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नई हलचल

यह परजीवी जीवन कैसा

एक बड़े नीम के पेड़ पर उगे उस पीतल के पौधे को समर्पित है यह कविता जो बाद में उस सूखे नीम के पेड़ के तने को चीरता हुआ धरती को छूता है और कुछ ही वर्षों में उस स्थान पर नीम का वृक्ष नहीं रह जाता और उसक...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
jai bhardwaj
kabhee kabhee
82

..यहां दशहरे के 6 दिन बाद होता है रावण दहन

बुराई का प्रतीक माने जाने वाले रावण का पुतला देशभर में दशहरे के दिन जलाया जा चुका है लेकिन उत्तर प्रदेश के एक कस्बे में रावण दशहरे के छह दिन बाद तक जीवित रहता है। राजधानी लखनऊ से करीब 60 किलोमीट...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Journalist
मेरा संघर्ष
66

"एक मदारी" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरी बालकृति नन्हें सुमन सेएक बाल कविता"एक मदारी"देखो एक मदारी आया। अपने संग लाठी भी लाया।।डम-डम डमरू बजा रहा है।भालू, बन्दर नचा रहा है।।लम्बे काले बालों वाला।भालू का अन्दाज निराला।।खेल अ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
191

लाइफ तो चलती रहती है...

'सात फेरे' की सलोनी की भूमिका में साधारण नैन-नक्श वाली सांवली-सलोनी राजश्री ठाकुर जब दर्शकों से रूबरू हुईं थीं,तो सबने उनमें अपने आस-पास रहने वाली घरेलू लड़की की  छवि देखी । लगभग चार वर्षों तक ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Somya
सौम्य वचन
155

यहां पसही के चावल खाकर गुजर बसर कर रहे हैं लोग!

वक्त की मार बहुत बुरी होती है, यकीन न हो तो बुंदेलखंड में गरीबों की थाली में झांककर देखिए, जहां पेट की आग बुझाने के लिए भटक रहे 'गरीब-गुरबा' जंगली चारा 'पसही' का चावल खा बसर कर रहे हैं। इस चारा के च...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Journalist
मेरा संघर्ष
78

एक टिकिटार्थी का पञ

http://vyangyalok.blogspot.in/2013/10/blog-post.html...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Pramod
1

तुम्हारा आना और जाना - हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल : चर्चा अंक : 28

तुम आये और,चले गए।=======================आँगन के एक कोने में बिछी दरी,सन्नाटे फांकता कुआँ,और धूल से भरे दरीचे से,रिसती धूप।=======================खिलने वाला है, ..........बेलामहकेगी रातरानी।=======================और,और क्या,कुछ रह गया है क्य...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
ललित चाहार
हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल
75

संत , स्वप्न और स्वर्ण भण्डार

संत , स्वप्न और स्वर्ण भण्डारएक संत ने स्वप्न  देखा एक राजा के किले के तहखाने के अन्दर स्वर्ण का अपूर्ब भंडार संत का सपना कि यदि ये भंडार देश का हो जाये तो देश का खजाना ही नहीं भरेगा बल्कि  धन ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Madan mohan saxena
मदन मोहन सक्सेना की रचनाएँ
49

Two horses - Due cavalli - दो घोड़े

Castelfranco Veneto (TV), Italy: Two horses and a victory arch, surrounded by green grass and behind it, a modern building. I felt that the combination of nature and art have given some breathing space to the expanding new part of the city.कस्तेलफ्राँको, इटलीः दो घोड़े और एक विजय द्वार, आसपास खुला घास का मैदान और पीछे एक आधुनिक शैली में ब...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SUNIL DEEPAK
Chayachitrakar - छायाचित्रकार
25

निविया की नजर से -- हिन्दी ब्लागर्स चौपाल चर्चा : अंक 027

पति की लम्बी आयु के लिए  यूँ तो महिलाए अनेक व्रत करती हैं परन्तु  ' करवाचौथ " उन में  से  सबसे प्रमुख हैं  यह हिन्दू महिलाओ का  सबसे प्रमुख और प्रिय त्यौहार माना जाता  हैं  सभी सुहागने...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
ललित चाहार
हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल
71

