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नई हलचल

बेटी को माना बोझ तो फिर जन्म क्यूं दिया ,

 न कुछ कहने की इज़ाज़त ,न कुछ बनने की इज़ाज़त ,न साँस लेने की इज़ाज़त ,न आगे बढ़ने की इज़ाज़त .      न आपसे दो बात मन की बढ़के कह सकूं ,      न माफिक अपने फैसला खुद कोई ले सकूं ,      जो आपको ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
WORLD's WOMAN BLOGGERS ASSOCIATION
55

आप सभी को कृष्ण जन्माष्टमी की बहुत बहुत शुभकामनायें

''श्री कृष्ण-जन्माष्टमी ''एक ऐसा पर्व जो सारे भारतवर्ष में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है .अभी कुछ वर्षों से ये दो  दिन मनाया जाने लगा है .पंडितों ने इसे ''स्मार्त '' और ''वैष्णव ''में बाँट दि...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHALINI KAUSHIK
! कौशल !
65

कब लब होंगे आज़ाद कब लेंगें खुलकर साँस ?

कब लब होंगे आज़ाद कब लेंगें खुलकर साँस ?शोषित पीड़ित नारी ये सोच रही है आज !***************************कब तक बनकर  सीता अग्नि परीक्षा देंगी ?कब तक शुचिता -प्रमाणन की आज्ञा पूर्ण करेंगी ?कब मूक कंठ से अपने भी नि...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
भारतीय नारी
47

पत्ता पत्ता बूटा बूटा - एक चर्चा

पत्ता पत्ता बूटा बूटा....एक चर्चा यह ’मीर’ का मत्ला [एक शे’र] हैपत्ता पत्ता  बूटा बूटा  हाल   हमारा जाने है जाने न जाने गुल ही न जाने,बाग तो सारा जाने हैमीर का पूरा नाम मीर मुहम्मद तक़ी था म...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
आनन्द पाठक
उर्दू से हिंदी
90

आना श्याम...

टूट गये हैं दिलों के बंधन,उदास है हर घर आंगन,जन्म हुआ था प्रेम का जिससे,वो बंसी तुम  पुनः बजाओ...अस्त हो गया धर्म का सूरज,धुमिल हो गयी दिशा पूरव,पथ भ्रष्ट हैं आज सभी,गीता का अर्थ समझाओ...नहीं भाता ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
kuldeep thakur
man ka manthan. मन का मंथन।
59

अर्थ का अनर्थ (अब तो आ कान्हा जाओ)

अब तो आ कान्हा  जाओ, इस धरती पर सब त्रस्त हुए दुःख सहने को भक्त तुम्हारे आज क्यों  अभिशप्त हुए नन्द दुलारे कृष्ण कन्हैया  ,अब भक्त पुकारे आ जाओ प्रभु दुष्टों का संहार करो और&nbs...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Madan mohan saxena
मदन मोहन सक्सेना की रचनाएँ
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कृष्ण लीला सार.....कृष्ण जन्माष्टमी पर डा श्याम गुप्त के पद.... डा श्याम गुप्त

 १.तेरे कितने रूप गोपाल ।सुमिरन करके कान्हा मैं तो होगया आज निहाल ।नाग-नथैया,  नाच-नचैया,  नटवर,  नंदगोपाल  ।मोहन, मधुसूदन, मुरलीधर, मोर-मुकुट, यदुपाल ।चीर-हरैया,    रास -रचैया,   &nb...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
51

ठेले बरबस खींचते, मन भर भर के प्याज

ठेले बरबस खींचते, मन भर भर के प्याज | पिया बसे परदेश में, यहाँ छिछोरे आज |यहाँ छिछोरे आज, बड़ा सस्ता दे जाते |रविकर नाम उधार, तकाजा करने आते |आया है सन्देश, बड़े हो रहे झमेले |जल्दी रुपये भेज, खड़े घ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
रविकर-पुंज
60

सूरज धरि एक पाइप लगा दी

बाल कविता-101सूरज धरि एक पाइप लगा दीपूव उगै छथि दिनकर भैया, पश्चिममे भऽ जाइ छथि अस्तभरि दिन दौड़थि मेहनत करथि, होइ छथि नै कनिको पस्तओ छथि तँ धरती छै आ छै जीवनक चक्र चलैतगाछ-बिरिछ मुस्कैत गाबैत आ मे...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
AMIT MISHRA
30
अनकही
82

