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नई हलचल

"स्कूल बस" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मेरी बालकृति "नन्हें सुमन" सेएक बालकविता "स्कूल बस" बस में जाने में मुझको,आनन्द बहुत आता है।खिड़की के नजदीक बैठना,मुझको बहुत सुहाता है।।पहले मैं विद्यालय में,रिक्शा से आता-जाता था।रिक्शे...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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Rare Hindi Songs (1)

एक दुर्लभ गीत  -------------------- एस डी बर्मन (सचिन देव बर्मन) की धर्मपत्नी मीरा दत्ता रॉय ने बंगाली फिल्मों में कई गाने गाये थे ! मीरा बर्मन जी ने कई बार सचिन दा को संगीत बनाने में सहायता की, परन्तु उन...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
prakash govind
सिनेमा गीत-संगीत
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हॅपी बर्थ

मंग्या सायकल वरून जात असतो..आणि सायकल चे चाक म्हशीच्या शेनावरून जाते. जवळच काही मुली उभ्या असतात......त्या मुलीनी टाळ्या वाजवल्या आणि म्हंटले,"हॅपी बर्थ डे टू यु"मंग्या थांबला आणि उत्तर दिले,धन्...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
vaghesh
विनोद नगरी
51

Super Hit Song : Copied From Other (4)

[Original Song]RETURN TO THE ALAMO / The Shadows Cover==========================================[INSPIRED SONG] --------------------------- अकेले हैं तो क्या गम है चाहें तो हमारे बस में क्या नहीं Song - Akele Hain To Kya Gum Hai ..Movie - Qayamat Se Qayamat Tak (1988)Singers - Udit Narayan, Alka YagnikMusic - Anand-MilindStarring - Aamir Khan, Juhi Chawla...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
prakash govind
सिनेमा गीत-संगीत
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"अच्छी नहीं लगतीं" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

वफा और प्यार की बातें, किसे अच्छी नहीं लगतीं। तपन के बाद बरसातें, किसे अच्छी नहीं लगतीं। मिलन होता जहाँ बिछड़ी हुई, कुछ आत्माओं का,  चमकती वो हसीं रातें, किसे अच्छी नहीं लगतीं।। गुलो-गु...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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चार पोल (खम्भा )

मेरे प्यारे दोस्तों
धर्म में आज के धौर में अनेक बाधा उत्पन्न्य हो रही है .
वो हिन्दू धर्म हो
या मुस्लिम धर्...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
amin khan
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रस की गंगा

\'रस की गंगा\'

मुम्बई, स्थानीय मातुश्री दुर्गाबाई महेश्वरदत्त मिश्र सेवा संस्थान द्वारा पोषित \'जीवन प्रभात व...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
सत्यनाराण मिश्र
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बिरोधाभास

बिरोधाभासनरक की अंतिम जमीं तक गिर चुके हैं  आज जोनापने को कह रहे , हमसे बहदूरियाँ आकाश कीइस कदर भटकें हैं युबा आज के  इस दौर में खोजने से मिलती नहीं अबगोलियां सल्फ़ास कीआज हम महफूज है क्यों&...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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विचित्र कथ्य-भावों की एक ग़ज़ल 'आईना' पर ..एक रुबाई एवं ग़ज़ल ....डा श्याम गुप्त....

--- कुंवर बेचैन की एक उल-जुलूल ग़ज़ल 'आईना' पर ..एक रुबाई एवं ग़ज़ल ...          रुबाई...किसने कहा कि भाग्य-विधाता है आईना |चांदी की पीठ हो तभी बनता है आईना |है आपकी औकात क्या, वह बोल जाता है -क्या इसलिए ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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"दरवाजे की दस्तक" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जीवन के कवि सम्मेलन में, गाना तो मजबूरी है।आये हैं तो कुछ कह-सुनकर, जाना बहुत जरूरी है।।जाने कितने स्वप्न संजोए,जाने कितने रंग भरे।ख्वाब अधूरे, हुए न पूरे,ठाठ-बाट रह गये धरे।सरदी-गरमी, धूप-छाँव ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
49

