अपना ब्लॉग जोड़ें

अपने ब्लॉग को  जोड़ने के लिये नीचे दिए हुए टेक्स्ट बॉक्स में अपने ब्लॉग का पता भरें!
आप नए उपयोगकर्ता हैं?
अब सदस्य बनें
सदस्य बनें
क्या आप नया ब्लॉग बनाना चाहते हैं?
नवीनतम सदस्य

नई हलचल

श्री अमिताभ बच्चन जी के 70 जन्मदिवस पर सम्पूर्ण ब्लॉग परिवार & सुगना फाऊंडेशन-मेघालासिया की पूरी टीम की तरफ से हार्दिक शुभकामनाएं...

सदी के महानायक श्री अमिताभ बच्चन जी का आज 70 जन्मदिवस है उनको मेरी और सम्पूर्ण ब्लॉग परिवार & सुगना फाऊंडेशन-मेघालासिया की पूरी टीम की तरफ से हार्दिक शुभकामनाएं...  हैप्पी बड्डे 2 आद. श्री अमित...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
  Sawai Singh Rajpurohit
246

Flowers Gif image

Swinging Heart Generator          c     McMore Flowers Greetings CommentsMore Flowers Greetings CommentsMore Flowers Greetings CommentsMore Flowers Greetings CommentsMore Flowers Greetings CommentsMore Flowers Greetings CommentsMore Flowers Greetings CommentsMore Flowers Greetings CommentsMore Flowers Greetings CommentsMore Flowers Greetings CommentsMore Flowers Greetings CommentsMore Flowers Greetings CommentsMore Flower...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
ATUL WAGHMARE
0

भागलपुर के ज़ख्म

जब पहली बार ज़िंदगी में होश संभाला था तो मेरे गाँव में खबरें आ रही थी उन्माद की, सर कलम होने की, धज्जियाँ उड़ने की. कुछ जान पहचान के  पारिवारिक मित्र भागलपुर में रहते थे जहाँ धर्म के नाम पर १९८९ ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
निहार रंजन
बातें अपने दिल की
67

होंठों पर तैरती मुस्कान!

हर शासकीय अवकाश के दिन सरकारी कामकाज  के लिए दफ्तर पूरी तरह से बंद हों, इस बात का पता लगाना आम आदमी के लिए कोई हँसी खेल का काम तो कतई नहीं हो सकता। शासकीय कैलेंडर और डायरी में अंकित अवकाश के द...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Kavita Rawat
KAVITA RAWAT
116

हुआ, हुआ- न हुआ सुख

क्या नाम दूं उस सुख को- जो हो कर भी नहीं है. एक ऐसा सुख, जिसका अनुभव तो कर सकते हैं, किन्तु भोग नहीं सकते. उदाहरण के लिए- आप को पता चलता है कि जिस बस से जाने वाले थे उसके सभी यात्रियों को रास्ते ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
केशव कहिन
14

Gangrape at gunpoint in Jind now

6 वर्ष पूर्व
Akbar Khan
TheNetPress.Com
110

राष्ट्रीय दामाद से पंगा? (व्यंग गीत)

(Google Images)In practice, a banana republic is a country operated as a commercial enterprise for private profit, effected by the collusion (मिलीभगत) between the State and favoured monopolies, whereby the profits derived from private exploitation of public lands is private property, and the debts incurred are public responsibility.http://en.wikipedia.org/wiki/Banana_republicराष्ट्रीय  दामाद  से  पंगा? (व्यंग गी...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Markand Dave
M.K.TVFilms - HINDI ARTICLES
89

मैं... आज फिर... लिख रहा हूँ...

आज...लिख रहा हूँ...हाँ ! मैं  फिर लिख रहा हूँ...पर क्यों ?क्यों छोड़ा था मैंने...लिखना...?क्या...?भूल गया था मैं...खुद से ही कुछ...सीखना...?जाने कितने...मंज़र बीत गए...और दिल को कितने...खंजर चीर गए... ?फिर भी क्यों...?...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Mahesh Barmate
माही....
84

भाई फिर तेरी याद आई

गधे ने किसी गधे को गधा कह कर आज तक नहीं बुलाया आदमी कौन से सुर्खाब के पर अपने लगा कर है आया बता दे कुछ जरा सा भी किसी धोबी के दुख: को थोड़ा सा भी वो कम कभी हो कर पाया किस अधिकार से जिसको भी चाहे गधा ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डा0 सुशील कुमार जोशी
उल्लूक टाईम्स
69

हिन्दी का 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला है नौवां विश्व हिन्दी सम्मेलन ?

