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नई हलचल

माँ गुजर जाने के बाद

ब्याहता बिटिया के हक में फर्क पड़ता है बहुत छूटती मैके की सरहद माँ गुजर जाने के बाद अब नहीं आता संदेसा मान मनुहारों भराखत्म रिश्तों की लगावट माँ गुजर जाने के बादजो कभी था मेरा आँगन, घर मेरा, कमर...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Ritesh
Satya: The Voice of Truth
69
दुनिया
59

अविनाश का यह पाखंड !

परसों मोहल्ला से भेजा गया अविनाश का एक पोस्ट ब्लागवाणी पर देखा । ‘बेढंगे कपड़े पहनना, मुसीबत को बुलावा’ या ऐसे ही किसी शीर्षक से मोहल्ला पर पूर्व में प्रदर्शित एक पोस्ट के बारे में थी यह पोस्ट ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
73

मुझे अपनी बाहों मे भर लो

नदी के के इस पार शब्दों का मेला है कोई तुम्हे -पुकार रहा -माँ दीदी पत्नी दोस्त प्रेमिका इस भीड़ के लिए तुम देह के दर्पण का अलग -अलग हिस्सा हो किसी के लिए बिंदिया किसी के लिए राखी हो आँचल मे प्रसाद ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Ritesh
Satya: The Voice of Truth
64

मुझे अपने पास रख लो

अपनी हथेली की रेखाओं मेमेरा नाम लिख लोमुझे अपने पास रख लोअपनी आँखों के पिंजरे मेमुझेकैद कर लोअपने मन रूपी गमले मेमुझे गुलाब सा उगा लोअपने आँचल के छोर मेएक स्वर्ण सिक्के सा बाँध लोमुझे अपने प...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Ritesh
Satya: The Voice of Truth
53

ठीक कहा था डार्विन तुमने

ठीक कहा था डार्विन तुमने,सदियों पहले, ठीक कहा था ।विज्ञान की आड़ में छुप कर,समाज का गहरा-नंगा सच ।दुरुस्त थीं सौ फीसदी,अनुकूलन-प्राकृतिक चयन कीतुम्हारी दोनों ही अवधारणाएंऔर सटीक था एकदमयोग्यत...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
77

पूजा भी बनी प्रमोशनल इवेंट !

अखबार में छपी कुछ तस्वीरों ने बरबस ही आकर्षित किया । तस्वीरें थीं हालीवुड की सुपर माॅडल क्लाउडिया की । अरे गलत मत सोचिए भाई ! बिकिनी-स्वीमिंग कास्ट्यूम में देह उधाड़ू फोटो सेशन की नहीं थीं यह त...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
57

माफ करना।

देखकर हुस्नतेराग़र हो जाऊं शायर-दीवानातोमाफ करना।बंधके खिंचा चला आऊं तेरे सदके पे बार-बारतोमाफ करना।हो जाए ग़र इश्क तुझे हौले-हौले मुझसेतोमाफ करना।उड़ जाए नींद रातों की तेरी ग़र मुझसेतोम...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Ritesh
Satya: The Voice of Truth
57

ठीक कहा था डार्विन

ठीक कहा था डार्विन तुमने,सदियों पहले, ठीक कहा था ।विज्ञान की आड़ में छुप कर,समाज का गहरा-नंगा सच ।दुरुस्त थीं सौ फीसदी,अनुकूलन-प्राकृतिक चयन कीतुम्हारी दोनों ही अवधारणाएंऔर सटीक था एकदमयोग्यत...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
54

बहस को गलत दिशा में मत मोड़िये हुजूर

भई मसिजीवी जी ! बातों को गलत आलोक में न लें । न तो महिलाओं के लिए विधायिका में आरक्षण का मैं विरोध कर रहा हूं न ही यह कह रहा हूं कि विनय कटियार जो कह रहे हैं वही शब्दशः सही है और वही होना चाहिए । मैं...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
54

महिला बिल पर बेवजह नहीं है तकरार

महिला आरक्षण बिल पर रार और तकरार दोनों ही बढ़ती जा रही हैं । महिलाओं को समाज में, सियासत में, सत्ता में आगे लाने की बात हर दृष्टि, हर लिहाज से सही है । इसका विरोध न किया जाना चाहिए न हो रहा है । पर बि...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
62

जानवर से आदमी

जानवर से आदमीएक जानवरमेरे साथ रहता है.मेरे बगल मे सोता है.अपने बदन पर उगी हुई घासें दिखाकरमुझे उससे चिपकने को कहता है.उघरी हुई टाँगें दिखातापूरे घर मेंइधर उधर फिरता रहता है.सड़ी बदबूदार दांतो...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
AJANTA SHARMA
अजन्ता शर्मा
54

सच्चा दोस्त

आज सुबह एक दोस्तों के ग्रुप को देखी.....हँसी-मजाक करते हुए,एक दुसरे की खिंचाई करते हुए....मुझे भी अपने स्कूल के वो दिन याद आ गए,जब हम सभी सहेलियों का ग्रुप इसी तरह की मस्ती करता था.हमारी क्लास डे शिफ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
neha sharma
मेरी कहानी
56