कुछ मजेदार ट्रिक्स

आज पेश है कम्प्यूटर से संबधित मजेदार ट्रिक्स, जिससे आप आसानी से कम्प्युटर की गति बढ़ा सकते हैं साथ ही कम्प्यूटर को आसानी से और जल्दी शटडाउन तथा रिस्टार्ट कर सकते हैं। आजकल सब को पंडित बनने और ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Anshu
Computer Education
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गुरु वन्दना (रुबाइयाँ )

"रुबाइयाँ "की रूप देने की कोशिश की। अगर आपको लगे कुछ कमी रह गयी है ,कृपया टिप्पणी के रूप में बताएं, आभारी रहूँगा। १मन ,वुद्धि ,विवेक का स्रष्टा होज्ञान विज्ञानं के तुम विधाता होब्रह्मा  रूपेण ह...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
53
अल्लम्...गल्लम्....बैठ निठ्ठ्लम्...
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एक व्यंग्य : छ -का छकास.....

छ की छकास....[मेरी एक साहित्यिक महिला मित्र ने एक अक्षर "छ’ पर एक रसमय आलेख लिखा ,जो कविता होते होते बच गई, कि वर्ण ’छ’ जीवन में कार्य कलापों में कहाँ कहाँ आता है ’छतरी’ से ’छेना’ ’छेनी’ और छांगुर त...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
46

मृगया करने नृप जाय कहाँ मृगया खुद षोडश ने कर डाला-

जब रूपसि-रंगत नैन लखे तब रंग जमे मितवा मतवाला |चढ़ जाय नशा उतरे न कभी अब भूल गया मनुवा मधुशाला |मृगया करने नृप जाय कहाँ मृगया खुद षोडश ने कर डाला |नवनीत चखी चुपचाप सखी  फिर छोड़ गई वह सुन्दर बा...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
रविकर
रविकर की कुण्डलियाँ
46

मेला चार साला कुमारसैन

मेला चार साला कुमारसैन क्षेत्र में बडी हर्षोउल्‍लास के साथ मनाया जाता है । इस मेले के इतिहास के बारे में बडी विडम्‍बनाएं है । माना जाता है कि 11वी शताब्‍दी में जब पूरातत्‍व विभाग द्वारा कु...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
रौशन जसवाल विक्षिप्‍त
73

मेरी कुछ क्षणिकाएँ

मेरी कुछ क्षणिकाएँ एक :संबिधान है न्यायालय है मानब अधिकार आयोग है लोकतांत्रिक सरकार है साथ ही आधी से अधिक जनता अशिक्षित ,निर्धन और लाचार है .दो:कृषि प्रधान देश है भारत भी नाम है भू...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Madan mohan saxena
मदन मोहन सक्सेना की रचनाएँ
46

जो आत्मा परमात्मा को प्राप्त हो जाता है उसके तीनों शरीर नष्ट हो जाते हैं। अब उसे दिव्य काया ,दिव्य मन और दिव्य बुद्धि नसीब होते हैं।वह परमात्म लोक में प्रभु की लीला दिव्य चक्षुओं से देखती है।

The Gross ,Subtle ,and Causal Body प्रश्न :जब आत्मा शरीर छोड़ ती है मन और बुद्धि साथ ले जाती है। नया शरीर मिलने पे इनका क्या रोल रहता है ?उत्तर :(१)स्थूल शरीर :पृथ्वी ,जल ,वायु ,अग्नि ,आकाश का बना किराए का मकान है यह। ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
32

गई शक्ति-मिल दुष्ट क्लीव को -

 नहा खून से हर हर गंगे |बहा खून ले, दर दर दंगे |भंग व्यवस्था लंगु प्रशासन सड़कों पर दुर्दांत लफंगे । जब मारक आघात करें | बोलो किसकी बात करें ॥ जहाँ प्रवंचक प्रवचन करते । श्रोता मकु तरते न...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
रविकर
"कुछ कहना है"
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On the lake - Sul lago - झील पर