                                                             चित्र गूगल से साभार डा जगदीश्वर चतुर्वेदी, जाने मा...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
विनोद पाराशर Vinod Parashar
राजभाषा विकास मंच RAJBHASHA VIKAS MANCH
115

कब जागेगी हम भारतियों की गैरत

कब जागेगी हम भारतियों की गैरत एक अक्टूबर  को दैनिक जागरण में (यथार्थ कोना)  में पेज नम्बर-  नौ में भाई नदीम जी का लेख तलाश गैरत की – समाज की कुछ ऐसे सच्चाई बयां करता है, जिसे कोई भी झुंठ्...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
ATUL WAGHMARE
0

कब जागेगी हम भारतियों की गैरत

कब जागेगी हम भारतियों की गैरत एक अक्टूबर  को दैनिक जागरण में (यथार्थ कोना)  में पेज नम्बर-  नौ में भाई नदीम जी का लेख तलाश गैरत की – समाज की कुछ ऐसे सच्चाई बयां करता है, जिसे कोई भी झुंठ्...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Manoj Pandey
प्रगतिशील ब्लॉग लेखक संघ
85

कहि न जात- गली का कुत्ता

कहानी 'गली का कुत्ता'दो सहेलियों की आपसी बात-चीत पर आधारित है. इसमें दिखाने की कोशिश की गयी है कि बच्चे कैसे सोचते हैं, उनके मन में कोई स्थाई मैल या बैर नहीं नहीं रहता. साथ ही पल में माशा, अगले पल त...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
केशव कहिन
15

अपराध-बोध

खुलासा कर देना आवश्यक है कि और सज्जन होते होंगे, किन्तु मै जन्मजात कवि नहीं था.  बल्कि उल्टे मुझे कविता से डर लगता था (उस कविता से नहीं, जिसका  जिक्र आगे है).  कविता के रूप में मैने जो...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
केशव कहिन
15

गली का कुत्ता

परिवार के सभी लोग इकट्ठे बैठे थे. ऐसा आज तक नहीं हुआ था कि दादा-दादी और माँ-बाबूजी के साथ-साथ-दोनों चाचा भी मिलकर एक साथ बैठे हों. और तो और, तीन महीने के छोटे भाई को भी मां ने अपनी छाती से लगाए-दुप...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
केशव कहिन
15

प्रेम पावन

दुनिया में हर रिश्ते को, कोई नकोई नाम मिला,राधा कृष्ण के रिश्ते को, नाम मिला न अन्जाममिला।श्याम की रानियां थी अनेक, न उन में से राधा थी एक।पर समर्पणथा इन सब से अधिक, फिर भी न बैकुन्ठ धाम मिला।सब न...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
kuldeep thakur
man ka manthan. मन का मंथन।
70

फुठी कोठी

सन 1884 में ही इंदौर में हवा महल नामक मजबूत चट्टानी मोटी-मोटी दीवारों के साथ बनवाना प्रारंभ हुआ | इस महलनुमा किले को महाराजा इतना ऊँचा बनाना चाहते थे कि उपरी मंजिल कि छत पर तोपे जमाकर के यही से अंग...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Devendra Gehlod
My Indore City [ इंदौर शहर ]
142

जज्बात की आवाज-2

आप पिछली पोस्ट यहाँ पढ़ सकते हैजिंदगी में मुझे दूसरों के बाज-बाज अशआर ऐसे मिले, जिन्हें मुझे अपना कहने का बहुत दिल चाहा, बस यु ही जैसे किसी प्यारे बच्चे को गोद में लेकर आप उसके वालिदें के सामने क...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Devendra Gehlod
Jakhira, Shayari Collection | जखीरा, उर्दू शायरी संग्रह
134

परछाईं

6 वर्ष पूर्व
Imran Ansari
जज़्बात...दिल से दिल तक
54

किसी दोस्त सा चेहरा

वो मिरे साथ चल तो सकता था दिल में चाह ने सताया नहीं होगा उतना वो मेरी खामियाँ ही निकालता रहा मेरे जज़्बे को नहीं देख पाया होगा उतना हम अपने हाल को गीतों में ढालते रहे ये अश्कों का सफ़र ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Sharda Arora
गीत-ग़ज़ल
95