चाह गई चिंता मिटी ,मनवा बे -परवाह , जिनको कछु न चाहिए ,वे साहन के साह।

अब्दुल अब्दुल रहीम -ए -  खानेखानाचाह गई चिंता मिटी ,मनवा बे -परवाह ,जिनको कछु न चाहिए ,वे साहन के साह। रहीम जी कहते हैं :अगर मनुष्य के मन से इच्छा समाप्त हो जाए तो उसकी सब चिंताएं मिट जातीं हैं ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
146

"मैं तो यूँ ही बुनता हूँ (चर्चा मंचःअंक-1402)

मित्रों।शुक्रवार की चर्चाकेवल इस शुक्रवार के लिएमेरी पसन्द के लिंक--"चाँद मेरे साथ चल रहा है".. वो मुझे नागपूर में मिली थी , पडोस के मकान में रहती है ,जब भी सासुमां से मिलने जाती हूं उससे भी मुला...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
50

हास्यकवि चला काव्य-यात्रा पर लोगों को हँसाने और धूम मचाने

लो जी हम तो चले यात्रा पर लोगों को हँसायेंगे धूम मचायेंगे जय हिन्द ! hasyakavi albela khatrihasyakavi albela khatrihasyakavi albela khatrihasyakavi albela khatrihasyakavi albela khatrihasyakavi albela khatri...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Hasyakavi Albela Khatri
अलबेला खत्री की महफ़िल
63

झंझट की जड़ -घूंघट

आज सुबह की ही बात है मेरे घर के सामने दो महिलाएं एक टेलर की दुकान पर आई .सभी तरह से वे सास-बहू ही लग रही थी .उनमे से एक का मुंह तो खुला हुआ था और एक का घूंघट इतना अधिक लम्बा था कि उसके लिए टेलर की दुका...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHALINI KAUSHIK
! कौशल !
33

कुण्डलिया : प्रेम पात सब झर गये

पीपल अब सठिया गया,रहा रात भर खाँसप्रेम पात सब झर गये , चढ़-चढ़ जावै साँस चढ़- चढ़ जावै साँस , कहाँ वह हरियाली हैआँख  मोतियाबिंद , उसी की  अब लाली हैछाँह गहे अब कौन , नहीं रहि छाया शीतलरहा रात भर खाँस...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
39

जानना और समझना

                                   जो जानते हैं, जरूरी नहीं कि वे समझते भी हों। लेकिन जो समझते हैं, वे जानते भी हैं। जानना पहले होता है, समझना उसके बाद। यह तत्काल बाद भी हो सकता...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
mahendra verma
शाश्वत शिल्प
55

I AM A WOMAN

I AM A WOMANMOTHER SAIDCOME MY FAIRYYOU ARE MY PARTBETTER THAN ME !FATHER SAIDCOME MY DAUGHTERYOU ARE MY HONOURNEVER CHEAT ME !BROTHER SAIDCOME MY SISTERI PROTECT YOUPLEASE TRUST ME !HUSBAND SAIDLISTEN DEARNEVER BE RUDEALWAYS FOLLOW ME !SON SAIDYOU NEVER SHOWED YOUR DESIREYOU ARE GREATNEVER INTERRUPT ME !I SAIDI HAVE NO COMPLAINTBECAUSE ‘I AM A WOMAN’WHAT GOD HAS MADE ME !! ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
भारतीय नारी
41

I AM A WOMAN

I AM A WOMANMOTHER SAIDCOME MY FAIRYYOU ARE MY PARTBETTER THAN ME !FATHER SAIDCOME MY DAUGHTERYOU ARE MY HONOURNEVER CHEAT ME !BROTHER SAIDCOME MY SISTERI PROTECT YOUPLEASE TRUST ME !HUSBAND SAIDLISTEN DEARNEVER BE RUDEALWAYS FOLLOW ME !SON SAIDYOU NEVER SHOWED YOUR DESIREYOU ARE GREATNEVER INTERRUPT ME !I SAIDI HAVE NO COMPLAINTBECAUSE 'I AM A WOMAN'WHAT GOD HAS MADE ME !!...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
earthly heaven
114

चाहे जो कुर्बानी देनी पड़े।

 बाराबंकी। जल, जंगल, जमीन बचाने की लड़ाई किसान सभा के नेतृत्व में लड़ी जा रही है जिसके तहत जनपद के विभिन्न गांव में क्रमिक भूख हड़ताल दूसरी दिन भी जारी रही।यह जानकारी देते हुए भारतीय कम्युन...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
loksangharsha
लो क सं घ र्ष !
24

