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नई हलचल

आमने-सामने गुरुजी और सरकार

राजीव मणिकरीब एक पखवारे से सुलग रही नियोजित और वित्तरहित शिक्षकों के आंदोलन की चिंगारी बीते मंगलवार को जंगल की आग की तरह फैल गयी। शिक्षकों एवं पुलिस के बीच जो कुछ हुआ, उसने पूरे सूबे के नियोजि...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Rajiv Mani
MANIfeature
82

हादसे झेल चुका दिल मेरा फौलाद है !-राहुल गाँधी

 यह हमारे आदर्श युवा नेता श्री राहुल जी के ज़ज्बातों को शब्द प्रदान करने की एक छोटी सी कोशिश है -मेरे विरोधियों को बस यही जवाब है ,पी एम्. बनना नहीं सेवा मेरा ख्वाब है !गीता व् गाँधी  करते हैं प्...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
नेता जी क्या कहते हैं ?
57

शुद्ध श्रद्धा : आत्मविश्वास

पुराने जमाने की बात है। एक शिष्य अपने गुरु के आश्रम में कई वर्षों तक रहा। उसने उनसे शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त किया। एक दिन उसने देखा कि उसके गुरु पानी पर चले आ रहे हैं। यह देखकर उसे बहुत हैरान...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
हंसराज 'सुज्ञ'
67

चमनलाल की मौत

चमनलाल मर गए। वैसे तो एक दिन उन्हें मरना ही था। हर कोई मर  जाता है । इस फानी दुनिया का और जीवन का यही दस्तूर है , सो जैसे सब एक न एक दिन मर जाते है , वैसे ही वो भी एक दिन मर गए।  वैसे ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
कहानियो के मन से .....
208

दामिनी ..रामसिंह

इंसान सबसे नज़रे चुरा सकता है , सबको बना सकता है ...मगर जब खुद से नज़रे चुराने कि बारी आती है तब वो कहा जाये..कैसे चुराए खुद से नज़रे ?उसकी आंखे तो उसके मन में मौजूद है, फिर भला मन से बचके कोई कैसे जी स...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
sakhi
sakhi with feelings..kahaniya/Articles
35

कुछ - करो !!!!!

कुछ - करो !!!!!जिंदगी भीख में मिलती नहीं,माँगे मेरे मन, आज जी ले, जो मिली यहजिंदगानी,मत गँवा इसको, तू ऐसे गीतगाकर,कुछ करो ऐसा - कि जागे यहजवानी.इस धरा पर कुछ तो ऐसा कामकर लो,याद करके लोग कुछ गुणगान करले...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
रंगराज अयंगर
65

‘‘तितली रानी’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मन को बहुत लुभाने वाली,तितली रानी कितनी सुन्दर।भरा हुआ इसके पंखों में,रंगों का है एक समन्दर।।उपवन में मंडराती रहती,फूलों का रस पी जाती है।अपना मोहक रूप दिखाने,यह मेरे घर भी आती है।। भोली-भ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
237

श्याम स्मृति----बहुत जानते हैं, हम..डा श्याम गुप्त ..

 बहुतजानतेहैं, हम.          बच्चेबहुतकुछजान लेतेहैं।युवाउनसेअधिकहीजानतेहैं।बड़ेउनसेभी अधिकजानतेहैं।ज्ञानीऔरबहुतकुछजानतेहैं।          सामान्यजनजानतेहैं, प...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
  Sawai Singh Rajpurohit
एक ब्लॉग सबका
105

कामयाबी की मंजिलें

 हर तरफ छाया है अँधेरा दिखता नही सवेरा जिन्दगी में है बेरुखी का आलम हर डाल के पत्ते है सुर्खखो गया है मंजिलों के रास्तेनहीं रहा अब खुशियों से वास्ता जिन्दगी के इम्तिहाँ तोड़ रहें मेरा हौसला र...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Rajendra kumar
भूली-बिसरी यादें
276

Fishing - Pescare - मछलियाँ पकड़ना

Schio, Italy: In the morning when I came out for a walk with my dog, the sun was bright, the nature had wiped clean the shining mountains and some persons were out in the river, with their fishing rods.स्किओ, इटलीः सुबह सुबह कुत्ते को सैर कराने निकला तो सुनहली धूप खिली थी, पहाड़ों को प्रकृति ने झाड़ पौंछ कर चमका दिय...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
SUNIL DEEPAK
Chayachitrakar - छायाचित्रकार
46