शर्म उनको मगर नहीं आती

-राजेश त्रिपाठीहमारा देश आज ऐसे संधिकाल में खड़ा है, जहां एक ओर लूटतंत्र है वहीं दूसरी ओर विपन्न आर्थिक व्यवस्था और तथाकथित आर्थिक सुधारों के चलते बढ़ती महंगाई से सिसकता समाज है। जनतंत्र यहा...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Rajesh Tripathi
Kalam Ka Sipahi / a blog by Rajesh Tripathi कलम का सिपाही/ राजेश त्रिपाठी का ब्लाग
73

हाथ की लकीरें । (गीत)

हाथ  की   लकीरें । (गीत)सरगोशी   कर    रही    है,   हाथ   की   लकीरें, लगता   है,   तुम     यहीँ  कहीँ    आसपास   हो..!मुस्कुरा     रही    है,  मेरे   दिल   की   धड़कन,कहती &nbs...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Markand Dave
M.K.TVFilms - HINDI ARTICLES
169

शरीर की प्यास

रानी मुखर्जी की नयी फ़िल्म "अईय्या" का एक गाना देखा तो एक पुरानी बात याद आ गयी.करीब 35 वर्ष पहले की बात है, मेरे क्लिनिक में एक महिला आयीं. पचास या बावन की उम्र थी उनकी. उनकी समस्या थी कि उनके पति में...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
SUNIL DEEPAK
जो न कह सके
445

संडे है आज तुझे कर तो रहा हूँ याद

इस पर लिखा उस पर लिखाताज्जुब की बाततुझ पर मैने कभी कुछ नहीं लिखा कोई बात नहीं आज जो कुछ देख कर आया हूँउसे अभी तक यहाँ लिख कर नहीं बताया हूँऎसा करता हूँ आज कुछ भी नहीं बताता हूँसीधे सीधे तुझ पर ही ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डा0 सुशील कुमार जोशी
उल्लूक टाईम्स
58

Herdsman (चरवाहा)

6 वर्ष पूर्व
Prashant Suhano
SUHANO DRISHTI
110

स्वार्थ का बोझ

एक आदमी अपने सिर पर अपने खाने के लिए अनाज की गठरी ले कर जा रहा था। दूसरे आदमी के सिर पर उससे चार गुनी बड़ी गठरी थी। लेकिन पहला आदमी गठरी के बोझ से दबा जा रहा था, जबकि दूसरा मस्ती से गीत गाता जा रहा ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
हंसराज 'सुज्ञ'
64

वीर बालक : दिग्विजयी स्कन्दगुप्त(SKAND GUPTA)

वैश्य गौरव - वीर बालक स्कन्द गुप्त हूण, शक आदि मध्य एशिया की मरुभूमि में रहने वाली बर्बर जातियां वहां पांचवीं शताब्दी में थीं। हूण और शक जाति के लोग बड़े लड़ाकू और निर्दयी थे। इन लोगों ने यूर...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Praveen Gupta
हमारा वैश्य समाज - HAMARA VAISHYA SAMAJ
152

लाला हरदेव सहाय - गोऊ माता की रक्षा को समर्पित जीवन (LALA HARDEV SAHAY)

हमारे धर्मशास्त्रों में मातृभूमि के महत्व पर व्यापक रूप से प्रकाश डाला गया है। वेद का कथन है- 'माताभूमि: पुत्रो अहं पृथिव्या:' अर्थात भूमि मेरी माता है और मैं उसका पुत्र हूं। इस आदेश का असंख्य म...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Praveen Gupta
हमारा वैश्य समाज - HAMARA VAISHYA SAMAJ
136

आठवे दशक की लघुकथाए

 भूखजगदीश चन्द्र कश्यपवह पूरी शक्ति से भाग रहा था। जब वह रूका तो उसनेअपने को किसी बड़े नगर में पाया। कई बार रो पड़ने के बावजूद किसी ने भी उसे अपने पवित्र घर में घुसने नहीं दिया था। अब वह गांव क...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
bhagirath
ज्ञानसिंधु
55
SUHANO DRISHTI
104


Postcard
फेसबुक द्वारा लॉगिन