मन का चन्दन

मन का चन्दन महक उठता हैतन कस्तूरी लगता हैदिल से दिल मिले यदि तोसारा जग अपना लगता हैतुम्हें देख कानन तरूवरविहँसने का उपक्रम करतेक्यों शाख पे लिपटी लताएंक्यों पवन मंद मंद बहतेमरूस्थल में भी फ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
राजीव कुमार झा
यूं ही कभी
62

सड़े खुले में अन्न, बटेगा सड़ा हुआ कल-

रविकर पक्का मूर्ख, तभी तो रोटी खोई -कोई टी वी बाँटता, कांगरेस धन अन्न |लैप टॉप बाँटे सपा, हुई भाजपा सन्न |हुई भाजपा सन्न, उठाये खुद भी झोले |मुट्ठी दोनों भींच, राम की जय जय बोले -रविकर पक्का मूर्ख, ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
"लिंक-लिक्खाड़"
47

रविकर पक्का मूर्ख, तभी तो रोटी खोई -

(1)कोई टी वी बाँटता, कांगरेस धन अन्न |लैप टॉप बाँटे सपा, हुई भाजपा सन्न |हुई भाजपा सन्न, उठाये खुद भी झोले |मुट्ठी दोनों भींच, राम की जय जय बोले -रविकर पक्का मूर्ख, तभी तो रोटी खोई |छोड़े टी वी अन्न, क...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
"कुछ कहना है"
45

दिल जीतेगी पेट से, दिल्ली से यह व्योम

(1)मरजीना असली मदर, रोम रोम में रोम |दिल जीतेगी पेट से, दिल्ली से यह व्योम |दिल्ली से यह व्योम, बरसते काले बादल |सड़े खुले में अन्न, बटेगा सड़ा हुआ कल |और मरे ना भूख, टैक्स पेयर है करजी |मिल जाए बस वोट...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
रविकर की कुण्डलियाँ
49

Green river - Fiume verde - हरी नदी

Valle Aurina, Italy: In the Aurina valley, river Rienza accompanies the main road. Surrounded by green foliage, even the river waters looked green. Today's images have some ducks from the Rienza river.वाल्ले आउरीना, इटलीः आउरीना घाटी में रिइन्ज़ा नदी सड़क के साथ साथ चलती है. हरियाली से घिरी नदी का जल भी हरा दिखता था. ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SUNIL DEEPAK
Chayachitrakar - छायाचित्रकार
43

कबीर की साखियाँ

कबीर की साखियाँ( १)जो तोकू काँटा बुवै  ,ताहि कू  बोव तू फूल ,     तोकू फूल के फूल हैं ,वाकू हैं त्रिशूल।भले आपके लिए कोई मुसीबत  खड़ी करे आप के मार्ग में कांटे बिछा दे विघ्न पैदा करे अडं...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
187

इंटरनेट पर किताबों की दुनिया

फ़िरदौस ख़ानकिताबें हमें अंधेरे से रोशनी की तरफ़ ले जाती हैं. किताबें इंसान की सबसे अच्छी दोस्त होती हैं, क्योंकि अच्छे दोस्त न होने पर किताबें ही हमारी सबसे अच्छा साथी साबित होती हैं. किताबे...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
Firdaus Diary
82

!! जी रहा आदमी !! (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

कविता को साफ-साफ पढ़ने के लिएकृपया फ्रेम पर क्लिक कर लें।...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
72

प्रॉमिस

वधु : थांबा...!!! अज्जिबात जवळ येऊ नका .. मला स्पर्श सुद्धा करू नका !!.वर : पण का ??? काय झालं?.वधु : मी आईला प्रॉमिस केलं आहे............लग्नानंतर हे सर्व बंद करेन म्हणून.... ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
vaghesh
विनोद नगरी
56

फ़ूड बिल पास

5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
51

मंगलवारीय चर्चा ---1350--जहाँ परिवार में परस्पर प्यार है , वह केवल अपना हिंदुस्तान है

 एक अन्तराल के बाद फिर हाजिर हूँ आप की सेवा में इन पंक्तियों के साथ उतरी रेल को पटरी पर आने में वक़्त लगता है दूर कहीं मंजिल तो वहां जाने में वक़्त लगता है कहो क्यूँ किस लिए किस बात की आपा धापी? ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
155

गति के नियम : महर्षि कणाद | Laws of Motion by Maharishi Kanada : 600BC

जी हाँ दोस्तों ,शीर्षक बिलकुल सही है इस संसार को गति के नियम महर्षि कणाद ने दिए है ना की कोई न्यूटन फ्यूटन ने ।वैशेषिक दर्शन (Vaisheshika Sutra) के रचनाकार महर्षि कणाद लगभग २ या ६ ईसा पूर्व प्रभास क्षेत...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
प्राचीन सम्रद्ध भारत
29

पैदा हुए ही गला क्यूं दबा नहीं दिया .