एक मुलाकात

हिन्दी साहित्य में भक्तिकाल में कृष्ण भक्ति के भक्त कवियों में महाकवि सूरदास का नाम अग्रणी है। सूरदास जी वात्सल्य रस के सम्राट माने जाते हैं। उन्होंने श्रृंगार और शान्त रसों का भी बड़ा मर्म...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
परिकल्पना
220

शायद पहली मौत, देश में इतनी चर्चा-

 ये हैं शहादत के सौदागर, मीडिया भी मौन ! महेन्द्र श्रीवास्तव  TV स्टेशन ... शोकाकुल परिवार से गहरी सहानुभूति-किन्तु क्या-हो सकता है क्या नहीं, हों रिश्ते असहाय |खर्चा पूरा नहिं पड़े, नाम लिस...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
रविकर
"लिंक-लिक्खाड़"
60

कुण्डलिया : नरेन्द्र मोदी की तरफ से-

हमने भी की गलतियाँ, मिले शर्तिया दंड |शिकायतें भी हैं कई, किन्तु नहीं उद्दंड |किन्तु नहीं उद्दंड, सिपाही भारत माँ का |सेवा करूँ अखंड, करे ना कोई फांका |सभी हाथ को काम, ग्रोथ नहिं देंगे कमने |  स्वा...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
रविकर
रविकर की कुण्डलियाँ
65

हुई लाल -पीली सखी, पी ली मीठी भांग-

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 29दोहे रंग रँगीला दे जमा, रँगरसया रंगरूट | रंग-महल रँगरेलियाँ, *फगुहारा ले लूट ||*फगुआ गाने वाला पुरुष -फ़गुआना फब फब्तियां, फन फ़नकार फनिंद |रंग भंग भी ढंग से, नाचे गाये हि...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
रविकर
"कुछ कहना है"
78

primary education ,क्यों लाचार हुई प्राथमिक शिक्षा .......... संभावित कारण ............

मेरे एक मित्र नमन ने फेसबुक पर सवाल कर पूछाhttps://www.facebook.com/care.namanक्यों लाचार हुई प्राथमिक शिक्षा ..........संभावित कारण ............१ - शिक्षक पढाते नहीं २ बच्चे विद्द्यालय नहीं आते ३ अभिवावक बच्चो को भेजते नह...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Manu
yatra (यात्रा ) मुसाफिर हूं यारो .............
141

''एक हल्की बात कर देती है किरदार तार-तार !''

 ये पोस्ट पूर्व में एक पुरुष ब्लोगर की टिप्पणी पर प्रकाशित की थी -''एक हल्की बात कर देती है किरदार तार-तार !''ब्लॉग जगत अपने मूल स्वरुप में बुद्धिजीवियों का समूह है .ब्लॉग जगत में ऐसी हल्की बात क...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
SHALINI KAUSHIK
WOMAN ABOUT MAN
76

ग्रहों ने बढ़ाई जल की पवित्रता

फ़िरदौस ख़ानदुनिया की तमाम सभ्यताएं नदियों के किनारे ही परवान चढ़ी हैं, क्योंकि पानी के बिना ज़िंदगी का तसव्वुर भी नहीं किया जा सकता. हिंदुस्तान में भी नदियों के किनारे बस्तियां बसीं और कई स...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
Firdaus Diary
42

छुपन - छुपाई

              छुपन - छुपाई                  झरोखे से माठी सुगंध आ रही है,                  तुम यहीं पास मेरे कहीं पर छुपी हो,                  रोशनी ये मद्धिम कहे जा रही ह...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
रंगराज अयंगर
69

तेरा एहसास

डूब  कर  तेरे  एहसास  के  समंदर  में मुझे तेरे प्यार का एक मोती मिल गया सेहरा-ए-बंजर  थी  ये  हस्ती  मेरी मिले तुम जीने का एक सबब मिल गया..!! मानव मेहता 'मन'...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Manav Mehta 'मन'
मानव 'मन'
90

महावीर बिनवउँ हनुमाना -BEST BLOG OF THE WEEK

महावीर बिनवउँ हनुमानाइस ब्लॉग पर सर्वप्रथम यह सम्मान प्रदान किया जा रहा -महावीर बिनवउँ हनुमाना ब्लॉग  को .इस ब्लॉग के स्वामी  हैं - SHRI Vishwambhur Nath Shrivastav  इनका परिचय इस प्रकार है -Popularly known as BHOLA my...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
BEST BLOG OF THE WEEK
160