जो कह न सकी

माँ....एक ऐसा शब्द जिसे बच्चा सबसे पहले कहता है.मेरी माँ...जिन्हें मैंने हर वक्त अपने साथ पाया....मुश्किल पलों में सहेली के रूप में,जीवन की कठिन राहों में मार्गदर्शक के रूप में,अकेलेपन में सहारे के ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
neha sharma
मेरी कहानी
50

स्कूल का पहला दिन

आज अचानक अपने स्कूल का पहला दिन याद आ गया.छोटी होने के कारण कई फायदे तो थे लेकिन नुकसान भी था...मुझे घर पर सारे दिन अपने भाइयों के स्कूल से घर आने का इंतजार करना पड़ता था,इस बोरियत को मिटाने के लिए म...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
neha sharma
मेरी कहानी
65
दुनिया
68
आशियाना Aashiyana
73

भेलवाले बाबा

कल मार्केट में एक भेल(मुर्रे में कुछ चटपटी चीजें मिलकर बनाई जाती है/गुपचुप की दूर की बहन)वाले को देख कर अचानक अपने स्कूल के सामने खड़े होने वाले भेल वाले बाबा की याद आ गई.......हमारे भेलवाले बाबा हम ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
neha sharma
मेरी कहानी
64

कवि,लेखक और चिंतक प्रेम भारद्वाज के निधन पर..........

अब नहीं बहेगा "प्रेम" का झरना !पहाड़ी ग़ज़ल के दुःष्यंत कुमार,प्रेम भारद्वाजका निधन। प्रख्यात साहित्यकार विष्णु प्रभाकर के निधन से जगत में शोक की लहर अभी थमी नहीं थी कि हिमाचल प्रदेश ने 13 मई 200...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
प्रकाश बादल
प्रकाश बादल
107

मार्केटिंग का हिंदी फंडा

एक लड़के को सेल्समेन के इंटरव्यू में इसलिए बाहर कर दिया गया क्योंकि उसे अंग्रेजी नहीं आती थी। लड़के को अपने आप पर पूरा भरोसा था। उसने मैनेजर से कहा कि आपको अंग्रेजी से क्या मतलब ? अगर मैं अंग्रेज...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
RAVINDRA RANJAN
आशियाना Aashiyana
93
दुनिया
61

इंटनरेट से ऐसे करें कमाई

इंटरनेट पर आमतौर पर आजकल लोग कुछ घंटे तो बिताते ही हैं। ब्लागिंग से जुड़े लोग नियमित तौर पर इसका इस्तेमाल करते हैं। ब्लागिंग भले ही मुफ्त हो, लेकिन इंटरनेट सर्विस मुफ्त में नहीं मिलती। इसके ल...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
RAVINDRA RANJAN
आशियाना Aashiyana
68

एक और धन्यवाद

पिछली बार मैंने अपने इतिहास के टीचर के बारे मैं लिखा था और आज मैं अपनी संस्कृत की टीचर के बारे मैं लिखना चाहती हूँ;वैसे ये करीब-करीब एक ही तरह की बात होगी लेकिन फ़िर भी....हम घर में बचपन से ही मंत्रो...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
neha sharma
मेरी कहानी
56
दुनिया
64

शिमला पहुँची उड़नतश्तरी

सर्रर्रर्रर्रर्रर करती आई उड़नतश्तरी और दिल में उतर गई। समीर भाई के काव्य संग्रह "बिखरे मोती" ने मेरे दिल की कई तहों को खंगाला, कुरेदा, और मेरी स्मृतियाँ बरसों पुरानी दास्तानें कहने लगीं !-प्र...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
प्रकाश बादल
प्रकाश बादल
84

...तो फिर कौन है असली पप्पू?

-प्रशांत अगर आप भारत के नागरिक हैं और लोकसभा चुनावों में वोट डालने नहीं जाते हैं, तो आप पप्पू हैं, ये हम नहीं कह रहे चुनाव आयोग की ओर से जारी सारे विज्ञापनों में यही बताने की कोशिश की गई है... लेकिन...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
RAVINDRA RANJAN
आशियाना Aashiyana
79

वो कागज़ की कश्ती .......

एक अत्यंत प्रिय ब्लॉगर साथी ने कुछ ही दिन पहले मेल में लिखा कि" कितने बच्चे हैं न हम आज भी भीतर से ...!"इन शब्दों ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर हम बड़ों की दुनियाइतनी उदास और बुझी-बुझी सी शा...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
prakash govind
73

बोरकर सर:जिन्होंने कभी बोर नही किया

आज अचानक ही अपने स्कूल की बात याद आ गई.जब से इतिहास हमारे पाठ्यक्रम में आया;तभी से ये एक बोझ सा लगने लगा...इतने सरे सन् और तारीखें याद करना बहुत ही मुश्किल लगता था.याद हो भी जाता तो पेपर के समय इधर-...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
neha sharma
मेरी कहानी
50

छोडो कल की बातें कल की बात पुरानी......

आप सबके स्नेह का आभार! पिछले दिनों मेरे साथ क्या हुआ आप सब जानते हैं। लेकिन बहुत से दोस्तों और मित्रों ने मेरे न लिखने के निर्णय को न मानने का आग्रह किया उनमें सर्वप्रथम मैं भाई श्री अनूप शुक्ल ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
प्रकाश बादल
प्रकाश बादल
91
दुनिया
63


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