 न कुछ कहने की इज़ाज़त ,न कुछ बनने की इज़ाज़त ,न साँस लेने की इज़ाज़त ,न आगे बढ़ने की इज़ाज़त .      न आपसे दो बात मन की बढ़के कह सकूं ,      न माफिक अपने फैसला खुद कोई ले सकूं ,      जो आपको ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHALINI KAUSHIK
! कौशल !
46

Identification- ( improve personality in Hindi)

पहचानकबीर जी ने अपने पुत्र कमाल को गहन चिंतन में डूबा देखा तो उनसे पूछा- “ बेटा  क्या बात है तुम इतना व्याकुल क्यों हो, कमाल ने कहा “ में एक प्रश्न का सही उत्तर नहीं खोज पा रहा”,कबीर जी ने कहा-“ ब...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
richa shukla
Hindi Blog For Motivational, Personal Development Article,knowledge of computers technology, job
251

मीराबाई :साधौ कर्मन की गति न्यारी

मीराबाई :साधौ कर्मन की गति न्यारी निर्मल नीर दियो नदियन  को ,सागर कीन्हों खारी ,उज्जवल बरन दीन्हीं बगुलन को ,कोयल कर दीन्हीं  कारी।मूरख को तुम ताज  दियत हो ,पंडित फिरै ,भिखारी। सुन्दर ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
43

कुछ भी , कभी भी .........

आज देश की सर्वोच्च विधायी संस्था , संसद में ,मांग उठाई गई कि देश के एक स्वनाम धन्य संत आसाराम बापू पर लगे बलात्कार जैसे संगीन अपराध वो भी उनकी ही एक नाबालिग अनुयायी के साथ , के मामले पर सरकार सिर्...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
अजय कुमार झा
कुछ भी...कभी भी..
68

क्या न्यूटन भी मुसलमान था?

---जीशान हैदर जैदी जब मैंने ठोस तथ्यों द्वारा सिद्ध किया कि आइंस्टीन ने इस्लाम कुबूल कर लिया था तो कुछ लोगों की व्यंगात्मक प्रतिक्रिया आयी कि अब न्यूटन और गैलीलियो के भी मुसलमान होने की खबर आ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Dr. Zeashan Zaidi
Ya Husain Ya Shah-E-Karbala
119

फोन पर फ्री में करनी हो बात तो आजमाएं यह उपाय

मोबाइल फोन आज हर किसी की मुख्य जरूरत है। लेकिन मोबाइल फोन रखना किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं है। मोबाइल बिल की बढ़ती रकम हमेशा आज के युवाओं पर अधिक प्रेशर डालती है। लेकिन लगता है देश में हर तरफ मह...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
ललित चाहार
Tech Education HUB
205

बापू आसाराम के समर्थकों ने भी दिया आमने सामने की जंग का संदेश

संत आसा राम  के खिलाफ किए जा रहे दुष्प्रचार का किया डट कर विरोध प्रदर्शनकारियों ने तीखे तेवरों में सौंपा जिला प्रशासन को ज्ञापन  लुधियाना 26 अगस्त ( *जितेन्द्र सचदेवा/पंजाब स्क्रीन) यो...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Childless Women Specialist BABA JI +91-9909794430
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जाने मरजीना कहाँ, चली बांटने अन्न-

जाने मरजीना कहाँ, चली बांटने अन्न |चालू चालीस चोर के, अच्छे दिन आसन्न |अच्छे दिन आसन्न, रहा अब तक मन-रेगा |कई फीसदी लाभ, यही भोजन बिल देगा |चाहे डूबे देश, चले हम वोट कमाने |भूखें सोवें लोग, लूटते चोर ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
"कुछ कहना है"
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