सर्वप्रथम नियम व नियमानुशासन प्रणेता.... सूर्यपुत्र यम... डा श्याम गुप्त

                      सृष्टि के मानव इतिहास में मानव आचरण व मर्यादा के सर्वप्रथम नियम व नियमानुशासन प्रणेता.... सूर्यपुत्र यम...                 ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
भारतीय नारी
58

लघुकथा - बंदर

आजादी के समय देश में हर तरफ दंगे फैले हुए थे। गांधी जी बहुत दुखी थे। उनके दुख के दो कारण थे - एक दंगे, दूसरा उनके तीनों बंदर खो गए थे। बहुत तलाश किया लेकिन वे तीन न जाने कहां गायब हो गए थे।एक दिन सु...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
बृजेश नीरज
Voice of Silent Majority
59

"कथाक्रम" जनवरी-मार्च 2013 अंक मे प्रकाशित दो कविताएँ

http://kathakram.in/jan-mar13/Poetry.pdf1. मौसमसर्दियों की आहट सुनते हीबुनना शुरू कर देती हैवह मेरा स्वेटर हर साल,लपेट कर उंगलियों मेंसूरज की गुनगुनी किरनें,एक उल्टा-दो सीधाया ऐसा ही कुछबुदबुदाते हुए,हजार कामों मेंफ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Padmnabh Gautam
रचना डायरी
101

ज़रूरी नहीं...

कैप्शन जोड़ेंज़रूरी नहीं कि हम पीटें ढिंढोरा कि हम अच्छे दोस्त हैं कि हमें आपस में प्यार है कि हम पडोसी भी हैं कि हमारे साझा रस्मो-रिवाज़ हैं कि हमारी मिली-जुली विरासतें हैं कतई ज़रूरी नहीं है ये क...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
anwar suhail
अनवर सुहैल का रचना संसार
98

हैरत होती है हमें, करते कडुवी बात-

औरतें अपने जैसी औरतों को अपना हमदर्द क्यों न बना सकीं ?Dr. Ayaz Ahmad सोने पे सुहागाहैरत होती है हमें, करते कडुवी बात |खरी खरी लिख मारते, भूलो रिश्ते नात |भूलो रिश्ते नात, सज्जनों को उपदेशा |लेकिन दुर्ज...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
रविकर
"लिंक-लिक्खाड़"
60

अंग अनेकन अर्थ भरे लुकवावत हैं रँगवावत हैं-

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 29मदिरा सवैया  नंग-धडंग अनंग-रती *अकलांत अनंद मनावत हैं ।रंग बसंत अनंत चढ़ा शर चाप चढ़ाय चलावत हैं ।  लाल हरा हुइ जाय धरा नभ नील सफ़ेद दिखावत हैं ।अंग अनेकन अ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
रविकर
"कुछ कहना है"
58

अपने आत्मस्वरूप को पहचाने .....

            अपने आत्मस्वरूप  को  पहचाने .....मनुष्य ने अपने बुद्धिबल से जहां एक ओर भौतिकजगत के अनेक विस्मयकारीरहस्यों को उदघाटित किया है, वहीं उसने मनोवैज्ञानिक विश्लेषणोंकेद्वारा, अप...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Utkarsh Pratap Singh
मेरी डायरी
93

वाह भोले वाह------------

                                                         वाह भोले वाह                                             &...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
jyoti khare
उम्मीद तो हरी है .........
71

खनकती हुई धूप में, जहाँ दिल है मेरा

       पंखुरीसिन्हाकी क़लम से आख़िरी अट्टहास अबवहआगेबैठी, टेलीविज़नके, हँसरहीहै, एकहँसी, एकबेहदराजनीतिकहँसी, करतीहुईदिनकाहिसाब, जैसेलिखतीहुईउसपरअपनानाम, हंसतीहुईदिनकाआखिरीअट...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Shahroz
Hamzabaan हमज़बान ھمز با ن
69

साहिर लुधियानवी हर पल के शायर थे...

फ़िरदौस ख़ानबीते आठ मार्च को साहिर लुधियानवी का जन्मदिन था. उनके चाहने वालों ने इसे अपने-अपने तरीक़े से मनाकर उन्हें अपनी अक़ीदत के फूल पेश किए. जहां रेडियो पर उनके लिखे गाने दिन भर बजे, वहीं श...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
Firdaus Diary
53


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