..और जो पाया वो लिखा था  "गांधी और मै"शीर्षक से..अब बारी है श्...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
62

क्या हम कभी इतने 'सभ्य' नहीं रहे कि 'हाशिया' ही ना रहे...?

आज दीवाली है, खासा अकेला हूँ. सोचता हूँ, ये दीवाली, किनके लिए है, किनके लिए नहीं. एक लड़की जो फुलझड़ियॉ खरीद रही है, दूसरी बेच रही है, एक को 'खुशी' शायद खरीद लेने पर भी ना मिले, और दूसरी को भी 'खुशी' शाय...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
45

इस दीवाली एक सदाग्रह..

सदाग्रह इस दीवाली आप सभी से अपील करता है..१. मोमबत्ती नहीं दीप जलाएं. २. पटाखों में मितव्ययिता बरतें. ३. अपने आस-पास के वातावरण को स्वच्छ बनायें. ४. इस दीवाली पर अपना पर्यावरण प्रेम व्यक्त करें. ५. ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
66

जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना...

स‌च कहूं तो त्योहारों को लेकर मैं कोई खास उत्साहित नहीं रहता। त्योहार वाला दिन मेरे लिए आम दिनों जैसा ही होता है। घर पर टीवी देखना या इंटरनेट पर वक्त बिताना ज्यादा अच्छा लगता है। पूजा-पाठ, पटा...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
RAVINDRA RANJAN
आशियाना Aashiyana
68

शुभ दीपावली

दीवाली के दिन पूजन का विशेष महव है. गणेश जी , लक्ष्मी जी और सरस्वती जी की पूजा अर्चना कर लोग धन, सुख समृद्धि, बुद्धि और ज्ञान प्राप्ति की कामना करते हैं। विधिवत पूजा करने में आनंद भी है और संतोष ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Chetna Vardhan
bas do minute
95

"सर्वत्र" से संवाद

JNU में राजनीतिक जागरूकता जबरदस्त है, ऐसा शायद ही भारत में किसी और कैम्पस में हो...तो इसमे खास बात क्या है..? खास ये है कि यहाँ आपको अपने व्यक्तिगत राजनीतिक अधिकारों के लिए जरूरी नहीं कि आप किसी खास ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
50

दीया, तुम जलना..

दीवाली पर अभी तुरत लिखी एक छोटी कविता.जो जीवन देकर उजाला देता है, उससे की मैंने विनती....दीया, तुम जलना..  अंतरतम का मालिन्य मिटाना विद्युत-स्फूर्त ले आना.  दीया, तुम जलना.  जलना तुम मंदिर-मं...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
42

कैसा लगता है, जब फुटपाथ पर कोई लड़की सिगरेट बेचती है...?

सचमुच एक दृश्य देखा मैंने दिल्ली के फुटपाथ पर...और फिर....कैसा लगता है, जब फुटपाथ पर कोई लड़की सिगरेट बेचती है...? पर यहाँ लड़की अपनी झोपड़ी के पास मजबूत धागों में गुटखे व चट्टे पर सिगरेट, पान, स...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
44

निकल आते हैं आंसू हंसते-हंसते,ये किस गम की कसक है हर खुशी में .

निदा फाज़ली की नज्में कुछ इस तरह चर्चित हैं कि अपने आस-पास साधारण, सामान्य हर तरह का आदमी उनकी पंक्तियाँ कह रहा होता है पर अक्सर सुनाने वाले और सुनने वाले दोनों को ही पता नहीं होता कि ये निदा फा...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
47

चीनी खाने और गन्ना बोकर, चूसने में अंतर है, नायपाल जी.

जे.एन. यू में मेरी पहली anchoring जबरदस्त सराही गयी, माँ शारदा को प्रणाम. प्रो. घोष की रसिकता पर मैंने यूं चुटकी ली : "..बदन होता है, बूढा, दिल की फितरत कब बदलती है, पुराना कूकर क्या सीटी बजाना छोड़ देता है.......  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
53

ये ब्लोगिंग में लाठी-बल्लम...?

ये इतना घमासान क्यूँ....? किसको साबित करना चाहते हैं..? किसके  बरक्श....? ये कौनसी मिसाल आप सब बना रहे हैं..? सब, सब पर फिकरे कस रहे हैं. आये थे, कुछ बांटने, ब्लॉग लिखने, कुछ सीखने, कुछ बताने,...., ये क्या करन...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
57

हिंदी का भूत.........