कानपुर से पटना तक

कानपुर से पटना तक ॥ डीलक्स ट्रेन की ए सी सी कार में,इस लम्बे सफ़र में चला जा रहा था । मैं चला जा रहा था एक पत्रिका को पलटते हुए साथ ही अपनी नज़रों को इधर उधर फेंकते हुए कानपुर से पटना तक ॥ ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
jai bhardwaj
kabhee kabhee
48

दागी नेता बे फिकर रहो ,,

दागी नेता बे फिकर रहो ,,मोर्चा हमने संभाल लिया है,,ग्रहों की देखी तीव्र दशा ,,संकट मोचनकवच बनाय लिया है ,,,,दागी नेता बे फिकर रहो,मोर्चा हमने संभाल लिया है ,,,नया आर्डिनेंस लायेंगे ,,तर्क से उसे सजाएं...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
RAJKISHOR MISHRA
राजनीति
77

बेटी हैंकुल सेतु

बेटी कुल सेतु हुआ करती,दो कुल इससे तर जाते हैं,,,प्रेम ,स्नेह ,सद्भाव की गुड़िया ,ह्रदय कमल खिल जाते हैं,,सेवा और समर्पण इतना ,बरबस सब झुक जाते हैं,,बेटी कुल सेतु हुआ करती,दो कुल इससे तर जाते हैं,,,,बे...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
RAJKISHOR MISHRA
राजनीति
78

कौन है असली ब्राह्मण, जानिए

ब्रह्म सत्य, जगत मिथ्या : जो ब्रह्म (ईश्वर) को छोड़कर किसी अन्य को नहीं पूजता वह ब्राह्मण। ब्रह्म को जानने वाला ब्राह्मण कहलाता है। जो पुरोहिताई करके अपनी जीविका चलाता है, वह ब्राह्मण नहीं, याच...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Praveen Gupta
हिन्दू - हिंदी - हिन्दुस्थान - HINDU-HINDI-HINDUSTHAN
177

"है किसने दिल को पहचाना" डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

जब से ज़ालिम हुआ जमाना उलझ गया सब ताना-बाना चारा-पत्थर और कोयला बना आज लोगों का खानाछल-फरेब की इस दुनिया में नहीं रहा अब ठौर-ठिकाना सिसक रहीं हैं राग-रागिनीरोता है संगीत पुराना कोयल का सुर मौन ह...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
41

अब क्या करूँ ? धन्यवाद दूं इस चोरी के लिए या विरोध करूँ ?

अपनी चोरविद्या  में संत तरुण सागर जी को क्यों शामिल करते हो भाई पाठक जी ? मेरी एक साधारण सी कविता जो कि संयोग से बहुत प्रसिद्ध हो गयी है आजकल कई लोग उसे अपने काम में ले रहे हैं . कितने ही पोस्टर म...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Hasyakavi Albela Khatri
अलबेला खत्री की महफ़िल
164

एक दिन

अपनी दुनिया में से निकाल करएक दिन ऐसा दे दे मुझे...जिसमें उगता सूरज,चलता सूरजऔर ढलता सूरजसाथ—साथ देखें..उस रंगीन दिन मेंब्लैक एंड व्हाइट दौर केगानों की मिठास घुली होउस दिन की शुरूआतसर्दी की सर...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
34

...तो इसीदिन भगवान श्रीकृष्ण ने रचाया था गोपियों संग रास

आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। इसे रास पूर्णिमा भी कहा जाता है ऐसा इसलिए क्योंकि शरद पूर्णिमा की रात को ही भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ रास रचाया था। यूं तो हर माह में ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Journalist
मेरा संघर्ष
85

जाने कार्तिक मास में क्यों करते हैं दीपदान

हिंदू धर्म के धर्म शास्त्रों में प्रत्येक ऋतु व मास का अपना विशेष महत्व बताया गया है। सामान्य रूप से तुला राशि पर सूर्यनारायण के आते ही कार्तिक मास प्रारंभ हो जाता है। कार्तिक का माहात्म्य ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Journalist
मेरा संघर्ष
132
सिनेमा गीत-संगीत
322


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