Naivasha, Kenya: The gentle sounds of the water lapping at the edge, as if after lunch even the tick-tock of the clock has become lazy.नईवाशा, केनियाः किनारे से टकराते हुए पानी की हल्की सी थपक थपक जैसे घड़ी की टिकटिक भी दोपहर को खाना खा कर सुस्त हो गयी हो. Naivasha, Kenia: Il gentile suono dello sciabordio dell'ac...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
SUNIL DEEPAK
Chayachitrakar - छायाचित्रकार
27

अलग अलग हैं मन और मष्तिष्क

अलग अलग हैं मन और मष्तिष्क दिमाग तो हमारे शरीर में एक टेलीफोन  एक्सचेंज की तरह है जिसका काम दिमाग की एकल इकाई न्यूरोन के ज़रिये दो तरफ़ा सूचना सम्प्रेषण  है। आत्मा का यह महज़ एक सूक्ष...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
37

Question :Thoughts are nothing but unrealized acts .If not ,what happens to our thoughts once life ends ?

Question :Thoughts are nothing but unrealized acts .If not ,what happens to our thoughts once life ends ?Answer :Thoughts are not exactly unrealized acts .They are ideas ,plans ,conceptions ,opinions ,and feelings produced by the mind .They are bundles of subtle energy ,quantum of energy ,that the mind generates.Modern scientific research in the field of Electroencephalography  ,reveals the variety of alpha ,beta and gamma waves produced by brain activity .It also correlates altered mental ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
33

हम बेटी के बाप, हमेशा रहते चिंतित- : चर्चा मंच 1365-

क्षिति को शिला जीत उकसाए । कामातुर अँधा हो जाए ।"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव"अंक - 35एक भाव-तीन विधाकुण्डलियाँ क्षिति जल पावक नभ हवा, घटिया कच्चा माल ।निर्माना पारम्परिक, दिया शोध बिन ढाल ।दिया ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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Super Hit Song : Copied From Other (3)

[Original Song]अगर तुम मिल जाओ ज़माना छोड़ देंगे हम Singer - Tasawur Khanum Film - Imaandaar (1974) Music - Nashad==========================================Live Performance - Tasawur Khanum ========================================== [Copied Song](Female Version)Aagar Tum Mil Jao Zamaana Chhod Denge Ham Movie - Zeher (2005) Singer - Shreya Ghoshal Music - Roop Kumar Rathod=================================...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
prakash govind
सिनेमा गीत-संगीत
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हिन्दुस्तान की राजनीति में इतिहास बनाता एक धरना

        यह एक सामान्य बात भर नहीं है कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में , के सामने पिछले पचासी दिनों से लगातार रिहाई मंच संगठन के लोग अनिश्चित कालीन धरने पर बैठे हुए हैं। रिहाई मंच के लो...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
loksangharsha
लो क सं घ र्ष !
37

या अनुरागी चित्त की गति समझे न कोये। ज्यों ज्यों बुड़े श्याम रंग त्यों त्यों उज्जल होये।

मन बुद्धि चित्त और अहंकार प्रश्न :भगवदगीता मन और बुद्धि भगवान् को समर्पित करने की बात करती। पंचदशी(विद्या-अरण्य कृत ) मन को बंधन और मुक्ति का कारण बतलाती है। शंकराचार्य अंत :करण (inner apparatus ) की म...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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एक बार फिर

एक बार फिर इकट्ठा हो रही वही ताकतें एक बार फिर सज रहे वैसे ही मंच एक बार फिर जुट रही भीड़कुछ पा जाने की आस में              भूखे-नंगों की एक बार फिर सुनाई दे रहीं,          ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
anwar suhail
अनवर सुहैल का रचना संसार
95

ज्ञान

मिथ्‍या ज्ञान से हमेशा डरते रहे । --- महात्‍मा गांधी ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
रौशन जसवाल विक्षिप्‍त
31


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