हिंदी से डर लगता है। डरावनी हो गई है। सीबीएसई अब हिंदी के सवालों को हल्का करने जा रही है। प्राइवेट स्कूल इंग्लिश मीडियम होते हैं। गांव गांव में टाट की झोंपड़ी में इंग्लिश मीडियम स्कूल के बोर्...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Himanshu
आँगन.. जो बाहर होकर भीतर है
64

सदाग्रह..शांति, सद्भावना के लिए....

सदाग्रह एक विमर्श मंच है जहाँ प्रयास होगा विभिन्न समाधानों के लिए एक बौद्धिक पहल का...विमर्श से एक शांतिपूर्ण समाधान की खोज और एक अपील इसे अपनाने की सहभागी बंधुओं से....आपका रचनात्मक सहयोगअपेक...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
48

ek naya template

थोड़ी मेहनत की, एक नया टेम्पलेट...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
62

शायद फ़िक्र हो..

स्मार्ट दूकानदार, मुस्कुराकर, अठन्नी वापस नहीं करता.. शायद फ़िक्र हो.. भिखमंगों की. नये कपड़ों की जरूरत  लगातार बनी रहती है शायद फ़िक्र हो हमें, अधनंगों की.  चीजें कुछ फैशन के लिहाज से पुर...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
52

घर सा घर ... अब कहाँ है घर

'घर' एक वास्तु मात्र न होकर भावसूचक संज्ञा भी है ! घर से अधिक सजीव एवं घर से अधिक निर्जीव भला क्या हो सकता है ! अनगिनत भावनाओं और प्रतीकों का मिला-जुला रूप है घर !"कमरा नंबर एक / जहाँ दो-दो सड़कों के द...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
prakash govind
67

पुनर्पाठ...तुम्हारा..

(१) मै; तुम्हे शिद्दत से चाहता हूँ, पर तुम नहीं. आत्मविश्वास ने समाधान किया: 'सफल हो जाने पर कौन नहीं चाहेगा मुझे,,,? "....पर उन्ही लोगो में पाकर क्या मै चाह सकूँगा ..तब..तुम्हे..?  (२) तुमने जब टटोला तो म...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
43

ब्रेकिंग न्यूज की मजबूरी क्यों?

कुछ दिन पहले कई चैनलों वाले बड़े मीडिया ग्रुप के एक छोटे या फिर कहें मंझोले हिंदी चैनल के संपादक को पढ़ रहा था। वह छोटे और मध्यम श्रेणी के चैनलों की परेशानियां गिना रहे थे। उनका कहना था कि छोटे ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
RAVINDRA RANJAN
आशियाना Aashiyana
67
अल्लम्...गल्लम्....बैठ निठ्ठ्लम्...
47

गाँधी मेरी नजरों से..

गाँधी जी जैसा रीयल परसन अपने जन्मदिन पर आपको निष्क्रिय कैसे रहने दे सकता है..? जितना पढ़्ता जाता हूँ गाँधी जी को उतना ही प्रभावित होता जाता हूँ. गाँधी और मै. मेरे लिये गाँधी जी सम्भवत: सबसे पहल...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
54

गाँधी और मै....श्रीश पाठक 'प्रखर'

गाँधी जी जैसा रीयल परसन अपने जन्मदिन पर आपको निष्क्रिय कैसे रहने दे सकता है..? जितना पढ़्ता जाता हूँ गाँधी जी को उतना ही प्रभावित होता जाता हूँ. गाँधी और मै. मेरे लिये गाँधी जी सम्भवत: सबसे पहले स...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
59

ईश्वरत्व से बचते हुए

[...आर्डिनरी जब एक्स्ट्रा-आर्डिनरी बन जाता है, तो वह चमत्कार हो जाता है. महामना गांधी जानते थे कि चमत्कार पर मुग्ध हुआ जा सकता है, पर इसे अपनाया नहीं जा सकता. महात्मा जीवन भर प्रयास करते रहे कि जो ज...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
55

स्वीकारने से कायम होगी सद्भावना

[परिवर्तन शाश्वत हैं और नितांत आवश्यक भी. प्रत्येक पीढ़ी अपने साथ बदलाव का झनकार लाती है. पर इस स्वर में मधुरता का अनुशासन ना हो तो यह कालांतर में अप्रासंगिक हो जाती है. इस बदलाव में जरूरी है कि क...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
71

बैंडिट क्वीन

फिल्म देखा तो स्तब्ध रह गया मै, मुझे विश्वास नहीं हुआ कि ऐसा हो सकता है. किसी एक जाति की ज्यादती की तो बात ही नहीं है, क्योकि जो भी शीर्ष पर रहा है, उससे ऐसी ज्यादतियां हुई हैं.पर मानवता सबसे कम मान...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
58


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